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शैतान को कंकड़ मारने के वायरल वीडियो पर वसीम अकरम और उनके दोस्त ने क्या कहा?
- Author, रशीद शकूर
- पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, कराची से
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 6 मिनट
दुनिया भर के मुसलमान इस्लाम के पाँचवें बुनियादी स्तंभ, हज, की अदायगी के बाद अपने-अपने घरों को लौटना शुरू हो गए हैं. लेकिन इसी दौरान पाकिस्तान क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और 'सुल्तान ऑफ़ स्विंग' के नाम से मशहूर वसीम अकरम एक वायरल वीडियो की वजह से सबकी नज़र में आ गए और इस पर अंतहीन बहस भी छिड़ गई.
इस वीडियो में देखा जा सकता है कि वसीम अकरम मीना में शैतान को कंकड़ मार रहे हैं. यह हज का एक अहम रुक्न (अनिवार्य और बुनियादी हिस्सा) है जिसे 'रमी' कहा जाता है. लेकिन वसीम अकरम ने शैतान को कंकड़ मारने का जो तरीका अपनाया, वह साधारण नहीं था. उन्होंने यह काम अपने बोलिंग एक्शन के साथ किया.
याद रहे कि वसीम अकरम क्रिकेट इतिहास के सबसे सफल लेफ़्ट-आर्म फ़ास्ट बोलर के तौर पर जाने जाते हैं. लेकिन अपने बोलिंग एक्शन से कंकड़ मारने का उनका यह अंदाज़ चर्चा का विषय बन गया.
एक तरफ़ इसे दिलचस्प अंदाज़ कहा गया, तो दूसरी तरफ़ आलोचना हुई कि शैतान को कंकड़ मारने का यह अमल गंभीरता, गरिमापूर्ण अंदाज़ और सम्मान के साथ किया जाता है. इसलिए बोलिंग एक्शन में कंकड़ मारने की ज़रूरत नहीं थी.
इस बहस में जो प्रतिक्रियाएँ सामने आईं, उनमें कई लोगों ने कहा कि शैतान को कंकड़ मारते समय वसीम अकरम को अपना क्रिकेट का दौर याद आ गया होगा, जब वे बड़े-बड़े बल्लेबाज़ों को अपनी स्विंग बोलिंग से बेबस कर देते थे. और उन्होंने रमी के इस अमल में भी वही अंदाज़ अपना लिया.
सोशल मीडिया पर कुछ प्रतिक्रियाएँ इस तरह थीं कि हज मनोरंजन नहीं है, इसमें सम्मान का ख़्याल रखना चाहिए. वसीम अकरम के इस अमल का समर्थन करने वालों ने जवाब दिया कि कंकड़ मारने का जो मक़सद होता है, वसीम अकरम ने वह पूरा कर दिया. अल्लाह नीयतों का हाल जानता है.
पाकिस्तान उलेमा काउंसिल क्या कहती है?
पाकिस्तान उलेमा काउंसिल के चेयरमैन, आलिमा ताहिर अशरफ़ी इस बारे में कहते हैं, "वसीम अकरम की हज की तमाम इबादतों को छोड़कर हर कोई उनके बोलिंग एक्शन से शैतान को कंकड़ मारने पर टिप्पणी करना चाहता है, जैसे उन्होंने कोई बड़ा जुर्म कर लिया हो."
"इसमें कोई शक नहीं कि हज एक गंभीर अमल है और रमी के मौके पर भी गंभीरता रहनी चाहिए. लेकिन अगर किसी शख़्स ने कोई ऐसा काम किया है जो न तो मना है और न ही उससे कोई गुनाह साबित होता है, तो फिर इस तरह की टिप्पणियाँ कोई मायने नहीं रखतीं."
आलिमा अशरफ़ी का कहना है, "अगर कोई ग़लती भी की है, तब भी उसके सुधार का यह तरीका नहीं है जो कई लोगों ने अपनाया. अल्लाह सबको तौफ़ीक़ दे कि हम दूसरों की छोटी-छोटी ग़लतियों और कोताहियों को दरगुज़र करें."
इस वीडियो के बनने की कहानी
हज के इस सफ़र में वसीम अकरम के साथ पाकिस्तान क्रिकेट टीम के एक और पूर्व कप्तान मिस्बाह-उल-हक़ और मशहूर स्पोर्ट्स एंकर फ़ख़र आलम भी थे.
फ़ख़र आलम इस वीडियो के बारे में बीबीसी हिन्दी से बात करते हुए कहते हैं, "हम तीनों सुबह-सवेरे ही रमी के लिए पहुँच गए थे और उस वक़्त ज़्यादा भीड़ भी नहीं थी. हमने बड़े इत्मीनान और सुकून से शैतान को कंकड़ मारी. इस दौरान मुझे ख़याल आया कि लोगों ने आम तरीक़े से हटकर भी कंकड़ मारी है."
"मैंने ऐसी बहुत-सी वीडियो देखी हैं कि कोई फ़ायरिंग के अंदाज़ में कंकड़ मार रहा है, कोई दौड़कर आता है और कंकड़ मारता है. उस वक़्त हर मुसलमान का जोश और जज़्बा बहुत भरपूर होता है. मैंने वसीम अकरम से गुज़ारिश की कि आप अपने बोलिंग एक्शन से कंकड़ मारें ताकि मैं उसकी वीडियो बना सकूँ."
फ़ख़र आलम ने बताया, "वसीम अकरम ने पहले तो कहा कि अच्छा नहीं लगेगा, लोग क्या कहेंगे. लेकिन मैंने उनसे कहा कि इसका मक़सद किसी तरह की पब्लिसिटी नहीं है. चूँकि आपके बर्र-ए-सीग़र (उपमहाद्वीप) में बहुत-से क्रिकेट फ़ैन्स हैं, इसलिए उन्हें यह चीज़ अलग लगेगी और वे इससे ज़रूर प्रभावित होंगे. मुझे उन्हें क़ायल करना पड़ा, जिसके बाद मैंने यह वीडियो बना ली."
"इसे ज़्यादातर लोगों ने बहुत पसंद किया. कुछ हल्कों से आपत्तियाँ आईं तो मैं यही कहूँगा कि अल्लाह सबके दिल बड़े करे और उनमें रोशनी डाले. अल्लाह जानता है कि इंसान से ग़लती होती है और वह माफ़ करने वाला है. उसे अपने बंदे की नीयत का भी अच्छी तरह पता है और वही फ़ैसले करने वाली ज़ात है. ज़मीन पर कोई नहीं है जो फ़ैसले सुनाता फिरे. इस वीडियो के पीछे भी जो नीयत थी, उसे अल्लाह भली-भाँति जानता है. इस वीडियो का मक़सद यही था कि वसीम अकरम को इस अंदाज़ में देखकर बहुत-से लोग हज की तरफ़ रागिब होंगे."
हज का ख़याल कैसे आया?
वसीम अकरम कहते हैं, "तीन-चार साल से मेरे दोस्त उस्मान, जो इस हज में हमारे साथ थे, मुझे हज का कहते रहे. मैं उन्हें कहता था कि जब भी वक़्त आएगा, मैं ज़रूर करूँगा. तीन-चार महीने पहले मिस्बाह, फ़ख़र और मैंने फ़ैसला किया कि इस बार हज करना है. यह इरादा कर लिया कि अब मैं साठ साल का हो रहा हूँ, तो मुझे यह फ़र्ज़ अदा कर लेना चाहिए."
यह स्पष्ट रहे कि वसीम अकरम 3 जून को 60 साल के होने वाले हैं.
वसीम अकरम कहते हैं, "यह मेरे लिए एक ज़बरदस्त तजुर्बा रहा. हालाँकि कठिन था, लेकिन हज है ही कठिनाई सहने का नाम. दोस्तों के साथ हज का अपना अलग मज़ा है- आप एक-दूसरे से बहुत कुछ समझते और सीखते हैं."
वसीम अकरम ने हज का फ़र्ज़ पूरा करने के बाद अपने एक्स अकाउंट पर भी लिखा कि उनकी दुआ है कि उनके जैसे बहुत-से भाई-बहन भी इस रूहानी सफ़र का हौसला करें और हज की सआदत हासिल करें.
वसीम अकरम की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर बहुत वायरल हुई है, जिसमें वे मदीना में हज़रत मोहम्मद के रोज़ा-ए-मुबारक के सामने खड़े हैं और उनकी आँखों में आँसू हैं. इस तस्वीर पर हर किसी ने यही टिप्पणी की कि यह जगह ही ऐसी है कि कोई भी अपने जज़्बात पर क़ाबू नहीं रख सकता और आँखों में आँसू आ जाना फ़ितरी बात है.
स्पॉन्सर्ड हज नहीं था
वसीम अकरम, मिस्बाह-उल-हक़ और फ़ख़र आलम को इस हज के दौरान यह बातें भी सुनने को मिलीं कि उनका यह हज पेड या स्पॉन्सर्ड था.
इस पर फ़ख़र आलम ने अपनी एक वीडियो में सख़्ती से इसका खंडन किया और कहा, "अल्लाह के फ़ज़ल और करम से हम तीनों ने यह हज अपने ख़र्च पर किया. अल्लाह ने हमें बहुत कुछ दिया है, हमें किसी स्पॉन्सर की ज़रूरत क्यों होती."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.