You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
ईरान में इंटरनेट पाबंदी की वजह से लाखों नौकरियां ख़त्म, इस हालात के लिए ज़िम्मेदार कौन?
- Author, बीबीसी मॉनिटरिंग
- पढ़ने का समय: 4 मिनट
अमेरिका और इसराइल के साथ जारी जंग के बाकी असर से अलग ईरान में इंटरनेट की पाबंदी से लाखों लोग प्रभावित हुए हैं.
ईरान में क़रीब एक करोड़ लोग अपने काम के लिए स्थिर इंटरनेट कनेक्टिविटी पर निर्भर हैं.
शुरुआती आकलनों के अनुसार इंटरनेट पर जारी पाबंदियों की वजह से अब तक 10 लाख से ज़्यादा नौकरियां जा चुकी हैं. कुछ स्वतंत्र अनुमानों में इसका असर इससे भी ज़्यादा होने की आशंका जताई गई है.
डिजिटल अर्थव्यवस्था को भारी नुक़सान होने के भी अनुमान जताए गए हैं. इसके साथ ही ढांचे और उद्योगों को भी व्यापक क्षति पहुंची है.
इधर देश में इंटरनेट पाबंदियों को लेकर ईरान सरकार के अंदर भी अंतर्विरोध नज़र आ रहे हैं.
बीबीसी हिंदी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
ईरान के वरिष्ठ मंत्रियों ने इंटरनेट पर पाबंदी की वजह से नागरिकों की नौकरियां जाने और इसके सामाजिक, आर्थिक असर को लेकर चेतावनी दी है.
इंटरनेट की एक्सेस के भेदभावपूर्ण होने को लेकर भी गंभीर आपत्ति जताई गई है लेकिन इसके साथ ही सरकार के ही वरिष्ठ अधिकारी यह भी दावा कर रहे हैं कि 'विशेष परिस्थितियों' की वजह से इंटरनेट बहाल नहीं किया जा सकता.
लोगों को इसकी वजह से सब्र रखने को भी कहा जा रहा है.
'भेदभावपूर्ण' व्यवस्था के ख़िलाफ़ चेतावनी
ईरानी अधिकारियों और मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिका और इसराइल के साथ युद्ध का आर्थिक असर गहराता जा रहा है.
इसका दबाव रोज़गार, डिजिटल अर्थव्यवस्था और अहम उद्योगों पर लगातार बढ़ रहा है.
ताज़ा चिंता देश‑भर में इंटरनेट की रुकावट को लेकर है, जो अब अपने 54वें दिन में प्रवेश कर चुकी है. वरिष्ठ अधिकारियों ने समान और निष्पक्ष पहुंच के महत्व पर ज़ोर दिया है.
ईरान के आधिकारिक सरकारी सूचना पोर्टल के अनुसार, प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद रज़ा आरिफ़ ने 22 अप्रैल को कहा कि इंटरनेट तक पहुंच को एक सार्वभौमिक अधिकार के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए.
उन्होंने किसी भी तरह की भेदभावपूर्ण या कई स्तरों वाली व्यवस्था के ख़िलाफ़ चेतावनी दी. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि युद्ध के दौरान शासन और सेवाओं की आपूर्ति के लिए स्थिर संचार बेहद ज़रूरी है.
अलग‑अलग आंकड़े बताते हैं कि इसका असर पहले ही श्रम बाज़ार में दिखने लगा है.
जामारान न्यूज़ वेबसाइट के अनुसार, उप श्रम मंत्री ग़ुलाम हुसैन मोहम्मदी ने कहा कि शुरुआती अनुमान यह बताते हैं कि युद्ध के कारण 10 लाख से ज़्यादा नौकरियां ख़त्म हो चुकी हैं, जबकि 20 लाख लोगों को सीधे या परोक्ष रूप से बेरोज़गारी का सामना करना पड़ रहा है.
40 लाख नौकरियां ख़त्म या प्रभावित
कुछ ईरानी मीडिया अनुमानों का कहना है कि आर्थिक नुक़सान का पैमाना इससे काफ़ी ज़्यादा हो सकता है.
संयत रुख वाली न्यूज़ वेबसाइट अस्र‑ए ईरान (Asr‑e Iran) ने एक अनौपचारिक अनुमान का हवाला दिया है, जिसके मुताबिक युद्ध और इंटरनेट बंदी के मिले-जुले संयुक्त असर से 40 लाख तक नौकरियां ख़त्म हो चुकी हैं या प्रभावित हुई हैं.
उसी रिपोर्ट में ढांचे और उद्योगों को बड़े पैमाने पर हुए नुक़सान के दावों का भी ज़िक़्र है, हालांकि यह नहीं बताया गया कि ऐसा किस कार्य-पद्धति के आधार पर कहा गया है.
ईरान की डिजिटल अर्थव्यवस्था को हुआ अनुमानित नुक़सान 2,150 ट्रिलियन रियाल (1.69 अरब डॉलर) तक पहुंच चुका है.
रोज़ाना होने वाले नुक़सान के आक़लन के अनुसार डिजिटल कोर को 5 ट्रिलियन रियाल (3.9 मिलियन डॉलर) का नुक़सान हुआ है और पूरी अर्थव्यवस्था को 50 ट्रिलियन रियाल (39.2 मिलियन डॉलर) का. बताया गया कि घरेलू प्लेटफ़ॉर्म मांग को संभाल नहीं पाए, जो क्षमता की गंभीर कमी की ओर इशारा करता है.
हालात के लिए कौन ज़िम्मेदार?
अधिकारियों ने इंटरनेट पाबंदियों को युद्धकाल की ज़रूरत बताकर सही ठहराने की कोशिश की है.
सरकार की सार्वजनिक संपर्क परिषद के प्रमुख एलियास हज़राती ने कहा कि संघर्ष ख़त्म होने के बाद ही इंटरनेट एक्सेस को पूरी तरह बहाल किया जाएगा. उन्होंने जनता से 'विशेष परिस्थितियों' की वजह से धैर्य रखने की अपील की.
21 अप्रैल को संचार मंत्री सत्तार हाशमी ने कहा कि स्थिर और उच्च‑गुणवत्ता वाला इंटरनेट एक्सेस एक 'सार्वजनिक अधिकार' है.
ख़बर ऑनलाइन न्यूज़ वेबसाइट के अनुसार, उन्होंने चेतावनी दी कि ये रुकावटें सिर्फ तकनीकी नहीं हैं, बल्कि कई सेक्टरों में फैली एक 'व्यवस्थागत' गड़बड़ी हैं.
हाशमी ने कहा कि करीब 1 करोड़ लोग, जिनमें ज़्यादातर मध्यम और निम्न आय वर्ग से हैं, अपने काम के लिए सीधे तौर पर भरोसेमंद डिजिटल कनेक्टिविटी पर निर्भर हैं.
उन्होंने चेतावनी दी कि लगातार बनी अस्थिरता उनकी नौकरियों के लिए सीधा ख़तरा है और इससे व्यापक सामाजिक व आर्थिक असर पड़ सकता है.
उन्होंने दूरसंचार सेक्टर पर पड़ रहे वित्तीय दबाव की ओर भी इशारा किया और कहा कि कुछ ऑपरेटरों की आमदनी घट रही है और उन्हें कर्मचारियों की तनख़्वाह देने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.