आप 35 पार हैं! दिल में दर्द भी होता है?

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अधेड़ उम्र में अगर कॉलस्ट्रॉल का स्तर थोड़ा सा भी बढ़ जाए तो ये 'दिल के लिए ख़तरनाक' है.

एक शोध से पता चला है कि 35 साल से 55 साल की उम्र के लोगों में हर दशक के बाद कॉलस्ट्रॉल का स्तर थोड़ा सा बढ़ जाता है. अध्ययन के मुताबिक इससे दिल की बीमारी की संभावना 40 फ़ीसदी तक बढ़ जाती है.

शोधकर्ताओं का कहना है कि कॉलस्ट्रॉल की जांच न कराना कोई बुद्धिमानी का काम नहीं है. अध्ययन दल ने इस शोध में तकरीबन डेढ़ हज़ार लोगों पर नज़र रखी थी.

उन्होंने कहा, "चर्बी या वसा ख़तरे की घंटी बजा देते हैं."

बीमारी की नींव

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विज्ञान पत्रिका 'सर्कुलेशन' में छपने वाले शोध पत्र के प्रमुख लेखक डॉक्टर एन मेरी नवार बोगन कहती हैं कि जरूरी नहीं है कि कॉलस्ट्रॉल के थोड़ा सा भी बढ़ने पर दवा से ही इलाज कराया जाए. लोग अपनी खान-पान की आदतें बदलकर और अधिक अभ्यास करके भी फ़ायदा उठा सकते हैं.

रक्त वाहिका

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बोगन कहती हैं, "बीस, तीस और चालीस के दशक में इन बीमारियों की शुरुआत हो जाती है और अगर हम दिल के रोगों से बचाव के लिए 50 या 60 की उम्र तक इंतजार करेंगे तो तब तक हम एक महत्वपूर्ण अवसर गंवा चुके होंगे."

खून में कॉलस्ट्रॉल के बढ़ जाने से आहिस्ता-आहिस्ता रक्त वाहिकाओं की दीवारों पर वसा की एक परत बनने लगती है और इससे दिल, दिमाग और शरीर को मिलने वाली खून की आपूर्ति पर असर पड़ता है.

समय के साथ-साथ रक्त वाहिकाएं इस कदर बीमार हो जाती हैं कि दिल में दर्द या फिर दिल का दौरा पड़ने की समस्या का सामना पड़ता है.

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