शहरी इलाक़ों का मुद्दा है 2जी घोटाला

ए राजा
इमेज कैप्शन, घोटाले के मामले में ए राजा इन दिनो जेल में हैं
    • Author, थंगवेल अप्पाची
    • पदनाम, बीबीसी तमिल संवाददाता
  • प्रकाशित

जिस दिन अन्ना हज़ारे दिल्ली में अनशन पर बैठे, उसके दो दिनों बाद तमिलनाडु के कोयम्बटूर में लोग बड़ी संख्या में बाहर निकल आए.

मैं उस दिन वहीं था. इन लोगों में ज़्यादातर युवा थे और वे अन्ना हज़ारे के प्रति समर्थन व्यक्त कर रहे थे.

फिर मैं चेन्नई लौटा तो पाया कि चेन्नई में भी माहौल वैसा ही था. लोग वहाँ किसी और शहर की तुलना में ज़्यादा बाहर निकले.

जब तक अनशन चला अख़बारों ने इस अनशन पर और भ्रष्टाचार पर लोगों की राय लेकर दो-दो तीन-तीन पृष्ठों की सामग्री प्रकाशित की.

<link type="page"><caption> तमिलनाडु की राजनीति</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/southasia/2011/04/110411_tn_backgrounder_vv.shtml" platform="highweb"/></link>

अन्ना हज़ारे के अनशन को मिले समर्थन ने यह समझना आसान कर दिया कि भ्रष्टाचार तमिलनाडु के शहरों में एक बड़ा मुद्दा बन गया है.

इसने यह समझने में भी मदद की कि लोग पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा और 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के बारे में क्या सोच रहे होंगे और डीएमके और उसके सहयोगी दलों को लोगों के बीच जाकर किस तरह की सफ़ाई देनी पड़ रही होगी.

शहर बनाम गाँव

करुणानिधि और जयललिता
इमेज कैप्शन, दोनों नेता एक दूसरे पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हैं

हालांकि ये कहना ठीक नहीं होगा कि ए राजा और 2जी स्पैक्ट्रम घोटाले का मुद्दा पूरे तमिलनाडु में एक जैसा असर पैदा कर रहा है.

शहरी इलाक़ों में तो लोग इसके बारे में जानते हैं और इस पर चर्चा कर रहे हैं. लेकिन गाँवों में लोग इसके बारे में या तो जानते ही नहीं और जानते भी हैं तो वे इसे चुनावी मुद्दा नहीं मानते.

मैंने ए राजा के लोकसभा क्षेत्र नीलगिरी का दौरा किया.

शहरी इलाक़े के एक मतदाता ने बीबीसी से हुई बातचीत में कहा, "2जी स्पेक्ट्रम घोटाला पूरे तमिलनाडु के लिए एक शर्मनाक मामला है."

वहाँ ज़्यादातर लोग इसे डीएमके प्रमुख डीएमके के परिवार से जोड़कर देखते हैं और कहते हैं कि यदि इन्हें फिर से मौक़ा दिया गया तो वे पूरे तमिलनाडु को लूट लेंगे.

लेकिन इस सवाल पर सब एकमत नहीं हैं कि क्या वे इस घोटाले के आधार पर डीएमके को वोट देने न देने का फ़ैसला करेंगे. क्योंकि कुछ ही लोगों ने कहा कि इससे उनके मत पर फ़र्क पड़ेगा.

जबकि गुडालूर के ग्रामीण इलाक़ों के मतदाताओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले का मुद्दा कोई चुनावी मुद्दा नहीं है और वे इसके बावजूद डीएमके को वोट देंगे.

उनका कहना था कि अगर राजा फिर चुनाव लड़ें तो वे फिर राजा को ही वोट देंगे.

एक ग्रामीण ने कहा, "राजा इतने भले व्यक्ति हैं कि वे भ्रष्ट हो ही नहीं सकते."

डीएमके और सहयोगियों की दिक़्कत

2जी स्पेक्ट्रम के मामले में डीएमके मुश्किल में तो है और उसकी प्रमुख सहयोगी कांग्रेस को भी सफ़ाई देनी पड़ रही है.

यही वजह है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जब चुनाव प्रचार के लिए पहुँचे तो उन्होंने भी कहा कि यूपीए भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ लड़ने के लिए प्रतिबद्ध है और इसीलिए उसने सूचना का अधिकार जैसा क़ानून बनाया. हालांकि उन्होंने 2जी स्पेक्ट्रम के बारे में कोई बात नहीं की.

ज़ाहिर तौर पर तो डीएमके और कांग्रेस के नेता कहते हैं कि राजा का जेल में होना कोई चुनावी मुद्दा नहीं है.

लेकिन एक डीएमके नेता ने कहा, "राजा एक बड़ा मुद्दा है और इसका चुनाव पर असर भी होगा, अब तो हम डीएमके सरकार की उपलब्धियों के ही भरोसे हैं."

डीएमके की ही तर्ज़ पर कांग्रेस भी राज्य में डीएमके सरकार की उपलब्धियाँ गिनवा रही है.

विपक्ष के लिए मुद्दा

मैंने दक्षिणी और पश्चिमी तमिलनाडु में कई जगह दौरा किया और पाया कि वामपंथी दलों ने तो 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले को बड़ा मुद्दा बनाया हुआ है.

लेकिन प्रमुख विपक्षी गठबंधन का नेतृत्व कर रही एआईएडीएमके की नेता जयललिता ने ए राजा को इतना बड़ा मुद्दा नहीं बनाया है जितने की उम्मीद की जा रही थी.

वे अपने चुनावी अभियान में ए राजा का ज़िक्र तो कर रही हैं लेकिन करुणानिधि के परिवार के भ्रष्टाचार के साथ जोड़कर.

एआईएडीएमके के एक नेता ने कहा, "ए राजा का मसला कोई बड़ा मसला नहीं है. उसे तो बलि का बकरा बनाया गया है. इस पूरे घोटाले से तो करुणानिधि और उसका परिवार ही लाभान्वित हुआ है."

हालांकि शहरी इलाक़ों में पढ़े लिखे लोग, मसलन वकील इसे बड़ा मुद्दा मानते हैं और कहते हैं कि इसका असर चुनाव परिणामों पर ज़रुर दिखेगा.

एक लाख 76 हज़ार करोड़ के कथित घोटाले का असर तमिलनाडु के चुनाव पर कितना हुआ ये तो चुनाव के परिणामों से ही पता चलेगा.