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नीतीश के बेटे निशांत कुमार को मंत्री बनाने के पीछे जेडीयू की रणनीति क्या है?
बिहार में सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार का गुरुवार को विस्तार हुआ. जेडीयू प्रमुख नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार समेत 30 अन्य नेताओं ने पटना के गांधी मैदान में आयोजित एक समारोह में मंत्री पद की शपथ ली.
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन ने कुल 32 लोगों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. ये सभी 32 विधायक राज्य में एनडीए के पाँचों घटक दलों से हैं.
निशांत कुमार और पूर्व उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के अलावा, पूर्व मंत्री श्रवण कुमार और अशोक चौधरी को भी सम्राट चौधरी मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है.
शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, जेडीयू प्रमुख नीतीश कुमार और राज्य में सत्तारूढ़ एनडीए के अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद रहे.
बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार का गठन पिछले महीने हुआ था, जब जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया था. इसके बाद सम्राट चौधरी ने उनकी जगह ली और वह बिहार में सरकार का नेतृत्व करने वाले बीजेपी के पहले नेता बने.
बिहार में बीजेपी और जेडीयू के अलावा एनडीए में केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के नेतृत्व वाली लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास), जीतन राम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेकुलर) और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा भी शामिल हैं.
जेडीयू की रणनीति क्या है?
यह सवाल लंबे समय से उठता रहा है कि नीतीश कुमार के बाद जेडीयू का क्या होगा?
45 साल के निशांत कुमार अपने पिता नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद सार्वजनिक जीवन में थोड़ा सक्रिय हुए थे.
बिहार की राजनीति में निशांत की दस्तक तब हुई, जब नीतीश कुमार रिटायरमेंट की ओर बढ़ रहे हैं. नीतीश कुमार के राजनीतिक जीवन में लालू यादव की तरह परिवार केंद्र में कभी नहीं रहा.
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या निशांत कुमार बिहार की राजनीति में अपने पिता की पार्टी को मज़बूत कर पाएंगे या ख़ुद भी एक मुकाम हासिल कर पाएंगे?
निशांत कुमार की छवि राजनीति में एक अनिच्छुक व्यक्ति के रूप में रही है लेकिन अब जब उन्होंने मंत्री पद की शपथ ले ली है तो पुरानी पहचान क्या मिट जाएगी?
जेडीयू नेता नीरज कुमार कहते हैं, ''पार्टी का निर्णय है और निशांत ने इसे स्वीकार किया.''
यानी मंत्री बनने का फ़ैसला निशांत नहीं पार्टी का था? इसके जवाब में नीरज कुमार कहते हैं, ''जटिल परिस्थिति में पार्टी और व्यक्ति का फ़ैसला अलग-अलग नहीं होता है.''
निशांत कुमार का राजनीति में अचानक आना और मंत्री बन जाना, आख़िर जेडीयू इसके ज़रिए हासिल क्या करना चाहती है?
टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ़ सोशल साइंसेज़ के पूर्व प्रोफ़ेसर पुष्पेंद्र कहते हैं कि क्षेत्रीय पार्टियां चमत्कारिक व्यक्तित्व से चलती हैं और जेडीयू के पास नीतीश के बाद वो विकल्प नहीं है.
पुष्पेंद्र कहते हैं, ''पार्टी को एकजुट रखने के लिए ज़रूरी है कि एक धुरी बनी रहे. यह धुरी परिवार से बाहर संभव नहीं है. नीतीश के बाद जेडीयू में सारे दूसरी पंक्ति के ही नेता हैं. ऐसे में परिवार से ही किसी को लाना ज़्यादा बेहतर था. निशांत कुमार कुमार इस धुरी के रूप में कितना सफल होंगे, ये अभी कहना मुश्किल है.''
''नीतीश कुमार परिवारवाद का विरोध करते थे, इसलिए परिवार को अपनी राजनीति से बिल्कुल अलग रखा था. निशांत तब राजनीति में आए, जब नीतीश वैचारिक रूप से बहुत प्रतिबद्ध नहीं रहे. जेडीयू को एक परिवार के रूप में लें तो नीतीश कुमार के बाद निशांत को लाना, इस परिवार की मजबूरी थी.''
निशांत की शख़्सियत
मंत्री पद की शपथ लेने से पहले निशांत कुमार ने एक्स पर लिखा था, ''पिताजी का आशीर्वाद और बिहार की जनता का स्नेह ही मेरा संबल है.''
पिता का आशीर्वाद तो निशांत को मिल गया है लेकिन बिहार की जनता का स्नेह किस हद तक मिलेगा, इसकी परीक्षा अभी बाक़ी है.
निशांत कुमार ने रविवार यानी तीन मई को पश्चिम चंपारण ज़िले के बगहा से अपनी 'सद्भाव यात्रा' की शुरुआत की थी. उन्होंने अपने पिता की उस लंबे समय से चली आ रही परंपरा को आगे बढ़ाया, जिसके तहत सभी राजनीतिक यात्राएं चंपारण क्षेत्र से शुरू की जाती रही हैं.
इस यात्रा में बिहार जेडीयू अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा और जेडीयू विधायक दल के नेता श्रवण कुमार भी निशांत के साथ हैं.
बेतिया में लोगों को संबोधित करते हुए निशांत ने कहा था कि जिस तरह उनके पिता ने महात्मा गांधी की धरती चंपारण से अपनी सभी यात्राएं शुरू की थीं, उसी परंपरा का पालन उन्होंने भी किया है.
उन्होंने कहा था, "जनता से मिला यह अपार प्यार और समर्थन ही मेरी सबसे बड़ी ताक़त है. मुझे उम्मीद है कि आगे भी यही स्नेह, विश्वास और आशीर्वाद मिलता रहेगा ताकि सद्भाव और विकास की यह यात्रा लगातार आगे बढ़ती रहे."
जब से नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दिया है, तब से जेडीयू सरकार और संगठन के भीतर संतुलन साधने की कोशिश कर रही है.
पार्टी विधायक दल की बैठक बुलाए बिना ही दो वरिष्ठ नेताओं बिजेंद्र प्रसाद यादव और विजय कुमार चौधरी को उपमुख्यमंत्री चुना गया, जबकि बाद में पार्टी ने नालंदा से आठ बार विधायक रहे श्रवण कुमार को विधानसभा में अपना नेता चुना.
पहले अटकलें थीं कि निशांत कुमार उपमुख्यमंत्री पद संभाल सकते हैं, लेकिन मंत्री बनने के बाद तमाम अटकलों पर विराम लग गया है. पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर निशांत नीतीश कुमार के इकलौते बेटे हैं.
अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस ने इसी साल आठ मार्च को निशांत का एक प्रोफाइल प्रकाशित किया था.
इस प्रोफ़ाइल के मुताबिक़, ''निशांत की शुरुआती पढ़ाई पटना के सेंट करेन स्कूल में हुई थी लेकिन एक शिक्षक की पिटाई से उन पर बुरा असर पड़ा. इसके बाद उनके पिता ने उन्हें उत्तराखंड के मसूरी स्थित एक स्कूल में भेज दिया.''
इंडियन एक्सप्रेस से मुख्यमंत्री आवास (तब नीतीश सीएम थे) से जुड़े एक सूत्र ने बताया था, "निशांत को परिवार से दूर रहना पसंद नहीं आया. बाद में उनका दाखिला पटना के सेंट्रल स्कूल में कराया गया, जहां से उन्होंने 12वीं बोर्ड की परीक्षा दी."
इसके बाद निशांत ने रांची के पास बीआईटी मेसरा में पढ़ाई की. जेडीयू नेता नीरज कुमार बताते हैं कि 2002 में कंप्यूटर साइंस में बीटेक पूरा करने के बाद निशांत ने नौकरी के इंटरव्यू नहीं दिए और पटना लौटकर अपनी मां के साथ ननिहाल में रहने लगे.
2007 में मां के निधन के बाद वह अपने पिता के साथ मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास 1, अणे मार्ग में रहने लगे, जहां परिवार के अन्य सदस्य और रिश्तेदार भी रहते थे.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.