झारखंड के सरना आदिवासी संघ से हुए नाराज़

सरना कोड के लिए संघ का विरोध
    • Author, रवि प्रकाश
    • पदनाम, रांची से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
  • प्रकाशित

आरएसएस के सरना कोड को ख़ारिज करने पर झारखंड के आदिवासी आंदोलन पर उतर आए हैं.

ग़ुस्साए आदिवासियों ने रांची में संघ प्रमुख डा मोहन भागवत और सह सरकार्यवाह डा कृष्णगोपाल के पुतले फूंके.

रांची में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की आखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक में सरना कोड को अलग धर्म मानने से इनकार किया गया था.

आरएसएस के सह सरकार्यवाह डा कृष्णगोपाल ने रांची में पत्रकारों से कहा था कि सरना कोई अलग धर्म नहीं है.

आदिवासियों की मांग है कि उनके लिए अलग से सरना धर्म कोड होना ही चाहिए.

सरना कोड के लिए संघ का विरोध

उन्होंने कहा था, "भारतीय संविधान के मुताबिक़ वैसे लोग जो मुस्लिम, ईसाई और पारसी धर्मो के तहत नहीं आते वे हिंदू धर्म कोड के अधीन हैं. ऐसे में अलग से सरना धर्मकोड की कोई ज़रुरत नहीं है. संघ उन्हें हिंदू मानता है. अब सरना आदिवासी यह तय कर लें कि उन पर कौन-सा क़ानून लागू होता है."

वहीं दूसरी ओर सरना धर्मगुरु बंधन तिग्गा ने आरोप लगाया कि संघ आदिवासियों का धर्मांतरण कराना चाहता है.

बंधन तिग्गा ने बीबीसी से बातचीत में कहा, ''आदिवासियों की संस्कृति अलग है. हम मूर्ति पूजा नहीं करते. प्रकृति के उपासक हैं. ऐसे में हम हिंदू कैसे हो सकते हैं. आरएसएस का बयान बेतुका है. हम इसकी निंदा करते हैं. आज़ादी के पहले जब सरना धर्मकोड लागू था, तो अब इसे लागू करने में क्या कठिनाई है. उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र और झारखंड में बैठी भाजपा सरकार हमारी संस्कृति और धर्म को भ्रष्ट करना चाहती है. हम इसका विरोध करेंगे.''

सरना कोड के लिए संघ का विरोध

आदिवासी सरना महासभा, आदिवासी जनपरिषद, आदिवासी छात्रसंघ, आदिवासी सेंगेल अभियान और झारखंड दिशोम पार्टी समेत कई संगठनों ने आरएसएस का विरोध किया है.

सैकड़ों आदिवासियों ने रांची के अल्बर्ट एक्का चौक पर संघ प्रमुख डा मोहन भागवत और डा कृष्णगोपाल के पुतले जलाए.

सरना कोड के लिए संघ का विरोध

इस ताज़ा विवाद से यहां सत्तासीन भारतीय जनता पार्टी बैकफुट पर है.

दरअसल, भाजपा को वोट देने वालों में सरना आदिवासी भी शामिल हैं, जो संघ के इस स्टैंड के विरोध करते हुए आंदोलन पर उतर आए हैं.

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