झारखंड: 'विधानसभा मार्च' के दौरान कैसा है माहौल, तस्वीरों में देखें
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इमेज कैप्शन, अभ्यर्थी पुराने विधानसभा परिसर से नए विधानसभा भवन की ओर शांतिपूर्ण मार्च कर रहे हैं
झारखंड की राजधानी रांची में जेपीएससी और जेएसएससी-सीजीएल परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में अभ्यर्थियों का आंदोलन 17वें दिन भी जारी है.
सरकार के साथ रविवार को बातचीत होने के बाद सोमवार को अभ्यर्थी पुराने विधानसभा परिसर से नए विधानसभा भवन की ओर शांतिपूर्ण मार्च कर रहे हैं.
विधानसभा मार्च के दौरान की कुछ तस्वीरें भी सामने आई हैं-
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इमेज कैप्शन, विधानसभा मार्च में शामिल होने वाले प्रदर्शनकारियों से पुलिस ने शांतिपूर्ण तरीक़ा अपनाने की अपील की है
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इमेज कैप्शन, सरकार और आंदोलनकारियों के बीच रविवार को रांची स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में बातचीत हुई जिसमें 14वीं जेपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा रद्द करने और एक उच्च स्तरीय जांच कमिटी बैठाने की मांग पर सहमति बनी है
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इमेज कैप्शन, झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने रविवार को ही झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) के तीन सदस्यों का इस्तीफ़ा मंज़ूर कर लिया है
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इमेज कैप्शन, देवेंद्रनाथ महतो गुट के प्रवक्ता रविंद्र रवि ने कहा कि स्टूडेंट्स परीक्षाओं की जांच सीबीआई से कराने की माँग पर अड़े हुए हैं और सोमवार को विधानसभा का शांतिपूर्ण घेराव करने का एलान किया है
इसराइली मीडिया का दावा- खुफ़िया एजेंसी मोसाद ने दो सीनियर अफ़सरों को हटाया, ये है वजह
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इमेज कैप्शन, इसराइली मीडिया की रिपोर्ट में दोनों अधिकारियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं (फ़ाइल फ़ोटो: बिन्यामिन नेतन्याहू)
इसराइल की इंटेलिजेंस एजेंसी मोसाद के चीफ़ रोमन गॉफ़मैन ने अपने दो वरिष्ठ अधिकारियों को उनके पदों से हटा दिया है.
इसराइली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, इन दोनों अधिकारियों ने ईरान की सरकार को सत्ता से हटाने का कथित प्लान तैयार किया था, जो नाकाम साबित हुआ.
इसराइली चैनल-12 की रिपोर्ट के अनुसार, हटाए गए अधिकारियों में से एक दिसंबर 2015 से मोसाद के इंटेलिजेंस डिपार्टमेंट का प्रमुख था, जबकि दूसरा अधिकारी एजेंसी के ईरान मामलों से जुड़े विभाग का प्रमुख था.
हालांकि, इसराइली मीडिया की रिपोर्ट में दोनों अधिकारियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक़, दोनों अधिकारियों ने ईरान की सरकार को सत्ता से हटाने के लिए एक ऑपरेशनल प्लान तैयार करने में अहम भूमिका निभाई थी. कथित तौर पर इस योजना में कुर्द समूहों की मदद लेने और पूरे ईरान में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों को भड़काने की रणनीति शामिल थी.
इसराइली मीडिया के अनुसार, इसी योजना का ज़िक्र पहले द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में भी किया गया था.
दावा है कि इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी यह योजना दिखाई थी. उस समय नेतन्याहू ट्रंप को ईरान पर सैन्य कार्रवाई के लिए राज़ी करने की कोशिश कर रहे थे.
रिपोर्ट के मुताबिक़, इस योजना के तैयार होने के समय मोसाद के प्रमुख डेविड बार्निया थे. बार्निया की जगह जून 2026 में रोमन गॉफ़मैन ने ली.
झारखंड: विधानसभा मार्च के बीच पुलिस ने रोका तो क्या होगा, स्टूडेंट लीडर ने दिया जवाब
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जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों को लेकर सोमवार को विधानसभा मार्च और घेराव का आह्वान किया है.
छात्र नेता रविंद्र पासवान ने कहा कि पुलिस प्रशासन जहां भी उन्हें रोकेगा, वे वहीं बैठकर प्रदर्शन करेंगे.
उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, "हमारा आंदोलन सांकेतिक है और पूरे झारखंड के लोगों को आज के विधानसभा मार्च और घेराव की जानकारी है."
रविंद्र पासवान ने कहा कि प्रदर्शन के ज़रिए सरकार को यह संदेश देना है कि अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर एकजुट और दृढ़ हैं.
उन्होंने चेतावनी दी, "अगर सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो आने वाले समय में इससे भी बड़ा आंदोलन हो सकता है."
पासवान ने आरोप लगाया कि जिन परीक्षाओं को लेकर छात्रों ने सवाल उठाए हैं, उनमें अनियमितताएं सामने आई हैं. उन्होंने विशेष रूप से सीजीएल परीक्षा का ज़िक्र करते हुए इसमें बड़ी गड़बड़ी का आरोप लगाया.
इससे पहले एडीजी (मुख्यालय) मनोज कौशिक ने अभ्यर्थियों से शांतिपूर्वक मार्च निकालने की अपील की थी.
साथ ही उन्होंने कहा, "छात्रों के प्रस्तावित विधानसभा मार्च के दौरान अशांति की आशंका को देखते हुए पुलिस प्रशासन को अलर्ट पर रखा गया है."
श्रीलंका टेस्ट सिरीज़ में जगह मिलने के बाद सरफ़राज़ ख़ान ने सोशल मीडिया पर क्या पोस्ट किया
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इमेज कैप्शन, टीम में शामिल किए जाने के बाद सरफ़राज़ ख़ान ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर की (फ़ाइल फ़ोटो)
श्रीलंका के ख़िलाफ़ होने वाली दो मैचों की टेस्ट सिरीज़ से साई सुदर्शन बाहर हो गए हैं. उनकी जगह सरफ़राज़ ख़ान को भारतीय टीम में शामिल किया गया है.
टीम में शामिल किए जाने के बाद सरफ़राज़ ख़ान ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर की. पोस्ट में उन्होंने दो तस्वीरें साझा की हैं, जिनमें वह टीम इंडिया की ट्रैवलिंग जर्सी में नज़र आ रहे हैं. एक तस्वीर में सरफ़राज़ अपने पिता के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं.
सरफ़राज़ ने इस पोस्ट के साथ कोई कैप्शन नहीं लिखा. उन्होंने सिर्फ़ इमोजी का इस्तेमाल किया, जिसमें भारतीय झंडे की इमोजी भी शामिल है.
इससे पहले, जब उन्हें टीम में जगह नहीं मिली थी, तब सरफ़राज़ ने इंस्टाग्राम स्टोरी के ज़रिए अपना दुख ज़ाहिर किया था.
उन्होंने लिखा था, “शायद मैं फिट नहीं बैठता, लेकिन मैं अपनी पूरी ताकत से लड़ूंगा.”
गौरतलब है कि भारत और श्रीलंका के बीच दो मैचों की टेस्ट सीरीज़ 15 अगस्त से 27 अगस्त 2026 तक श्रीलंका में खेली जाएगी.
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चीन में तूफ़ान डॉल्फ़िन ने दी दस्तक, 10 लाख से ज्यादा लोग सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए गए
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इमेज कैप्शन, तूफ़ान के चलते राजधानी शंघाई समेत कई इलाक़ों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है
चीन के पूर्वी हिस्से में तूफ़ान डॉल्फ़िन के दस्तक देने के बाद 10 लाख से ज़्यादा लोगों को उनके घरों से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है.
तूफ़ान के चलते राजधानी शंघाई समेत कई इलाक़ों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है.
मौसम विभाग के मुताबिक़, डॉल्फ़िन तूफ़ान ने रविवार शाम क़रीब 5:30 बजे झेजियांग प्रांत के युहुआन में पहली बार दस्तक दी. इस दौरान तूफ़ान की अधिकतम रफ़्तार 150 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई. इसके क़रीब एक घंटे बाद तूफ़ान ने वेंझोउ शहर में दूसरी बार लैंडफ़ॉल किया.
तूफ़ान के कारण अकेले शंघाई में क़रीब 1,400 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं. इससे बड़ी संख्या में यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा.
चीनी अधिकारियों ने तूफ़ान डॉल्फ़िन को लेकर पहले सबसे उच्च स्तर की रेड अलर्ट चेतावनी जारी की थी. हालांकि, सोमवार सुबह इसकी तीव्रता कम होने के बाद अलर्ट को घटा दिया गया.
मौसम विभाग के अनुसार, तूफ़ान अब चीन के अंदरूनी इलाक़ों की ओर बढ़ रहा है. अधिकारियों ने बुधवार तक मूसलाधार बारिश, बाढ़ और भूस्खलन की आशंका को लेकर चेतावनी जारी की है.
शानडोंग, हेनान, हुबेई, अनहुई, जिआंगसू और झेजियांग प्रांतों के साथ शंघाई में सोमवार को भी भारी बारिश का अनुमान जताया गया है. स्थानीय प्रशासन ने लोगों से ग़ैर-ज़रूरी कामों के लिए बाहर न जाने की अपील की है.
झारखंड: आंदोलन कर रहे स्टूडेंट आज निकालेंगे विधानसभा मार्च, पुलिस ने क्या कहा
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इमेज कैप्शन, प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने आरोप लगाया है कि झारखंड के अलग-अलग हिस्सों से रांची पहुंच रहे सैकड़ों छात्रों को पुलिस बलपूर्वक रोक रही है (फ़ाइल फ़ोटो)
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के ख़िलाफ़ स्टूडेंट आंदोलन 17वें दिन में प्रवेश कर गया. आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों ने सोमवार को विधानसभा मार्च का आह्वान किया है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, मार्च को देखते हुए रांची में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. झारखंड पुलिस ने शहर के प्रमुख इलाकों में पर्याप्त संख्या में पुलिस बल तैनात किया है.
एडीजी (मुख्यालय) मनोज कौशिक ने कहा, "छात्रों के प्रस्तावित विधानसभा मार्च के दौरान अशांति की आशंका को देखते हुए पुलिस प्रशासन को अलर्ट पर रखा गया है."
उन्होंने मार्च में शामिल होने वाले छात्रों से शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से प्रदर्शन करने की अपील की.
रांची के एसएसपी राकेश रंजन ने कहा, "मार्च के दौरान क़ानून-व्यवस्था बनाए रखना सभी की ज़िम्मेदारी है. पुलिस किसी भी छात्र के करियर पर क़ानून-व्यवस्था बिगड़ने के कारण दाग़ नहीं लगने देना चाहती. शहर के प्रमुख स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई है और पर्याप्त संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है."
विधानसभा के 750 मीटर के दायरे में निषेधाज्ञा
एसएसपी के मुताबिक़, विधानसभा भवन के 750 मीटर के दायरे में छह अगस्त से 12 अगस्त तक निषेधाज्ञा लागू है. इन दिनों सुबह छह बजे से रात 10 बजे तक यह आदेश प्रभावी रहेगा.
रांची में प्रस्तावित छात्र मार्च को देखते हुए जमशेदपुर में भी रविवार आधी रात से निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है. ज़िला प्रशासन की ओर से जारी बयान में इसकी जानकारी दी गई.
रांची ज़िला प्रशासन ने आंदोलन कर रहे छात्रों से किसी भी तरह के आक्रामक प्रदर्शन में शामिल नहीं होने की अपील की है. प्रशासन ने मार्च के दौरान हिंसा और किसी भी तरह की अवैध गतिविधि से दूर रहने की चेतावनी भी दी है.
वहीं, प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने आरोप लगाया है कि झारखंड के अलग-अलग हिस्सों से रांची पहुंच रहे सैकड़ों छात्रों को पुलिस बलपूर्वक रोक रही है.
हमास ने किस बात पर अमेरिका से कहा- नेतन्याहू पर दबाव डालें
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इमेज कैप्शन, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू (फ़ाइल फ़ोटो)
हमास के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमेरिका से इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू पर दबाव डालने की अपील की है, ताकि ग़ज़ा पीस प्लान के अगले चरण को लागू किया जा सके.
हमास के राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य बासेम नईम ने एएफ़पी से बातचीत में कहा कि अमेरिका इस समझौते का गारंटर है. ऐसे में उसे नेतन्याहू और उनकी सरकार परपीस प्लान के रोडमैप को लागू करने के लिए दबाव बनाना चाहिए.
बासेम नईम ने कहा, "हम उम्मीद करते हैं कि मध्यस्थ देश और अमेरिका बिन्यामिन नेतन्याहू और उनकी सरकार पर दबाव डालेंगे, क्योंकि ये ही समझौते के गारंटर हैं."
दरअसल, इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने ग़ज़ा को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 15 पॉइंट प्लान को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है.
नेतन्याहू ने कहा है कि जब तक हमास को पूरी तरह निरस्त्र (बग़ैर हथियार के) नहीं किया जाता, तब तक ग़ज़ा से इसराइली सेना की वापसी नहीं होगी.
नेतन्याहू ने रविवार को हुई कैबिनेट बैठक में कहा, "इसराइल 15 पॉइंट डॉक्यूमेंट को ख़ारिज करता है. इसराइली सेना अपने सैनिकों और नागरिकों के लिए पैदा होने वाले ख़तरों को रोकने के लिए कार्रवाई जारी रखेगी."
उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब ग़ज़ा में युद्धविराम को लेकर इसराइल और हमास के बीच मतभेद बने हुए हैं. दोनों पक्षों के बीच इसराइली सेना की वापसी को लेकर असहमति है.
उल्लेखनीय है कि पिछले महीने ट्रंप के बोर्ड ऑफ़ पीस ने दावा किया था कि ग़ज़ा में हमास और अन्य सशस्त्र समूहों के पूर्ण निरस्त्रीकरण को लेकर समझौता हो गया है.
हालांकि, हमास ने इस पर अलग रुख़ जाहिर किया था. संगठन का कहना था कि वह तभी हथियार छोड़ेगा, जब इसराइल अपनी सैन्य कार्रवाई रोककर ग़ज़ा से सेना वापस बुलाएगा.
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