सीएम की कुर्सी पर पहला दिन, क्या ये 5 बातें विजय की भविष्य की राजनीति तय करेंगी?

    • Author, ए. नंदकुमार
    • पदनाम, बीबीसी तमिल
  • पढ़ने का समय: 8 मिनट

तमिलगा वेट्री कड़गम यानी टीवीके के नेता विजय ने मुख्यमंत्री के रूप में पदभार ग्रहण करने के तुरंत बाद अपने पहले भाषण और पहले दिन की गतिविधियों के ज़रिए कई तरह के राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है.

विजय का पहला भाषण एक बहुआयामी राजनीतिक बयान था. इसमें सरकारी योजनाओं की घोषणाओं से लेकर पिछली सरकार की वित्तीय स्थिति की आलोचना, धर्मनिरपेक्षता, अल्पसंख्यकों से किए गए वादे और गठबंधन की राजनीति पर रोशनी डाली गई.

साथ ही "मैं एक आम आदमी हूं" वाले नज़रिए के साथ, इसमें एक भावनात्मक अपील भी थी. भाषण के अलावा, उनके पहले दिन के कामों को भी राजनीतिक प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है.

शपथ ग्रहण समारोह के बाद, विजय अपने आधिकारिक काम को शुरू करने के लिए सचिवालय गए और बाद में पेरियार स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की.

विजय ने लगभग साठ सालों तक डीएमके और एआईएडीएमके के शासन में रहे तमिलनाडु के राजनीतिक वर्चस्व को तोड़ा है.

उन्होंने अपने पहले ही दिन यह दिखाने की कोशिश की है कि राज्य की अगली राजनीतिक दिशा क्या होगी.

डीएमके पर पहला राजनीतिक हमला

मुख्यमंत्री के रूप में अपने भाषण में विजय का सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश पिछली सरकार की वित्तीय स्थिति की सीधी आलोचना थी.

विजय ने कहा कि पिछली सरकार ने ख़ज़ाना ख़ाली कर दिया और चली गई, और इस पर एक श्वेत पत्र जारी किया जाना चाहिए.

साथ ही उन्होंने कहा कि अगर लोग उन्हें कुछ समय दें तो यह मददगार होगा.

पत्रकार कुबेंद्रन कहते हैं, "विजय को तमिलनाडु सरकार की वित्तीय स्थिति को पूरी तरह समझने में कुछ समय लगेगा. उन्होंने इसके लिए खुलकर अनुरोध किया है."

राजनीतिक विश्लेषक रामू मणिवन्नन कहते हैं, "विजय ने अपने शासन की शुरुआत में ही पिछली सरकार को आर्थिक चुनौतियों के लिए ज़िम्मेदार ठहराने का राजनीतिक रुख़ अपनाया है. इसे भविष्य में संभावित वित्तीय संकटों या वादों को पूरा करने में देरी के लिए पहले से ही एक राजनीतिक स्पष्टीकरण तैयार करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है."

वो कहते हैं, "टीवीके कोई वैचारिक पार्टी नहीं है, बल्कि यह बीजेपी, डीएमके और एआईएडीएमके जैसी अन्य पार्टियों की आलोचना करके उभरी है. इसने इन पार्टियों के ख़िलाफ़ वोट हासिल करके चुनाव जीता. विजय के भाषण से पता चलता है कि पार्टी अपनी विपक्ष की राजनीति जारी रखेगी."

"अब तक डीएमके विरोधी राजनीति का नेतृत्व एआईएडीएमके कर रही थी. अब विजय ने वह जगह ले ली है. यह रुख़ व्याप्त असंतोष से निपटने में मददगार साबित हो सकता है."

डीएमके नेता एमके स्टालिन की इस पर तुरंत दिए गए बयान से पता चलता है कि विजय के भाषण का राजनीतिक प्रभाव पड़ा था.

स्टालिन ने कहा, "तमिलनाडु का क़र्ज़ निर्धारित सीमा के भीतर है. हमने पिछले फ़रवरी के बजट में तमिलनाडु सरकार की वित्तीय स्थिति स्पष्ट रूप से बताई थी. क्या आपको यह बात नहीं पता? उसके बाद ही आपने जनता से कई वादे किए. जिन लोगों ने आपको वोट दिया है, उन्हें धोखा न दें और गुमराह न करें."

क्या बीजेपी का विरोध रहेगा जारी?

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की शपथ ग्रहण समारोह में भागीदारी ने काफ़ी ध्यान आकर्षित किया.

विजय ने राहुल गांधी को 'भाई' कहकर संबोधित किया, जो यह दिखाता है कि वो राष्ट्रीय स्तर पर बीजेपी के ख़िलाफ़ विपक्षी दलों के साथ अच्छे राजनीतिक संबंध बनाने का प्रयास कर रहे हैं. चुनाव से पहले कांग्रेस के साथ गठबंधन करने की टीवीके की इच्छा थी. अब यह संभव हो पाया है.

रामू मणिवन्नन कहते हैं, "विजय ने सत्ता बचाने और अपने भविष्य के राजनीतिक मार्ग को सुरक्षित रखने की ज़रूरत को देखते हुए बीजेपी के ख़िलाफ़ रुख़ अपनाया है."

राजनीतिक विश्लेषक प्रोफ़ेसर राजा का कहना है, "भविष्य में बीजेपी विरोधी राष्ट्रीय गठबंधन में विजय महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं."

उन्होंने कहा, "राजनीति में विजय का पहला दिन तमिलनाडु के उन मतदाताओं के लिए आत्मविश्वास बढ़ाने वाला था, जो बीजेपी विरोधी हैं. बीजेपी विरोधी दलों पर ज़ोर देना और पेरियार स्मारक का उनका दौरा, ये सभी संकेत हैं कि विजय द्रविड़ राजनीतिक परंपरा को पूरी तरह से नकारने के रास्ते पर नहीं हैं."

रामू मणिवन्नन कहते हैं, "मैं विजय की पेरियार स्मारक यात्रा को नीतिगत बयान के रूप में नहीं देखता. तमिलनाडु में कोई भी पार्टी पेरियार के बिना राजनीति नहीं कर सकती. विजय को भी पेरियार की ज़रूरत है."

उनका कहना है कि विजय ने अन्य गठबंधन दलों को जो महत्व दिया है, वह समय की ज़रूरत है और इस रुख़ का रुझान भविष्य में और अधिक स्पष्ट हो जाएगा.

राजा का कहना है, "हालांकि विजय लगातार बीजेपी को वैचारिक शत्रु कहते रहे हैं, लेकिन उन्होंने डीएमके का जितना विरोध किया, उतना बीजेपी की सीधी और गंभीर आलोचना ज़मीनी स्तर पर नहीं की है."

"ऐसे में यह देखना होगा कि कांग्रेस, कम्युनिस्ट और वीसीके जैसी बीजेपी विरोधी दलों के समर्थन से सरकार बनाने वाले विजय बीजेपी की आलोचना को और तेज़ करेंगे या केंद्र सरकार से सीधे टकराव से बचते हुए 'प्रशासनिक संतुलन' की राजनीति का रास्ता अपनाएंगे."

सामाजिक न्याय, धर्मनिरपेक्षता और द्रविड़ राजनीति

विजय ने कहा, "यह एक नई शुरुआत है. सच्चे सामाजिक न्याय और धर्मनिरपेक्षता के एक नए युग की शुरुआत हो रही है."

उनके इस बयान को एक राजनीतिक घोषणा के रूप में देखा जा रहा है.

ऐसा माना जा रहा है कि वह सामाजिक न्याय और धर्मनिरपेक्षता की राजनीति का एक नए रूप में प्रतिनिधित्व करेंगे, जिसे द्रविड़ पार्टियां लंबे समय से अपनी राजनीतिक पहचान के रूप में दावा करती रही हैं.

विजय ने कहा कि "यह सरकार अल्पसंख्यक भाइयों के साथ रहेगी" और विजय ने ख़ुद को हिंदू, ईसाई और मुस्लिम समुदायों के प्रतिनिधि चेहरे के रूप में पेश किया.

राजा का कहना है, "तमिलनाडु में अल्पसंख्यक वोट बड़े पैमाने पर डीएमके गठबंधन को जाते हैं, इसलिए विजय ने उस समुदाय को उम्मीद का सीधा संदेश देने की कोशिश की है."

वो कहते हैं, "द्रविड़ राजनीति के विकल्प के रूप में सत्ता में आने के बावजूद, विजय पेरियार को श्रद्धांजलि देकर डीएमके के पारंपरिक राजनीतिक क्षेत्र में भी अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं."

रामू मणिवन्नन कहते हैं कि सामाजिक न्याय और धर्मनिरपेक्षता किसी पार्टी की व्यक्तिगत नीतियां नहीं हैं.

वो कहते हैं कि विजय तमिलनाडु की राजनीतिक पहचान के इन पहलुओं को अपने राजनीतिक भाषण का हिस्सा बनाए रखेंगे.

'मैं कोई फ़रिश्ता नहीं हूँ'

राजनीतिक विश्लेषक विजय के इस बयान कि, 'मैं कोई फ़रिश्ता नहीं हूँ, मैं भी एक साधारण इंसान हूँ' को उनके पूरे भाषण का सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक पल मानते हैं.

रामू मणिवन्नन का कहना है कि सिनेमा में "उद्धारकर्ता" की छवि रखने वाले अभिनेता ने राजनीति में उस छवि को नरम कर दिया है और "आपके बेटे और भाई" की पहचान की ओर रुख़ करने की कोशिश की है.

वो कहते हैं, "कुछ लोगों ने विजय की सिनेमाई छवि के आधार पर वोट दिया होगा. वे वास्तविक जीवन में भी नाटकीय बदलाव की उम्मीद कर रहे होंगे. उनके लिए, विजय ने 'सिनेमा अलग है, वास्तविक जीवन अलग है' का विचार व्यक्त किया है."

लेकिन उनका कहना है कि वास्तविकता में विजय की हीरो वाली छवि नरम पड़ जाएगी, और उनके समर्थक नहीं चाहेंगे कि यह पूरी तरह से नष्ट हो जाए.

पार्टी सदस्यों को चेतावनी

विजय ने चेतावनी देते हुए कहा, "अगर आपको लगता है कि हम खेल को ऐसे खेल सकते हैं जैसे हम जीत चुके हैं, तो उस विचार को त्याग दें."

इस बयान को टीवीके के नेताओं और समर्थकों के लिए एक प्रत्यक्ष राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है.

राजा का कहना है, "इससे पता चलता है कि वह अपनी पार्टी को नियंत्रण में रखना चाहते हैं और अपने शासन की शुरुआत में नकारात्मक आलोचनाओं को पनपने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं."

विजय ने अपने भाषण में कहा, "यहां सिर्फ़ एक ही केंद्र है. वह केंद्र जो मेरे नेतृत्व में बना था."

राजा का कहना है, "विजय ने यह विचार व्यक्त करने का प्रयास किया है कि अंतिम निर्णय उनके नेतृत्व में लिए जाएंगे और सरकार और पार्टी में नियंत्रण का केवल एक ही केंद्र होगा. इसे पार्टी के भीतर सत्ता संघर्ष या गुटबाज़ी को पनपने से रोकने के लिए एक प्रारंभिक चेतावनी के रूप में देखा जा सकता है."

हालांकि उनका कहना है, "एक बार सरकार सत्ता में आ जाए, तो सत्ता का बंटवारा कैसे होगा और फ़ैसले लेने में किसका प्रभाव होगा, यही भविष्य में इस अवधारणा का सही राजनीतिक अर्थ तय करेगा."

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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