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दूसरे दौर की बातचीत से ठीक पहले ईरान ने ऐसा क्या कहा कि पाकिस्तान उसे मनाने में जुटा
सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कुछ बयानों से उम्मीद बंधी कि ईरान जंग के ख़त्म होने को लेकर जल्द ही कोई अच्छी ख़बर आ सकती है.
लेकिन ये उम्मीद भी बस चंद घंटों के लिए ही रही. उसके बाद से लगातार अमेरिका और ईरान के बयानों से लगा कि फ़िलहाल शांति दूर है.
सोमवार देर रात ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई ने कहा है कि ईरान फ़िलहाल अमेरिका के साथ होने वाली अगली दौर की बातचीत में हिस्सा लेने की कोई योजना नहीं बना रहा है.
ये बात उन्होंने तब कही जब अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल संभावित दूसरे दौर की पाकिस्तान-प्रायोजित अमेरिका-ईरान बातचीत के लिए इस्लामाबाद पहुंचने की तैयारी कर रहा है.
20 अप्रैल को साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बक़ाई ने कहा, "अभी तक हमारे पास अगले दौर की बातचीत की कोई योजना नहीं है और इस बारे में कोई फैसला नहीं लिया गया है." बीबीसी मॉनिटरिंग ने ईरान की समाचार एजेंसी आईआरएनए के हवाले से ये जानकारी दी.
जबकि इससे पहले सोमवार को ही डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखी ''अगर ईरान के नए नेता समझदार निकले, तो ईरान का भविष्य बहुत ही उज्ज्वल और समृद्ध हो सकता है.''
अमेरिका और ईरान के बीच 8 अप्रैल से लागू हुआ सीज़फ़ायर 22 अप्रैल को ख़त्म हो रहा है. पाकिस्तान दोनों पक्षों के बीच दूसरे दौर की बातचीत की मेज़बानी करने की तैयारी कर रहा है.
इससे पहले 11 और 12 अप्रैल को इस्लामाबाद में दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई थी, लेकिन लंबी चर्चा के बावजूद कोई समझौता नहीं हो सका.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 19 अप्रैल को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कहा कि उनका प्रतिनिधिमंडल 20 अप्रैल की शाम इस्लामाबाद पहुंचेगा. लेकिन अब तक ये साफ़ नहीं है कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंचा या नहीं
ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर ईरान किसी समझौते को स्वीकार नहीं करता है, तो अमेरिका ईरान के "हर एक पावर प्लांट और हर एक पुल को नष्ट कर देगा."
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता बक़ाई ने ट्रंप की चेतावनी पर कहा कि ईरान किसी भी तरह की डेडलाइन, अल्टीमेटम और दबाव को खारिज करता है और उसके फ़ैसले राष्ट्रीय हितों के आधार पर होते हैं, न कि संघर्षविराम की समय-सीमा के अनुसार.
उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी अमेरिका का मामला है, ईरान का नहीं.
'फ़िलहाल बातचीत की कोई प्लानिंग नहीं'
उन्होंने कहा कि ईरान आगे की बातचीत में हिस्सा लेने को लेकर अभी ज़्यादा उत्सुक नहीं है, क्योंकि उसे इस बात के कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं कि "अमेरिका बातचीत को लेकर गंभीर है."
बक़ाई ने यह भी कहा कि अमेरिका का रुख़ 'तर्कहीन और काल्पनिक बातों' पर आधारित है.
एक ईरानी कहावत का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि जो पहले परखा जा चुका है, उसे दोबारा परखना गलती है, और चेतावनी दी कि अमेरिका ने सख़्ती दिखाई तो उसे पहले जैसी ही प्रतिक्रिया मिलेगी.
उन्होंने कहा कि अमेरिका का पिछला बर्ताव और बातचीत की बात कहकर भी बार-बार हमलों के कारण दोनों के बीच 'गहरा अविश्वास' है और अब आगे का कोई समझौता अमेरिकी आश्वासनों के बजाय ईरान की अपनी ताक़त और गारंटी पर आधारित होना चाहिए.
उन्होंने बातचीत में मिस्र की भूमिका के बारे में पूछे जाने पर कहा कि फ़िलहाल पाकिस्तान ही अमेरिका और ईरान के बीच एकमात्र मध्यस्थ है, हालांकि अन्य देश भी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए संपर्क में हैं.
उन्होंने अमेरिकी मीडिया की उन खबरों को भी खारिज कर दिया, जिनमें दावा किया गया था कि पिछले दौर की बातचीत के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप फोन पर ईरानी प्रतिनिधिमंडल पर चिल्लाए थे.
बक़ाई ने इसे 'अमेरिकी मीडिया की कहानी' बताया.
बक़ाई ने यह भी साफ किया कि ईरान ने अपने उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम के भंडार को अमेरिका को सौंपने पर सहमति नहीं दी है और यह मुद्दा किसी भी दौर की बातचीत में नहीं उठा.
उन्होंने कहा, "जिस तरह ईरान की ज़मीन हमारे लिए पवित्र और महत्वपूर्ण है, उसी तरह संवर्धित यूरेनियम भी हमारे लिए महत्वपूर्ण है."
पाकिस्तान की कोशिशें जारी
बीबीसी पर्शियन संवाददाता ग़ोंचे हबीबीज़ाद के मुताबिक़ सोमवार को ही ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशहाक़ डार के साथ टेलीफोन पर बातचीत में कहा कि अमेरिका के साथ संबंधों को लेकर ईरान "सभी पहलुओं की समीक्षा करेगा और आगे की रणनीति पर फैसला करेगा."
अराग़ची ने कहा कि अमेरिकी की "उकसावे वाली कार्रवाइयाँ और बार-बार संघर्षविराम का उल्लंघन" कूटनीतिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में बाधा डाल रही हैं.
उन्होंने यह भी कहा कि ईरानी व्यापारिक जहाज़ों के ख़िलाफ़ 'धमकियां और हस्तक्षेप' और ईरान को लेकर 'विरोधाभासी बयान और धमकी भरी भाषा' भी बातचीत में रुकावट पैदा कर रही हैं.
वहीं पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इसहाक़ डार और अब्बास अराग़ची के बीच हुई इस बातचीत पर एक बयान जारी किया.
बयान के अनुसार, इसहाक़ डार ने सभी मुद्दों को जल्द से जल्द सुलझाने के लिए लगातार बातचीत की अहमियत पर ज़ोर दिया, ताकि क्षेत्र में शांति और स्थिरता को बढ़ावा मिल सके.
बयान में यह भी कहा गया कि "दोनों विदेश मंत्रियों ने आपसी संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई."
इस बीच, सोमवार को रूस के विदेश मंत्री के साथ एक अलग फ़ोन कॉल में अराग़ची ने कहा, "ईरान अमेरिका की कार्रवाइयों पर नज़र रखेगा और अपने हितों और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए सही फ़ैसला लेगा."
दोनों बयानों में अराग़ची ने यह साफ़ नहीं किया कि ईरान इस्लामाबाद में अमेरिका के साथ होने वाली बातचीत में हिस्सा लेगा या नहीं.
डोनाल्ड ट्रंप क्या बोले
डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को पहले अपने ट्रुथ सोशल अकाउंट पर पोस्ट किया, ''वेनेज़ुएला, जिनके अंजाम के बारे में मीडिया बात करना पसंद नहीं करता, उसी तरह ईरान में शानदार नतीजे होंगे. अगर ईरान के नए नेता समझदार निकले, तो ईरान का भविष्य बहुत ही उज्ज्वल और समृद्ध हो सकता है.''
लेकिन बाद में उनके सुर फिर बदले और उन्होंने कहा है कि अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगी नाकाबंदी तब तक नहीं हटाएगा, जब तक ईरान के साथ कोई समझौता नहीं हो जाता.
ट्रंप का यह बयान उस समय आया है जब यह साफ़ नहीं है कि युद्ध ख़त्म करने के लिए दूसरे दौर की बातचीत होगी या नहीं.
डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, "नाकाबंदी ईरान को पूरी तरह तबाह कर रही है. वे हर दिन 500 मिलियन डॉलर गंवा रहे हैं, ऐसा लंबे समय तक चलना नामुमकिन है."
दूसरी ओर, ईरान कह चुका है कि जब तक ईरान के बंदरगाहों से अमेरिकी नाकाबंदी नहीं हटाई जाएगी, तब तक बातचीत नहीं होगी.
गौरतलब है कि पाकिस्तान की राजधानी में बैठक की संभावना को देखते हुए सुरक्षा कड़ी कर दी गई है. लेकिन बैठक में अमेरिका का प्रतिनिधित्व करने वाले उप राष्ट्रपति जेडी वेंस अभी तक वॉशिंगटन से रवाना नहीं हुए हैं.
वहीं ईरान ने कहा है कि उसने अब तक यह तय नहीं किया है कि वह बैठक में शामिल होगा या नहीं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित