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ट्रंप बोले, 'मुनीर और शरीफ़' के कहने पर बढ़ाया सीज़फ़ायर, मंगलवार को वॉशिंगटन में क्या-क्या हुआ
- Author, डैनियल बुश
- पदनाम, बीबीसी के वॉशिंगटन संवाददाता
- पढ़ने का समय: 6 मिनट
मंगलवार का दिन अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन में राजनयिक उथल-पुथल भरा रहा.
अमेरिकी विमान एयरफोर्स-2 उप राष्ट्रपति जेडी वेंस को इस्लामाबाद ले जाने के लिए तैयार था, जहां अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता का एक नया दौर निर्धारित था. लेकिन कई घंटों के बाद भी विमान उड़ान नहीं भर सका और बातचीत ठप हो गई.
वेंस ने इस्लामाबाद दौरे की कभी आधिकारिक घोषणा नहीं की, जिससे वॉशिंगटन में अनिश्चितता बनी रही. वहीं, ईरान ने भी बातचीत में शामिल होने की औपचारिक सहमति नहीं दी, जिससे व्हाइट हाउस के सामने यह मुश्किल फैसला खड़ा हो गया कि वेंस को भेजा जाए या नहीं, जबकि इस बात की कोई गारंटी नहीं थी कि तेहरान बातचीत की मेज़ पर आएगा.
जैसे-जैसे दिन बीतता गया, वार्ता टलने के संकेत दिखने लगे. वेंस के नेतृत्व वाली अमेरिकी वार्ता टीम के वरिष्ठ सदस्य, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर, सीधे इस्लामाबाद जाने के बजाय मियामी से वॉशिंगटन लौट गए.
इसके तुरंत बाद, वेंस 'नीति बैठकों' के लिए व्हाइट हाउस पहुंचे, जहां राष्ट्रपति और उनके वरिष्ठ सलाहकार इस पर चर्चा कर रहे थे कि आगे क्या करना है.
आखिर में, ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर युद्धविराम बढ़ाने की घोषणा की. फरवरी के अंत में शुरू हुए युद्ध के बाद से इससे जुड़े अपडेट देने का उनका पसंदीदा माध्यम ट्रुथ सोशल ही रहा है.
राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने यह फ़ैसला पाकिस्तान के अनुरोध पर लिया, जिसने ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत में मध्यस्थता की है.
ट्रंप ने कहा, "हमसे कहा गया है कि हम ईरान पर अपना हमला तब तक रोकें, जब तक उसके नेता और प्रतिनिधि एक साझा प्रस्ताव लेकर नहीं आते."
पाकिस्तान ने की गुज़ारिश
ट्रंप ने कहा कि उन्होंने यह निर्णय पाकिस्तानी फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ के अनुरोध पर लिया है.
ट्रंप ने लिखा, "पाकिस्तान के फ़ील्ड मार्शल आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने मांग की है कि ईरान पर हमला तब तक रोके रखें जब तक उनके नेता और प्रतिनिधि एक साझा प्रस्ताव लेकर नहीं आते."
ट्रंप के इस एलान के बाद शहबाज़ शरीफ़ ने ट्रंप का शुक्रिया भी अदा किया.
शहबाज़ शरीफ़ ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, "मैं दिल से राष्ट्रपति ट्रंप का धन्यवाद करता हूं कि उन्होंने हमारी गुज़ारिश मानकर युद्धविराम बढ़ाया, ताकि कूटनीतिक कोशिशें आगे बढ़ सकें."
शरीफ़ ने कहा, "पाकिस्तान भरोसे और विश्वास के साथ बातचीत से हल निकालने की कोशिश जारी रखेगा. मुझे उम्मीद है कि दोनों पक्ष युद्धविराम का पालन करेंगे और इस्लामाबाद में होने वाली दूसरे दौर की बातचीत में एक स्थायी 'शांति समझौता' कर पाएंगे, जिससे संघर्ष का हमेशा के लिए अंत हो सके."
ग़ौर करने वाली बात यह है कि इस बार ट्रंप ने यह नहीं बताया कि युद्धविराम कितने समय तक चलेगा. इससे पहले इसी महीने उन्होंने पहले युद्धविराम के लिए दो हफ्ते की समय-सीमा तय की थी.
यह उस समय हुआ था जब उनके बयान एक-दूसरे से अलग थे. एक ओर उन्होंने कहा था कि बातचीत अच्छी चल रही है, लेकिन साथ ही यह भी चेतावनी दी थी कि अगर ईरान बातचीत से इनकार करता है तो वह फिर से युद्ध शुरू करने पर विचार करेंगे.
क्या दबाव में हैं ट्रंप?
इराक़ और तुर्की में अमेरिका के पूर्व राजदूत जेम्स जेफ्री ने बीबीसी से कहा, "युद्ध खत्म करने का कोई स्पष्ट फॉर्मूला नहीं होता."
जेफ्री ने यह भी जोड़ा कि ट्रंप पहले ऐसे अमेरिकी राष्ट्रपति नहीं हैं जिन्होंने "एक तरफ बड़े सैन्य तनाव को बढ़ाने की धमकी दी हो और दूसरी तरफ अच्छा समझौता भी पेश किया हो."
मंगलवार को ट्रंप का बयान, ईरान पर उनके पहले के सोशल मीडिया हमलों की तुलना में ज्यादा संतुलित था.
इससे यह संकेत मिल सकता है कि ट्रंप उस युद्ध को खत्म करना चाहते हैं, जिसने वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिला दिया है और उनके उन 'मागा' (मेक अमेरिका ग्रेट अगेन) समर्थकों में भी अलोकप्रिय है, जो बाहरी हस्तक्षेप के ख़िलाफ़ हैं.
मिडिल ईस्ट इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ फेलो ब्रायन कैटुलिस कहते हैं, "यह एक व्यावहारिक फैसला है, जो ईरानी सरकार के मौजूदा नेतृत्व में साफ़ दिख रही दरारों पर आधारित है."
लेकिन कैटुलिस ने यह भी कहा कि ट्रंप के इस फ़ैसले से युद्ध कितने समय तक चलेगा, इसे लेकर अनिश्चितता और बढ़ गई है.
उन्होंने कहा, "यह कदम ट्रंप के सामने यह सवाल खड़ा करता है कि वे अमेरिका में लोगों को हो रही आर्थिक परेशानी और अपने समर्थकों से मिल रहे राजनीतिक दबाव से कैसे निपटेंगे. उन्होंने अभी तक उन सवालों के जवाब नहीं दिए हैं, जो इस संकट को आगे बढ़ा रहे हैं."
कई बड़े सवाल अभी बाकी
युद्धविराम बढ़ने के साथ, अब अमेरिका और ईरान के पास एक स्थायी शांति समझौता करने के लिए ज़्यादा समय है, लेकिन कई बड़े सवाल अभी भी बाकी हैं.
ईरान ने कहा है कि होर्मुज़ स्ट्रेट (जलडमरूमध्य) की अमेरिकी नाकाबंदी युद्ध की कार्रवाई है. ट्रंप ने भले ही तुरंत युद्ध फिर से शुरू नहीं किया, लेकिन उन्होंने यह संकेत नहीं दिया कि वे इस नाकाबंदी को खत्म करेंगे.
अमेरिका को उम्मीद थी कि इससे ईरान पर दबाव बनेगा और वह पीछे हटेगा, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हुआ है. इससे ट्रंप के पास सैन्य अभियान तेज़ करने के अलावा विकल्प कम बचते दिख रहे हैं.
वहीं, ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने या मध्य पूर्व में अपने सहयोगी समूहों के समर्थन को रोकने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है, ये दोनों ही ट्रंप की तथाकथित "रेड लाइन" हैं, जिन्हें वे किसी भी अंतिम शांति समझौते में शामिल करना चाहते हैं.
ट्रंप ने अपने लिए थोड़ा और समय तो हासिल कर लिया है, लेकिन फ़िलहाल युद्ध का जल्दी समाधान पहले की तरह ही मुश्किल नज़र आ रहा है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.