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वैभव सूर्यवंशी क्यों टीम इंडिया की रेस में शुभमन गिल पर भारी पड़ रहे हैं
- Author, विमल कुमार
- पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिन्दी के लिए
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 6 मिनट
शुक्रवार रात न्यू चंडीगढ़ में खेले गए आईपीएल क्वालिफायर टू में मुक़ाबला सिर्फ दो टीमों, गुजरात टाइटंस और राजस्थान रॉयल्स के बीच नहीं था. ये मुक़ाबला रहा टीम इंडिया के वर्तमान 'प्रिंस'(शुभमन गिल) और भविष्य के उत्तराधिकारी ( वैभव सूर्यवंशी) के बीच.
ये सच है कि इन दोनों बल्लेबाज़ों के खेलने का अंदाज़ बिलकुल जुदा है लेकिन एक बात समान दिखती है, वो है जीत हासिल करने के लिए शांत तरीके वाला ज़ज्बा.
वैभव ने अपने चिर-परिचित अंदाज़ में चौके-छक्के से अपनी पारी शुरू नहीं की. इसकी वजह रही पिच का मिजाज अलग होना और राजस्थान रॉयल्स ने शुरुआत में जल्दी दो विकेट भी गंवा दिए थे.
मुश्किल हालात के बीच वैभव ने परिपक्वता दिखाई और संभल कर खेलते हुए 31 गेंद में अपना अर्द्धशतक पूरा किया. 31 गेंद में अर्द्धशतक बनाना किसी भी बल्लेबाज़ के लिए एक अच्छा स्कोर कहा जा सकता है, लेकिन वैभव का आईपीएल में ये सबसे धीमा अर्द्धशतक रहा
अर्द्धशतक पूरा करने के तुरंत बाद वैभव ने उसी अंदाज़ में बल्लेबाज़ी की, जिसके लिए उन्हें जाना जाता है.
उन्होंने अगली 16 गेंद में 46 रन जड़ दिए. हालांकि एक बार फिर से वो शतक बनाने से चुक गए.
वैभव ने 47 गेंद में 97 रन बनाए और उनकी पारी में 7 छक्के शामिल रहे. इस पारी के दौरान भी वैभव का स्ट्राइक 200 से ज्यादा का ही रहा.
छक्के लगाने के मामले में सभी पर भारी वैभव
लेकिन ये बात साफ़ है कि मुश्किल हालात के बीच वैभव ने जिस तरह से अपनी 96 रन की पारी को बिल्ड किया, उससे निश्चित तौर पर सेलेक्टर्स के ऊपर उन्हें चुनने का दबाव बढ़ेगा.
इस सीजन में वैभव अभी तक सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज हैं. उन्होंने 776 रन बनाए हैं और वो भी 237.3 के स्ट्राइक रेट से.
आईपीएल 2026 में वैभव ने जिस तरह का प्रदर्शन किया है उससे वह आयरलैंड दौरे के लिए टीम इंडिया में सेलेक्ट होने के नजदीक आ चुके हैं.
वहीं अजीब विडंबना है कि कप्तानी पारी और शतक बनाने के बावजूद शुभमन गिल के लिए फिर से टी20 टीम में ओपनर के तौर पर वापस आना आसान नहीं दिखता है.
क्योंकि अब सेलेक्टर्स के पास वैभव सूर्यवंशी जैसे विकल्प हैं.
ऐसा नहीं है कि गिल के लिए मौजूदा आईपीएल किसी भी तरीके से उन्नीस रहा है. शुभमन गिल ने इस सीजन में 722 रन बनाए हैं और उनका औसत वैभव की तरह करीब 48 का रहा है.
लेकिन पूरे टूर्नामेंट में 15 साल के वैभव अकेले वैभव राजस्थान रॉयल्स को आगे बढ़ाते हुए दिखे.
वहीं गिल को साई सुदर्शन का साथ मिला, जो इस सीज़न 700 से ज़्यादा रन बनाने वाले तीसरे बल्लेबाज़ भी हैं.
इसके अलावा गिल और वैभव की बल्लेबाजी में दो और फ़र्क साफ़ रहे, वो थे छक्के लगाने और तेजी से रन बनाने की क्षमता.
वैभव ने करीब 237 के स्ट्राइक से इस सीजन में रन बनाए और 72 छक्के लगाए. वहीं गिल के बल्ले से करीब 163 के स्ट्राइक रेट से रन निकले हैं और उन्होंने 33 छक्के ही लगाए हैं.
जिस तरह से ज़बरदस्त दबाव वाले मैच में गिल और साई की जोड़ी ने शतकीय साझेदारी की उससे लगा ही नहीं ये नॉक आउट मुकाबला है.
13 ओवर से पहले ही 167 रनों की इस साझेदारी ने मैच को एकतरफ़ा बना दिया और 7 विकेट की जीत महज़ औपचारिकता दिखी.
होल्डर की कसी हुई गेंदबाज़ी
बहरहाल, इस मैच में तनाव और संघर्ष की शुरुआत टॉस के साथ ही हो गई. दोनों टीमें शायद इस पिच पर पहले बल्लेबाज़ी करना चाहती थी.
लेकिन टॉस दोबारा हुआ क्योंकि मैच रेफरी शोर के चलते रियान पराग के कॉल को सुन नहीं पाये.
टॉस जीतने के बाद रॉयल्स ने पहले बल्लेबाज़ी करने का फैसला किया. सूर्यवंशी को अपनी शानदार पारी के दौरान सिर्फ कुछ समय के लिए रवींद्र जडेजा (35 गेंदों पर 45 रन) और डोनोवन फरेरा (13 गेंदों पर 38 रन) का साथ मिला.
लेकिन निचले क्रम में दासुन सनाका (9 गेंदों पर सिर्फ 3 रन) की पारी हैरान करने वाली रही.
टेस्ट मैच की शैली में सनाका को दो गेंदों को 'वेल लेफ्ट' करना भी अजीब रहा और शायद इस धीमी से राजस्थान रॉयल्स को नुकसान पहुंचा और वो 214 से ज्यादा बड़ा स्कोर खड़ा नहीं कर पाई.
हालांकि रनों की बौछार वाले मैच का मतलब ये नहीं है कि आप गुजरात के गेंदबाज़ और वो भी ख़ास तौर पर जेसन होल्डर की तारीफ नहीं करेंगे. उन्होंने 4 ओवर में 27 रन देकर 2 विकेट लिए.
जेसन होल्डर की भले ही इस मैच में ज्यादा चर्चा नहीं हो रही हो, लेकिन यह साफ़ है कि उनकी गेंदबाज़ी बेहद निर्णायक साबित हुई और गुजरात को फाइनल में पहुंचाने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई.
कगिसो रबाडा भी गुजरात के लिए अहम साबित हुए. उन्होंने चार ओवर में 35 रन खर्च कर दो विकेट लिए, जिसमें एक विकेट सूर्यवंशी का भी रहा.
लेकिन स्पिन के लिए मददगार माने जाने वाले विकेट पर जब राशिद ख़ान ने सिर्फ 2 ओवर ही डाले वो भी 45 रन की धुनाई.
हालांकि तभी ये संकेत भी मिले कि इस पिच पर दूसरी पारी में बल्लेबाजी करना ज्यादा मुश्किल नहीं होगा.
215 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए जब शुभमन गिल और साई सुदर्शन की जोड़ी ने 167 रन जोड़ डाले तभी मैच का नतीजा लगभग तय हो गया.
ये 11वां मौका रहा जब इस जोड़ी ने आईपीएल में शतकीय साझेदारी पूरी की. आईपीएल के इतिहास में गुजरात ने कभी भी 215 या उससे ज्यादा के स्कोर का पीछा करते हुए जीत हासिल नहीं की थी.
लेकिन शुक्रवार को गुजरात ने ये काम बेहद आसानी से किया. अब रविवार को अहमदाबाद में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के ख़िलाफ़ उनकी दावेदारी को खारिज नहीं किया जा सकता है.
गिल के सामने अब फाइनल की चुनौती
हकीकत तो ये है कि प्ले ऑफ में किसी भी टीम ने आईपीएल में इतने बड़े स्कोर का पीछा नहीं किया था.
इसमें निश्चित तौर पर कप्तान गिल की पारी का सबसे बड़ा योगदान रहा क्योंकि किसी भी कप्तान ने आईपीएल प्ले ऑफ में शतक नहीं लगाया था.
मैच खत्म होने के बाद गिल के माता-पिता भी स्टैंड में खुश नज़र आ रहे थे तो वैभव सूर्यवंशी अकेले अपने आंसूओं को रोकने का प्रयास कर रहे थे.
गिल और वैभव की बातचीत में क्या हुआ, ये शायद कोई नहीं जानता.
लेकिन अगर ये कहा जाए कि गिल के मन में ये ख्याल आया हो कि काश मैं भी इतनी ही स्वछंद आक्रामकता से टी20 क्रिकेट खेल पाऊं, तो वैभव के मन में भी ये सोच आ सकती है कि वो कैसे गिल से शांत मिजाज से मैच जिताने वाली पारी की कला सीख सकतें हैं.
ना सिर्फ गिल ने, बल्कि उनकी टीम गुजरात में भी निरंतरता दिखती है. आखिर 5 सालों के दौरान कौन सी टीम 3 फाइनल खेलती है?
गिल ने अपनी कप्तानी और बल्लेबाज़ी से ये दिखाया है कि भविष्य की चुनौती को तो उन्होंने फिलहाल रोक दिया है.
लेकिन क्या वो अपने आदर्श 'किंग' कोहली के सामने अपनी टीम के विजय रथ को रोक पाने में कामयाब होंगे? रविवार को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में हर किसी को ये जवाब मिल जाएगा.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.