You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
भारत में मीडिया और अल्पसंख्यकों पर डच पीएम की 'चिंता' का मोदी सरकार ने दिया ये जवाब
भारत ने नीदरलैंड्स के प्रधानमंत्री की उस कथित टिप्पणी को ख़ारिज किया है जिसमें भारत में प्रेस की आज़ादी में गिरावट और धार्मिक व अल्पसंख्यक अधिकारों के कमज़ोर होने का दावा किया गया था.
गौरतलब है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पांच देशों के मौजूदा दौरे के तहत नीदरलैंड्स पहुंचे थे, रविवार को वह स्वीडन गए जहां उन्हें 'रॉयल ऑर्डर ऑफ पोलर स्टार कमांडर ग्रैंड क्रॉस' के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित किया गया.
एक डच अख़बार डी फोल्क्सक्रांट के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शनिवार को नीदरलैंड्स पहुंचने से पहले डच प्रधानमंत्री ने कहा कि 'डच सरकार भारत में हो रहे घटनाक्रमों को लेकर चिंतित है और यह चिंता पूरे यूरोप में है.'
पीएम मोदी के नीदरलैंड्स दौरे को लेकर रविवार को भारत के विदेश मंत्रालय की ब्रीफ़िंग में जब नीदरलैंड्स के पीएम की इस टिप्पणी पर एक डच पत्रकार की ओर से सवाल किए गए तो भारत ने कहा कि ये दिखाता है कि भारत के बारे में लोगों में जानकारी की कमी है.
बीबीसी हिंदी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
भारतीय विदेश मंत्रालय की ब्रीफ़िंग में पीएम मोदी के नीदरलैंड्स दौरे के अंत में दोनों देश के प्रधानमंत्रियों की ओर से संयुक्त प्रेस कॉन्फ़्रेंस न किए जाने पर भी सवाल किए गए.
हालांकि दोनों देशों ने पीएम मोदी के दौरे को ऐतिहासिक बताया है. मोदी की यात्रा से कई ठोस नतीजे निकले. गुजरात में एक चिप मशीन फ़ैक्ट्री निर्माण में चिप बनाने वाली दुनिया की अग्रणी कंपनी एएसएमएल के साथ टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का समझौता हुआ.
इसके अलावा, लीडेन विश्वविद्यालय ने भारत सरकार को औपनिवेशिक ज़माने की विरासत लौटाने की घोषणा की, जिनमें चोल वंश के दौरान की तांबे की वस्तुएं हैं जिन्हें डच ईस्ट इंडिया कंपनी के समय में बिना अनुमति के नीदरलैंड्स ले जाया गया था.
भारत ने क्या कहा
भारत में अल्पसंख्यक समुदायों, ख़ासकर मुसलमानों के अधिकारों पर डच पीएम की चिंता को लेकर किए गए एक डच पत्रकार के सवाल के जवाब में भारत के विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सीबी जॉर्ज ने कहा, "हमें इस तरह के सवाल मूल रूप से इसलिए झेलने पड़ते हैं क्योंकि सवाल पूछने वाले व्यक्ति को जानकारी की कमी होती है."
जॉर्ज ने कहा कि भारत पांच हज़ार साल पुरानी सभ्यता वाला देश है और यहां सांस्कृतिक, धार्मिक और भाषाई विविधता मौजूद है.
उन्होंने कहा, "भारत 1.4 अरब लोगों का देश है, दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश है. यह विविधताओं वाला देश है. यहां संस्कृति की विविधता है, भाषाओं की विविधता है, खानपान की विविधता है, धर्मों की विविधता है."
"दुनिया में ऐसा कोई दूसरा देश नहीं है जहां चार धर्मों की उत्पत्ति हुई हो. हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म, जैन धर्म और सिख धर्म. इन धर्मों की उत्पत्ति भारत में हुई और ये आज भी भारत में फल-फूल रहे हैं."
उन्होंने कहा, "यहूदी धर्म भारत में 2500 साल से ज़्यादा समय तक रहा. लगातार सहअस्तित्व में रहा. भारत शायद उन बहुत कम देशों में से एक है जहां यहूदी समुदाय को कभी उत्पीड़न का सामना नहीं करना पड़ा."
"ईसाई धर्म यीशु मसीह के पुनर्जीवित होने के तुरंत बाद भारत आया और यहां फलता-फूलता रहा. इस्लाम पैगंबर मोहम्मद के समय में ही भारत आया और यहां विकसित हुआ."
सीबी जॉर्ज ने भारत को 'जीवंत लोकतंत्र' बताते हुए कहा, "हाल ही में हमारे यहां चुनाव हुए, जिसमें मतदान का स्तर 90 प्रतिशत था. यही भारत की ख़ूबसूरती है."
जॉर्ज ने कहा कि भारत ने लोकतांत्रिक सिद्धांतों से समझौता किए बिना आर्थिक सफलता हासिल की है, "हम दुनिया की कुल आबादी का छठा हिस्सा हैं, लेकिन दुनिया की समस्याओं का छठा हिस्सा नहीं हैं. यही भारत की ख़ूबसूरती है, जिस पर हमें गर्व है. इसलिए यहां हर अल्पसंख्यक समुदाय फलता फूलता है."
उन्होंने कहा, "जब हम आज़ाद हुए थे तब भारत में अल्पसंख्यक आबादी 11 प्रतिशत थी. अब यह 20 प्रतिशत से ज़्यादा है. ऐसा कौन सा देश है जहां अल्पसंख्यकों की आबादी बढ़ी हो? आपको भारत के अलावा कहीं नहीं मिलेगा."
उन्होंने कहा, "यही भारत की ख़ूबसूरती है. इसलिए मैं आपसे अनुरोध करूंगा कि भारत के बारे में और जानें ताकि आप भारत और उसकी प्रगति को बेहतर समझ सकें."
डच प्रधानमंत्री ने क्या कहा था
डच अख़बार डी फोल्क्सक्रांट के मुताबिक़, शनिवार को प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत करने से पहले डच पीएम जेटन ने कहा था कि डच सरकार को भी 'भारत में हो रहे घटनाक्रमों' को लेकर चिंता है.
पीएम जेटेन ने कहा, "यह सिर्फ प्रेस की स्वतंत्रता का मामला नहीं है, बल्कि अल्पसंख्यकों के अधिकारों का भी है, जो वहां गंभीर दबाव में हैं, ख़ास तौर से मुस्लिम समुदाय, लेकिन कई अन्य छोटे समुदायों पर भी यह लागू होता है."
उन्होंने कहा, "चिंता का विषय यह है कि क्या भारत अब भी एक समावेशी समाज बना हुआ है जहां सभी को समान अधिकार हासिल हैं?"
अख़बार के मुताबिक़ जेटेन ने कहा," भारतीय सरकार के समक्ष ये चिंताएं नियमित रूप से उठाई जाती हैं. मुझे यह भी लगता है कि यूरोपीय संघ और भारत के बीच मुक्त व्यापार समझौता इन दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करता है..."
उनके मुताबिक़ इससे भारत में मानवाधिकार और लोकतंत्र एवं क़ानून के शासन को मजबूत करने जैसे व्यापक विषयों पर चर्चा करने के मौक़े मिलते हैं.
भारत में प्रेस की आज़ादी की स्थिति
एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच (एचआरडब्ल्यू) जैसे मानवाधिकार संगठन मोदी सरकार पर नागरिक अधिकारों का हनन करने और एक्टिविस्टों और पत्रकारों के दमन का आरोप लगाते रहे हैं.
रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स की वैश्विक प्रेस स्वतंत्रता रैंकिंग में भारत लगातार नीचे फिसलता गया है.
इस रैंकिंग में भारत 180 देशों में से 157वें स्थान पर पहुंच गया है. 2025 में भारत 151वें नंबर पर था.
2026 में पड़ोसी देश पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल प्रेस की आज़ादी के मामले में भारत की तुलना में बेहतर स्थिति में हैं. हालांकि चीन 178वें नंबर पर है.
साल 2020 में भारत 142वें स्थान पर था.
पेरिस स्थित रिपोर्टर्स सैन्स फ्रन्टियर्स (आरएसएफ़) यानी रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स एक नॉन-प्रॉफ़िट संगठन है जो दुनियाभर के पत्रकारों और पत्रकारिता पर होने वाले हमलों को डॉक्यूमेंट करने और उनके ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने का काम करता है.
उधर, ह्यूमन राइट्स वॉच (एचआरडब्ल्यू) ने भी बीते कई सालों से अपनी रिपोर्टों में भारत में प्रेस की आज़ादी और अल्पसंख्यक अधिकारों को लेकर चिंता ज़ाहिर की है.
फ़रवरी 2026 की अपनी 'वर्ल्ड रिपोर्ट 2026' में एचआरडब्ल्यू ने कहा कि भारत में धार्मिक अल्पसंख्यक और आलोचकों को ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से निशाना बनाया जाता है.
526 पन्नों की अपनी इस रिपोर्ट में एचआरडब्ल्यू ने कहा, "भारतीय अधिकारियों को भेदभावपूर्ण नीतियों, नफ़रत फैलाने वाले भाषणों और मुसलमानों, ईसाइयों और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ गैरकानूनी कार्रवाई को उकसाने वाली गतिविधियों को ख़त्म करना चाहिए और पीड़ितों को इंसाफ़ दिलाना चाहिए."
इसमें सुझाव दिया गया, "भारतीय अधिकारियों को नागरिक समाज समूहों, भाजपा के राजनीतिक विरोधियों और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को परेशान करना और उन पर मुक़दमा चलाना बंद करना चाहिए और कार्यकर्ताओं और अन्य आलोचकों के ख़िलाफ़ सभी राजनीतिक रूप से प्रेरित आरोपों को तुरंत वापस लेना चाहिए."
पीएम मोदी ने स्वीडन में लोकतंत्र पर क्या कहा?
रविवार को स्वीडन पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी ने वहां सीईओ राउंड टेबल फ़ॉर इंडस्ट्रीज़ बैठक के दौरान दोनों देशों के साझा लोकतांत्रिक मूल्यों का ज़िक्र किया.
उन्होंने कहा, "भारत और स्वीडन लोकतंत्र, पारदर्शिता, इनोवेशन और स्थिरता जैसे साझा मूल्यों से जुड़े हुए हैं, जो एक महत्वाकांक्षी और भविष्य की ओर देखने वाली आर्थिक साझेदारी के लिए मज़बूत आधार तैयार करते हैं."
"आज भारत-स्वीडन साझेदारी सिर्फ़ आर्थिक संबंध नहीं है, बल्कि विचारों, तकनीक, इनोवेशन और साझा निर्माण की साझेदारी है. "
प्रधानमंत्री ने सुधारों, मज़बूत घरेलू मांग, डिज़िटल सार्वजनिक ढांचे, विनिर्माण विस्तार और नई पीढ़ी के बुनियादी ढांचे के विकास से प्रेरित भारत के तेज़ आर्थिक बदलाव को भी रेखांकित किया.
उन्होंने स्वीडिश कंपनियों को 'मेक इन इंडिया', राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन और राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन जैसी पहलों के तहत भारत में अपनी मौजूदगी बढ़ाने का न्योता दिया.
साथ ही क्लीन एनर्जी, रक्षा, सेमीकंडक्टर और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में बढ़ते अवसरों का लाभ उठाने के लिए भी कहा.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें एक्स, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)