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इसराइल: नेतन्याहू को सत्ता से हटाने के लिए दो धुर विरोधी नेताओं ने हाथ मिलाया
- Author, बीबीसी मॉनिटरिंग
- पढ़ने का समय: 4 मिनट
इसराइल में इसी साल होने वाले संसदीय चुनावों में प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू को हराने के लिए दो राजनीतिक दलों ने विलय करके एक नई पार्टी बनाई है.
पूर्व दक्षिणपंथी प्रधानमंत्री नफ़ताली बेनेट और मध्यमार्गी विपक्षी नेता याएर लापिड ने अपनी पार्टियों का विलय कर एक नई पार्टी याचाड बनाने की घोषणा की है, जिसका मतलब होता है 'साथ साथ'.
इसराइली अख़बारों में 27 अप्रैल को यह ख़बर सुर्खियों में रही.
इस फ़ैसले से याचाड सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी हो गई है और बेनेट, प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी बन गए हैं.
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इसराइली मीडिया के कई आउटलेट्स ने इस विलय को 'नाटकीय' बताया और इसके पीछे नेतन्याहू को सत्ता से बाहर करने का मक़सद कहा. लगभग सभी बड़े अख़बारों में बेनेट और लापिड की फ़ोटो पहले पन्ने पर छपी.
इससे पहले भी 2021 में नेतन्याहू को सत्ता से बाहर करने के लिए बेनेट और लापिड ने हाथ मिलाया था, हालांकि नेतन्याहू को बाहर करने के एक साझा मक़सद के लिए बना उनका नाज़ुक गठबंधन जल्द ही बिखर गया.
इसराइली मीडिया में क्या कहा जा रहा है
लोकप्रिय मध्यमार्गी चैनल 12 न्यूज़ ने बेनेट के हवाले से कहा, "हम सिर्फ़ जॉयनिस्ट पार्टियों पर भरोसा करेंगे. अरब पार्टियां जॉयनिस्ट नहीं हैं और इसलिए हम उन पर भरोसा नहीं करेंगे."
हाल के महीनों में चुनावी अभियान और मीडिया बहस में फ़लस्तीनी दलों को गठबंधन सरकारों से बाहर रखने की मांग एक प्रमुख मुद्दा बन गई है.
उदारवादी अख़बार हारेत्ज़ के अनुसार, इसराइल के अगले चुनाव की प्रक्रिया प्रभावी रूप से पहले ही शुरू हो चुकी है. अख़बार ने लिखा, "क़ानूनी रूप से चुनाव ठीक छह महीने बाद होने हैं, लेकिन चुनाव प्रक्रिया आज से ही शुरू हो गई है."
रिपोर्ट में कहा गया कि नफ़ताली बेनेट और याएर लापिड ने पहले गठबंधन में चुनाव लड़ने की संभावना कम होने की बात कही थी, लेकिन बाद में "वास्तविक स्थिति के दबाव" में अपना रुख़ बदल लिया.
हारेत्ज़ के मुताबिक, बेनेट ने अपने नेतृत्व में तेज़ी से विलय की वकालत की और कहा कि उन्हें "दक्षिणपंथ से हर संभव वोट लाना है." रिपोर्ट के अनुसार, बेनेट ने कहा, "मैं जीतने के लिए आया हूं."
वहीं, लापिड का शुरू में मानना था कि यह अभी जल्दबाज़ी होगी. वह इंतजार करना चाहते थे कि बिन्यामिन नेतन्याहू चुनाव लड़ेंगे या नहीं और राजनीतिक स्थिति कैसे बदलती है.
हारेत्ज़ ने यह भी बताया कि संभावित गठबंधन अब गैडी आईसेनकोट के फ़ैसले का इंतजार कर रहा है, जिनके शामिल होने की संभावना जताई जा रही है.
दक्षिणपंथी और नेतन्याहू समर्थक चैनल 14 न्यूज़ ने इस विलय को कम महत्व देते हुए कहा कि यह लापिड और बेनेट के लिए अपने राजनीतिक करियर को बचाने की कोशिश है. एक टिप्पणीकार ने कहा कि सर्वे के मुताबिक़ उनकी पार्टियां चुनावी सफलता को हासिल नहीं कर पाएंगी.
हालांकि, यह दावा मुख्यधारा के हालिया सर्वे के उलट है, जिनमें बेनेट की पार्टी को नेतन्याहू की लिकुड पार्टी का सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी बताया गया है.
बेनेट के पुराने बयानों पर विवाद
इस कदम के बाद सोशल मीडिया पर भी काफ़ी प्रतिक्रियाएं आने लगी हैं, जहां यूज़र्स ने बेनेट के पुराने बयान फिर से साझा किए. इन बयानों में उन्होंने कहा था कि वह लापिड को प्रधानमंत्री के रूप में समर्थन नहीं देंगे और इसे अपने उसूलों के ख़िलाफ़ बताया था.
एक्स पर साझा किए गए एक वीडियो में बेनेट लापिड से कहते नजर आते हैं कि कोई भी उनके साथ बैठना नहीं चाहेगा. वीडियो पोस्ट करने वाले यूज़र ने लिखा, "उन्हें इस तरह फिर से झूठ बोलते देखना दुखद है." उसने कहा कि "उनमें क़ाबिलियत थी."
एक अन्य वीडियो में बेनेट के पुराने बयानों का संकलन साझा किया गया है, जिसमें उन्होंने खुद को दक्षिणपंथी नेता बताया और कहा, "मैं लापिड को प्रधानमंत्री नहीं बनने दूंगा."
बेनेट पहले अतिराष्ट्रवादी न्यू राइट पार्टी के सह-नेता रह चुके हैं और उससे पहले वह जुईश होम पार्टी का नेतृत्व कर चुके हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.