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इसराइल ने कहा- नेतन्याहू ने यूएई का गोपनीय दौरा किया था, यूएई ने किया ख़ारिज लेकिन उठे कई सवाल
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने इस बात से इनकार किया है कि इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने खाड़ी देश का दौरा किया था.
यह बयान उस समय आया जब इसराइल ने दावा किया था कि नेतन्याहू ने यूएई का "गोपनीय दौरा" किया था.
यूएई के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, "यूएई यह दोहराता है कि इसराइल के साथ उसके संबंध सार्वजनिक हैं और आधिकारिक रूप से घोषित अब्राहम अकॉर्ड के ढांचे के भीतर संचालित होते हैं. ये संबंध किसी ग़ैर-पारदर्शी या अनौपचारिक व्यवस्था पर आधारित नहीं हैं."
इससे पहले इसराइल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने दावा किया था कि यह नेतन्याहू की यूएई की पहली ज्ञात यात्रा थी और इससे "इसराइल और संयुक्त अरब अमीरात के संबंधों ने ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया है."
यूएई ने यह भी ख़ारिज किया कि उसने किसी इसराइली सैन्य प्रतिनिधिमंडल की मेज़बानी की है.
इसराइल के दावों को यूएई ने कुछ ही घंटों के भीतर ख़ारिज कर दिया.
इसराइली प्रधानमंत्री कार्यालय ने 13 मई की रात क़रीब 11 बजे एक्स पर कहा था कि फ़रवरी के अंत में युद्ध शुरू होने के बाद नेतन्याहू ने यूएई के राष्ट्रपति शेख़ मोहम्मद बिन ज़ायद से मुलाक़ात की थी.
इसराइल और यूएई ने क्या कहा?
इसराइली पीएमओ ने एक्स पर लिखा है, ''ऑपरेशन "रोरिंग लायन" के दौरान प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने संयुक्त अरब अमीरात का गोपनीय दौरा किया, जहाँ उन्होंने यूएई के राष्ट्रपति शेख़ मोहम्मद बिन ज़ायद से मुलाक़ात की. इस दौरे ने इसराइल और यूएई के संबंधों में एक ऐतिहासिक सफलता की राह खोल दी है.''
इसराइल के इस दावे के कुछ ही घंटों बाद यूएई के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा, ''यूएई इसराइली प्रधानमंत्री की यात्रा या किसी इसराइली सैन्य प्रतिनिधिमंडल की मेज़बानी करने संबंधी रिपोर्टों का खंडन करता है."
संयुक्त अरब अमीरात ने उन रिपोर्टों को खारिज करता है, जिनमें दावा किया गया था कि इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने यूएई का दौरा किया या देश ने किसी इसराइली सैन्य प्रतिनिधिमंडल की मेज़बानी की.
यूएई के विदेश मंत्रालय ने आगे लिखा, "इसराइल के साथ हमारे संबंध सार्वजनिक हैं और आधिकारिक रूप से घोषित अब्राहम अकॉर्ड के ढांचे के भीतर संचालित होते हैं. ये संबंध किसी ग़ैर-पारदर्शी या अनौपचारिक व्यवस्था पर आधारित नहीं हैं.
इसलिए, यूएई के संबंधित अधिकारियों की आधिकारिक घोषणा के बिना किसी भी अघोषित यात्रा या गुप्त व्यवस्था से जुड़े दावे पूरी तरह निराधार हैं.
हम संस्थानों से अपील करते हैं कि वे सटीकता और पेशेवर मानकों का पालन करें. अपुष्ट सूचनाएं फैलाने या भ्रामक राजनीतिक नैरेटिव को बढ़ावा देने से बचें.''
ईरान ने कहा माफ़ करने लायक नहीं
इसराइल के दावे पर ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराग़ची ने एक्स पर लिखा है, "नेतन्याहू ने अब सार्वजनिक रूप से वही कहा है, जो ईरान की सुरक्षा एजेंसियां काफ़ी पहले ही हमारे नेतृत्व को बता चुकी थीं.
ईरान की महान जनता से दुश्मनी मोल लेना एक मूर्खतापूर्ण दांव है. इसराइल के साथ मिलीभगत करना माफ़ी के लायक नहीं है. जो लोग इसराइल के साथ मिलकर बाँटने की कोशिश कर रहे हैं, उनसे हिसाब लिया जाएगा."
मध्य-पूर्व मामलों के विशेषज्ञ और अमेरिकी की जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी में प्रोफ़ेसर वली नस्र ने इसराइल के दावों पर कहा है, ''सवाल यह है कि जब यूएई स्पष्ट रूप से इस यात्रा को स्वीकार नहीं करना चाहता, तो इसराइल ने सार्वजनिक क्यों किया? रिश्ते को दिखाने से इसराइल को फ़ायदा हो सकता है, लेकिन क्या यह यूएई को मुश्किल में डालने की क़ीमत पर नहीं होगा?''
इराक़ और ईरान केंद्रित ख़बरों का विश्लेषण करने वाली वेबसाइट अमवाज मीडिया के संपादक मोहम्मद अली शबानी ने इसराइल के दावों पर लिखा है, ''हाल में इसराइल-यूएई सहयोग को लेकर सामने आईं कई चीज़ें, चाहे वह युद्ध से पहले, युद्ध के दौरान या उसके बाद के हों, ने इस बहस को और तेज़ कर दिया है कि ईरान ने जिन लक्ष्यों को चुना, क्या उन्हें वह उचित मानता था.''
''लेकिन उससे भी बड़ा सवाल यह है कि अब आगे क्या होने वाला है. अगर युद्ध फिर शुरू होता है, तो ऐसा लगता है कि माहौल पहले से इस तरह तैयार किया जा रहा है कि यूएई को उसमें एक केंद्रीय भूमिका निभाने वाले पक्ष के रूप में देखा जाए.''
यूएई और इसराइल ने 2020 में अमेरिकी समर्थन वाले अब्राहम अकॉर्ड पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन कई वर्षों तक दोनों देशों के संबंध तनावपूर्ण रहे.
नेतन्याहू के कार्यालय ने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह यात्रा कब हुई, वह किस तरह यूएई पहुंचे या उन्होंने अमीरात के नेता शेख़ मोहम्मद बिन ज़ायद के साथ किन मुद्दों पर चर्चा की.
पिछले हफ़्ते यह रिपोर्ट सामने आई थी कि इसराइल ने अपना आयरन डोम एयर डिफेंस सिस्टम संयुक्त अरब अमीरात में तैनात किया है.
इज़राइल में अमेरिकी राजदूत माइक हकबी ने मंगलवार को इस तैनाती की पुष्टि की थी.
तेल अवीव में एक सम्मेलन के दौरान हकबी ने कहा था, "क्या मैं संयुक्त अरब अमीरात के लिए सराहना, गहरी सराहना और प्रशंसा के कुछ शब्द कह सकता हूं? वे अब्राहम समझौते में शामिल होने वाले पहले सदस्य थे लेकिन देखिए उन्हें इससे कितने लाभ मिले हैं."
अब्राहम अकॉर्ड को इसराइल के लिए काफ़ी अहम माना जाता था, क्योंकि इसे मध्य-पूर्व में उसकी व्यापक स्वीकार्यता और एकीकरण की दिशा में बड़े क़दम के रूप में देखा गया था. लंबे समय तक अरब देशों ने इसराइल को अलग-थलग रखा था.
थिंक टैंक क्विंसी इंस्टीट्यूट के वाइस प्रेसिडेंट त्रिता पारसी को लगता है कि यूएई इसराइल के मामले में फँस चुका है.
उन्होंने एक्स पर लिखा है, ''संयुक्त अरब अमीरात ने अकॉर्ड में शामिल होकर एक बड़ी रणनीतिक ग़लती की थी. इस समझौते का मूल मक़सद ईरान के ख़िलाफ़ एक अरब-इसराइल गठबंधन बनाना था. इसराइल और अमेरिका के ईरान पर युद्ध के बाद यह बात अब पूरी तरह स्पष्ट हो गई है.
यूएई के लिए यह इसलिए भी बड़ी भूल थी, क्योंकि इससे अमीरात ख़ुद को इसराइल की ईरान-विरोधी नीति से जोड़ बैठा. जबकि हक़ीक़त यह है कि ईरान के साथ अमीरात का तनाव उतना गहरा नहीं था, जितनी इसराइल की दुश्मनी है. ख़ास बात यह भी है कि यूएई ईरान का पड़ोसी है, जबकि इसराइल ईरान से लगभग 1,000 किलोमीटर दूर है.
लेकिन अब अबू धाबी एक तरह से फँस चुका है. कुछ हद तक ऐसा भी लगता है कि ईरान युद्ध का मक़सद जीसीस देशों को सुरक्षा के नाम पर इसराइल के और करीब धकेलना था.
इसी संदर्भ में युद्ध के दौरान नेतन्याहू ने कथित तौर पर गुप्त रूप से अबू धाबी का दौरा किया और यूएई को आयरन डोम सुरक्षा देने की पेशकश की. इसराइल इसे दोनों देशों के संबंधों में बड़ी सफलता के रूप में देखता है.लेकिन वास्तव में यह उस ट्रैप की अभिव्यक्ति है, जिसमें अब्राहम अकॉर्ड ने अमीरात को ला खड़ा किया है.''
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.