'तुम्हारी जाति के लोग घोड़े पर नहीं बैठ सकते': मध्य प्रदेश में दलित दूल्हे को पीटने का आरोप

    • Author, विष्णुकांत तिवारी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
  • पढ़ने का समय: 6 मिनट

मध्य प्रदेश के दमोह ज़िले के हटा थाना अंतर्गत बिजौरी पाठक गांव की एक गली में शादी की एक रस्म चल रही थी. दूल्हा गोलू अहिरवार घोड़ी पर बैठे थे, जिनके आगे बैंड बज रहा था और पीछे परिवार और रिश्तेदार ख़ुशी से नाच रहे थे.

लेकिन कुछ युवकों ने दूल्हे का रास्ता रोक लिया. पुलिस के मुताबिक, इसी दौरान गोलू और उनके परिवार के साथ हिंसा की गई.

गोलू अहिरवार ने फ़ोन पर बात करते हुए बीबीसी को बताया, "हमारे साथ गांव में वैसे भी भेदभाव होता ही है. उस दिन ज़्यादा हो गया. क्योंकि मैं दलित होकर भी घोड़े पर चढ़ा इसलिए गांव के उच्च जाति के लोगों को यह बात अच्छी नहीं लगी और उन्होंने हमारे साथ मारपीट की. वह कह रहे थे कि तुम्हारी जाति के लोग घोड़े पर नहीं बैठ सकते."

पुलिस के अनुसार चार अभियुक्तों में से तीन एक ही परिवार के हैं और चौथे एक अन्य ग्रामीण हैं. चारों लोग लोधी समुदाय से आते हैं.

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मारपीट करने का आरोप लोधी जाति के लोगों पर लगा है. लोधी समुदाय मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी श्रेणी में आता है, और राज्य में ओबीसी आबादी 50 प्रतिशत से अधिक होने के कारण कई इलाकों में इस समुदाय का प्रभाव भी है.

समाचार छापे जाने तक एक अभियुक्त की गिरफ़्तारी कर ली गई थी और पुलिस का दावा है कि बाकी को जल्द ही गिरफ़्तार कर लिया जाएगा.

अभियुक्तों के परिवार ने इन आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि ज़मीन के पुराने विवाद के कारण उन लोगों को फंसाया गया है.

गोलू अहिरवार के घोड़े पर बैठने से किसको थी दिक्कत?

गोलू के चाचा गरीबा अहिरवार की शिकायत पर घटना के बाद पुलिस ने एफ़आईआर दर्ज़ की. एफ़आईआर के मुताबिक, "गरीबा ने कहा कि उनके भतीजे गोलू के साथ गांव के कुछ दबंगों ने दलित होकर घोड़े पर बैठने के कारण मारपीट की."

एफ़आईआर के मुताबिक, "कुछ लोगों ने मिलकर मोटरसाइकिल से घोड़ी पर बैठे गोलू और पीछे चल रहे जुलूस को रोक कर हिंसा की थी."

"अभियुक्तों ने गोलू और परिवारवालों के बारे में जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए उसके घोड़े पर बैठने को लेकर आपत्ति जताई और मारपीट की."

23 वर्षीय गोलू अहिरवार जन्म से ही विकलांग हैं. वह बताते हैं कि उनके घर में उनके अलावा माता, पिता, एक भाई और एक बहन हैं.

गोलू मंगलवार 21 अप्रैल को अपनी शादी से पहले की 'रछवाई' रस्म निभा रहे थे. रछवाई बुंदेलखंड की एक परंपरा है, जिसमें दूल्हा शादी से पहले घोड़े पर सवार होकर पूरे गांव में निकलता है, जिसे बारात से पहले की रस्म माना जाता है.

गोलू अहिरवार ने बीबीसी से कहा, "मैं तो ख़ुश था बहुत. पूरा परिवार ख़ुश था. घर में एक लंबे अरसे के बाद शादी हो रही थी. लेकिन जो कहने के लिए उन लोगों को मेरा घोड़े पर बैठना उचित नहीं लगा. उन्होंने मुझे घोड़ी से नीचे खींच लिया और लाठियों से पीटा."

मंगलवार को हुई इस घटना का वीडियो बुधवार को सोशल मीडिया पर वायरल हुआ.

गोलू की मां विद्या अहिरवार कहती हैं, "मेरा बेटा विकलांग है, लेकिन उन्होंने कोई रहम नहीं किया. उसे घसीटकर पीटा. मेरी बेटी बचाने आई तो उसे भी मारा गया."

दूल्हे की बहन मनीषा अहिरवार बताती हैं, "उन्होंने पहले मोटरसाइकिल लगाकर रास्ता रोका. जब हमने हटाने को कहा तो वे हमला करने लगे. मेरे भाई को घोड़ी से उतार दिया और हमें पीटा. चार लोग थे. उन्होंने कहा कि दलित व्यक्ति घोड़ी पर चढ़कर इस गांव में नहीं घूमेगा. ऐसी बारात हमारे लिए नहीं होती."

परिवार का कहना है कि यह हमला अचानक नहीं था, बल्कि जातिगत पूर्वाग्रह से जुड़ा था. घटना के बाद परिवार और बारात में शामिल लोग हटा थाने पहुंचे और शिकायत दर्ज कराई.

पुलिस की मौजूदगी में हुई शादी, घर के बाहर पुलिस तैनात

गांव में पुलिस बल तैनात किया गया है और अभियुक्तों की तलाश की जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि शादी की बाकी रस्में पूरी कराने के लिए भी सुरक्षा दी गई है.

गोलू ने बीबीसी से कहा, "अगर उस दिन पुलिस टाइम पर नहीं आती तो न जाने क्या होता. मेरी शादी भी पुलिस की मौजूदगी में ही हुई है. और घर के बाहर भी पुलिस बल तैनात किया गया है."

दमोह पुलिस अधीक्षक श्रुतकीर्ति सोमवंशी ने बीबीसी को बताया, "हमने इस मामले में एससी-एसटी एक्ट और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है. एक व्यक्ति को गिरफ़्तार किया गया है. आरोपियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत कार्रवाई करने के लिए कलेक्टर को पत्र लिखा है."

वहीं अभियुक्त पक्ष ने इन सभी आरोपों को ग़लत बताया है. एफ़आईआर में नामजद अभियुक्त विश्वनाथ सिंह लोधी के भतीजे हेमराज ने बीबीसी से कहा, "हमारे चाचा लोगों पर गलत आरोप लगाए जा रहे हैं. हम लोगों का हरिजन लोगों से ज़मीन को लेकर पुराना विवाद है. इस बार हरिजन ज़्यादा संख्या में थे और उसी का फ़ायदा उठाते हुए उन्होंने हमारे चाचा लोगों को फंसा दिया है."

घोड़ी न चढ़ने देने और जातीय भेदभाव के आरोपों पर हेमराज ने कहा, "ये सब झूठ है. हम लोगों को फंसाया जा रहा है.".

इस बारे में पूछने पर हटा थाना प्रभारी सुधीर बैगी ने बीबीसी से कहा, "यह साफ़ तौर पर जातीय भेदभाव और हिंसा का मामला है. दूल्हा अपने शादी से पहले की रस्म निभा रहा था. गांव में कुछ उच्च जाति के लोगों ने इसी बात से नाराज़गी जताते हुए दूल्हे और उनके परिवार के सदस्यों के साथ मारपीट की है. हमारी टीमें अभियुक्तों को पकड़ने का प्रयास कर रही हैं. जल्द ही उनकी गिरफ़्तारी कर ली जाएगी."

हालांकि गोलू और उनका परिवार अब भी डरा हुआ है.

गोलू ने फ़ोन रखते हुए बीबीसी से कहा, "गांव की उस गली में, जहां उस दिन पहले बैंड बज रहा था वहीं हिंसा हुई, मारपीट की गई. सबके सामने हमें जातिसूचक गालियां दी गईं. हमें अब भी धमकाया जा रहा है कि पुलिस में रिपोर्ट करने का बदला हमसे लिए जाएगा."

मध्य प्रदेश में जातीय हिंसा की बढ़ती घटनाएं

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की सबसे ताज़ा रिपोर्ट साल 2023 तक के अपराधों की बात करती है. इस रिपोर्ट के मुताबिक़ मध्य प्रदेश साल 2021, 2022, और 2023 में लगातार देशभर में अनुसूचित जाति के ख़िलाफ़ हुए अपराधों में तीसरे पायदान पर रहा है. इससे ऊपर सिर्फ़ उत्तर प्रदेश और राजस्थान रहे हैं.

दमोह जो कि बुंदेलखंड के हिस्से में आता है वहां भी यह पहली घटना नहीं है. यह पहली बार नहीं है जब दलित दूल्हों को अपनी परंपराओं का पालन करने पर निशाना बनाया गया हो.

साल 2025 में मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके के टीकमगढ़ ज़िले के मोकहरा गांव में एक दलित दूल्हे जितेंद्र अहिरवार पर शादी की रस्म के दौरान घोड़ी पर चढ़ने को लेकर पत्थर फेंके गए थे.

इससे पहले दिसंबर 2024 में दमोह ज़िले के ही चौरई गांव में एक दलित दूल्हे को बग्घी में बैठाकर घुमाने पर विवाद हुआ था, जिसके बाद दबंगों ने बग्घी में तोड़फोड़ की, दूल्हे को पीटा और घोड़ा मालिक के साथ भी मारपीट की थी.

बुंदेलखंड के कई ग्रामीण इलाकों में आज भी दलित दूल्हों के घोड़ी पर चढ़ने को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं. स्थानीय स्तर पर पहले भी ऐसे मामले दर्ज किए गए हैं, जहां दूल्हों को घोड़ी से उतरने के लिए मजबूर किया गया.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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