राम मंदिर चंदा मामले पर अयोध्या के सांसद बोले, 'यह सिर्फ़ घोटाला नहीं, बल्कि डकैती है'
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इमेज कैप्शन, सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक कमेटी का गठन किया जाए
अयोध्या के राम मंदिर में चंदा विवाद पर स्थानीय सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि ये "घोटाला नहीं डकैती है."
अवधेश प्रसाद ने पीटीआई से बात करते हुए कहा, "ये हमारे देश का सबसे बड़ा घोटाला है. और अगर इसे डकैती कहना ग़लत नहीं होगा. और वह भी प्रभु श्रीराम के मंदिर के चढ़ावे से जुड़ा मामला है. यह देश के करोड़ों लोगों की आस्था और उनके चढ़ावे से जुड़ा विषय है."
उन्होंने आगे कहा, "हर रोज़ प्रभु श्रीराम के दर्शन करने के लिए देश के कोने-कोने से लोग आते हैं और अपनी आस्था के अनुसार उनके दर्शन करते हैं. अभी भी मंदिर चले जाइए, वहां लाखों श्रद्धालु मिलेंगे. इसलिए यह सिर्फ़ घोटाला नहीं, बल्कि डकैती है."
उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान ट्रस्ट को निलंबित कर दिया जाए और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक कमेटी का गठन किया जाए.
इससे पहले रविवार को समाचार एजेंसी एएनआई ने ख़बर दी कि यूपी सरकार ने राम मंदिर में कथित चंदा विवाद की जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया है.
एजेंसी के मुताबिक़, इस टीम में आईएएस विजय विश्वास पंत, आईपीएस किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं.
एएनआई के मुताबिक़, यूपी सरकार ने राम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध के बाद जांच टीम का गठन किया है.
जयपुर में कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन को पुलिस ने नहीं दी इजाज़त, पार्टी ने क्या कहा?, मोहर सिंह मीणा, जयपुर से बीबीसी हिन्दी के लिए
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इमेज कैप्शन, कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा है कि वो 15 जून को तीन बजे शहीद स्मारक, जयपुर पर मौजूद रहेंगे
कॉकरोच जनता पार्टी 15 जून को सुबह 10 बजे जयपुर के शहीद स्मारक पर पेपर लीक के मुद्दे पर प्रदर्शन करेगी. इस प्रदर्शन में कॉकरोच पार्टी के मुखिया अभिजीत दीपके भी शामिल होंगे.
पार्टी के राजस्थान समन्वयक शशि मीणा ने जयपुर दक्षिण डीसीपी कार्यालय से प्रदर्शन की अनुमति के लिए 9 जून को पत्र लिखा था. लेकिन, डीसीपी दक्षिण राजर्षि राज वर्मा ने शहीद स्मारक पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी है.
डीसीपी दक्षिण कार्यालय ने अनुमति नहीं देने का आदेश जारी करते हुए कहा, "जांच से सामने आए परिस्थितियों के आधार पर कानून-व्यवस्था की दृष्टि से शहीद स्मारक, गवर्नमेंट हॉस्टल, जयपुर में धरना-प्रदर्शन करने की अनुमति दी जाना संभव नहीं है."
डीसीपी राजर्षि राज वर्मा ने बीबीसी से फ़ोन पर बताया कि, "प्रदर्शन के लिए जो शर्तें थीं, उनका पालन अभी तक नहीं हो रहा था, इसलिए शहीद स्मारक पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई है. इसमें कितने लोग शामिल होंगे, यह बात इन्हें भी नहीं मालूम."
डीसीपी ने कहा है, "अगर प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोग पार्किंग और अन्य शर्तों का पालन कर पाएंगे, तो हम अनुमति देंगे. हम अभी देख रहे हैं."
कॉकरोच जनता पार्टी के राजस्थान समन्वयक शशि मीणा ने बीबीसी से कहा है, "हम शहीद स्मारक पर ही प्रदर्शन करेंगे. हमने पुलिस को बताया है कि क़रीब पांच सौ लोग इसमें शामिल होंगे. पार्टी के मुखिया अभिजीत दीपके सोमवार सुबह जयपुर आएंगे और पुलिस से फिर शहीद स्मारक पर प्रदर्शन की अनुमति लेंगे."
अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा है, "खम्मा घणी राजस्थान. सोमवार, 15 जून को तीन बजे से मैं आप सबके बीच शहीद स्मारक, जयपुर पर मौजूद रहूंगा. पेपर लीक ने राजस्थान के लाखों युवाओं का जीवन बर्बाद किया है. अब वक्त है एकजुट होकर अपनी आवाज़ रखने का. आप ज़रूर आइएगा. मिलकर धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा मांगते हैं."
पेपर लीक के मुद्दे पर कांग्रेस भी देशभर में आंदोलन की शुरुआत 17 जून से करने जा रही है. इस आंदोलन की शुरुआत कांग्रेस राजस्थान के कोटा से करेगी. राहुल गांधी कोटा आ रहे हैं और आंदोलन की शुरुआत करेंगे.
दिल्ली में यमुना नदी की सफ़ाई में हिस्सा ले रही टेरिटोरियल आर्मी ने क्या बताया?
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इमेज कैप्शन, लेफ्टिनेंट कर्नल अनुराग सिंह ने यमुना टास्क फ़ोर्स के बारे में जानकारी दी है
टेरिटोरियल आर्मी के कई जवानों ने रविवार को राजधानी दिल्ली में यमुना नदी के अलग-अलग हिस्सों में सफाई अभियान में हिस्सा लिया.
पीटीआई की 2025 की एक ख़बर के मुताबिक, दिल्ली सरकार ने यमुना नदी के बाढ़ वाले इलाकों में कब्ज़े, मलबा और कचरा फेंकने जैसी गैर-कानूनी गतिविधियों को रोकने के लिए टेरिटोरियल आर्मी के साथ मिलकर 'यमुना टास्क फोर्स' बनाने का फ़ैसला किया था.
लेफ्टिनेंट कर्नल अनुराग सिंह ने कहा, "मैं इसे चुनौती नहीं कहूंगा. हमें जो काम सौंपा गया है, उसके हिसाब से मैं इसे चुनौती नहीं मानता, बल्कि एक अच्छी तरह से योजनाबद्ध और ऐसी रणनीति मानता हूं जिसे लागू किया जा सके."
इससे पहले रविवार को दिल्ली सरकार ने यमुना नदी के किनारे 28 घाटों पर बड़े पैमाने पर सफाई अभियान चलाया, जिसके तहत दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने गीता कॉलोनी के दशमेश घाट पर 'मां यमुना नदी तट सफाई अभियान' में हिस्सा लिया.
दिल्ली सरकार के मुताबिक, यह अभियान प्रधानमंत्री के 12 साल का कार्यकाल पूरा होने के मौके पर चलाया गया.
महिला टी-20 वर्ल्ड कप: अमोल मजूमदार बीबीसी से बोले, 'किसी को हल्के में नहीं लिया जा सकता', अमृता धुर्वे, बीबीसी मराठी
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इमेज कैप्शन, अमोल मजूमदार ने कहा कि किसी भी टीम को कमज़ोर नहीं मानना चाहिए (फ़ाइल फ़ोटो)
आईसीसी महिला टी-20 वर्ल्ड कप में
रविवार से भारतीय टीम का अभियान शुरू हो रहा है.
भारतीय टीम टूर्नामेंट के लिए पहले
ही इंग्लैंड पहुंच चुकी है और अपना पहला मैच रविवार को पाकिस्तान के ख़िलाफ़ खेलेगी.
टीम के इंग्लैंड रवाना होने से पहले
मुख्य कोच अमोल मजूमदार ने बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, बेंगलुरु में आयोजित टीम के प्रशिक्षण शिविर के दौरान बीबीसी न्यूज़
मराठी से ख़ास बातचीत की.
उन्होंने कहा, "हमारी तैयारियां तेज़ी से चल रही हैं. आगे देखते
हैं क्या होता है. टी-20 क्रिकेट में आप किसी भी टीम को कमज़ोर नहीं समझ सकते. अगर
ऐसा करेंगे तो इसकी क़ीमत चुकानी पड़ेगी."
वर्ल्ड कप में सबसे बड़ी चुनौती कौन
सी टीम होगी? इस सवाल पर अमोल मजूमदार ने कहा,
"दुनिया में ऐसी कोई टीम नहीं है जो
टी-20 क्रिकेट में आपको चुनौती न दे सके."
उन्होंने कहा, "किसी भी दिन तथाकथित कमज़ोर टीम भी उतनी ही
ख़तरनाक साबित हो सकती है. इसलिए मैं हमेशा अपने खिलाड़ियों से कहता हूं कि किसी
को भी हल्के में न लें."
जब उनसे भारत के ग्रुप में मौजूद
टीमों के बारे में पूछा गया तो मजूमदार ने कहा, "हमारा ग्रुप काफ़ी मज़बूत है. इसमें ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ़्रीका, पाकिस्तान और बांग्लादेश हैं."
उन्होंने कहा, "हर मैच अहम होगा. आईसीसी टूर्नामेंट में न कोई
टीम कमज़ोर होती है और न ही कोई टीम बहुत बड़ी. आईसीसी टूर्नामेंट्स का दबाव अलग
तरह का होता है. अगर आप मैच वाले दिन उस दबाव को संभाल लेते हैं, तो जीत आपके हाथ में होती है."
नमस्कार!
अब तक बीबीसी संवाददाता सुमंत सिंह
आप तक ख़बरें पहुंचा रहे थे. अब से रात 10 बजे तक बीबीसी संवाददाता अरशद मिसाल आप तक अहम ख़बरें पहुंचाएंगे.
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स्विट्ज़रलैंड में आबादी सीमित करने के विवादित प्रस्ताव पर जनमत संग्रह, इमोजेन फ़ोल्क्स, बर्न, स्विट्ज़रलैंड
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इमेज कैप्शन, ट्रेड यूनियनों और राजनीतिक दलों ने इसे अराजकता पैदा करने वाली पहल बताया है
स्विट्ज़रलैंड में आबादी की एक सीमा निर्धारित करने को लेकर रविवार को जनमत संग्रह होने जा रहा है. मतदाता उस प्रस्ताव
पर फ़ैसला करेंगे, जिसमें देश की आबादी को 1 करोड़ तक
सीमित करने की बात कही गई है.
इस प्रस्ताव ने इमिग्रेशन को लेकर
देश में मौजूद मतभेदों को उजागर कर दिया है. प्रस्ताव को दक्षिणपंथी स्विस पीपुल्स
पार्टी का समर्थन हासिल है.
पार्टी इसे 'सस्टेनेबिलिटी इनिशिएटिव' बता रही
है, जिसका उद्देश्य आवास, सार्वजनिक सेवाओं और पर्यावरण पर बढ़ते दबाव को
कम करना है. हालांकि कुछ मतदाता इसे पार्टी का ताज़ा इमिग्रेशन-विरोधी क़दम मानते
हैं.
सरकार, अन्य राजनीतिक दल, कारोबारी
और ट्रेड यूनियन इस प्रस्ताव को "अराजकता पैदा करने वाली पहल" बता रहे
हैं.
उनका कहना है कि इससे अस्पतालों और
होटलों को ज़रूरी कर्मचारियों की कमी का सामना करना पड़ सकता है.
साथ ही यूरोपीय
संघ के साथ सालों में बने संबंधों को भी नुक़सान पहुंचेगा, जिससे यूरोपीय संघ का सदस्य नहीं होने वाला स्विट्ज़रलैंड एक जोखिम
भरी दुनिया में अलग-थलग पड़ सकता है.
स्विट्ज़रलैंड की आबादी 2002 से
तेज़ी से बढ़ी है. उस समय देश की आबादी 73 लाख थी. अब यह बढ़कर 91 लाख हो गई है.
इनमें 27 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जो स्विट्ज़रलैंड में रहते हैं लेकिन उनका जन्म किसी
दूसरे देश में हुआ था.
स्विट्ज़रलैंड की प्रत्यक्ष लोकतंत्र की व्यवस्था के तहत सभी बड़े फ़ैसले मतदान के ज़रिए लिए जाते हैं. किसी भी मुद्दे पर
देशव्यापी मतदान कराने के लिए अभियान चलाने वालों को केवल 1 लाख हस्ताक्षर जुटाने
होते हैं.
ब्रिटेन ने इंग्लिश चैनल में रूसी तेल टैंकर को रोका, पीएम स्टार्मर ने रूस के लिए झटका बताया
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इमेज कैप्शन, पीएम किएर स्टार्मर ने ब्रिटिश सेना की इस कार्रवाई को रूस के लिए झटका बताया
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर
स्टार्मर ने कहा है कि ब्रिटिश सेना ने रविवार तड़के इंग्लिश चैनल में रूस के 'शैडो फ़्लीट' से जुड़े एक तेल टैंकर को रोक लिया है.
छह घंटे तक चले इस अभियान में रॉयल
मरीन कमांडो और नेशनल क्राइम एजेंसी के विशेष रूप से प्रशिक्षित क़ानून प्रवर्तन
अधिकारी शामिल रहे. ये अधिकारी रॉयल एयर फ़ोर्स (आरएएफ़) की मदद से जहाज़ पर चढ़े
और कार्रवाई की.
रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा
कि स्मिर्टोस नामक इस जहाज़ को इंग्लैंड के दक्षिणी तट के पास निगरानी में रखा
जाएगा और जांच अभी जारी रहेगी.
किएर स्टार्मर ने कहा, "यह सफल अभियान रूस के लिए एक और झटका है और जो
लोग यूक्रेन में पुतिन के युद्ध को मदद दे रहे हैं, उन्हें यह याद दिलाता है कि हम उन्हें छिपने नहीं देंगे."
रक्षा मंत्री डैन जार्विस ने कहा,
"यूक्रेन में संघर्ष को जारी रखने के
लिए रूस अपने 'शैडो फ़्लीट' पर निर्भर है और हमारी यह कार्रवाई पुतिन के ग़ैरक़ानूनी युद्ध को
झटका देती है."
रूस अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से
बचने के लिए अस्पष्ट स्वामित्व वाले टैंकरों की एक 'शैडो फ़्लीट' संचालित
करता है, जिसका इस्तेमाल उसके तेल निर्यात के
लिए किया जाता है.
ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय के अनुसार,
रूस का 'शैडो
फ़्लीट' 700 टैंकरों का एक बेड़ा है. यह
प्रतिबंधित रूसी तेल का लगभग 75 प्रतिशत ट्रांसपोर्ट करता है. ब्रिटेन अब तक 500
से अधिक जहाज़ों पर प्रतिबंध लगा चुका है.
रुबियो के बयान पर राहुल गांधी ने कहा, 'न अफ़सोस, न माफ़ी, बल्कि मिला आदेश'
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इमेज कैप्शन, मार्को रुबियो के बयान पर राहुल गांधी ने कहा कि 'एक आज़ाद देश इस तरह की भाषा कभी नहीं सहेगा' (फ़ाइल फ़ोटो)
फ़ारस की खाड़ी क्षेत्र में हुए
अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के
बयान पर भारत में तीख़ी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं.
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल
गांधी ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी है.
राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा,
"अमेरिकी हमलों में तीन भारतीय
नाविकों की हत्या के चंद दिन बाद, न अफ़सोस,
न माफ़ी. उल्टा, अमेरिका ने आदेश देना जारी रखा है."
उन्होंने लिखा, "उनके शब्द पढ़िए: 'अमेरिकी सेना के आदेश तुरंत मानें.' कोई उल्लंघन 'बर्दाश्त
नहीं किया जाएगा'."
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि 'एक आज़ाद देश इस तरह की भाषा कभी नहीं सहेगा.'
लेकिन हमारे प्रधानमंत्री 'चुप' हैं और उनके 'आदेश मान लेते' हैं.
भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने
कहा था कि उन्होंने भारतीय नाविकों के मौत मामले में अमेरिकी विदेश मंत्री के
सामने 'कड़ा विरोध' दर्ज कराया था.
हालांकि, शनिवार को अमेरिकी विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, मार्को
रुबियो ने इस बातचीत के दौरान कहा कि "सभी कमर्शियल जहाज़ों को अमेरिकी सेना के आदेशों का तुरंत
पालन करना चाहिए, क्योंकि वह इस स्ट्रेट में शांति और
सुरक्षा बनाए रखने की कोशिश कर रही है."
उन्होंने कहा कि 'अमेरिकी नाकेबंदी का
उल्लंघन और ईरानी तेल की अवैध ढुलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी.'
राम मंदिर में चंदे की कथित गड़बड़ियों को लेकर एसआईटी गठित, नृपेंद्र मिश्रा ने क्या बताया
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इमेज कैप्शन, राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा के मुताबिक़, एसआईटी अपनी रिपोर्ट 15 दिनों के भीतर सौंपेगी
अयोध्या के राम मंदिर में चंदा
विवाद की जांच के लिए गठित विशेष जांच टीम (एसआईटी) की ख़बरों पर राम मंदिर
निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा का बयान आया है.
नृपेंद्र मिश्रा के मुताबिक़,
उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले की जांच के लिए
24 घंटे के भीतर एसआईटी का गठन किया है.
इससे पहले रविवार को समाचार एजेंसी
एएनआई ने ख़बर दी कि यूपी सरकार ने राम मंदिर में कथित चंदा विवाद की जांच के
लिए तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया है.
एजेंसी के मुताबिक़, इस टीम में आईएएस विजय विश्वास पंत, आईपीएस किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील
रतन शामिल हैं.
एएनआई के मुताबिक़, यूपी सरकार ने राम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट के
अनुरोध के बाद जांच टीम का गठन किया है.
उन्होंने कहा, "हमें इस पहल का समर्थन करना चाहिए, क्योंकि राज्य सरकार जिस तेज़ी से काम कर रही है,
उसने केवल 15 दिनों की समय-सीमा तय की है. सरकार
ने सात दिनों में प्रारंभिक रिपोर्ट और 15 दिनों में अंतिम रिपोर्ट सौंपने का समय
दिया है."
बीते दिनों राम मंदिर में चंदा को
लेकर कथित गड़बड़ियों के आरोप लगे थे.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़,
इसके बाद राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य
गोपाल दास के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास ने किसी भी कथित अनियमितता की
निष्पक्ष जांच की मांग की थी.
जी7 की बैठक से ठीक पहले कनाडा के पीएम ने अमेरिका को लेकर क्या कहा
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इमेज कैप्शन, कार्नी ने जी-7 समिट से पहले यह बयान दिया है
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा है कि मिडिल पावर देशों को 'महाशक्तियों' का फ़ेवर पाने के लिए आपस में होड़ नहीं करनी चाहिए.
कार्नी ने यह बात शनिवार को डबलिन
में आयरलैंड के नेता से मुलाक़ात के दौरान कही. यह मुलाक़ात आगामी जी-7 शिखर
सम्मेलन से पहले हुई.
कार्नी ने कहा, "महाशक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा वाली दुनिया में
मध्यम शक्ति वाले देशों के पास एक विकल्प है. वे या तो फ़ेवर के लिए आपस में
प्रतिस्पर्धा करें, या फिर मिलकर प्रभावशाली तीसरा
रास्ता तैयार करें."
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़,
कनाडाई पीएम ने कहा कि कनाडा और यूरोपीय संघ की
संयुक्त आबादी अमेरिका की आबादी से दोगुने से भी अधिक है.
उन्होंने कहा कि दोनों की संयुक्त
अर्थव्यवस्था का आकार भी लगभग अमेरिका के बराबर है और उनका सामूहिक रक्षा बजट चीन
के रक्षा बजट से दोगुना है.
कार्नी ने कहा कि छोटे देश समान सोच
रखने वाले सहयोगी देशों के साथ साझेदारी करके अपनी ताक़त कई गुना बढ़ा सकते हैं.
डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में
अमेरिका और कनाडा के संबंधों में खटास आई है. इसके बाद से कनाडा अपनी निर्भरता
अमेरिका से कम करने में लगा हुआ है.
पटना के पाटलिपुत्र रेलवे स्टेशन में पथराव, पुलिस और प्रत्यक्षदर्शी ने क्या बताया, प्रीति प्रभा, बिहार से बीबीसी न्यूज़ हिन्दी के लिए
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इमेज कैप्शन, पाटलिपुत्र रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों पर पथराव और तोड़ फ़ोड़ की गई
बिहार के पटना स्थित पाटलिपुत्र
रेलवे स्टेशन पर शनिवार और रविवार की दरमियानी रात लगभग तीन बजे स्टूडेंट्स ने
भारी हंगामा किया.
स्टूडेंट्स ने ट्रेन में तोड़-फोड़
और जमकर पथराव किया. इसकी वजह से दो-तीन घंटे स्टेशन में भारी अफरा-तफरी मची रही
और ट्रेनों का परिचालन भी बाधित हुआ.
पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में
करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे और हवा में फायरिंग की.
इस मामले पर पटना डीएम डॉ त्यागराजन
ने कहा, "ये सभी छात्र ट्रेन की व्यवस्था जैसे
मुद्दों को लेकर विरोध कर रहे थे. जबकि स्पेशल ट्रेनों का इंतजाम किया गया था.
स्टेशन पर पहले से दो स्पेशल ट्रेनें खड़ी थीं."
उन्होंने कहा, "हमें जानकारी मिली कि कुछ लोग रेलवे स्टेशन पर
हंगामा कर रहे हैं. मौक़े पर पहुंच कर हमने कम से कम बल का इस्तेमाल करके भीड़ को
हटाया. अब स्थिति पूरी तरह शांतिपूर्ण और नियंत्रण में है, आगे कोई समस्या नहीं है."
वहीं, पुलिस आईजी जितेंद्र राणा ने बताया,
"यहां पर लगभग 200-250 छात्र थे, वे ट्रेन को नहीं खुलने (डिपार्चर) दे रहे थे. जब आरपीएफ़, जीआरपी और ज़िला पुलिस ने उनको
समझाने का प्रयास किया तो उनकी ओर से पथराव किया गया."
उन्होंने कहा, "जानमाल की हानि बचाने के लिए पुलिस ने कार्रवाई
की है. इसके बाद सभी ट्रेनों को हटाया गया है."
समाचार एजेंसी आईएएनएस की ओर से जारी एक वीडियो में दिख रहा है कि छात्रों को काबू में करने के लिए पुलिस आंसू गैस के गोले दाग़ रही है और लाठी लेकर छात्रों को खदेड़ने की कोशिश की गई.
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इमेज कैप्शन, इस हंगामे की वजह से ट्रेन काफ़ी देर तक रवाना नहीं हो सकी
दरअसल, ये सभी स्टूडेंट बिहार पुलिस के मद्य निषेध विभाग की भर्ती परीक्षा
में शामिल होने वाले थे. परीक्षा दो पालियों में होनी थी, जिसके लिए हज़ारों अभ्यर्थी रात में ही स्टेशन पहुंच गए.
स्थिति तब बिगड़ गई, जब पाटलिपुत्र से कटिहार के लिए चलाई गई एग्ज़ाम
स्पेशल ट्रेन स्टेशन पहुंची. ट्रेन में काफ़ी भीड़ थी, हज़ारों की संख्या में स्टूडेंट ट्रेन नहीं पकड़ पाए. इस दौरान
अभ्यर्थियों में अफरा-तफरी मच गई.
इसके बाद नाराज़ स्टूडेंट ट्रेन के
आगे पटरी पर बैठ गए और रेल प्रशासन के ख़िलाफ़ जमकर नारेबाजी शुरू कर दी और
पर्याप्त ट्रेनों की मांग करने लगे.
मौक़े पर पहुंची पुलिस की ओर से
लाठीचार्ज के बाद नाराज़ स्टूडेंट्स ने पुलिस पर भी पथराव किया. इस पथराव से
स्टूडेंट्स के साथ-साथ कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं.
इस घटना के एक प्रत्यक्षदर्शी छात्र ने न्यूज़ एजेंसी आईएएनएस को बताया, "बिहार पुलिस की परीक्षा थी, इसी वजह से यहां बहुत भीड़ थी. इसके लिए कोई स्पेशल ट्रेन नहीं चलाई गई थी."
उन्होंने बताया, "जो भी ट्रेनें आ रहीं थीं, उनमें भीड़ थी. ट्रेन नहीं आई, इसलिए पथराव हुआ. यहां प्रशासन था, लेकिन जब पथराव हुआ तो प्रशासन भी पीछे हट गया."
इस घटना के बाद डीआरएम दानापुर की ओर से रविवार को जारी एक बयान में कहा गया कि "बिहार कांस्टेबल परीक्षा को ध्यान में रखते हुए, पूर्व मध्य रेलवे (दानापुर मंडल) की ओर से परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए दो परीक्षा स्पेशल ट्रेनों का परिचालन किया गया है."
अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो के बयान पर संजय सिंह ने क्या कहा
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इमेज कैप्शन, संजय सिंह ने अमेरिका की ओर से जारी बयान को 'भारत का अपमान' बताया (फ़ाइल फ़ोटो)
फ़ारस की खाड़ी क्षेत्र में हुए
अमेरिकी हमले में तीन भारतीयों की मौत के मामले में अमेरिका के बयान को लेकर भारत
में विपक्षी नेता सरकार के रुख़ पर सवाल उठा रहे हैं.
आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने इसे 'भारत का अपमान' बताया.
उन्होंने कहा, "हमारे विदेश मंत्री जयशंकर ने अमेरिकी सेना द्वारा तीन भारतीयों की हत्या पर अपना विरोध जताने के लिए मार्को रुबियो को फ़ोन किया. रुबियो ने दुख जताने के बजाय उल्टा हमारे विदेश मंत्री को ही 'डाँट' दिया और कहा 'अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा'."
कांग्रेस सांसद और पूर्व विदेश राज्य
मंत्री शशि थरूर ने अमेरिका के बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें 'निर्दोष भारतीयों की मौत पर दुख या संवेदना' का एक भी शब्द नहीं है.
उन्होंने कहा, "कोई 'मित्र'
और रणनीतिक साझेदार इतना असंवेदनशील कैसे हो सकता
है?"
दरअसल, भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस मामले में कहा था कि उन्होंने इस
हमले को लेकर अमेरिकी विदेश मंत्री के सामने 'कड़ा विरोध' दर्ज
कराया है.
वहीं, अमेरिकी विदेश मंत्री ने शनिवार को जारी एक बयान में कहा कि "सभी
कमर्शियल जहाज़ों को अमेरिकी सेना के आदेशों का तुरंत पालन करना चाहिए, क्योंकि वह इस स्ट्रेट में शांति और सुरक्षा बनाए
रखने की कोशिश कर रही है."
उन्होंने कहा कि अमेरिकी नाकाबंदी का
उल्लंघन और ईरानी तेल की अवैध ढुलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
ईरान के इन शहरों में अमेरिका से 'समझौते' के ख़िलाफ़ क्यों हुए प्रदर्शन
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इमेज कैप्शन, प्रदर्शनकारियों ने विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची और संसद के स्पीकर बग़र ग़ालिबाफ़ के ख़िलाफ़ नारे लगाए, ये दोनों नेता अमेरिका के साथ बातचीत में मुख्य भूमिका में हैं (फ़ाइल फ़ोटो)
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त
करने को लेकर रविवार को समझौता होने की उम्मीद जताई जा रही है. अमेरिकी राष्ट्रपति
डोनाल्ड ट्रंप ने इसको लेकर बयान भी जारी किया.
हालांकि, ईरान की ओर से हस्ताक्षर का समय या तारीख़ स्पष्ट तौर पर नहीं बताई गई
है.
इस बीच दोनों देशों के बीच समझौते के
ख़िलाफ़ ईरान के शहरों में प्रदर्शन हुए हैं.
बीबीसी फ़ारसी सेवा के मुताबिक़,
ईरान में समझौते के कुछ विरोधियों ने इसके
ख़िलाफ़ प्रदर्शन किए और विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची और संसद के स्पीकर मोहम्मद
बग़र ग़ालिबाफ़ के ख़िलाफ़ नारे लगाए.
यह रैली तेहरान के इब्न सिना
स्क्वायर में आयोजित की गई थी, जिसमें
शामिल प्रदर्शनकारी ईरान के एक कट्टरपंथी और चरमपंथी संगठन "परसिस्टेंस
फ़्रंट" के क़रीबी बताए जा रहे हैं.
शनिवार शाम को भी मशहद में विदेश
मंत्रालय के इमारत के सामने दर्जनों लोग अब्बास अराग़ची के अमेरिका के साथ संभावित
समझौते के बारे में दिए गए बयानों के विरोध में जमा हुए.
फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी ने एक वीडियो
जारी किया है, जिसमें मशहद में प्रदर्शनकारी
अराग़ची के ख़िलाफ़ नारे लगाते दिख रहे हैं.
समझौते का विरोध करने वालों का
मानना है कि यह समझौता ईरान के हित में नहीं है और इससे होर्मुज़ स्ट्रेट में
ईरान का प्रभाव कमज़ोर होगा.
बीबीसी फ़ारसी सेवा के मुताबिक़,
अराग़ची ने एक टेलीविजन इंटरव्यू में कहा था कि
समझौते में ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को हटाना शामिल होगा.
उन्होंने होर्मुज़ स्ट्रेट को ईरान के प्रमुख डेटेरेंट (निरोधक क्षमता) में से एक बताया.
पीएम मोदी और ट्रंप के बीच फ़्रांस में हो सकती है मुलाक़ात
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इमेज कैप्शन, दोनों नेताओं के बीच आखिरी बैठक पिछले साल फ़रवरी में हुई थी (फ़ाइल फ़ोटो)
फ़्रांस में होने वाली जी-7 बैठक से इतर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच मुलाक़ात होने की संभावना है.
अमेरिकी मीडिया ने अधिकारियों के
हवाले से जानकारी दी है कि दोनों नेताओं के बीच बुधवार, 17 जून को द्विपक्षीय बैठक होगी. ट्रंप सोमवार सुबह जी-7 शिखर सम्मेलन में शामिल होने
के लिए फ़्रांस रवाना होंगे.
पिछले साल फ़रवरी में वॉशिंगटन में
मुलाक़ात के बाद दोनों नेताओं के बीच यह पहली मुलाक़ात होगी.
वहीं, समाचार एजेंसी एएनआई ने एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी का बयान जारी किया
है. इसमें भी बुधवार 17 जून को दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय बैठक का ज़िक्र है.
इस मुलाक़ात की ख़बर ऐसे समय आई है जब खाड़ी में तीन भारतीय नाविकों की मौत को लेकर भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक
तनाव चल रहा है.
बीते दिनों ओमान की खाड़ी क्षेत्र
में एक कार्गो जहाज़ पर हुए हमले में तीन भारतीयों की मौत हुई थी. भारतीय विदेश
मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से फ़ोन पर बात कर इस
घटना पर 'कड़ा विरोध' दर्ज किया था.
हालांकि, अमेरिका की ओर से आए बयान में कहा गया कि अमेरिकी नाकाबंदी का उल्लंघन
और ईरानी तेल की अवैध ढुलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
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इमेज कैप्शन, पीएम मोदी फ़्रांस और स्लोवाकिया के दौरे पर हैं, वह शनिवार को फ़्रांस के नीस शहर में उतरे
पीएम मोदी का फ़्रांस दौरा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार, 13 जून को फ़्रांस पहुंच गए हैं. नीस में उतरने के बाद पीएम मोदी ने कहा कि वह इस यात्रा के दौरान द्विपक्षीय और बहुपक्षीय स्तर पर कई बैठकों और कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे.
उन्होंने फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से भी मुलाक़ात की बात कही.
भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक़, पीएम मोदी 13 से 18 जून तक फ़्रांस और स्लोवाकिया में रहेंगे. वह 13 से 14 जून तक फ़्रांस के नीस और 16 से 18 जून 2026 तक एवियान और पेरिस की यात्रा करेंगे.
इस बीच वह 14 से 16 जून तक स्लोवाकिया की आधिकारिक यात्रा करेंगे.
डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को समझौते पर हस्ताक्षर करने की बात कही, ईरान क्या बोला
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इमेज कैप्शन, ट्रंप ने समझौते को लेकर एलान तो कर दिया है लेकिन ईरान की ओर से अभी सतर्कता बरती जा रही है
फ़ारस की खाड़ी में संघर्ष समाप्त
करने को लेकर डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि रविवार यानी आज दोनों पक्षों में हस्ताक्षर
होंगे, जबकि ईरान ने कहा है कि हस्ताक्षर का अभी कोई सटीक समय तय नहीं हुआ है.
ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार,
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई ने शनिवार को कहा कि अमेरिका के साथ समझौते पर हस्ताक्षर करने का समय अभी तक निर्धारित नहीं
किया गया है.
उन्होंने एक बयान में कहा,
"समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने के
सटीक समय का हमें इंतजार करना होगा."
उन्होंने कहा कि रविवार को हस्ताक्षर नहीं होंगे, "हालांकि, आने वाले दिनों में हस्ताक्षर होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है.
दूसरे पक्ष के रुख़ में असंगति को देखते हुए, हमें इस प्रक्रिया के
बारे में कोई भी बयान देते समय सावधानी बरतनी चाहिए.
हालांकि बक़ाई के बयान के कुछ घंटों बाद ही अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में लिखा, "समझौते पर कल (रविवार) हस्ताक्षर होने वाले हैं, और जैसे ही इस पर हस्ताक्षर हो जाएंगे, होर्मुज़ स्ट्रेट सभी के लिए खुल जाएगा."
ईरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार की ओर इशारा करते हुए ट्रंप ने कहा कि "सही समय पर, जब सब कुछ शांत होगा, हम वहां जाएंगे और 'न्यूक्लियर डस्ट' को हासिल करेंगे."
इस प्रक्रिया में अहम मध्यस्थ की
भूमिका निभा रहे पाकिस्तान ने भी शनिवार को कहा था कि समझौते को अगले 24 घंटों के
भीतर अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है और दोनों देश 'इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर
की तैयारी कर रहे हैं.'