दिल के अंदर ही बन जाएगा पेसमेकर !

जैविक पेसमेकर, सेडार्स सिनाई
    • Author, हेलेन ब्रिग्स
    • पदनाम, हेल्थ एडिटर, बीबीसी न्यूज वेबसाइट
  • प्रकाशित

अपने ही शरीर में खुद का पेसमेकर तैयार करने की कल्पना जल्द ही हक़ीक़त में बदल सकती है. वैज्ञानिकों ने सुअरों में इसके कामयाब प्रयोग किए हैं.

वैज्ञानिकों ने हृदय की कोशिकाओं में एक जीन डालकर उन्हें पेसमेकर कोशिका में बदल दिया.

लॉस एंजेलिस के सिडार्स-सिनाई हार्ट इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों के अनुसार 'जैविक पेसमेकर एक बीमारी का प्रभावी ढंग इलाज करने में' कामयाब रहा है.

<link type="page"><caption> ब्रिटिश हार्ट फ़ाउंडेशन</caption><url href="www.bhf.org.uk/#&panel1-2" platform="highweb"/></link> के अनुसार <link type="page"><caption> साइंस ट्रांसलेशनल मेडिसिन</caption><url href="http://stm.sciencemag.org/" platform="highweb"/></link> में प्रकाशित शोध को प्रयोग में आने में 'अभी बहुत समय लगेगा.'

शोधकर्ताओं ने ऐसे सुअरों में एक जीन को डाला जिन्हें हृदयगति धीमी रहने की बीमारी थी.

इस जीन थैरेपी ने करोड़ों की संख्या में मौजूद दिल की मांसपेशियों में से कुछ को बहुत दुर्लभ उन विशेष कोशिकाओं में बदल दिया जो दिल की धड़कन को एक समान रखती हैं.

पारंपरिक पेसमेकर

जैविक पेसमेकर कोशिकाओं की तस्वीर
इमेज कैप्शन, (जैविक पेसमेकर कोशिकाओं की तस्वीर)

शोध दल का नेतृत्व करने वाले डॉक्टर एडुआर्डो मार्बन ने कहा, "पहली बार हम एक जैविक पेसमेकर तैयार करने में कामयाब हुए हैं जिसमें कम से कम बाहरी दखल दिया गया है. इससे यह भी पता चला है कि जैविक पेसमेकर रोज़मर्रा की ज़िंदगी का बोझ उठा सकता है."

पारंपरिक पेसमेकर एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण होता है जिसे छाती के अंदर लगाया जाता है और ये अनियमित हृदयगति को नियंत्रित करता है.

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