ईरानी पिस्ते पर होर्मुज़ संकट की मार, कौन उठा रहा है फ़ायदा?

    • Author, ईसार शलबी
    • पदनाम, बीबीसी अरबी
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 7 मिनट

बकलावा मध्य-पूर्व की एक पारंपरिक पेस्ट्री है. ईरान युद्ध के बाद आटे, चाशनी और पिस्ते की पतली परतों से तैयार बकलावे की मिठास फीकी पड़ती जा रही है.

क्षेत्रीय तनाव बढ़ने और दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक होर्मुज़ स्ट्रेट के बंद होने के कारण यह छोटी सी मिठाई एक बड़े संकट का प्रतीक बन गई है.

इस संकट ने पिस्ता, केसर और मिठाई बनाने की अन्य सामग्रियों की क़ीमतों को प्रभावित किया है. यह ख़ासतौर पर फ़ारस की खाड़ी के बाज़ारों में हुआ है, जो आयात पर बहुत ज़्यादा निर्भर हैं.

दुबई, शारजाह, अजमान और अबू धाबी में कई शाखाओं वाली एक पेस्ट्री की दुकान के मालिक सैफ़ ने बीबीसी अरबी को बताया कि तैयार उत्पादों की क़ीमतों में अभी तक बढ़ोतरी नहीं हुई है.

उन्होंने इसका कारण कच्चे माल, विशेष रूप से पिस्ते के पूर्व भंडारण की नीति को बताया. आमतौर पर रमज़ान, ईद अल-फ़ितर और ईद अल-अदहा जैसे त्योहारों से पहले बड़ी मात्रा में कच्चा माल ख़रीदा जाता है.

लेकिन सैफ़ के मुताबिक़, संकट का असली असर कच्चे माल के बाज़ार में पहले से ही महसूस किया जा रहा है. ईरान से जुड़े मार्गों में रुकावट की वजह से माल परिवहन में कठिनाई के चलते पिस्ते और वह भी ख़ासकर ईरानी पिस्ते की क़ीमतें, लगभग 15 प्रतिशत बढ़ गई हैं.

उनका कहना है कि सीरियाई पिस्ता और तुर्की का एंटेप पिस्ता अभी भी बाज़ार में उपलब्ध है, जिससे क़ीमतों में और ज़्यादा बढ़ोतरी को कुछ हद तक रोका जा सका है.

सैफ़ का यह भी कहना है कि कुछ व्यापारियों ने संकट का फ़ायदा उठाते हुए क़ीमतों में 10 से 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी है, जबकि कुछ वैकल्पिक वस्तुओं की क़ीमतों में बढ़ोतरी नहीं हुई है.

उनका कहना है कि ईरानी किशमिश की क़ीमत भी लगभग 10 प्रतिशत बढ़ गई है.

ईरान को सैकड़ों मिलियन डॉलर का नुक़सान

दुबई में केसर की दुकान पर विक्रेता अली का कहना है कि आपूर्ति श्रृंखला में रुकावट के बावजूद बाज़ार अभी भी कुछ हद तक संतुलित है.

उनका कहना है कि 10 ग्राम ईरानी केसर की क़ीमत लगभग 70 यूएई दिरहम है, जो 19 अमेरिकी डॉलर के बराबर है और दुकान में अभी तक क़ीमतों में कोई ख़ास बढ़ोतरी नहीं हुई है.

अली का कहना है कि उन्होंने रमज़ान से पहले लगभग दो किलोग्राम केसर का स्टॉक कर लिया था, जिससे इस दौरान उनकी बिक्री क़ीमतें स्थिर बनी रहीं.

वह यह भी बताते हैं कि केसर की क़ीमतें आमतौर पर वैश्विक तेल क़ीमतों और परिवहन लागत जैसे व्यापक कारकों से प्रभावित होती हैं, जिससे बाज़ार अंतरराष्ट्रीय व्यापार में किसी भी तरह की रुकावट के प्रति संवेदनशील हो जाता है.

संयुक्त राष्ट्र की आर्थिक रिपोर्टों के मुताबिक़, वैश्विक तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा होर्मुज़ स्ट्रेट से होकर गुज़रता है. इसके अलावा, प्राकृतिक गैस, पेट्रोकेमिकल उत्पाद और आवश्यक वस्तुओं की बड़ी मात्रा भी इसी मार्ग से होकर गुज़रती है.

इस बीच आर्थिक अनुमानों से पता चलता है कि होर्मुज़ स्ट्रेट में जहाज़ यातायात में रुकावट या प्रतिबंधों के कारण ईरान को रोज़ सैकड़ों मिलियन डॉलर का नुक़सान हो रहा है. यह इस संकट के राजनीतिक आयामों और आर्थिक लागतों के बीच आपसी संबंधों को दर्शाता है.

फ़ारस की खाड़ी के बाहर ईरानी पिस्ता बाज़ार

बेहरोज़ आग़ा ईरानी पिस्ता के व्यापार, निर्यात और उत्पादन के क्षेत्र में कार्यरत एक ग़ैर-सरकारी संगठन, ईरानी पिस्ता एसोसिएशन के एक अधिकारी हैं. उन्होंने बीबीसी अरबी के साथ एक इंटरव्यू में फ़ारस की खाड़ी के देशों को ईरानी पिस्ता के निर्यात में रुकावट के बारे में कहा, "इस क्षेत्र में जो हो रहा है वह ईरान और फ़ारस की खाड़ी के देशों के बीच व्यापार संबंधों के लंबे इतिहास में एक अस्थायी अवधि है."

उन्होंने कहा, "मौजूदा हालात के कारण ईरान और उसके दक्षिणी पड़ोसी देशों के बीच पिस्ता, केसर और किशमिश का निर्यात पूरी तरह से रुक गया है, लेकिन हमें उम्मीद है कि यह अवधि छोटी होगी और स्थिति जल्द ही सामान्य हो जाएगी."

आग़ा उन ख़बरों का खंडन करते हैं जिनमें कहा गया है कि होर्मुज़ स्ट्रेट के रास्ते निर्यात पर रोक लगने के कारण ईरान के घरेलू बाज़ार में पिस्ता की आपूर्ति बढ़ गई है और क़ीमतें गिर गई हैं. उनके मुताबिक़, ईरान का पिस्ता निर्यात किसी ख़ास बाज़ार पर निर्भर नहीं है और केवल फ़ारस की खाड़ी के देशों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें चीन, भारत, यूरोप, लैटिन अमेरिका और अफ़्रीका के बाज़ार भी शामिल हैं.

उन्होंने आगे कहा कि यूएई प्रत्यक्ष उपभोक्ता बाज़ार की बजाय पुनर्निर्यात केंद्र की भूमिका निभाता है.

उनके मुताबिक़, ईरान ने अगस्त से फ़रवरी के बीच फ़ारस की खाड़ी क्षेत्र, मुख्य रूप से दुबई को लगभग 2,000 से 3,000 टन पिस्ता निर्यात किया, जो घरेलू खपत और पुनर्निर्यात दोनों के लिए था.

उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि यह मात्रा ईरान के कुल पिस्ता उत्पादन की तुलना में ज़ीरो है, और कहा, "ईरान का पिस्ता उत्पादन लगभग दो लाख 20 हज़ार टन है, और संयुक्त अरब अमीरात को निर्यात किया जाने वाला पिस्ता इस आंकड़े का बहुत छोटा हिस्सा है."

2023 में संयुक्त अरब अमीरात ने ईरान से लगभग सात हज़ार टन पिस्ता आयात किया और यह आंकड़ा 2024 में लगभग 15 हज़ार टन तक पहुंच गया.

पिछले वर्ष के पहले सात महीने में संयुक्त अरब अमीरात को ईरानी पिस्ता का निर्यात लगभग 12 हज़ार टन था, जिसका अधिकांश भाग पुनर्निर्यात के लिए उपयोग किया गया था.

ईरान से पिस्ता की आख़िरी खेप फ़रवरी के अंत से ठीक पहले संयुक्त अरब अमीरात पहुंची, ठीक उसी समय जब अमेरिका और इसराइल ने ईरान पर हमले शुरू किए थे. आग़ा कहते हैं कि ईरान आमतौर पर हर तीन महीने में चार से छह हज़ार टन पिस्ता संयुक्त अरब अमीरात को निर्यात करता है, लेकिन फ़रवरी से मई 2026 के बीच यह निर्यात पूरी तरह बंद रहा है.

खाड़ी सहयोग परिषद के सदस्य देशों को ईरानी उत्पादों का निर्यात बंद होने के चलते बाज़ार बकलावा के उत्पादन के लिए तुर्की और सीरियाई पिस्ते जैसे विकल्पों की ओर रुख़ कर सकता है. इसकी वजह से लंबे समय में यूएई का बाज़ार धीरे-धीरे ईरानी पिस्ते का इस्तेमाल बंद कर सकता है और ईरान फ़ारस की खाड़ी के बाज़ारों के एक बड़े हिस्से को खो सकता है.

हालांकि फ़ारस की खाड़ी के बाज़ारों में विभिन्न मिठाइयों की क़ीमतें अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई हैं, लेकिन आपूर्ति श्रृंखला में लगातार रुकावट के कारण कच्चे माल की लागत धीरे-धीरे बढ़ सकती है.

आर्थिक अनुमानों से संकेत मिलता है कि निर्यात पर रोक लगने के बाद ईरानी पिस्ता की क़ीमतों में बढ़ोतरी के साथ, बकलावा के प्रत्येक टुकड़े की क़ीमत में 10 से 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है.

वैश्विक खाद्य उत्पादन के लिए एक ख़तरा

ईरान युद्ध ने फ़ारस की खाड़ी में ईरान के पिस्ता निर्यात को रोकने के अलावा, रासायनिक उर्वरकों और उनके कच्चे माल की आपूर्ति को भी बाधित कर दिया है, जिससे वैश्विक खाद्य सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं.

दुनिया के सबसे बड़े उर्वरक उत्पादकों में से एक, यारा के सीईओ ने चेतावनी दी है कि होर्मुज़ स्ट्रेट से होकर माल ढुलाई में आने वाली बाधाओं का उर्वरक की उपलब्धता पर सीधा असर पड़ेगा.

उन्होंने कहा कि इन उर्वरकों के उपयोग को कम करने से कृषि उत्पादन में कमी और खाद्य पदार्थों की क़ीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है, खासकर विकासशील देशों में.

संयुक्त राष्ट्र के अनुमानों के मुताबिक़, यूरिया, पोटाश, अमोनिया और फ़ॉस्फ़ेट जैसे रासायनिक उर्वरकों और अन्य सामग्रियों के वैश्विक व्यापार का लगभग एक तिहाई हिस्सा होर्मुज़ स्ट्रेट से होकर गुज़रता है.

संकट की शुरुआत से ही रासायनिक उर्वरकों की क़ीमतों में लगभग 80 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जिससे फ़ारस की खाड़ी में पिस्ता सहित कृषि और खाद्य उत्पादों की क़ीमतों पर असर पड़ा है और परिवहन, उत्पादन और आपूर्ति की लागत बढ़ गई है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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