बीजेपी नेताओं के घरों में कैसे पहुँची जेन ज़ी आंदोलन की आँच, उनकी बेटियां बनीं 'बाग़ी'

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दिल्ली के जंतर मंतर पर चले जेन ज़ी के 37 दिनों के आंदोलन में बीजेपी के भीतर से भी आवाज़ें उठीं.
न केवल बीजेपी के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी बल्कि कुछ बीजेपी नेताओं की बेटियां भी खुलकर सामने आईं.
मुरली मनोहर जोशी अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में शिक्षा मंत्री थे. उन्होंने 23 जुलाई को युवाओं के साथ पुलिस की सख़्ती पर सवाल उठाया था.
मुरली मनोहर जोशी ने कहा था, ''मुझे य़ह देखकर अत्यन्त पीड़ा हुई है कि महिलाओं पर निर्मम बल प्रयोग किया गया.''
लेकिन मामला यहीं तक नहीं रहा. असम गण परिषद (एजीपी) के एक मंत्री की बेटी, ओडिशा से बीजेपी की एक वरिष्ठ सांसद की बेटी और उत्तर प्रदेश में बीजेपी के एक पूर्व विधायक की बेटी उन लोगों में शामिल हैं, जिन्होंने जेन ज़ी के आंदोलन का खुलकर समर्थन किया.
कहा जा रहा है कि कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन का असर बीजेपी नेताओं को घरों तक पहुँच गया था. आंदोलन के समर्थक बीजेपी नेताओं के घरों में भी दिखे और आंदोलन में उनकी बेटियां शामिल भी हुईं.
23 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी के धरने के समर्थन में गुवाहाटी में हुए प्रदर्शन में शामिल लोगों में असम सरकार के कैबिनेट मंत्री और असम गण परिषद (एजीपी) के नेता केशव महंता की बेटी दिबीसा भी थीं.
पिछले हफ़्ते शनिवार को ओडिशा से बीजेपी सांसद अपराजिता सारंगी की बेटी अर्चिता सचिन राहर ने इंस्टाग्राम पर एक स्टोरी साझा की, जिसे धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े का जश्न मनाने के तौर पर देखा गया.
उत्तर प्रदेश के बीजेपी के पूर्व विधायक विक्रम सिंह की बेटी यशस्विनी राजे सिंह भी सोशल मीडिया पर पार्टी की आलोचना करती रही हैं. ये तीनों जेन-ज़ी पीढ़ी से हैं, यानी वे लोग जिनका जन्म लगभग 1997 से 2012 के बीच हुआ है.

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यशस्विनी सिंह
यशस्विनी सिंह ने 29 जुलाई को क़तर के प्रसारक अल जज़ीरा से इस मामले में बात की है.
यशस्विनी ने धर्मेंद्र प्रधान के त्यागपत्र पर कहा, "इस्तीफ़े को निर्णायक मोड़ के रूप में देखना बहुत अदूरदर्शी है. त्यागपत्र की भाषा में पछतावा जैसी कोई चीज़ नहीं है. जवाबदेही बिल्कुल नहीं है. उसकी भाषा ऐसी है, जैसे उन्होंने शहादत दी हो.''
यशस्विनी सिंह ने कहा, "सीजेपी ने ऐसे बड़ी संख्या में ग़ैर-राजनीतिक लोगों को एकजुट करने का बहुत-बहुत बेहतरीन काम किया. ऐसे लोग आमतौर पर इनोवेटिव मैसेजिंग, मीम्स और कॉन्टेंट के ज़रिए ऐसी बातचीत से दूर रहते हैं. उनका मुख्य फोकस इंस्टाग्राम था, जो कि बहुत बढ़िया था क्योंकि वहीं पर हमने विरोध प्रदर्शन का आम लोगों का इतना कवरेज देखा. यहाँ तक कि जिस व्यक्ति को अब शिक्षा मंत्री नियुक्त किया गया है, ईमानदारी से कहूँ तो एक बहुत ही भद्दे मज़ाक जैसा लगता है."
अपने पिता के बीजेपी में होने और उनकी राजनीति से बिल्कुल अलग राह लेने के बारे में यशस्विनी ने कहा, "मुझे नहीं लगता कि मैं ढोंगी या पाखंडी हूँ. मैं आर्थिक रूप से किसी पर निर्भर नहीं हूँ. मैं अपने दम पर अकेले रहती हूँ. मैं पिछले साढ़े तीन साल से भारत में हूँ और अकेले रह रही हूँ.''
''मैं उस तरह के माहौल में बिल्कुल भी शामिल न होने का विकल्प चुनती हूँ. मैं सालों से फ़तेहपुर नहीं गई हूँ. इसलिए, मैं उन सब बातों और ख़ुद के बीच एक बहुत-बहुत बड़ी दूरी बनाए रखती हूँ और इसी वजह से मैं बिना ढोंगी महसूस किए यह सब बातें कह पाती हूँ."
विक्रम सिंह उत्तर प्रदेश के फ़तेहपुर सदर विधानसभा क्षेत्र से पूर्व बीजेपी विधायक रहे हैं. वह फ़तेहपुर से दो बार विधायक रह चुके हैं. विक्रम सिंह 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार से चुनाव हार गए थे लेकिन अब भी वह फ़तेहपुर में एक सक्रिय बीजेपी नेता हैं.

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दिबीसा महंता
असम सरकार के कैबिनेट मंत्री और असम गण परिषद (एजीपी) के वरिष्ठ नेता केशव महंता की बेटी दिबीसा महंता उस समय विवादों में आ गईं, जब गुवाहाटी में कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में हुए एक प्रदर्शन में शामिल हुईं. कई वीडियो में दिख रहा है कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ नारे लगा रही हैं. उनके पिता केशव महंता असम गण परिषद (एजीपी) के नेता हैं और असम में बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में राजस्व मंत्री हैं.
अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी एक रिपोर्ट में लिखा है, ''दिबीसा ने पिछले वर्ष ब्रिटेन से दो पोस्ट ग्रैजुएट डिग्रियां पूरी की थीं. वह वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ नारे लगाती और "इंसाफ़" की मांग करती सुनाई देती हैं.''
एक अन्य वीडियो में वह कहती हैं, "यह बहुत दुखद है और वहां जो हिंसा हुई, उसे लेकर मैं कितना बुरा महसूस कर रही हूँ. इसे शब्दों में बयान नहीं कर सकती. छात्र सिर्फ़ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना चाहते थे, लेकिन वह इतना हिंसक हो गया. लाठीचार्ज हुआ, आंसू गैस छोड़ी गई, सब कुछ हुआ. लेकिन मैं इतना ज़रूर कहना चाहती हूँ कि उस दिन वहाँ पहुँचे हर छात्र पर मुझे गर्व है. उन्होंने जिस तरह बहादुरी दिखाई, उसने मुझे भी यहाँ आकर उनके साथ खड़े होने की प्रेरणा दी."
बीजेपी सरकार के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन में अपने ही मंत्री की बेटी के शामिल होने का सवाल पिछले रविवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा से भी पूछा गया. इसके जवाब में उन्होंने कहा था, "मेरे बच्चे क्या कहते हैं, उसके लिए मैं कैसे जवाबदेह हो सकता हूँ?''
''मेरा अपना भाई भी मेरी किसी बात से सहमत नहीं होता. मेरे बच्चे भी मेरी कई बातों से सहमत नहीं होते. यहाँ मौजूद जो भी पत्रकार बीजेपी के ख़िलाफ़ रील बनाते हैं, उनके माता-पिता भी बीजेपी के ही समर्थक हैं. उसने मोदी जी के ख़िलाफ़ बात कही है और मुझे उसका दुख है. अगर कभी उससे मुलाक़ात हुई, तो मैं उससे भी इस बारे में बात करूंगा."
उन्होंने कहा था, "अगर कल मेरा बेटा भी कुछ ग़लत कह दे, तो इसमें हैरानी नहीं होनी चाहिए. मेरा बेटा आगे चलकर वकील बनेगा और हो सकता है कि वह उन लोगों की पैरवी करे जिन्हें मैं पसंद नहीं करता. जब बच्चे बड़े होकर वयस्क हो जाते हैं, तो उनके कामों को उनके माता-पिता से नहीं जोड़ा जाना चाहिए. उसने जो कहा, वह ग़लत था, लेकिन उसके लिए हम उस लड़की से बात करेंगे. उसके पिता को क्यों परेशान किया जाए?"

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बीजेपी सांसद अपराजिता सारंगी की बेटी अर्चिता सचिन राहर
भुवनेश्वर से बीजेपी सांसद अपराजिता सारंगी की बेटी अर्चिता सचिन राहर की एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर भी विवाद हुआ. समाचार पीटीआई के अनुसार, अर्चिता की पोस्ट ने ओडिशा में पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच नाराज़गी पैदा कर दी.
अर्चिता राहर ने इंस्टाग्राम पर तिरंगे के इमोजी के साथ लिखा था- "जय हिंद! नीट पेपर लीक को लेकर हुए बड़े छात्र आंदोलन के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफ़ा दे दिया." दूसरी ओर, उनकी माँ समेत ओडिशा बीजेपी के कई नेताओं ने धर्मेंद्र प्रधान के प्रति सहानुभूति व्यक्त की थी.
पीटीआई के अनुसार, बीजेपी नेताओं ने अर्चिता राहर की पोस्ट की आलोचना की. बीजेपी नेता जगन्नाथ प्रधान ने कहा, "धर्मेंद्र प्रधान इस मिट्टी के बेटे हैं. उनके इस्तीफ़े से हमें दुख पहुँचा है. ओडिशा के लोगों ने बिहार की बेटी (अपराजिता सारंगी) का स्वागत किया और उन्हें दो बार सांसद बनाया."
उन्होंने कहा था, "अपराजिता सारंगी को अपने परिवार के सदस्यों पर नियंत्रण रखना चाहिए. उनकी बेटी ने धर्मेंद्र प्रधान के ख़िलाफ़ जो प्रतिकूल टिप्पणी की है, उसके लिए उन्हें ओडिशा की जनता से माफ़ी मांगनी चाहिए."
अपराजिता सारंगी ने अपनी बेटी की इंस्टाग्राम स्टोरी को लेकर उठे विवाद पर सफ़ाई देते हुए कहा कि पोस्ट अनजाने में शेयर हो गई थी.
हालांकि अर्चिता ने इसके बाद एक और पोस्ट की थी, जिसमें लिखा था, "डीपी के पीए के लिए, जो निश्चित रूप से मेरी माँ को मैसेज करके मुझसे पिछली स्टोरी हटाने के लिए कहेंगे (ऐसा पहले भी हो चुका है) परेशान मत होइए. मैं इसे नहीं हटाऊंगी. जय जगन्नाथ! जय हिंद." हालांकि बाद में यह स्टोरी हटा दी गई.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक़ इन पोस्टों के बारे में बीजेपी सांसद ने कहा, "अर्चिता जेन-ज़ी है और उसने अपने दोस्तों के साथ मिलकर यह स्टोरी साझा की थी. जब मैंने उससे पूछा तो उसे अपनी ग़लती का अहसास हुआ और उसने इसे हटा दिया."
उन्होंने कहा, "उसने बताया कि यह स्टोरी अनजाने में पोस्ट हो गई थी. उस समय मैं ओडिशा में अपने संसदीय क्षेत्र में थी और वह दिल्ली में थी."
पिछले हफ़्ते शनिवार रात अपराजिता सारंगी ने भी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े पर एक्स पर एक पोस्ट किया था. उन्होंने लिखा, "धर्मेंद्र प्रधान जी ने अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया. नैतिक ज़िम्मेदारी स्वीकार करते हुए इस्तीफ़ा देना बहुत साहस की बात है. इस कठिन समय में मैं उनके साथ खड़ी हूँ. आने वाले दिनों के लिए मैं उन्हें शुभकामनाएं देती हूँ. भगवान जगन्नाथ उन पर अपनी कृपा बनाए रखें."
ओडिशा कैडर की पूर्व आईएएस अधिकारी अपराजिता सारंगी नवंबर 2018 में बीजेपी में शामिल हुई थीं और इसमें धर्मेंद्र प्रधान की भूमिका अहम मानी जाती है.
अपराजिता सारंगी ने नई दिल्ली में पार्टी के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के आवास पर आयोजित एक कार्यक्रम में औपचारिक रूप से बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की थी.
इस अवसर पर तत्कालीन केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, ओडिशा बीजेपी अध्यक्ष बसंत पांडा और पार्टी के ओडिशा प्रभारी अरुण सिंह भी मौजूद थे.
1994 बैच की आईएएस अधिकारी अपराजिता सारंगी वर्ष 2013 से केंद्र सरकार में डेपुटेशन पर थीं.
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