तमिलनाडु: क्या होगा अगर टीवीके सरकार नहीं बना पाती है

    • Author, जेवियर सेल्वकुमार
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
  • पढ़ने का समय: 4 मिनट

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित हुए चार दिन हो चुके हैं, लेकिन अब तक यह तय नहीं हो पाया है कि सरकार कौन बनाएगा.

सबसे ज्यादा सीटें जीतने वाली एकल पार्टी होने के नाते एक्टर विजय की तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) ने तमिलनाडु के कार्यवाहक राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर को पत्र सौंपकर सरकार बनाने का दावा पेश किया है.

लेकिन राज्यपाल अर्लेकर ने सरकार गठन के लिए ज़रूरी 118 विधायकों के समर्थन की कमी का हवाला देते हुए विजय को आमंत्रित करने से इनकार कर दिया.

इस संबंध में राजभवन से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया, "टीवीके नेता विजय ने राज्यपाल से मुलाकात की. इस बैठक के दौरान राज्यपाल ने स्पष्ट किया कि सरकार गठन के लिए तमिलनाडु विधानसभा में ज़रूरी बहुमत का समर्थन अभी तक हासिल नहीं हुआ है."

6 मई को पहली बार राज्यपाल से मुलाकात कर पत्र सौंपने के बावजूद सरकार बनाने का न्योता नहीं मिलने के बाद, विजय ने 7 मई को फिर से राज्यपाल से मुलाकात की. इस बार उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 5 विधायकों के समर्थन पत्रों के साथ सरकार बनाने का दावा पेश किया. इसके बाद ही यह प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई.

इस घटनाक्रम के बाद इस बात को लेकर संदेह पैदा हो गया है कि क्या टीवीके सरकार बना पाएगी? साथ ही, अगर उसे मौका नहीं मिलता है तो अगली सरकार कैसे बनेगी, इसको लेकर भी सवाल उठने लगे हैं.

टीवीके के सरकार बनाने की क्या संभावनाएं

टीवीके ने 108 सीटें जीती हैं, चूंकि दो सीटों से जीतने वाले विजय को एक सीट से इस्तीफ़ा देना होगा, इसलिए पार्टी की संख्या घटकर 107 रह जाएगी.

उस स्थिति में सदन की कुल संख्या 233 हो जाएगी और बहुमत के लिए 117 विधायकों का समर्थन पर्याप्त होगा. यदि विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) टीवीके का होता है, तो उस सूरत में बहुमत तक पहुंचने के लिए पार्टी को 11 और सदस्यों के समर्थन की ज़रूरत पड़ेगी.

क्योंकि कांग्रेस के 5 विधायकों का समर्थन तय माना जा रहा है, इसलिए फिलहाल टीवीके को 6 और विधायकों के समर्थन की ज़रूरत है.

ऐसे में दो-दो सीटों वाली भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) और सीपीआई ने भी टीवीके को समर्थन देने के संकेत दिए हैं. इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) ने भी दो सीटें हासिल की हैं और उसने भी संकेत दिया है कि वह अगली सरकार को 'रचनात्मक और आलोचनात्मक' समर्थन दे सकती है. इस तरह टीवीके प्लस की कुल संख्या 119 तक पहुंच सकती है, जो बहुमत के आंकड़े से आगे है.

अगर वे समर्थन पत्र के साथ फिर से सरकार बनाने का दावा पेश करते हैं, तो राज्यपाल को उन्हें सरकार गठन के लिए आमंत्रित करना पड़ सकता है.

यदि अस्थायी स्पीकर के चुनाव के समय एक सदस्य की संख्या कम होती है, तो किसी बाहरी पार्टी के विधायक को अस्थायी स्पीकर बनाया जा सकता है.

यदि यह भी संभव नहीं होता, तो कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि विश्वास मत कराने के लिए हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को अस्थायी स्पीकर और रिटर्निंग ऑफिसर नियुक्त किया जा सकता है.

विजय चुप क्यों हैं और खुलकर क्यों नहीं बोल रहे?

राजनीतिक विश्लेषक राजन कुरई कृष्णन ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "विजय सबसे ज्यादा सीटें जीतने वाली पार्टी के नेता के रूप में सरकार बनाने का दावा कर रहे हैं. उन्हें सिर्फ दिए गए समय के भीतर विधानसभा में अपना बहुमत साबित करना है. अगर द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) विश्वास मत के दौरान मतदान में हिस्सा नहीं लेती, तब टीवीके को सदन में बहुमत हासिल करने में समस्या नहीं होगी."

उन्होंने कहा, "लेकिन यह कहना कि केवल स्पष्ट बहुमत होने पर ही उन्हें बुलाया जाएगा, ये राज्यपाल का अपनी शक्ति का दुरुपयोग करना है. दुख की बात यह है कि इस मुद्दे पर विजय को खुद खुलकर बोलना चाहिए, जो वो नहीं कर रहे हैं. विजय ने अभी तक पत्रकारों से मुलाकात नहीं की है. कम से कम अब उन्हें मीडिया से मिलना चाहिए और सरकार गठन के लिए राज्यपाल के रवैये पर सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखनी चाहिए."

प्रोफेसर राजन कुरई कृष्णन ने कहा कि नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनने के बाद पत्रकारों से नहीं मिले थे. उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री बनने से पहले मोदी 20-25 साल तक एक कार्यकर्ता रहे थे. उस दौरान वह पत्रकारों से मिला करते थे. प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने सीधे बात नहीं की, क्योंकि उनकी ओर से या पार्टी की ओर से बोलने के लिए कई प्रवक्ता मौजूद थे. लेकिन विजय ने अभी-अभी राजनीति में कदम रखा है और उन्हें मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला है. उन्हें खुलकर बोलना चाहिए."

इसी तरह की राय वी सी काची के महासचिव आलूर शानवास ने भी व्यक्त की है. इस मुद्दे पर बोलते हुए उन्होंने कहा, "राज्यपाल बाधा पैदा कर रहे हैं, लेकिन टीवीके उनका विरोध करने से डर रही है. क्या विजय में इतनी राजनीतिक इच्छाशक्ति और साहस है कि वह उस राज्यपाल के ख़िलाफ़ अपनी राय खुलकर रख सकें, जिन्होंने टीवीके को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित नहीं किया?"

राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने भी विजय को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित नहीं करने पर राज्यपाल की कड़ी आलोचना की है. कपिल सिब्बल ने कहा,"जब राज्यपाल बीजेपी के एजेंट बन जाते हैं, तो वे भाजपा की इच्छा के अनुसार काम करते हैं. अगर विधानसभा कोई विधेयक पारित करती है, तो राज्यपाल मंजूरी दिए बिना उसे लंबित रखते हैं. लेकिन पश्चिम बंगाल में, जहां अब बीजेपी सत्ता में आई है, वहां वे तुरंत मंजूरी दे देंगे."

उन्होंने आगे कहा, "आज की स्थिति में टीवीके के पास सदन में बहुमत नहीं है. राज्यपाल तमिलनाडु की मौजूदा स्थिति से पूरी तरह वाकिफ हैं. उन्हें सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का सख्ती से पालन करना चाहिए. सरकारिया आयोग ने भी इसे स्पष्ट रूप से कहा है."

राज्यसभा सांसद और एक्टर कमल हासन और सीपीआई के राज्य सचिव वीरापांडियन ने भी राज्यपाल से विजय को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने की मांग की है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.