तमिलनाडु: विजय की कैबिनेट में एकमात्र महिला मंत्री कीर्तना को जानिए, हिन्दी बोलने पर इनकी हुई थी ख़ूब चर्चा

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इमेज कैप्शन, तमिलनाडु में शपथ लेने वाले नौ मत्रियों में कीर्तना भी शामिल हैं
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तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) प्रमुख सी जोसेफ़ विजय ने रविवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. उनके साथ नौ अन्य मंत्रियों ने भी पद और गोपनीयता की शपथ ली है.

इन नौ मंत्रियों मेंसेल्वी एस. कीर्तना भी हैं, जो एकमात्र महिला हैं. 29 साल की सेल्वी एस. कीर्तना विजय मंत्रिमंडल में सबसे युवा हैं.

शपथ लेने के बाद कीर्तना ने कहा, "अब सब कुछ बदलने वाला है. बल्कि बदलाव आ चुका है. सी जोसेफ़ विजय मुख्यमंत्री बन चुके हैं . मैं एक मध्यमवर्गीय परिवार से से हूँ और मुझे कैबिनेट मंत्री बनने का मौक़ा मिला. मुझे नहीं लगता है कि दूसरे राज्यों में इतनी आसानी से ऐसा हो पाता.''

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कीर्तना ने कहा, "विजय लोगों की क्षमता और प्रतिभा को देखते हैं और हम सभी बदलाव लाने के लिए यहाँ हैं. यह सरकार 35 से 50 साल तक चलेगी. हम सबसे लंबे समय तक रहने वाली सरकार बनने जा रहे हैं."

कीर्तना के अलावा मंत्री बनने वालों में 'बुसी' एन आनंद, आधव अर्जुना, केजी अरुणराज, केए सेंगोट्टैयन, पी वेंकटरमणन, सीटीआर निर्मलकुमार, ए राजमोहन और टी. के. प्रभु हैं.

कौन हैं कीर्तना

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इमेज कैप्शन, कीर्तना ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 11 हज़ार से अधिक वोटों के अंतर से हराया था

सेल्वी एस. कीर्तना ने टीवीके के टिकट पर सिवाकासी से चुनाव लड़ा था.

चुनाव आयोग की वेबसाइट के अनुसार, उन्होंने 11,670 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की. उन्हें कुल 68,709 वोट मिले.

उन्होंने कांग्रेस के उम्मीदवार अशोकन जी को हराया, जिन्हें 57,039 वोट मिले.

एआईएडीएमके उम्मीदवार और पूर्व मंत्री राजेंद्र बालाजी 51 हजार 78 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे.

बीबीसी तमिल के अनुसार, 29 साल की कीर्तना ने एमएससी किया है. उन्होंने अपने चुनावी हलफ़नामे में बताया है कि वह पर्सनल कंसल्टेंट के तौर पर काम करती हैं.

चुनावी हलफ़नामे के मुताबिक़, उनकी कुल संपत्ति 22 लाख 57 हजार 710 रुपये है.

चुनाव जीतने के बाद एक इंटरव्यू में कीर्तना के हिंदी इस्तेमाल को लेकर सोशल मीडिया पर बड़ी बहस छिड़ गई थी.

बीबीसी सहयोगी पत्रकार इमरान क़ुरैशी के अनुसार, कीर्तना को क़रीब आधा दर्जन भाषाएं आती हैं और हिन्दी भी अच्छी बोल लेती हैं.

हिन्दी बोलने पर हुआ था विवाद

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चुनाव जीतने के बाद उन्होंने हिन्दी में बातचीत की थी. इस पर काफ़ी विवाद हुआ.

इसके जवाब में कीर्तना ने समाचार एजेंसी एएनआई से हिन्दी में कहा था, "मैं हिन्दी में बात कर रही हूं. मैं चाहती हूं कि मेरी पार्टी का प्रतिनिधित्व पूरे भारत में और दूसरे देशों तक पहुंचे. इसलिए मैं हिन्दी में बोल रही हूं. हर किसी को मेरे नेता के बारे में पता होना चाहिए."

"हर किसी को मेरी पार्टी के बारे में जानकारी होनी चाहिए. राजनीति ऐसी चीज़ नहीं है, जिससे डरना चाहिए. हर किसी को राजनीति में आना चाहिए. मैं सिर्फ़ एक उदाहरण हूं. मैं चाहती हूं कि सभी लोग आगे आएं और राजनीति से जुड़ें."

एनडीटीवी को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि वो पॉलिटिकल स्ट्रेटेजिस्ट रही हैं और वो राजनीति में बहुत पहले से आना चाहती थीं क्योंकि वो समझना चाहती हैं कि सिस्टम कैसे काम करता है, ब्यूरोक्रेसी कैसे काम करती हैं.

उन्होंने इस इंटरव्यू में बताया कि वो एक छोटे से ज़िले वृदनगर से आती हैं, सिवाकासी इसी ज़िले में आता है.

उन्होंने कहा, "मैंने तमिल मीडियम वाले सरकारी स्कूल से पढ़ाई की. आज जहां भी हूं मैं अपनी मेहनत से हूं."

वह तमिल, तेलुगू, हिंदी, अंग्रेज़ी अच्छी तरह जानती हैं.

हिन्दी बोलने के पीछे कीर्तना ने कारण बताया, "भाषा ज्ञान ने मुझे इतनी सारे अवसर दिए, कई राज्यों में काम करने का मौक़ा मिला. इसी तरह से मैंने भाषाएं सीखीं. मुझे भाषाएं सीखना पसंद है. लेकिन जब मीडिया के लोग आने लगे तो मुझे लगा कि टीवीके को राज्य के अन्य हिस्सों और अन्य राज्यों में भी फैलाना का अवसर है."

इसी इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि वो डीएमके और एआईएडीएमके के पॉलिटिकल कंसल्टेंट के रूप में भी काम किया है. टीवीके में राजनीतिक करियर शुरू करने के पीछे उन्होंने कारण बताया, "यहां पहुंच आसान है, भले मेरा बैकग्राउंड कुछ भी हो."

कीर्तना ने चंद्रबाबू नायडू के चुनावी कैंपेन में भी कंसल्टेंट की भूमिका निभाई है.

सिवाकासी बड़े पैमाने पर पटाखों के निर्माण के लिए जाना जाता है. इसे भारत का 'फ़ायर क्रैकर कैपिटल' भी कहा जाता है.

वहां अतीत में विस्फोट की भी कई घटनाएं हुई हैं. कीर्तना ने अपने चुनावी प्रचार अभियान के दौरान सिवाकासी के लिए एक अलग घोषणापत्र तैयार किया था.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

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