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ईरान पर बमबारी की धमकी देने वाले ट्रंप ने क्यों बढ़ाया सीज़फ़ायर?
सारा स्मिथ, नॉर्थ अमेरिका एडिटर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ईरान के साथ अनिश्चितकाल तक युद्धविराम बढ़ाने का फ़ैसला, उनके कुछ ही घंटे पहले के रुख़ से एक बड़ा यू-टर्न है.
ट्रंप ने इस एलान से चंद घंटों पहले सीएनबीसी से कहा था, "मुझे उम्मीद है कि हम (ईरान पर) बमबारी करेंगे," और यह भी कहा कि सेना "पूरी तरह तैयार" है.
उन्होंने ईरान के भीतर हर पुल और बिजली संयंत्र को नष्ट करने की अपनी धमकी भी दोहराई थी.
अब, जब मौजूदा युद्धविराम खत्म होने में सिर्फ़ कुछ घंटे बाकी थे, उन्होंने संघर्ष को अनिश्चित समय के लिए रोकने पर सहमति दे दी है. उनका कहना है कि उन्होंने यह फ़ैसला पाकिस्तान सरकार के अनुरोध पर लिया है.
इस पूरे संघर्ष के दौरान ट्रंप ने ईरानी शासन को आक्रामक और धमकी भरे बयानों से डराने की कोशिश की. लेकिन अब ऐसा लगता है कि वह वास्तव में ईरान पर फिर से हमला शुरू नहीं करना चाहते.
अंदरूनी दबाव?
बर्न्ड डिबशमैन जूनियर, व्हाइट हाउस रिपोर्टर
डोनाल्ड ट्रंप के युद्धविराम की घोषणा कई बातों से पर्दा उठाती है और आने वाले दिनों का संकेत देती है कि बातचीत की कितनी संभावना है.
ट्रंप की पोस्ट इशारा करती है कि फ़िलहाल उन्हें भी नहीं पता कि ईरान का प्रस्ताव वास्तव में क्या है और ईरान की सरकार में आख़िर फ़ैसले कौन ले रहा है.
यह उसी बात का विस्तार है, जो ट्रंप अक्सर कहते रहे हैं कि ईरान की लीडरशिप काफ़ी हद तक कमज़ोर हो चुकी है और अंदरूनी फ़ैसले लेने की प्रक्रिया में वहां अफ़रातफ़री है.
उनकी यह घोषणा ये भी दिखाती है कि अब ईरान के साथ वो जंग को फिर से उसी पैमाने पर शुरू नहीं करना चाहते.
अमेरिका में घरेलू राजनीति और तेल की क़ीमतों पर असर के लिहाज़ से फिर से लड़ाई छेड़ना ट्रंप के लिए मुश्किल हो सकता था.
ध्यान देने वाली बात यह भी है कि उन्होंने सीज़फ़ायर की कोई समयसीमा नहीं दी है, यानी समाधान निकालने के लिए कोई 'डेडलाइन' नहीं रखी गई. इस रणनीति से उन्हें सैद्धांतिक तौर पर ज़्यादा लचीलापन मिलता है.
हालांकि, ईरान के बंदरगाहों पर नाकेबंदी अभी भी जारी है. ईरान इसे युद्ध की कार्रवाई मानता है, और यही आगे की किसी भी बातचीत में बड़ी बाधा बन सकती है.
ऐसे में ईरान चाहे तो तनाव को और बढ़ा सकता है या फिर पर्शियन गल्फ़ और होर्मुज़ स्ट्रेट पर छोटा-मोटा संघर्ष छेड़ सकता है.
अब युद्ध जारी रखने में ट्रंप की दिलचस्पी नहीं
डेनियल बुश, वॉशिंगटन संवाददाता
डोनाल्ड ट्रंप ने ये फ़ैसला लेकर अपने लिए थोड़ा और समय निकाल लिया है.
पहले वो ईरान से लगातार कह रहे थे-या तो समझौता करो वरना बुधवार से फिर से युद्ध शुरू होगा.
और ऐसा कहने के बाद ही उन्होंने अनिश्चितकाल के लिए युद्धविराम बढ़ा दिया.
ऐसा करके ट्रंप ने फ़िलहाल ईरान पर बड़े हवाई हमले फिर से शुरू करने की अपनी धमकी को अमल में ना लाने का फ़ैसला किया. लेकिन इसके साथ ही यह भी तय हो गया है कि आने वाले दिनों या हफ़्तों में उन्हें फिर से यही फ़ैसला लेना पड़ेगा.
यह कब होगा, यह अभी साफ़ नहीं है. ट्रंप ने यह नहीं बताया कि नया युद्धविराम कितने समय तक चलेगा, सिर्फ़ इतना कहा कि वह ईरान को युद्ध खत्म करने के लिए 'एकजुट प्रस्ताव' देने का और समय दे रहे हैं.
पिछले दो हफ़्तों में यह दूसरी बार है जब ट्रंप ने युद्ध को बढ़ाने की धमकी से पीछे हटने का कदम उठाया है.
इससे यह संकेत मिलता है कि वह अब इस संघर्ष को धीरे-धीरे समाप्त करने में ज़्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं.
अब भी मुद्दे सुलझाना बाक़ी
गैरी ओडोन्यू, नॉर्थ अमेरिका संवाददाता
अमेरिका और दुनिया में इस नए डेवलपमेंट को एक बहुत बड़ी राहत के तौर पर देखा जा सकता है. ट्रंप ने ईरान के भीतर और ज़्यादा बमबारी और तबाही के ख़तरे से फिलहाल एक बड़ा कदम पीछे हटा लिया है.
दिलचस्प बात यह है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान में बिखरी हुई लीडरशिप की बात कर रहे हैं. इससे लगता है कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल अभी यह समझने की कोशिश कर रहा है कि असल में बातचीत किससे की जाए और किस तरह का प्रस्ताव रखा जाए.
अमेरिका के मुद्दे साफ़ हैं-होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से खोलना, ईरान की यूरेनियम एनरिचमेंट की क्षमता को नियंत्रित करना.
यहां यह शंका भी जताई जा रही है कि भले ही ईरान कहता है कि वह परमाणु बम नहीं चाहता, लेकिन वह भविष्य में बम बनाने का विकल्प अपने पास रखना चाहता है.
दोनों पक्षों के बीच अब भी कई बेहद अहम और जटिल मुद्दे सुलझाए जाने बाकी हैं.
जब युद्धविराम खत्म होने वाला था और एक बार फिर बमबारी शुरू होने का खतरा मंडरा रहा था, तब अमेरिकी प्रशासन ने फिलहाल ठहरकर एक कदम पीछे लिया है-और अब आगे क्या होता है, यह देखना दिलचस्प है.
मौजूदा युद्धविराम की शर्तें
युद्धविराम की मुख्य बातें संक्षेप में:
- 8 अप्रैल को ईरान और अमेरिका के बीच शर्तों के साथ दो हफ़्ते का युद्धविराम हुआ था, जो बुधवार को खत्म होने वाला था.
- ट्रंप के मुताबिक़, यह समझौता इस शर्त पर हुआ था कि ईरान होर्मुज़ स्ट्रेट (जलडमरूमध्य) को फिर से खोलेगा, जो तेल और अन्य निर्यात के लिए बेहद अहम समुद्री रास्ता है.
- ईरान ने दो हफ़्तों के लिए होर्मुज़ स्ट्रेट से जहाज़ों के गुजरने की अनुमति दी, जिसकी निगरानी ईरानी सेना कर रही थी.
- अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस शांति वार्ता के पहले दौर की बातचीत के लिए पाकिस्तान गए, लेकिन चंद घंटों की बातचीत के बाद बिना किसी ठोस नतीजे के वॉशिंगटन लौट आए.
- कोई समझौता न होने पर अमेरिका ने ईरान के खिलाफ नौसैनिक नाकेबंदी शुरू कर दी और आर्थिक दबाव भी बढ़ाया, जिसमें विदेशी बैंकों पर सेकेंडरी प्रतिबंधों की चेतावनी शामिल थी.
संघर्ष के दूसरे मोर्चे (इसराइल–लेबनान) से जुड़ी शर्तें:
वहीं लेबनान (जहां हिज़्बुल्लाह सक्रिय है) और इसराइल के बीच भी युद्धविराम हुआ
- 16 अप्रैल को ट्रंप ने इसराइल और लेबनान के बीच 10 दिन का युद्धविराम घोषित किया, जो 1993 के बाद दोनों देशों के बीच पहली सीधी बातचीत के बाद हुआ.
- ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि 'लेबनान में युद्धविराम के बाद' होर्मुज़ स्ट्रेट को पूरी तरह खोल दिया गया है, लेकिन अमेरिका के नाकेबंदी ख़त्म न करने पर ईरान ने अगले ही दिन इसे फिर बंद कर दिया.
- समझौते के तहत, इसराइल को हर समय आत्मरक्षा में सभी जरूरी कदम उठाने का अधिकार दिया गया है-चाहे उसे हमले की आशंका हो या हमला जारी हो.
- इसमें यह भी कहा गया है कि लेबनान को हिज़्बुल्लाह और अन्य 'गैर-राज्य (नॉन स्टेट) सशस्त्र समूहों' को इसराइल पर हमले करने से रोकने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.