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नीट पेपर लीक: गिरफ़्तार महिला प्रोफ़ेसर कौन हैं, एनटीए ने दी थी क्या ज़िम्मेदारी?
- Author, बीबीसी मराठी
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 8 मिनट
सीबीआई ने नीट पेपर लीक मामले में पुणे से एक और अभियुक्त मनीषा मांढरे को गिरफ़्तार किया है. पेपर लीक मामले में अब तक कुल नौ लोगों की गिरफ़्तारी हो चुकी है.
मनीषा मांढरे नीट यूजी-2026 की परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी हुई थीं. उन्हें नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने एक्सपर्ट के तौर पर नियुक्त किया था.
जांच में पता चला है कि उन्हें बॉटनी और ज़ूलॉजी प्रश्नपत्रों तक पूरी एक्सेस दी गई थी.
वह पुणे के एक प्रतिष्ठित कॉलेज में प्रोफ़ेसर के रूप में काम कर रही हैं.
हालांकि, इस मामले पर अभी तक मनीषा मांढरे या उनके वकीलों की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.
जवाब मिलने पर ख़बर को अपडेट किया जाएगा.
इससे पहले लातूर के रहने वाले पीवी कुलकर्णी को भी पुणे से गिरफ़्तार किया गया था.
सीबीआई ने कुलकर्णी को पेपर लीक मामले का 'मास्टरमाइंड' बताया है.
सीबीआई ने कहा है कि पीवी कुलकर्णी को गहन पूछताछ के बाद पुणे से गिरफ्तार किया गया.
कौन हैं मनीषा मांढरे?
मनीषा मांढरे पुणे के नामी कॉलेज में प्रोफ़ेसर हैं. वह बॉटनी की वरिष्ठ प्रोफ़ेसर के रूप में कार्यरत हैं.
इस मामले में नाम सामने आने के बाद सीबीआई ने गहन जांच की और फिर उन्हें दिल्ली में गिरफ़्तार किया.
जांच के मुताबिक़, अप्रैल 2026 के दौरान मनीषा मांढरे ने पुणे में मनीषा वाघमारे के ज़रिए संभावित नीट उम्मीदवारों को इकट्ठा किया और अपने घर पर विशेष कोचिंग क्लास चलाई.
मनीषा वाघमारे को 14 मई 2026 को गिरफ़्तार किया गया था.
इन कक्षाओं में मनीषा मांढरे ने बॉटनी और ज़ूलॉजी के कई सवाल समझाए और उनकी जानकारी दी.
स्टूडेंट्स से कहा गया कि वे इन सवालों को अपनी नोटबुक में लिखें और किताबों में भी मार्क करें.
जांच में पाया गया कि इनमें से ज़्यादातर सवाल 3 मई 2026 को हुई नीट यूजी 2026 परीक्षा के प्रश्नपत्र के सवालों से मिलते थे.
नीट पेपर लीक मामले में सीबीआई ने छह जगहों पर छापेमारी की है और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज़, लैपटॉप, बैंक स्टेटमेंट और मोबाइल फ़ोन ज़ब्त किए हैं.
अब तक इस मामले में दिल्ली, जयपुर, गुरुग्राम, नासिक, पुणे और अहिल्यानगर से कुल नौ अभियुक्तों को गिरफ़्तार किया जा चुका है.
इनमें से पांच अभियुक्तों को अदालत में पेश कर सात दिन की सीबीआई हिरासत में भेजा गया है.
कॉलेज की प्रिंसिपल ने क्या कहा?
जिस कॉलेज में मनीषा मांढरे प्रोफे़सर हैं, उसकी प्रिंसिपल डॉ. निवेदिता एकबोटे ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा कि उन्हें इस मामले की जानकारी मीडिया से मिली.
उन्होंने कहा, "हमें पता चला है कि सीनियर प्रोफे़सर मनीषा मांढरे को सीबीआई ने गिरफ़्तार किया है. वह पिछले 24 वर्षों से यहां काम कर रही थीं और एनटीए के साथ गोपनीय शर्तों के तहत जुड़ी हुई थीं."
उन्होंने बताया कि सर्विस रिकॉर्ड के मुताबिक़ मनीषा मांढरे सात महीने बाद रिटायर होने वाली थीं.
डॉ. एकबोटे ने कहा, "एनटीए, नीट परीक्षा और प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया के बारे में हमें कोई जानकारी नहीं है,"
उन्होंने आगे कहा, "संबंधित अधिकारियों से आधिकारिक जानकारी मिलने के बाद हम क़ानून के मुताबिक़ कार्रवाई करेंगे."
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने सरकार की मंज़ूरी के बाद नीट 2026 की दोबारा परीक्षा 21 जून को कराने का फै़सला किया है.
मनीषा मांढरे के अलावा गिरफ़्तार बाक़ी अभियुक्त कौन हैं.
शुभम खैरनार
सीबीआई की ओर से पेपर लीक मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू करने के ठीक पहले दिन ही एक नाम सामने आया और महाराष्ट्र में हलचल मच गई.
इस पेपर लीक मामले में सामने आया नाम नासिक के 30 वर्षीय शुभम खैरनार का था.
पुलिस ने सूचना दी थी कि नीट परीक्षा का प्रश्नपत्र नासिक के एक टेलीग्राम ग्रुप को भेजा गया था.
इसी सूचना के आधार पर नासिक पुलिस ने 12 मई, 2026 को शुभम को गिरफ्तार कर सीबीआई को सौंप दिया.
सीबीआई ने कहा कि शुभम खैरनार ने 29 अप्रैल, 2026 को धनंजय लोखंडे से प्राप्त प्रश्न पत्र की पीडीएफ़ यश यादव को दी.
पता चला कि शुभम खैरनार ने यह पेपर मांगीलाल खटीक, विकास बिवल और दिनेश बिवल को भी दिया था.
शुभम खैरनार नासिक के एक इलाके में स्थित एक इमारत में एसआर एजुकेशन कंसल्टेंसी नाम से अपना बिज़नेस चला रहे थे.
संदिग्ध के पिता ने दावा किया था कि "शुभम तीसरे वर्ष का मेडिकल छात्र है और नासिक में प्रैक्टिस करता है."
इसी बीच, बीबीसी मराठी ने यह जानने की कोशिश की कि क्या संदिग्ध वास्तव में बीएएमएस का छात्र है या केवल एक 'डॉक्टर' है जैसा कि उन्होंने अपने बोर्ड पर लिख रहा है.
सीहोर स्थित सत्य साई यूनिवर्सिटी के प्रशासन ने बीबीसी मराठी को बताया, "शुभम ने कॉलेज में दाखिला तो ले लिया था, लेकिन उसने सिलेबस का कोई भी साल पूरा नहीं किया था."
पीवी कुलकर्णी
15 मई 2026 को गहन पूछताछ के बाद सीबीआई ने प्रहलाद विट्ठलराव कुलकर्णी उर्फ़ पीवी कुलकर्णी को पुणे से गिरफ़्तार किया था.
सीबीआई ने पीवी कुलकर्णी को पेपर लीक मामले का 'मास्टरमाइंड' बताया है.
पीवी कुलकर्णी मूल रूप से लातूर के निवासी हैं. वे लातूर के दयानंद कॉलेज में रसायन विज्ञान पढ़ाते थे.
27 वर्षों की सेवा के बाद वे 2022 में सेवानिवृत्त हुए, बाद में वे पुणे में बस गए.
दयानंद कॉलेज के प्रिंसिपल सिद्धेश्वर बेलाले ने कहा कि पीवी कुलकर्णी के रिटायरमेंट के बाद कॉलेज से कोई संपर्क नहीं था.
कॉलेज में पढ़ाने के बाद उन्होंने लातूर में अपनी खुद की क्लासेज़ शुरू कीं.
कुलकर्णी का नाम पुणे स्थित एक संगठन से भी जुड़ा है. यह संगठन नीट, जेईई, जेईई मेन और एमएचटी-सीईटी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मॉक टेस्ट, क्वेश्चन सेट और गाइडेंस मुहैया कराते थे.
सीबीआई ने कहा है कि अप्रैल 2026 के आखिरी सप्ताह में पुणे स्थित उनके घर पर कुछ स्टूडेंट्स के लिए ख़ास कोचिंग सेशन चलाए गए थे.
इसके अलावा, स्थानीय स्तर पर यह शिकायत भी आई थी कि कुलकर्णी ने कुछ स्टूडेंट्स को पैसे के बदले 'गेस पेपर' दिए थे. सीबीआई ने लातूर स्थित उनके ट्यूशन संस्थानों और संबंधित शिक्षकों से पूछताछ की है.
कुलकर्णी के वकील ने कहा, "सीबीआई के मुताबिक़, पीवी कुलकर्णी एनटीए की ओर से परीक्षा प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया में शामिल थे और उनके पास प्रश्नपत्र मौजूद थे. मुझे नहीं पता कि मेरे क्लाइंट (पीवी कुलकर्णी) की ओर से तैयार प्रश्नपत्र एनटीए ने लिए थे या नहीं. कई शिक्षक प्रश्नपत्र तैयार करते हैं. मेरे क्लाइंट को बिना किसी सबूत के गिरफ्तार कर लिया गया है."
मनीषा वाघमारे
मनीषा वाघमारे को 14 मई, 2026 को गिरफ़्तार किया गया था.
मनीषा वाघमारे का संबंध पीवी कुलकर्णी से भी बताया गया है, जिन्हें सीबीआई ने 'मुख्य साज़िशकर्ता' कहा है.
सीबीआई ने कहा है कि मनीषा वाघमारे पीवी कुलकर्णी को मनीषा मांढरे के ज़रिए जानती थीं.
मनीषा वाघमारे के वकीलों ने दावा किया कि उनके मुवक्किल के ख़िलाफ़ कोई प्रत्यक्ष सबूत नहीं मिला है.
उन पर आरोप केवल इसलिए लगाया गया है क्योंकि वह धनंजय लोखंडे के संपर्क में थीं.
धनंजय लोखंडे
नीट परीक्षा पेपर लीक मामले में एक और नाम धनंजय लोखंडे का है. धनंजय को सीबीआई ने अहिल्यानगर ज़िले से गिरफ़्तार किया था.
सीबीआई की जानकारी के मुताबिक़, धनंजय लोखंडे ने मनीषा वाघमारे से नीट परीक्षा से संबंधित पेपर हासिल किया था और उसे शुभम खैरनार को दे दिया था.
शुभम खैरनार और धनंजय लोखंडे एक-दूसरे को जानते हैं.
बाद में शुभम ने धनंजय लोखंडे से मिले काग़ज़ात दूसरों को दे दिए थे.
इस बीच, महाराष्ट्र में पांचों अभियुक्तों में से कुछ ने अभी तक अपने वकीलों को कोई जवाब नहीं दिया है.
जैसे ही कोई जानकारी मिलेगी, यहां अपडेट कर दिया जाएगा.
मांगीलाल बिवाल
जयपुर के जमवारामगढ़ का रहने वाले मांगीलाल बिवाल को लीक प्रश्नपत्र हासिल करने और उसे बांटने के मामले में गिरफ़्तार किया गया है.
मांगीलाल बिवाल का बेटा विकास बिवाल सवाई माधोपुर के मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस फ़र्स्ट ईयर में पढ़ाई कर रहा है.
ऐसे भी आरोप हैं कि नीट 2025 में भी हरियाणा के यश यादव के ज़रिए मांगीलाल बिवाल ने पेपर ख़रीदा था. इसी परीक्षा में मांगीलाल बिवाल के परिवार से पांच बच्चों का सेलेक्शन हुआ था.
विकास बिवाल-दिनेश बिवाल
दिनेश बिवाल मांगीलाल बिवाल का भाई है जबकि विकास बिवाल बेटा है. दिनेश बिवाल को जयपुर से ही गिरफ़्तार किया गया है. इस लीक के पीछे हुए वित्तीय लेन-देन से उसके सीधे संबंध के आरोप हैं.
यश यादव
नीट-यूजी पेपर लीक मामले में गिरफ्तार गुरुग्राम का रहने वाले यश यादव उत्तरकाशी से बीएएमएस (बैचलर ऑफ़ आयुर्वेद मेडिसिन एंड सर्जरी) की पढ़ाई कर रहा था.
सीबीआई की टीम ने इस मामले में कई और लोगों के साथ यश यादव को भी गिरफ़्तार किया है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित