एससीओ बैठक - इस्लामाबाद में भारत की भागीदारी क्यों अहम है?
भारत-पाकिस्तान के बीच जारी तनाव के बावजूद शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के राष्ट्रीय समन्वयकों की इस्लामाबाद में चल रही बैठक में भारत समेत संगठन के सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं.
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एससीओ बैठक - इस्लामाबाद में भारत की भागीदारी क्यों अहम है?, शकील अख़्तर, बीबीसी उर्दू
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इमेज कैप्शन, भारत ने एससीओ के समन्वयकों की बैठक में हिस्सा लेने के लिए एक प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद भेजा है.
भारत-पाकिस्तान के बीच जारी तनाव के बावजूद शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के राष्ट्रीय समन्वयकों की इस्लामाबाद में चल रही बैठक में भारत समेत संगठन के सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं.
भारत ने एससीओ के समन्वयकों की बैठक में हिस्सा लेने के लिए एक प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद भेजा है.
इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी आलोक डिमरी कर रहे हैं.
आलोक डिमरी विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव हैं. वह एससीओ के लिए भारत के समन्वयक भी हैं. भारत और पाकिस्तान के बीच लगभग एक दशक से द्विपक्षीय वार्ता नहीं हुई है.
दोनों देशों के बीच आख़िरी बार दिसंबर 2015 में बातचीत हुई थी. उस समय भारत की तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज "व्यापक द्विपक्षीय वार्ता" प्रक्रिया को फिर से शुरू करने के अनुरोध के साथ इस्लामाबाद गई थीं.
हालांकि जनवरी 2016 में पठानकोट हमले के बाद यह प्रक्रिया फिर से ठप पड़ गई थी.
भारत सरकार का रुख़ रहा है कि पाकिस्तान के साथ बातचीत तभी संभव है जब "माहौल पूरी तरह चरमपंथ से मुक्त हो".
हालांकि भारत एससीओ जैसे बहुपक्षीय मंचों पर पाकिस्तान के साथ भागीदारी के लिए तैयार है.
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अगले साल एसईओ शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता करेगा पाकिस्तान
यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब पाकिस्तान ने इसी महीने 2026-27 के लिए एससीओ की अध्यक्षता संभाली है. इसके साथ ही अगस्त 2027 में संगठन के राष्ट्राध्यक्षों के शिखर सम्मेलन की मेज़बानी भी इस्लामाबाद को करनी है.
28 सितंबर से शुरू हुई इस तीन दिवसीय बैठक का समापन 30 सितंबर को होना है. पाकिस्तान की अध्यक्षता के दौरान एससीओ की गतिविधियों के कार्यक्रम पर विचार किया जा रहा है. इसके अलावा आने वाली बैठकों, महत्वपूर्ण आयोजनों की तैयारियों और संगठन के एजेंडे से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी चर्चा हो रही है.
इस बैठक में भारत की भागीदारी इसलिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि यह दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में तनाव के माहौल के बीच हो रही है.
इस्लामाबाद में हो रही यह बैठक अगले साल होने वाले एससीओ शिखर सम्मेलन की तैयारियों की प्रक्रिया का शुरुआती चरण भी है.
पाकिस्तान ने कहा है कि अगस्त 2027 में होने वाले शिखर सम्मेलन में एससीओ के सभी सदस्य देशों के नेताओं को आमंत्रित किया जाएगा यानी यह निमंत्रण भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी जाएगा.
उमर अब्दुल्लाह ने कहा, 'ज्ञानेश कुमार ने बीजेपी के लिए इतना किया, उन्हें तो भारत रत्न मिलना चाहिए'
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जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तंज़ कसते हुए कहा कि उन्हें तो भारत रत्न मिलना चाहिए और आने वाले समय में उन्हें भारत का राष्ट्रपति बना देना चाहिए.
जब उनसे चुनाव आयोग के कामकाज पर उठ रहे सवालों के बारे में पूछा गया तो उमर अब्दुल्लाह ने पहले कहा, ''इलेक्शन कमीशन को थोड़ी अपनी आत्मा टटोलनी चाहिए. यूं ही नहीं सारी विपक्षी पार्टियां उसके ख़िलाफ़ हैं. सबूत किसी पॉलिटिकल पार्टी ने सामने नहीं रखे. सबूत एक अख़बार की इन्वेस्टिगेशन के ज़रिए सामने आया है. बजाय इसके कि इसको छिपाने की कोशिश हो, मुझे लगता है कि चुनाव आयोग को अपने कामकाज में सुधार लाना चाहिए. कोशिश करनी चाहिए कि इस तरह की हरकतें न हों.”
हाल ही में 'इंडियन एक्सप्रेस' अख़बार की एक खोजी रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधु और विवेक जोशी की असहमति के बावजूद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में चुनाव आयोग ने कई फ़ैसलों को अमल में ला दिया.
जब उनसे पश्चिम बंगाल बीजेपी प्रमुख समिक भट्टाचार्य के उस बयान के बारे में पूछा गया, जिसमें उन्होंने ज्ञानेश कुमार को 'पद्म भूषण' दिए जाने की मांग की थी, तो उमर अब्दुल्लाह ने कहा, ''पद्म भूषण पर ही क्यों रुकें. आप उनको भारत रत्न दे दो. इसके बाद उन्हें राष्ट्रपति बना दो. उन्होंने इतना कुछ बीजेपी के लिए किया है. पश्चिम बंगाल दिया है तोहफ़े में.''
पीएम मोदी की शैक्षिक डिग्री से जुड़ी अपीलों की सुनवाई टली
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इमेज कैप्शन, पीएम नरेंद्र मोदी (फ़ाइल फ़ोटो)
दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री से जुड़ी जानकारी मांगे जाने वाली अपीलों पर सुनवाई दिसंबर तक टाल दी है.
कानूनी मामलों की समाचार वेबसाइट बार एंड बेंच के मुताबिक़, ये मामले मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की बेंच के लिए सूचीबद्ध थे. हालांकि इन पर सुनवाई नहीं हो सकी.
दूसरी ओर,गुजरात हाई कोर्ट ने मंगलवार को प्रधानमंत्री मोदी की शैक्षिक डिग्री से जुड़ी एक अपील ख़ारिज़ कर दी है.
कानूनी मामलों की वेबसाइट लाइव लॉ के मुताबिक़, आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल की उस अपील को ख़ारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने उस आदेश को चुनौती दी थी जिसने गुजरात यूनिवर्सिटी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एकेडमिक डिग्री के बारे में बताने के निर्देश को रद्द कर दिया था.
गुजरात हाई कोर्ट की चीफ़ जस्टिस सुनीता अग्रवाल और जस्टिस डीएन रे की डिवीजन बेंच ने सिंगल जज के आदेश को बरकरार रखा.
बेंच को सेंट्रल इंफ़ॉर्मेशन कमीशन के 2016 के निर्देश को रद्द करने और केजरीवाल पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाने के फ़ैसले में दख़ल देने का कोई आधार नहीं मिला.
इंडिया गठबंधन की बैठक के लिए दिल्ली पहुंचीं ममता बनर्जी ने क्या कहा
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इमेज कैप्शन, ममता बनर्जी (फ़ाइल फ़ोटो)
इंडिया गठबंधन की बैठक बुधवार को नई दिल्ली में होने जा रही है जिसमें शामिल होने के लिए ममता बनर्जी यहां पहुंच चुकी हैं.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, दिल्ली पहुंचने पर पूर्व सीएम ममता बनर्जी ने कहा "जो कुछ भी कहना है, वह मैं कल की बैठक में कहूंगी. आप जानते हैं, हमारा निशाना चुनाव आयोग है. यह बैठक उस पूरी सॉफ्टवेयर टीम के ख़िलाफ़ है, जिसने लोगों को धोखा दिया और उनके साथ विश्वासघात किया. जो कुछ भी कहना है, वह मैं कल कहूंगी.''
ममता बनर्जी ने इंडिया ब्लॉक के अंदर इस मुद्दे पर सभी दलों को साथ लाने के लिए सीपीएम के महासचिव एमए बेबी से भी बात की.
इसको लेकर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने तंज़ कसते हुए कहा कि वह "एक हाथ में जमात और दूसरे हाथ में दिमागी नक्सलियों" के साथ आगे बढ़ रही हैं.
फ़ारस की खाड़ी में कितने भारतीय जहाज़ और नाविक हैं, विदेश मंत्रालय ने बताया
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इमेज कैप्शन, सप्ताह की पहली प्रेस कॉन्फ़्रेंस के दौरान रणधीर जायसवाल
भारतीय विदेश मंत्रालय ने फ़ारस की खाड़ी में मौजूद भारतीय जहाज़ों और भारतीय नाविकों की जानकारी दी है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस में पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा, "फ़िलहाल फ़ारस की खाड़ी में भारत के झंडे वाले छह वाणिज्यिक जहाज़ मौजूद हैं."
"इसके अलावा, छह विदेशी झंडे वाले जहाज़ भी हैं जो भारत के लिए माल लेकर जा रहे हैं. यानी कुल 12 जहाज़ वहां मौजूद हैं. इन जहाज़ों पर क़रीब 163 भारतीय नाविक सवार हैं."
इसके अलावा विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी है कि इस जल क्षेत्र में 4,500 से ज़्यादा भारतीय नाविक कई वाणिज्यिक जहाज़ों पर सवार हैं. साथ ही नौवहन मंत्रालय इन जहाज़ों की आवाजाही पर लगातार नज़र रख रहा है.
स्मृति ईरानी बोलीं, 'दुनिया के कई देश भारत के चुनाव आयोग की सराहना करते हैं'
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इमेज कैप्शन, बीजेपी की राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी इस बात से नाराज़ है कि भारत की जनता इस लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत उसका समर्थन नहीं करती
भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी ने चुनाव आयोग को लेकर कांग्रेस की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर पार्टी को घेरा है.
उन्होंने कहा, "साल 2019 में कांग्रेस के निवर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इमेज को ख़राब करने का भरसक प्रयास करेंगे. प्रधानमंत्री मोदी ने बार-बार कहा कि उनपर कटाक्ष करें मगर कांग्रेस का हमला संवैधानिक संस्थाओं और लोकतंत्र के हमले में तब्दील न हो. मगर कांग्रेस का नेतृत्व भारत की संवैधानिक व्यवस्थाओं को तार तार करने में कोई भी कसर नहीं छोड़ रहा है."
इसके साथ ही उन्होंने कहा, "एक नागरिक के तौर पर मैं कहना चाहूंगी कि चुनाव आयोग भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को मज़बूत करता है. यह भारतीय लोकतंत्र की गरिमा का प्रतीक है और दुनिया के कई देश इसकी सराहना और सम्मान करते हैं."
"कांग्रेस पार्टी इस बात से नाराज़ है कि भारत की जनता इस लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत उसका समर्थन नहीं करती. इसलिए अपनी हार पर आत्ममंथन करने के बजाय वह चुनाव आयोग पर हमला कर रही है."
"सवाल यह उठता है कि हिमाचल प्रदेश, पंजाब, केरल और कर्नाटक जैसे राज्यों में, जहां भारतीय जनता पार्टी सत्ता में नहीं है, क्या कांग्रेस नेतृत्व चुनाव आयोग को क्लीन चिट दे रहा है. या फिर वहां भी आयोग की गतिविधियों पर सवाल उठा रहा है?"
"अगर मतदाता सूची में किसी का नाम दो बार दर्ज है, या किसी मृत व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में मौजूद है, तो कांग्रेस पार्टी उसे फिर से बहाल क्यों करना चाहती है?"
"कांग्रेस पार्टी क्यों चाहती है कि मतदाता सूची में दर्ज दोहराए गए नाम बने रहें?"
"कांग्रेस पार्टी मतदाता सूचियों में दोहराए गए नामों को बनाए रखने पर ज़ोर क्यों देना चाहती है?"
SIR पर सवाल, Gyanesh Kumar के सामने क्या चुनौतियां? | दिनभर
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ईरान के परमाणु संधि से बाहर निकलने के संकेत पर रूस ने क्या कहा
इमेज कैप्शन, रूसी राष्ट्रपति पुतिन और उनके कार्यालय के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव
रूसी राष्ट्रपति के कार्यालय क्रेमलिन ने कहा है कि वह नहीं चाहता कि ईरान परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) से बाहर निकले.
बीबीसी फ़ारसी के मुताबिक़, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव की यह प्रतिक्रिया ईरानी अधिकारियों की उन टिप्पणियों के जवाब में आई है जिसमें तेहरान के इस संधि से बाहर निकलने की संभावना जताई गई थी.
यह संधि तेहरान को परमाणु हथियार विकसित करने या हासिल करने से रोकती है, वह 1960 से इस संधि का हिस्सा है.
दरअसल, ईरानी संसद के उपाध्यक्ष अली निकज़ाद ने मंगलवार को घोषणा की कि संसद ईरान को एनपीटी से बाहर निकालने की तीन चरणों वाली योजना पर विचार करेगी.
ईरानी मीडिया के अनुसार, अली निकज़ाद ने कहा, "हमें एजेंसी और उसके मौजूदा महानिदेशक पर बिल्कुल भरोसा नहीं है. वे केवल औपचारिक दौरे करते हैं और ईरान के ख़िलाफ़ नकारात्मक रिपोर्ट पेश करते हैं. इस योजना की समीक्षा के साथ, संसद इसके अंतरराष्ट्रीय पहलुओं की भी समीक्षा करेगी."
क्रेमलिन प्रवक्ता पेस्कोव ने इन बयानों का ज़िक्र करते हुए कहा, "इन बयानों को और स्पष्ट किए जाने की ज़रूरत है."
उन्होंने कहा, "हम एनपीटी को परमाणु अप्रसार व्यवस्था की बुनियाद मानते हैं. हमें उम्मीद है कि ईरान इस संधि का एक महत्वपूर्ण और ज़िम्मेदार सदस्य बना रहेगा."
बता दें कि ईरान सरकार के 30 से अधिक पूर्व अधिकारियों ने सोमवार को एक खुला पत्र जारी किया. इसमें इस्लामी गणराज्य ईरान से एनपीटी से बाहर निकलने की अपील की गई.
हस्ताक्षर करने वालों में पूर्व उपराष्ट्रपति और पूर्व मंत्री शामिल हैं और पत्र में कहा गया है कि एनपीटी में बने रहना "देश के हित में नहीं है."
एक ईरानी यात्री विमान को तुर्की में रोका गया, क्या है पूरा मामला?
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इमेज कैप्शन, यह विमान इस्तांबुल से तेहरान के लिए रवाना होने की तैयारी कर रहा था
एक ईरानी यात्री विमान को तुर्की में उड़ान भरने से रोक दिया गया क्योंकि वह क़र्ज़ का भुगतान नहीं कर सका था.
बीबीसी न्यूज़ फ़ारसी ने ईरानी समाचार एजेंसी तसनीम के हवाले से बताया है कि यह विमान कैस्पियन एयरलाइंस नाम की एक ईरानी निजी एयरलाइन का है.
इस यात्री विमान को तुर्की के इस्तांबुल शहर के हवाई अड्डे पर ज़ब्ती के आदेश के बाद रोक दिया गया.
रिपोर्ट में बताया गया है कि ऐसा क़र्ज़ का भुगतान न करने के कारण हुआ है. ज़ब्त किया गया विमान बोइंग 737-500 मॉडल का है.
यह विमान इस्तांबुल से तेहरान के लिए रवाना होने की तैयारी कर रहा था. तभी अदालत के आदेश पर उसे रोक दिया गया, जिसके बाद यात्रियों को विमान से उतरना पड़ा.
विमानन सेवाएं देने वाली कंपनी टैमसेल गज़ेटम का कहना है कि कैस्पियन एयरलाइंस पर उसका लगभग 30 लाख यूरो बकाया है.
रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने विमान ज़ब्त करने के लिए अदालत से आदेश हासिल कर लिया था.
कैस्पियन एयरलाइंस के जनसंपर्क विभाग ने एक बयान में कहा कि प्रशासनिक समस्या के कारण उसके एक बोइंग विमान की परिचालन गतिविधि अस्थायी रूप से प्रभावित हुई.
बयान में कहा गया कि मामले को सुलझाने के लिए संपर्क, क़ानूनी और प्रशासनिक क़दम उठाए जा रहे हैं. साथ ही रोका गया विमान आज (मंगलवार) ईरान लौट आएगा.
कार्टून: वन नेशन, वन बिल
इमेज कैप्शन, बकाया ट्रैफ़िक चालानों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के सुझाव पर आज का कार्टून
एशियन गेम्स : महिलाओं की रिले रेस में भारत ने जीता गोल्ड
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इमेज कैप्शन, महिलाओं की 4x400 मीटर रिले रेस में जीत के बाद भारत की प्राची, किरण और पूवम्मा माचेत्तिरा जश्न मनाती हुईं
जापान में चल रहे एशियन गेम्स में भारत ने महिलाओं की 4x400 मीटर रिले रेस में गोल्ड मेडल जीता है.
एथलेटिक्स फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर जानकारी दी है कि भारतीय टीम 3 मिनट, 29.69 सेकंड का टाइम निकालकर इस रिले रेस में पहले नंबर पर रही.
जबकि बहरीन 3 मिनट, 30.21 सेकंड के समय के साथ दूसरे स्थान पर रहा. बाकी टीमों के नतीजे अभी तक नहीं आए हैं.
मौजूदा एशियन गेम्स में एथलेटिक्स प्रतियोगिता में भारत का यह पहला गोल्ड मेडल है.
रिले रेस की भारतीय टीम में किरण, माचेत्तिरा पूवम्मा, प्राची और विथ्या रामराज शामिल हैं.
इसे मिलाकर भारत ने मंगलवार को दो खेलों में गोल्ड मेडल जीते. भारत की नीरू ढांडा ने विमेंस ट्रैप शूटिंग प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल हासिल किया है.
इसके अलावा, मंगलवार को ही पुरुष 4x400 मीटर रिले में भारत ने कांस्य पदक जीता. वहीं, मंगलवार को भारत को एक और कांस्य पदक महिला ऊंची कूद स्पर्धा में पूजा ने दिलाया.
भारत ने अभी तक कुल 6 गोल्ड, 21 सिल्वर और 23 ब्रॉन्ज़ मेडल जीते हैं. भारत के कुल मेडलों की संख्या 50 पहुंच गई है.
अमेरिका-ईरान युद्ध पर ट्रंप का बड़ा दावा, बोले- जल्द जीतेंगे जंग, मध्यस्थों से भी हो रही बातचीत
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इमेज कैप्शन, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (फ़ाइल फ़ोटो)
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका उन मध्यस्थों के संपर्क में है जो ईरान के साथ जारी युद्ध को ख़त्म कराने की कोशिश कर रहे हैं.
हालांकि, उन्होंने साथ ही दावा किया कि अमेरिका इस युद्ध में "बहुत जल्द" जीत हासिल कर लेगा.
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा, "जहां तक मेरी बात है, हम जीतने वाले हैं. यह मामला बहुत तेजी से आगे बढ़ेगा."
ट्रंप ने एक बार फिर यह भी कहा कि युद्ध में अमेरिका की जीत के बाद पेट्रोल की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिलेगी. उनका दावा है कि इससे अमेरिकी उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी और ऊर्जा लागत कम होगी.
अमेरिकी राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में तनाव बना हुआ है और युद्ध ख़त्म कराने के लिए विभिन्न पक्षों की ओर से कूटनीतिक कोशिशें जारी हैं.
ट्रंप ने मध्यस्थों की पहचान या बातचीत के बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं दी, लेकिन संकेत दिया कि पर्दे के पीछे संपर्क बनाए हुए हैं.
उनके इस बयान को युद्ध और कूटनीतिक प्रयासों, दोनों मोर्चों पर अमेरिका के रुख़ के तौर पर देखा जा रहा है.
ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की मांग वाली याचिका पर अगले हफ़्ते सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
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सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने वाली जनहित याचिका (पीआईएल) पर अगले सप्ताह सुनवाई करने पर सहमति जताई है.
याचिका में उन फ़ैसलों को चुनौती दी गई है जिन्हें सीईसी के नेतृत्व में चुनाव आयोग ने दो अन्य चुनाव आयुक्तों की कथित मंजूरी के बिना लिया था.
मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ के समक्ष इस मामले का ज़िक्र किया गया.
वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने अदालत से कहा कि कानून के तहत बहुसदस्यीय चुनाव आयोग के निर्णय सर्वसम्मति से या बहुमत के आधार पर लिए जाने चाहिए.
याचिका में आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग ने कुछ फैसले निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया का पालन किए बिना लिए.
सुप्रीम कोर्ट ने मामले को सुनवाई के लिए अगले हफ़्ता सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई है.
दरअसल, अंग्रेजी अख़बार 'इंडियन एक्सप्रेस' ने अपनी एक खोजी रिपोर्ट में कहा है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले कुछ महीनों में भारत निर्वाचन आयोग के फ़ैसलों और कामकाज की प्रक्रिया को लेकर आंतरिक तौर पर आपत्तियां उठाईं.
अख़बार की रिपोर्ट के मुताबिक़, पिछले साल स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न यानी एसआईआर अभियान के दौरान चुनाव आयुक्तों को कई फ़ैसलों की जानकारी नहीं दी गई थी और दोनों चुनाव आयुक्तों ने इन फ़ैसलों पर बार-बार आपत्तियां जताई थीं.
इस रिपोर्ट के बाद विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त पर हमलावर हैं और उनके इस्तीफ़े की मांग कर रहे हैं.
चुनाव आयोग कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे कई वामपंथी नेताओं को हिरासत में लिया गया
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इमेज कैप्शन, सीपीआई(एम) के महासचिव एमए बेबी और सीपीआई(एमएल) की केंद्रीय समिति की सदस्य सुचेता डे और श्वेता राज को हिरासत में लिया गया.
कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (मार्क्सवादी) के महासचिव एमए बेबी को 29 सितंबर को हिरासत में लिया गया.
उन्हें दिल्ली में भारत निर्वाचन आयोग के मुख्यालय के बाहर वामपंथी दलों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया.
उनके अलावा, सीपीआई(एमएल) की केंद्रीय समिति की सदस्य सुचेता डे और श्वेता राज को भी हिरासत में लिया गया है.
वामपंथी दलों ने भारत निर्वाचन आयोग के दफ़्तर के बाहर एकजुट होकर सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग की.
सीपीआई(एम) ने प्रेस विज्ञप्ति में आरोप लगाया है कि "प्रदर्शनकारियों की बात सुनने के बजाय पुलिस ने उन पर बलपूर्वक कार्रवाई की."
"हमें हिरासत में ले लिया गया है और हमें नहीं पता कि हमें कहाँ ले जाया जा रहा है या कब ले जाया जाएगा."
प्रदर्शनकारियों में सीपीआई(एमएल) के कई नेता, सीपीआई(एम) के नेता, सीपीआई(एमएल) की नेता कॉमरेड सुचेता डे, श्वेता राज, एआईसीसीटीयू और एआईएलएजे के कार्यकर्ता, अन्य वरिष्ठ नेता और ट्रेड यूनियन नेता शामिल हैं.
अभिजीत दीपके ने उद्धव और राज ठाकरे का क्यों शुक्रिया अदा किया
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इमेज कैप्शन, शिवसेना (यूबीटी) और एमएनएस ने एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणा की है कि वे चार अक्तूबर को मुंबई में निर्वाचन आयोग के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन करेंगे
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर दो अक्तूबर को मुंबई में होने वाले कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन को शिवसेना (यूबीटी) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) ने समर्थन देने का ऐलान किया है.
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने एक्स पर पोस्ट करके उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे का शुक्रिया अदा किया.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, शिवसेना (यूबीटी) और एमएनएस ने एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणा की है कि वे चार अक्तूबर को मुंबई में निर्वाचन आयोग के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन करेंगे.
शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा, "हम 2 तारीख़ को होने वाले कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन का पूरा समर्थन करते हैं.
उन्होंने कहा कि इससे पहले सीजेपी के जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन का भी हमने समर्थन किया था. लोकतंत्र को बचाने के लिए जो भी आंदोलन करेगा, हम उसके साथ खड़े रहेंगे.
मगर साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि समर्थन का मतलब यह नहीं है कि सभी को एक-दूसरे के मंच पर दिखाई देना चाहिए.
वे बोले कि हम सबको अपने-अपने तरीक़े से जनता के अलग-अलग वर्गों को जागरूक और संगठित करना चाहिए.
अभिजीत दीपके ने एक्स पर दोनों का शुक्रिया अदा करते हुए लिखा, "मैं उद्धव सर और राज ठाकरे सर को हमें अपना समर्थन देने के लिए धन्यवाद करता हूं. लोकतंत्र को बचाने के लिए सभी भारतीयों को साथ आना होगा."
म्यांमार के रखाइन में नागरिकों पर हवाई हमले, 49 लोगों की मौत
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इमेज कैप्शन, अराकान आर्मी (एए) के मुताबिक़, हमले में करीब 60 लोग घायल हुए हैं, जिनमें 22 की हालत गंभीर बताई गई है
म्यांमार के रखाइन राज्य के क्याउक्ताव शहर में 28 सितंबर को हुए हवाई हमले में मरने वालों की संख्या बढ़कर 49 हो गई है.
अराकान आर्मी (एए) के मुताबिक़, हमले में करीब 60 लोग घायल हुए हैं, जिनमें 22 की हालत गंभीर बताई गई है.
बीबीसी न्यूज़ बर्मीज़ के मुताबिक़, स्थानीय सूत्रों का दावा है कि मलबे से शव निकाले जाने का काम जारी है और मृतकों की संख्या 58 तक पहुंच सकती है.
यह हमला क्याउक्ताव स्थित किस्सापनादी पुल क्षेत्र और भारतीय बाज़ार के आसपास किया गया था.
अराकान आर्मी ने इस हमले के लिए म्यांमार की सेना को ज़िम्मेदार ठहराते हुए इसकी निंदा की है और जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है.
वहीं, सेना समर्थक टेलीग्राम चैनलों का दावा है कि मारे गए लोग अराकान आर्मी के सदस्य थे. स्वतंत्र रूप से इन दावों की पुष्टि नहीं हो सकी है.
यह घटना हाल के महीनों में रखाइन राज्य में नागरिकों पर सबसे घातक हमलों में से एक मानी जा रही है.
अभी तक बीबीसी संवाददाता अरशद मिसालआप तक ख़बरें पहुंचा रहे थे. अब बीबीसी संवाददाता शिवांगी जायसवाल रात दस बजे तक आप तक ख़बरें पहुंचाएंगी.
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अमेरिका में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने वैश्विक व्यवस्था को लेकर दी चेतावनी
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इमेज कैप्शन, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के हाई-लेवल वीक के बाद एशिया सोसाइटी में बात की
विदेश मंत्री एस. जयशंकर सोमवार को अमेरिका के न्यूयॉक में एशिया सोसाइटी के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मौजूदा समय में जारी जंग, आर्थिक दबावों और व्यापारिक संबंधों के बढ़ते राजनीतिक इस्तेमाल ने वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य को अस्थिर कर दिया है.
उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में देश आपस में जुड़े होने के बावजूद इन संबंधों का इस्तेमाल रणनीतिक दबाव बनाने के लिए कर रहे हैं.
जयशंकर ने यूक्रेन और अन्य क्षेत्रों में जारी संघर्षों, पश्चिम एशिया की अस्थिरता और अफ़्रीका के कुछ हिस्सों में हिंसा का ज़िक्र करते हुए कहा कि इससे विकासशील देशों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है.
उन्होंने कहा कि खाद्य, ईंधन, उर्वरक और वित्तीय संसाधनों पर दबाव बढ़ा है और वैश्विक आपूर्ति चेन भी अधिक असुरक्षित हो गई हैं.
विदेश मंत्री ने कहा, "एक दूसरे पर निर्भरता सच्चाई है, जबकि प्रतिस्पर्धा एक भावना है."
उन्होंने चेतावनी दी कि जब कोई देश किसी महत्वपूर्ण ज़रूरत के लिए दूसरे देश पर निर्भर होता है, तो उस निर्भरता को दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है.
जयशंकर ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में "कूटनीति एक एक्सट्रीम स्पोर्ट बन गई है", जहां राजनयिकों को जोखिम भरे फ़ैसलों और उनके परिणामों से निपटते हुए दीर्घकालिक विवादों को भी संभालना पड़ता है.
मुल्ला अफ़रोज़ पर लगा एनएसए रद्द, कोर्ट ने यूपी सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया
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सुप्रीम कोर्ट ने 2024 के संभल हिंसा मामले में मुल्ला अफ़रोज़ की राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत की गई डिटेंशन को रद्द कर दिया है.
साथ ही इस कार्रवाई को अवैध मानते हुए राज्य सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया.
यूपी पुलिस ने संभल हिंसा मामले में मुल्ला अफ़रोज़ को माटरमाइंड बताया था.
उत्तर प्रदेश के संभल में 24 नवंबर 2024 को शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हिंसा हुई थी, इसमें कई लोगों की मौत भी हुई थी.
लाइव लॉ और बार एंड बेंच के मुताबिक, जस्टिस दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की बेंच ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले को भी ख़ारिज कर दिया, जिसमें डिटेंशन ऑर्डर को बरकरार रखा गया था.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार, पुलिस हिरासत में अफ़रोज़ के कथित कबूलनामे के आधार पर प्रिवेंटिव डिटेंशन का आदेश नहीं दे सकती थी.