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पीएम मोदी के तेल-सोने वाले बयान पर उद्योगपति क्यों बोले- 'बेहद ख़राब हालात के लिए रहें तैयार'
देश में तेल और गैस के इस्तेमाल को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान के बाद मंगलवार को केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री ने देश में इसकी उपलब्धता को लेकर बयान दिया.
साथ ही तेल और गैस के मुद्दे पर भारत के उद्योग जगत की चर्चित हस्तियां अपनी राय ज़ाहिर कर रही हैं.
वहीं पीएम मोदी ने एक साल तक सोना न ख़रीदने की भी अपील की थी.
केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सीआईआई के सालाना बिज़नेस सम्मेलन में कहा कि देश में वर्तमान में कच्चे तेल और एलएनजी का 60 दिनों और एलपीजी का 45 दिनों का स्टॉक है.
साथ ही इस दौरान उन्होंने कहा कि जहां एक ओर वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें लगभग दोगुनी हो गई हैं, वहीं भारत ने पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों को स्थिर रखा है.
पीएम मोदी और हरदीप पुरी के बयानों से इतर भारत के उद्योगपति की चर्चित हस्तियों ने भी भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर कई अहम बयान दिए हैं. एक उद्योगपति ने तो चेतावनी देते हुए कहा है कि भारत को 'बेहद ख़राब' हालात के लिए तैयार रहना चाहिए.
केंद्रीय मंत्री ने और क्या कहा?
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि 60 दिनों के कच्चे तेल और एलएनजी और 45 दिनों के एलपीजी स्टॉक है और सप्लाई की कोई समस्या नहीं है.
उन्होंने कहा, "पश्चिम एशिया संघर्ष के दौरान एलपीजी का उत्पादन 75 हज़ार मिट्रिक टन से बढ़कर 90 हज़ार मिट्रिक टन हो गया है."
इसके साथ ही पुरी ने कहा कि सरकार ने अब तक संकट को बेहद ज़िम्मेदारी से संभाला है और पूरे देशभर में ऊर्जा की निर्बाध उपलब्धता रही है.
रविवार को पीएम मोदी ने देशवासियों से अपील की थी कि वो पेट्रोल-डीज़ल की खपत कम करने, पब्लिक ट्रांसपोर्ट अपनाने की अपील की थी.
इस पर हरदीप सिंह पुरी ने एक्स पर लिखा, "प्रधानमंत्री ने नागरिकों को केवल यही सलाह दी है कि वे ऊर्जा की खपत को संयमित रखें, ताकि अर्थव्यवस्था पर कोई वित्तीय बोझ न पड़े.''
''जहाँ एक ओर वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें लगभग दोगुनी हो गई हैं, वहीं भारत ने पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों को स्थिर रखा है. साथ ही, एक लाख से अधिक पेट्रोल पंपों पर ईंधन की निरंतर उपलब्धता और 33.5 करोड़ परिवारों तक एलपीजी की लगातार आपूर्ति सुनिश्चित की है.''
किस चीज़ को लेकर चेता रहे उद्योगपति?
कोटक महिंद्रा बैंक के संस्थापक और बैंकर उदय कोटक ने सीआईआई (कन्फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडियन इंडस्ट्री) के सालाना बिज़नेस सम्मेलन में चेताते हुए कहा कि 'बेहद ख़राब हालात' के लिए तैयार रहना चाहिए.
उन्होंने कहा, "हमें उम्मीद करनी चाहिए कि मुश्किल वक़्त न आए और न ही जारी रहे लेकिन हमें फिर भी बेहद ख़राब हालात के लिए तैयार रहना चाहिए."
"किसी झटके का इंतज़ार करने से अच्छा है कि मुश्किल वक़्त के लिए तैयारी की जाए. कई तरह से प्रधानमंत्री ने ये बात कही."
इसी दौरान टोकते हुए एक दर्शक ने उनसे पूछा कि मुश्कित वक़्त कैसा होगा? इस पर उदय कोटक ने कहा, "मुझे लगता है कि आप देखना शुरू करेंगे. बीते दो महीनों में मध्य पूर्व जंग का असर हमने अब तक नहीं देखा है. ख़ासकर के ऊर्जा दामों में फेरबदल को लेकर. यह बहुत भारी मात्रा में आने वाला है और उपभोक्ता ने अब तक उसका दबाव झेला नहीं है."
"उस उपभोक्ता के बारे में सोचिए जिसकी सीमित आय है जिसको सीधे तौर पर ईंधन पर ख़र्च करना होगा और अप्रत्यक्ष रूप से उन उत्पादों पर ख़र्च करना होगा जो ईंधन से जुड़े हैं. झटका बस आ ही रहा है. मेरे पास कोई जवाब नहीं है जब तक कि ईरान जंग न रुके."
वहीं उद्योगपति सुनील भारती मित्तल ने भी पीएम मोदी के बयान पर अपनी राय दी है.
उन्होंने सीआईआई के सम्मेलन में कहा, "यह मुश्किल समय है. देश शानदार रफ़्तार से आगे बढ़ता रहा है और साल दर साल 6-7 फ़ीसदी की दर से विकास करता रहा है. कुल मिलाकर हालात काफ़ी अच्छे दिख रहे हैं."
"लेकिन कुछ परिस्थितियां ऐसी बनती हैं जो किसी के भी नियंत्रण से बाहर होती हैं. मध्य पूर्व में मौजूदा संकट, जिसका सामना हम सभी कर रहे हैं, वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं पर ज़बरदस्त दबाव बना रहा है और भारत भी इससे अलग नहीं है. दुनिया इस समय आर्थिक मोर्चे पर जिन मुश्किलों का सामना कर रही है, उनसे हम पूरी तरह बच नहीं सकते."
सुनील मित्तल ने कहा, "उनका (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी) संदेश बहुत काफ़ी गहरा था. मेरा मानना है कि उद्योग जगत को इसमें अपनी भूमिका निभानी चाहिए. हमारे यहां लाखों लोगों को रोज़गार मिला हुआ है. हम उनके संदेश को गंभीर और सार्थक तरीके से आगे बढ़ा सकते हैं. हमें सोने के आयात को लेकर इस जुनून से बाहर निकलना होगा. हमें अपनी ऊर्जा लागत कम करनी होगी. हमें तेज़ी से रिन्यूएबल एनर्जी इंडस्ट्री की तरफ़ बढ़ना होगा."
"भारत में ज़्यादा खर्च करें, यहां ज़्यादा कैपेक्स करें. हमें ज़्यादा निवेश करने की ज़रूरत है. यह पीछे हटने का समय नहीं है, बल्कि अपने देश में निवेश बढ़ाने और पूरी ताक़त लगाने का समय है. आइए भारत में बनाएं और भारत की ज़रूरतों को भारत से पूरा करें."
सोने को लेकर क्या कह रहे हैं विश्लेषक?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को सिकंदराबाद में एक जनसभा में विदेशी मुद्रा बचाने के लिए सोना न ख़रीदने की सलाह दी थी.
पीएम मोदी ने कहा था, "सोने की ख़रीद एक और पहलू है जिसमें विदेशी मुद्रा बहुत ख़र्च होती है. एक समय था जब संकट आता था तब लोग देशहित में सोना दान दे देते थे. आज दान की ज़रूरत नहीं है लेकिन देशहित में हमें यह तय करना होगा कि सालभर तक घर में कोई कार्यक्रम हो, हम सोने के गहने नहीं ख़रीदेंगे. सोना नहीं ख़रीदेंगे. विदेशी मुद्रा बचाने के लिए हमारी देशभक्ति हमें चुनौती दे रही है और हमें यह स्वीकार करके विदेशी मुद्रा बचानी होगी."
इस पर ऑल इंडिया जेम एंड ज्वेलरी डोमेस्टिक काउंसिल के चेयरमैन राजेश रोकड़े ने पीएम मोदी की अपील का स्वागत किया. साथ ही इस उद्योग पर पड़ने वाले असर के बारे में बताया था.
उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, "मैं कहूंगा कि ये उद्योग बहुत बड़ा है. प्रधानमंत्री का जो कहना है वो राष्ट्रहित में सही है. प्रधानमंत्री जी आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत की बात कहते हैं. मैं एक अलग एंगल आपके सामने रखना चाहूंगा. सोना हमारी संस्कृति में घुल-मिल गया है और भारतीय संस्कृति में सोने की ज्वेलरी का एक अलग महत्व है."
राजेश रोकड़े ने कहा, "पीएम का ये कहना हो सकता है कि जो अनावश्यक सोना ख़रीदते हैं, जो निवेश की दृष्टि से सोना ख़रीदते हैं उन्हें बंद कर देना चाहिए. मैं भी इस बात से सहमत हूं."
"अगर ज्वेलरी को किसी तह से ख़रीदना बंद करवा दिया जाता है तो निश्चित तौर पर जीडीपी में भी इस उद्योग का सात प्रतिशत का योगदान है, उसका असर पड़ेगा. इसके अलावा इस उद्योग में एक करोड़ से ज़्यादा लोग काम करते हैं, उन लोगों पर सीधा असर पड़ सकता है."
"मेरा यही कहना रहेगा कि किसी भी तरह से ज्वेलरी पर रोक लगाना बेरोज़गारी का बड़ा सवाल खड़ा कर सकता है इसलिए निवेश के लिए सोना ख़रीदने पर रोक को मैं सही समझता हूं."
ज्वेलरी कंपनी सेनको गोल्ड के एमडी सुवांकर सेन ने कहा, "उद्योग के नज़रिए से हम प्रधानमंत्री से यह अपील करना चाहते हैं कि सोने के आयात बिल को बढ़ाने की वजह सिर्फ़ ज्वेलरी की खपत नहीं है."
"अगर आप वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के जनवरी से मार्च तिमाही के आंकड़े देखें, तो पाएंगे कि ज्वेलरी के लिए सोने की खपत या आयात कम है, जबकि निवेश के लिए सोने की मांग ज्यादा है. इसलिए हमारी प्रधानमंत्री से अपील है कि लोगों से सोना और ज्वेलरी नहीं ख़रीदने को कहने के बजाय इस पर विचार किया जाए कि आयात को कैसे नियंत्रित किया जा सकता है."
"हम जानते हैं कि हमारी अर्थव्यवस्था में तक़रीबन 20 हज़ार टन सोना मौजूद है, जो सालों से जमा होता आया है. यह मंदिरों, घरों, गोल्ड ईटीएफ़ में पड़ा है. पिछले कुछ वर्षों से हर कोई सोना ख़रीद रहा है क्योंकि इसकी क़ीमत लगातार बढ़ रही है. अगर हम इस सोने का इस्तेमाल करने के तरीक़े खोज सकें, तो आयात पर हमारी निर्भरता कम हो सकती है. मुश्किल समय में सख़्त फ़ैसलों की ज़रूरत होती है."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.