पश्चिम बंगाल में मतगणना से पहले 285 बूथों पर फिर मतदान का क्यों लिया गया फ़ैसला

पढ़ने का समय: 4 मिनट

चुनाव आयोग ने शनिवार को पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना ज़िले की फाल्टा विधानसभा सीट के सभी 285 मतदान केंद्रों पर 21 मई को दोबारा कराने का आदेश दिया है. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ यह जानकारी एक अधिकारी ने दी है.

अधिकारी के अनुसार, 29 अप्रैल को दूसरे चरण के तहत फाल्टा में हुए मतदान के दौरान "गंभीर चुनावी अपराध और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमज़ोर करने" की घटनाओं के कारण यह फ़ैसला लिया गया.

चुनाव आयोग ने कहा कि सभी बूथों (सहायक मतदान केंद्रों सहित) पर सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक पुनर्मतदान कराया जाएगा. इसके लिए 'कड़ी सुरक्षा व्यवस्था' की जाएगी ताकि मतदान स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके़ से हो सके.

आयोग के अधिकारी ने बताया कि इस विधानसभा क्षेत्र की मतगणना 24 मई को होगी.

वहीं, पश्चिम बंगाल विधानसभा की दो सीटों (मगराहट पश्चिम और डायमंड हार्बर) के 15 बूथों पर शनिवार दो मई को दोबारा मतदान हुआ था.

इस बीच समाचार एजेंसी एएनआई ने ख़बर दी है कि फाल्टा में भारी सुरक्षा बंदोबस्त किए गए हैं. यहां शनिवार को टीएमसी नेताओं के कथित तौर पर धमकाने और पिटाई करने के बाद स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन किया था.

बता दें कि राज्य में विधानसभा चुनाव दो चरणों में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को हुए थे, जबकि मतगणना 4 मई, सोमवार को होनी है.

वीडियोग्राफ़ी, कड़ी निगरानी के निर्देश

पीटीआई के अनुसार अपने आदेश में चुनाव आयोग ने कहा कि उसने मुख्य निर्वाचन अधिकारी, ज़िला निर्वाचन अधिकारी, रिटर्निंग ऑफिसर और अन्य फील्ड अधिकारियों की रिपोर्ट, पर्यवेक्षकों की टिप्पणियां और उपलब्ध सभी रिकॉर्ड का गंभीरता से अध्ययन करने के बाद यह निर्णय लिया.

पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट में "मतदाताओं को डराने, मतदान केंद्रों के भीतर अनाधिकृत लोगों की मौजूदगी और संभावित छेड़छाड़" के आरोप सामने आए थे.

आयोग के आदेश में कहा गया, "रिपोर्ट की गई घटनाओं की गंभीरता और मतदान प्रक्रिया के दूषित होने को देखते हुए, आयोग 29 अप्रैल को फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में हुए मतदान को शून्य घोषित करता है और सभी मतदान केंद्रों पर नए सिरे से मतदान कराने का आदेश देता है."

चुनाव आयोग ने निर्देश दिया है कि किसी भी तरह की गड़बड़ी की पुनरावृत्ति रोकने के लिए पर्याप्त केंद्रीय बल, माइक्रो-ऑब्ज़र्वर और जहां आवश्यक हो वेबकास्टिंग सुविधा की व्यवस्था की जाए.

इसके साथ ही पूरे मतदान प्रक्रिया की वीडियोग्राफी और कड़ी निगरानी के भी निर्देश दिए गए हैं.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार सबसे गंभीर आरोप ईवीएम से जुड़ा था. बीजेपी नेताओं ने दावा किया था कि बहुत से बूथों में, जिनमें हरिंदांगा हाई स्कूल भी शामिल है, उसमें बीजेपी के चुनाव चिन्ह को आंशिक रूप से ढका गया था जिसकी वजह से मतदाता अपने पसंदीदा विकल्प को चुन नहीं पा रहे थे.

बीजेपी ने किया स्वागत, अभिषेक ने दी चुनौती

फाल्टा सीट पर जहांगीर खान का मुकाबला भाजपा के देबांग्शु पांडा और कांग्रेस के अब्दुर रज्जाक मोल्ला से है. सीपीआई (एम) के संभू नाथ कुर्मी भी चुनावी मैदान में हैं.

भाजपा नेता सुकांत मजूमदार ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह पुनर्मतदान 'फाल्टा की महिलाओं की जीत' है और स्थानीय टीएमसी नेता जहांगीर खान द्वारा की गई कथित अत्याचारों के ख़िलाफ़ एक बड़ा कदम है.

तृणमूल कांग्रेस के अभिषेक बनर्जी ने आरोपों को खारिज कर दिया और पलटवार करते हुए विपक्षी नेताओं को इस सीट पर चुनाव लड़ने और ज़मीन पर अपने दावों का बचाव करने की चुनौती दी.

बता दें कि फाल्टा विधानसभा पहले से चर्चाओं में रहा था.

यहां ऑब्ज़र्वर बनाए गए यूपी के चर्चित आईपीएस अजयपाल शर्मा का एक वीडियो वायरल हुआ था.

इस वीडियो में वह कहते हुए दिखे, "अच्छी तरह से समझ लें, किसी ने बदमाशी की तो कायदे से इलाज किया जाएगा. कहीं से खबर आई कि किसी ने कोई खुराफात की, किसी को परेशानी करने की कोशिश की तो उसकी अच्छी से खबर ली जाएगी. जहांगीर (टीएमसी प्रत्याशी) के घर वाले भी ये सुन लें. उसे बता देना. बार-बार खबरें आ रही हैं कि धमकाया जा रहा है. उसे बता देना, बाद में रोना-पछताना मत."

इस वीडियो के वायरल होने के बाद अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेताओं ने आईपीएस अजयपाल शर्मा की निंदा की थी.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और व्हॉट्सऐप पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)