धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े और प्रदर्शन पर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में क्या कहा जा रहा है?

इमेज स्रोत, Reuters
भारत के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने क़रीब एक सप्ताह तक चले देशव्यापी प्रदर्शनों के बाद इस्तीफ़ा दे दिया. इसे एक नए युवा आंदोलन की बड़ी जीत माना जा रहा है.
यह प्रदर्शन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के सामने अब तक की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक था.
अब शिक्षा मंत्रालय का प्रभार बीजेपी के वरिष्ठ नेता प्रल्हाद जोशी को दिया गया है जो पहले से दो मंत्रालयों का कार्यभार संभाल रहे हैं.
शनिवार को शिक्षा मंत्री के इस्तीफ़े के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा, "धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफ़ा दे दिया है. यह इस बात का सबूत है कि अगर आप डरते नहीं हैं, अगर आप इस सरकार के सामने झुकते नहीं हैं, तो आप किसी से भी इस्तीफ़ा दिलवा सकते हैं. लोकतंत्र में डरने की ज़रूरत नहीं है."
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े को दूसरे देशों की मीडिया ने भी प्रमुखता से प्रकाशित किया है. पश्चिम के कुछ मीडिया संस्थान शुरुआत से ही इस आंदोलन को 'जेन ज़ी का प्रदर्शन' बताते रहे हैं.
दरअसल, कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की शुरुआत एक ऑनलाइन व्यंग्यात्मक आंदोलन के रूप में हुई थी.
यह ऑनलाइन आंदोलन भारत के चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत की उस टिप्पणी के विरोध में शुरू हुआ था, जिसमें उन्होंने कुछ 'फ़ेक डिग्री वाले युवाओं' की तुलना कॉकरोच से की थी.
कुछ ही समय में सीजेपी को बड़ी संख्या में लोगों का समर्थन मिलने लगा और इंस्टाग्राम, एक्स और फ़ेसबुक पर इसके फ़ॉलोअर्स लाखों में पहुंच गए.
गल्फ़ न्यूज़, पाकिस्तान और बांग्लादेश के अख़बारों में भी इस आंदोलन को प्रमुखता से जगह मिली. पश्चिमी मीडिया के कुछ संस्थानों ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफ़े को 'युवा प्रदर्शनकारियों की बड़ी जीत' बताया.
पाकिस्तान के अख़बार 'डॉन' ने अपनी ख़बर का शीर्षक दिया, "कॉकरोच जीत गए: भारत के शिक्षा मंत्री ने कई दिनों तक चले युवा प्रदर्शनों के बाद इस्तीफ़ा दिया."
अख़बार ने जंतर-मंतर पर जश्न के माहौल की तस्वीरों की एक गैलरी भी प्रकाशित की है.

इमेज स्रोत, Reuters
'युवा प्रदर्शनकारियों की बड़ी जीत'
अमेरिकी मीडिया संस्थान सीएनएन ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफ़े को युवा प्रदर्शनकारियों की बड़ी जीत बताया.
सीएनएन ने लिखा, "धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा सरकार के लिए एक दुर्लभ राजनीतिक झटका है. तीसरे कार्यकाल के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आमतौर पर विरोध प्रदर्शनों के दबाव में फ़ैसले बदलने के लिए नहीं जाने जाते. आलोचक लंबे समय से उनकी सरकार पर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में असहमति और विपक्ष की आवाज़ दबाने का आरोप लगाते रहे हैं."
"कई सप्ताह तक प्रदर्शनकारी नई दिल्ली के बीचों-बीच डेरा डाले रहे और उन आरोपों पर जवाबदेही की मांग करते रहे कि भारत के प्रतिष्ठित और बेहद प्रतिस्पर्धी मेडिकल कॉलेजों की प्रवेश परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक कर बेचे गए, जिसके कारण लाखों छात्रों को दोबारा परीक्षा देनी पड़ी. "
"हालांकि नरेंद्र मोदी ने 2024 में तीसरी बार सत्ता हासिल की, लेकिन उनकी पार्टी का बहुमत कम हो गया और पहली बार सरकार को संसद में सहयोगी दलों के समर्थन पर निर्भर रहना पड़ा."
फ़्रांस 24 ने सीजेपी के आंदोलन को 2024 में दोबारा चुने जाने के बाद हिंदू राष्ट्रवादी मोदी प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया.
फ़्रांस 24 ने लिखा, "भारत के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को इस्तीफ़ा दे दिया. युवा नेतृत्व वाले बड़े प्रदर्शनों में परीक्षा से जुड़ी कई अनियमितताओं को लेकर उन्हें पद से हटाने की मांग की जा रही थी."
"यह आंदोलन अब सिर्फ़ परीक्षा अनियमितताओं तक सीमित नहीं रहा. इसमें बेरोज़गारी, युवाओं के अवसरों की कमी और आलोचकों के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की लगातार अधिक केंद्रीकृत और सत्तावादी होती शैली को लेकर भी सवाल शामिल हो गए."
"भारत के विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े को 'बहुत बड़ा क़दम' बताया. राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी से माफ़ी मांगने और छात्रों तथा भारत की आने वाली पीढ़ियों का सम्मान करने की अपील भी की."
"यह प्रदर्शन 2024 में दोबारा चुने जाने के बाद हिंदू राष्ट्रवादी मोदी सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन गया."
चीन के 'साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट' ने भी शिक्षा मंत्री के इस्तीफ़े को युवा प्रदर्शनकारियों की बड़ी जीत बताया.
पोर्टल ने लिखा, "हाल के वर्षों में भारत के सबसे बड़े सड़क प्रदर्शन एक बड़े राजनीतिक मुद्दे में बदल गए हैं और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक खड़ी कर दी है. राजनीतिक दलों ने भी युवाओं की कार्रवाई की मांग का समर्थन किया."
"युवा प्रदर्शनकारियों के भारी दबाव के बाद शनिवार को भारत के शिक्षा मंत्री ने इस्तीफ़ा दे दिया. परीक्षा प्रश्नपत्र लीक होने पर ग़ुस्सा पहले से मौजूद रोज़गार और सरकारी नीतियों को लेकर असंतोष के साथ जुड़ गया."
"2014 में नरेंद्र मोदी के पहली बार प्रधानमंत्री बनने के बाद से धर्मेंद्र प्रधान केंद्रीय मंत्री रहे हैं. उन्होंने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, इस्पात, कौशल विकास और शिक्षा मंत्रालयों की ज़िम्मेदारी संभाली. वह 2021 में शिक्षा मंत्री बने."
"मोदी सरकार में मंत्रियों के इस्तीफ़े बहुत कम हुए हैं. 2014 के बाद किसी विवाद के कारण इस्तीफ़ा देने वाले धर्मेंद्र प्रधान दूसरे मंत्री हैं. इससे पहले अक्तूबर 2018 में एमजे अकबर ने भारत के #MeToo आंदोलन के दौरान कई महिलाओं की ओर से लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद विदेश राज्य मंत्री पद से इस्तीफ़ा दिया था."
मध्य पूर्व के मीडिया में क्या छपा

इमेज स्रोत, Reuters
क़तर के मीडिया संस्थान अल जज़ीरा ने भी सीजेपी के आंदोलन और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े को प्रमुखता से प्रकाशित किया और इस विषय पर कई रिपोर्टें जारी कीं.
अल जज़ीरा की एक वीडियो रिपोर्ट में कहा गया, "कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में 36 दिनों तक लगातार चले युवा प्रदर्शनों के बाद भारत के शिक्षा मंत्री ने इस्तीफ़ा दे दिया. व्यंग्य के रूप में शुरू हुआ यह आंदोलन परीक्षा प्रश्नपत्र घोटालों के बाद देशव्यापी विरोध प्रदर्शन में बदल गया."
अल जज़ीरा की एक अन्य रिपोर्ट में लिखा गया, "नरेंद्र मोदी ने अपनी राजनीतिक पहचान सोशल मीडिया के ज़रिए बनाई थी. अब प्रदर्शनकारी उसी मंच का इस्तेमाल उनकी सरकार का मज़ाक उड़ाने के लिए कर रहे हैं.
"भारत के युवा प्रदर्शनकारी अपनी सरकार का मज़ाक उड़ा रहे हैं और उनके व्यंग्य असर भी दिखा रहे हैं. जहाँ हज़ारों प्रदर्शनकारी राजधानी की सड़कों पर उतरे, वहीं समानांतर रूप से सोशल मीडिया पर मीम, पैरोडी वीडियो और ख़ुद पर व्यंग्य करने वाले पोस्ट साझा कर रहे हैं."
"ऐसा करते हुए वे शक्तिशाली लेकिन अपनी सार्वजनिक छवि को लेकर बेहद सजग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उसी मैदान में चुनौती दे रहे हैं, जहाँ उन्होंने अपनी पहचान बनाई थी. 'कॉकरोच' आंदोलन का डिजिटल अभियान बड़े पैमाने पर हास्य पर आधारित रहा."
'झड़पें बन गईं वायरल कंटेंट'

इमेज स्रोत, AFP via Getty Images
अल जज़ीरा ने लिखा, "पुलिस के साथ झड़पों के वीडियो वायरल सामग्री बन गए. कुछ वीडियो में प्रदर्शनकारी पुलिस के लाठीचार्ज से भागते हुए मज़ाक में कहते दिखे कि वे अपनी फ़िटनेस ऐप स्ट्रावा की स्ट्रीक बचा रहे हैं. कुछ लोगों ने पुलिस बैरिकेड्स पार करते हुए अपने वीडियो को लोकप्रिय मोबाइल गेम 'सबवे सर्फ़र्स' की तरह संपादित किया."
"कुछ महिलाओं ने इन्फ़्लुएंसर संस्कृति का इस्तेमाल करते हुए मार्च से पहले 'गेट रेडी विद मी' वीडियो और हेलमेट, गॉगल्स व घर में बनाए गए सुरक्षा उपकरणों के साथ 'फ़िट चेक' पोस्ट साझा किए."
"दूसरे प्रदर्शनकारियों ने सरकार समर्थक टीवी एंकरों की शैली की पैरोडी करते हुए वीडियो बनाए, जिनमें प्रदर्शनकारियों को 'राष्ट्र-विरोधी' और 'विदेशी फंडिंग वाले साज़िशकर्ता' बताया गया था."
अरब के एक अन्य मीडिया संस्थान अल अरबिया ने लिखा, "शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा, जो छात्रों की सबसे प्रमुख मांग थी, इसलिए चौंकाने वाला था क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी की छवि दबाव में फ़ैसले न लेने वाले नेता की रही है."
"उनके इस्तीफ़े की ख़बर आने के बाद केंद्र सरकार ने प्रदर्शन स्थल के आसपास मोबाइल इंटरनेट सेवाएँ बहाल कर दीं, जिन्हें सप्ताह के अधिकांश समय तक बंद रखा गया था."
"अगले साल मोदी की पार्टी को कई राज्यों के विधानसभा चुनावों का सामना करना है. हालिया सालों में श्रीलंका, नेपाल और बांग्लादेश में इसी तरह के युवा आंदोलनों ने सरकारों को सत्ता से बाहर कर दिया था."
अमित शाह ने किया धर्मेंद्र का बचाव

इमेज स्रोत, AFP via Getty Images
जर्मन मीडिया संस्थान डॉयचे वेले (डीडब्ल्यू) ने लिखा, "भारत के शिक्षा मंत्री के युवा प्रदर्शनों के बीच इस्तीफ़ा देने के कुछ घंटों बाद भारत के गृह मंत्री उनके समर्थन में सामने आए. वहीं, कॉकरोच पार्टी के नेता ने पूरे भारत के 'कॉकरोचों' का धन्यवाद किया."
डीडब्ल्यू ने लिखा, "2021 के किसान आंदोलन के बाद ये प्रदर्शन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के सामने सबसे महत्वपूर्ण चुनौतियों में से एक रहे हैं."
"भारत के गृह मंत्री अमित शाह ने देशव्यापी युवा प्रदर्शनों के दबाव में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़ा देने के कुछ घंटे बाद सोशल मीडिया पर उनका बचाव किया."
अमित शाह ने एक्स पर लिखा, "भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए देश, हमारे युवा और छात्र किसी भी पद से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं. आज केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान जी का अपने पद से इस्तीफ़ा इसी सिद्धांत का उदाहरण है."
उन्होंने शिक्षा मंत्री के रूप में धर्मेंद्र प्रधान के सुधारों का ज़िक्र करते हुए कहा, "परीक्षा व्यवस्था को अधिक समावेशी और छात्र-केंद्रित बनाने की दिशा में उनके प्रयास उल्लेखनीय रहे हैं. उनका कार्यकाल विकसित भारत के संकल्प के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रमाण है."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
BBC World Service के नए ऐप को डाउनलोड करें
BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट... सब एक जगह
कृपया नोट करें: नया ऐप ब्रिटेन और अमेरिका में उपलब्ध नहीं है.






















