पीएम मोदी के 'तेल बचाने' की अपील के एक दिन बाद पेट्रोलियम मंत्रालय ने क्या कहा

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रविवार को एक साल तक सोना न ख़रीदने और खाने का तेल कम इस्तेमाल करने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद पेट्रोलियम मंत्रालय ने एक प्रेस कांफ़्रेंस कर भारत में पेट्रोलियम पदार्थों के स्टॉक की जानकारी दी.
पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा कि 'हमारी रिफ़ाइनरियां बेहतर क्षमता पर काम कर रही हैं.'
उन्होंने भरोसा दिलाया, "पेट्रोल और डीज़ल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है, और घरेलू ज़रूरतों के लिए एलपीजी की सप्लाई लगातार जारी है."
इसके अलावा सोमवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मध्यपूर्व के हालात पर अंतर-मंत्रालयी बैठक (आईजीओएम) की. बैठक के बाद कहा गया कि देश में ईंधन का पर्याप्त भंडार है.
दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तेलंगाना दौरे पर थे और सिकंदराबाद में एक जनसभा को संबोधित करने के दौरान ईरान जंग को लेकर वैश्विक मुश्किलों की चर्चा की.
पीएम मोदी ने लोगों से सोना न ख़रीदने, खाने के तेल की बचत करने जैसी कई सलाहें दीं और कहा, "विदेशी मुद्रा बचाने के लिए हमारी देशभक्ति हमें चुनौती दे रही है और हमें यह स्वीकार करके विदेशी मुद्रा बचानी होगी."
इसके बाद कांग्रेस समेत कई विपक्षी नेताओं ने सरकार पर निशाना साधा. कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने रविवार को आरोप लगाया कि 'पीएम मोदी को अब भी यह समझ नहीं आ रहा है कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए.'
सोमवार को आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा, "क्या यह आर्थिक इमरजेंसी की आहट है? क्या देश भारी आर्थिक संकट में फँस गया है? ऐसा तो देश में पहले कभी नहीं हुआ.''
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को पश्चिम एशिया पर गठित अनौपचारिक मंत्रियों के समूह (आईजीओएम) की बैठक की. बैठक में क्षेत्र में जारी संघर्ष से जुड़े ताजा हालात की समीक्षा की गई.
उधर पेट्रोलियम मंत्रालय ने एक प्रेस कांफ़्रेंस कर मौजूदा समय में देश में पेट्रोलियम पदार्थों के स्टॉक की जानकारी दी.
पेट्रोलियम मंत्रालय ने क्या बताया

पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने कहा, "हमारी रिफ़ाइनरियां बेहतर क्षमता पर काम कर रही हैं. किसी भी रिटेल आउटलेट पर ईंधन खत्म होने की सूचना नहीं है."
उन्होंने कहा, "एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटरशिप भी सामान्य रूप से काम कर रही हैं और कहीं भी गैस ख़त्म होने की रिपोर्ट नहीं मिली है. घरेलू ज़रूरतों के लिए एलपीजी की सप्लाई लगातार जारी है."
पेट्रोल और डीज़ल को लेकर उन्होंने कहा कि देश में 'पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध' है.
सुजाता शर्मा ने बताया, "पिछले तीन दिनों में ही 1.26 करोड़ बुकिंग के मुकाबले 1.14 करोड़ एलपीजी सिलेंडर डिलीवर किए गए हैं. इसी दौरान 17,000 टन से ज़्यादा कमर्शियल एलपीजी की बिक्री हुई है. 762 टन से ज़्यादा ऑटो एलपीजी भी बेची गई है."
"इसके अलावा, इसी अवधि में 5 किलो वाले 1.40 लाख से ज़्यादा सिलेंडर बेचे गए हैं. ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने करीब 93 कैंप भी लगाए, जिनमें 2,100 से ज़्यादा सिलेंडर बेचे गए."
उधर, आईजीओएम की बैठक में अधिकारियों ने कहा कि भारत सरकार ने कहा है कि देश में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और कच्चे तेल की कोई कमी नहीं है और लोगों को घबराकर ख़रीदारी करने की ज़रूरत नहीं है.
अधिकारियों ने क्या बताया?

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सोमवार को मध्यपूर्व के हालात पर हुई अंतर-मंत्रालयी बैठक (आईजीओएम) में अधिकारियों ने कहा कि भारत के पास पर्याप्त ईंधन भंडार है और क्षेत्र में जारी संघर्ष का असर कम करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं.
अधिकारियों के मुताबिक़, भारत की करीब 90 प्रतिशत ऊर्जा आयात ज़रूरतें प्रभावित क्षेत्र से पूरी होती हैं. इसके बावजूद सरकार ने सप्लाई पर असर कम करने के लिए तेज़ी से कदम उठाए हैं.
सरकार की तरफ़ से कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील का मतलब किसी संभावित कमी की चेतावनी नहीं है. इसे ऊर्जा संरक्षण और वैश्विक अनिश्चितता के दौर में आर्थिक बोझ कम करने की कोशिश के तौर पर देखा जाना चाहिए.
बैठक में कहा गया कि देश में पेट्रोलियम उत्पादों और जरूरी सामान की कोई कमी नहीं है. भारत के पास 60 दिन का कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस, जबकि 45 दिन का एलपीजी स्टॉक मौजूद है.
बैठक में बताया गया कि वैश्विक संकट के बावजूद भारत में पेट्रोलियम क़ीमतें स्थिर हैं, जबकि कई देशों में कीमतों में 30 से 70 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है. तेल कंपनियां नुक़सान उठाकर भी घरेलू उपभोक्ताओं पर बोझ नहीं डाल रही हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील का हवाला देते हुए लोगों से सार्वजनिक परिवहन, कार पूलिंग और ईंधन बचत अपनाने को कहा गया.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अधिकारियों को ऊर्जा बचत और जागरूकता अभियान तेज़ करने के निर्देश दिए.
आईजीओएम में अधिकारियों ने बताया कि कि फ़र्टिलाइज़र्स की उपलब्धता मजबूत बनी हुई है और आपूर्ति ज़रूरत से अधिक है. इसके बारे में उत्पादन और बिक्री के आंकड़े भी दिए गए.
विपक्ष ने उठाए सवाल

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विपक्ष के नेताओं ने पीएम मोदी की इस अपील की आलोचना की है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि ये नाकामी का सबूत है, अब जनता को यह बताना पड़ रहा कि क्या ख़रीदें और क्या नहीं.
राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा, "मोदी जी ने कल जनता से त्याग मांगे- सोना मत ख़रीदो, विदेश मत जाओ, पेट्रोल कम जलाओ, खाद और खाने का तेल कम इस्तेमाल करो, मेट्रो में चलो, घर से काम करो. ये उपदेश नहीं, ये नाकामी के सबूत हैं."
उन्होंने लिखा, "12 साल में देश को इस मुक़ाम पर ला दिया है कि जनता को बताना पड़ रहा है- क्या ख़रीदें, क्या न ख़रीदें, कहां जाएं, कहां न जाएं. हर बार ज़िम्मेदारी जनता पर डाल देते हैं ताकि ख़ुद जवाबदेही से बच निकलें. देश चलाना अब कॉम्प्रोमाइज्ड पीएम के बस की बात नहीं."
समाजवादी पार्टी के प्रमुख और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि चुनाव ख़त्म होते ही संकट याद आ गया.
अखिलेश यादव ने एक्स पर लिखा, "इस तरह की अपील से तो व्यापार-कारोबार-बाज़ार में मंदी या महंगाई की आशंका की वजह से डर के साथ घबराहट, बेचैनी, निराशा फैल जाएगी. सरकार का काम अपने अकूत संसाधनों का सदुपयोग करके आपातकालीन हालातों से उबारना होता है, भय या अफ़रातफ़री फैलाना नहीं."
आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने अर्थव्यवस्था को लेकर पीएम मोदी की अपील पर सवाल खड़े किए.
केजरीवाल ने एक्स पर लिखा, ''क्या यह आर्थिक इमरजेंसी की आहट है? क्या देश भारी आर्थिक संकट में फँस गया है? ऐसा तो देश में पहले कभी नहीं हुआ.''
''प्रधानमंत्री को देश के सामने सच्चाई स्पष्ट रूप से रखनी चाहिए कि आख़िर, देश की अर्थव्यवस्था की वास्तविक स्थिति क्या है?''
कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने कहा कि क्या सरकार कुछ छुपाने की कोशिश कर रही है?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद बाद सोमवार को जब भारतीय शेयर बाज़ार खुला तो उसमें भारी गिरावट दर्ज की गई.
बाज़ार खुलते ही प्रमुख ज्वैलरी कंपनियों के शेयरों में 10% से ज़्यादा की गिरावट देखी गई.
सेनको के शेयर 7.85% टूटकर बंद हुए, जबकि स्काई गोल्ड के शेयर्स में सबसे ज़्यादा 12% तक गिरावट आई थी हालांकि बाज़ार बंद होने तक उसमें 6.63% गिरावट दर्ज की गई.
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