कोहली चाहते हैं विवादित डीआरएस पर फ़ैसला

विराट कोहली
    • Author, आदेश कुमार गुप्त
    • पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
  • प्रकाशित

डीआरएस यानी डिसिज़न रिव्यू सिस्टम एक बार फिर चर्चा में आ गया है.

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) और भारत के पूर्व टेस्ट कप्तान महेंद्र सिंह धोनी हमेशा इसका विरोध करते रहे हैं.

भारत के कप्तान विराट कोहली ने कहा कि वह विवादित डीआरएस पर अपने साथी खिलाड़ियों से बातचीत के लिए तैयार हैं.

कोहली ने कहा कि वह अपने गेंदबाज़ों और बल्लेबाज़ों से बात करेंगे क्योंकि बांग्लादेश से टेस्ट मैच के बाद अब काफ़ी समय है.

महेंद्र सिंह धोनी और विराट कोहली

घरेलू क्रिकेट में अम्पायरिंग कर चुके पूर्व स्पिनर मनिंदर सिंह कहते है कि कोहली सकारात्मक सोच वाले खिलाड़ी है.

उनकी यही सकारात्मकता उन्हें यह कहने के लिए मजबूर कर रही है कि जब सारी दुनिया डीआरएस मान रही है तो भारत क्यों नहीं मान रहा.

परेशानी

आख़िर बीसीसीआई को इसमें क्या परेशानी है?

मनिंदर कहते है, "परेशानी बोर्ड को नहीं थी, परेशानी धोनी को थी क्योंकि उन्हें मालूम नहीं था कि इसका इस्तेमाल कैसे किया जाए. बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष एन श्रीनिवासन का उन्हें पूरा समर्थन था लेकिन अब सत्ता बदल गई है.

"लगता है कि अब कोहली जो सकारात्मक बात कर रहे हैं कहीं ना कहीं बोर्ड का भी इशारा है कि जब बाक़ी देश डीआरएस अपना रहे हैं तो हम भी अपनाएंगे."

क्रिकेट समीक्षक विजय लोकपल्ली कहते हैं कि कोहली ने निश्चित रूप से एक सकारात्मक बात की है.

उन्होंने कहा, "इससे पहले भारत के सीनियर खिलाड़ियों को लगता था कि यह प्रणाली पूरी तरह सही नहीं है और मेरा भी ऐसा ही मानना है."

लोकपल्ली कहते है कि बीसीसीआई को किसी मोड़ पर आकर इसे मानना पड़ेगा. लगभग हर देश डीआरएस के साथ है और भारत को भी ऐसा करना पड़ेगा.

ग़लत निर्णय

वैसे भी कोहली भविष्य की सोचते हैं और वह ऐसा इसलिए भी कह रहे हैं क्योंकि कई बार निर्णायक मोड़ पर ग़लत निर्णयों की वजह से मैच भारत के हाथ से निकल गए.

लोकपल्ली कहते है कि एलबीडब्ल्यू में डीआरएस हमेशा सही नहीं होता क्योंकि गेंद पिच होने के बाद कितनी ऊंचाई तक जाएगी इसका फ़ैसला नहीं हो सकता, लेकिन अगर गेंद ने बल्ले का बाहरी किनारा लिया है लेकिन अम्पायर को इसका पता नहीं चला और विकेटकीपर को पता है तो फिर डीआरएस लिया जा सकता है.

धोनी और कोहली

कई मौक़ों पर बेहद नज़दीकी मामलों में अम्पायर भी बार-बार एक्शन रिप्ले देखने के बाद भी निर्णय नहीं ले पाते.

जब खिलाड़ी बैकफुट पर खेलते हैं तो अम्पायर को लगता है कि गेंद विकेट पर नहीं लगेगी लेकिन डीआरएस दिखाता है कि गेंद विकेट पर लगेगी.

खिलाड़ी कहते हैं कि एक निर्णय से उनका करियर तबाह हो सकता है लेकिन ऐसा तो पहले भी होता था जब ग़लत निर्णय दिए जाते थे.

निर्णय कई बार खिलाड़ी के पक्ष में जाता है कई बार विरोध में.

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