कोलकाता: जादवपुर विश्वविद्यालय में एबीवीपी और लेफ़्ट छात्र संगठनों की बीच झड़प
इमेज कैप्शन, कोलकाता स्थित जादवपुर यूनिवर्सिटी में छात्र संगठनों के बीच झड़प की ख़बर है. (फ़ाइल फ़ोटो)
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता स्थित जादवपुर यूनिवर्सिटी में देर रात हंगामा हुआ है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, एबीवीपी के साथ एसएफ़आई समेत कई छात्र संगठनों के बीच झड़प हुई. एसएफ़आई की ओर से बुलाई गई जनरल बॉडी की बैठक को लेकर तनाव पैदा हुआ. इस बैठक को बुलाने के अधिकार पर एबीवीपी ने सवाल उठाया था.
पीटीआई के मुताबिक़, एबीवीपी का आरोप है कि एसएफ़आई समेत वामपंथी छात्र संगठनों के समर्थकों ने उनके समर्थकों पर हमला किया.
इसके बाद एबीवीपी समर्थक जादवपुर विश्वविद्यालय परिसर में दाखिल हुए और आरोप है कि उन्होंने एसएफ़आई समेत वामपंथी छात्र संगठनों के समर्थकों पर हमला किया.
पीटीआई के मुताबिक़, फ़िलहाल यूनिवर्सिटी में स्थिति सामान्य है.
अब मुझे यानी बीबीसी संवाददाता अरशद मिसाल को इजाज़त दीजिए. अब से रात दस बजे तक बीबीसी संवाददाता दीपक मंडल आप तक अहम ख़बरें पहुंचाएंगे.
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अमित शाह ने ‘वंदे मातरम्’ को लेकर कांग्रेस पर क्या आरोप लगाया
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इमेज कैप्शन, अमित शाह ने एक्स पर लिखा कि कांग्रेस कार्यसमिति का यह फैसला “देशविरोधी” है (फ़ाइल फ़ोटो)
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ‘वंदे मातरम्’ पूरा गाने की जगह केवल दो अंतरे गाने के कांग्रेस कार्यसमिति के फैसले को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा है.
अमित शाह ने एक्स पर लिखा कि कांग्रेस कार्यसमिति का यह फैसला “देशविरोधी” है और संसद द्वारा बनाए गए कानून की खुली अवहेलना है.
दरअसल कांग्रेस पार्टी ने वंदे मातरम के शुरुआती दो छंद ही गाने का फ़ैसला किया है.
उन्होंने दावा किया कि 1937 में तुष्टीकरण की राजनीति के तहत कांग्रेस ने ‘वंदे मातरम्’ के दो हिस्से किए, जिससे दो-राष्ट्र सिद्धांत को ताकत मिली और आगे चलकर देश का विभाजन हुआ.
शाह ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ के 150वें वर्ष पर मोदी सरकार ने इस ऐतिहासिक ग़लती को सुधारते हुए पूरे गान को कानूनी स्वरूप दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस एक बार फिर वोट बैंक की राजनीति के लिए तुष्टीकरण के रास्ते पर जा रही है.
अमित शाह ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि ‘वंदे मातरम्’ को लेकर कांग्रेस के इस फैसले के ख़िलाफ़ एकजुट होकर आवाज़ उठानी चाहिए. उन्होंने कहा कि देश पहले ही ‘वंदे मातरम्’ को लेकर हुई इस ग़लती के परिणाम भुगत चुका है.
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने क्या कहा
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा, "हम 1937 से ‘वंदे मातरम्’ गाते आ रहे हैं, यानी 90 साल से भी ज़्यादा समय से. हमारे लिए इसमें नया क्या है? बीजेपी स्वतंत्रता संग्राम का हिस्सा नहीं थी. ‘वंदे मातरम्’ स्वतंत्रता संग्राम का हिस्सा था. यह हमारे लिए भावनात्मक मुद्दा है, लेकिन उनके (बीजेपी) लिए राजनीतिक मुद्दा है. वे पेपर लीक, चंदे की चोरी और अरुणाचल प्रदेश में चीन की घुसपैठ जैसे वास्तविक मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाना चाहते हैं."
झारखंडः छात्रों का आंदोलन हुआ ख़त्म, जिनकी नौकरी गई, अब वो धरने पर, आनंद दत्त, बीबीसी हिन्दी के लिए रांची से
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इमेज कैप्शन, प्रदर्शन खत्म होने के बाद जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम बुधवार की शाम तक खाली हो गया
झारखंड में बीते 25 जुलाई से चल रहा छात्रों का आंदोलन बुधवार, 19 अगस्त को ख़त्म हो गया. आंदोलन में मौजूद छात्र अपने घरों को लौट गए हैं.
छात्रों का ये प्रदर्शन जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में हो रहा था. बुधवार की शाम तक ये स्टेडियम खाली हो गया था.
इससे पहले आंदोलन समाप्ति की घोषणा करते हुए जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच ने कहा कि फिलहाल इसे स्थगित किया जाता है. हम सरकार को अगले 60 दिनों का समय दे रहे हैं. इस अवधि में अगर संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई, तो हम दोबारा आंदोलन पर विचार करेंगे.
छात्र नेता रविंद्र पासवान ने कहा कि आंदोलन खत्म करने का मतलब मांगों से पीछे हटना नहीं है. आगामी 60 दिनों के भीतर मांगें पूरी नहीं हुईं, तो छात्र दोबारा आंदोलन शुरू करेंगे.
वहीं, दूसरी तरफ झारखंड सरकार ने जिन परीक्षाओं और उनके परिणामों को रद्द करने की घोषणा की है, उनमें पूर्व में पास हुए और नौकरी कर रहे लोगों ने आंदोलन शुरू कर दिया है.
बीते मंगलवार की शाम जैसे ही सीएम हेमंत सोरेन ने जेपीएससी-जेएसएससी से संबंधित परीक्षाओं को रद्द करने की बात कही, नौकरी कर रहे छात्रों का हुजूम राज्य सचिवालय परिसर में उमड़ पड़ा.
इन छात्रों का कहना है कि सरकार हमारी जांच कर ले कि कौन पैसे देकर नौकरी कर रहा है और कौन मेरिट के बूते. जो दोषी पाए जाते हैं, उन्हें जेल भेजे और नौकरी से निकाले. लेकिन जो अपनी मेहनत और ईमानदारी के बल पर नौकरी पाए हैं, उन्हें एक झटके में नौकरी से नहीं निकाल सकती है.
इन छात्रों ने बुधवार की दोपहर सरकार के इस फैसले को चुनौती देने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया है.
वहीं, मुख्य विपक्षी दल बीजेपी के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सरकार पर आरोप लगाया है कि सीआईडी से जांच कराने का फैसला ही विवादास्पद है. जब तक इसकी जांच सीबीआई को नहीं सौंपी जाती, इसकी निष्पक्षता सुनिश्चित नहीं की जा सकती है.
अरुणाचल प्रदेश में चीनी घुसपैठ पर क्या बोले किरेन रिजिजू
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इमेज कैप्शन, रिजिजू ने कहा कि मोदी सरकार सीमा के आसपास के इलाक़ों में सड़क, कनेक्टिविटी और दूसरी बुनियादी सुविधाओं को तेज़ी से मज़बूत कर रही है (फ़ाइल फ़ोटो)
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने गुरुवार को अरुणाचल प्रदेश में चीन की कथित नई घुसपैठ के दावों को खारिज करते हुए कहा कि पहले सीमा से लगे इलाक़ों की अनदेखी की जाती थी, लेकिन अब ये नरेंद्र मोदी सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है.
रिजिजू ने कहा कि मोदी सरकार सीमा के आसपास के इलाक़ों में सड़क, कनेक्टिविटी और दूसरी बुनियादी सुविधाओं को तेज़ी से मज़बूत कर रही है.
उन्होंने इस दौरान पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी के 2013 में संसद में दिए बयान का भी ज़िक्र किया. एंटनी ने उस समय माना था कि भारत की पुरानी नीति सीमा से लगे इलाक़ों को विकसित नहीं करने की थी.
हालांकि, एंटनी ने अपने बयान में यह भी कहा था कि यह नीति यूपीए सरकार के सत्ता में आने से काफी पहले ही खत्म कर दी गई थी और उसके बाद की सरकारों ने भी इस नीति को जारी नहीं रखा.
रिजिजू का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अरुणाचल प्रदेश में चीन की कथित घुसपैठ को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं. उन्होंने सरकार की मौजूदा सीमा नीति और बॉर्डर इलाकों में किए जा रहे विकास कार्यों को सामने रखते हुए इन दावों का जवाब दिया.
अब्बास अराग़ची ने ट्रंप के ‘इकोनॉमिक डी-डे’ पर साधा निशाना, क्या कहा
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इमेज कैप्शन, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची (फ़ाइल फ़ोटो)
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने अमेरिका की ओर से ईरान के ख़िलाफ़ घोषित किए गए तथाकथित “इकोनॉमिक डी-डे” पर निशाना साधा है.
उन्होंने कहा कि अमेरिका का यह कदम असल में उसकी अपनी आर्थिक परेशानियों से ध्यान भटकाने की कोशिश है.
अराग़ची ने एक्स पर लिखा कि अमेरिका का “इकोनॉमिक डी-डे” उसकी अपनी आर्थिक मुश्किलों से ध्यान हटाने का तरीका है.
बुधवार शाम को सोशल मीडिया पर किए गए एक पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि वह ईरान के खिलाफ़ "इकोनॉमिक डी-डे" (आर्थिक मोर्चे पर निर्णायक कार्रवाई) शुरू कर रहे हैं, क्योंकि ईरान अमेरिका के साथ समझौता करने में नाकाम रहा था.
इसके बाद अब्बास अराग़ची ने अमेरिका के बढ़ते सरकारी कर्ज और ब्याज के बढ़ते खर्च का जिक्र करते हुए कहा कि पुरानी और नाकाम नीतियों को दोहराने से अमेरिका को आगे भी हार और ईरानियों की नाराज़गी ही मिलेगी.
उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी आर्थिक आतंकवाद पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और देशों की संप्रभुता के लिए ख़तरा बन रहा है.
अराग़ची की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब अमेरिका का राष्ट्रीय कर्ज 40 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर चुका है. अमेरिकी ट्रेजरी के आंकड़ों के मुताबिक, 18 अगस्त तक कुल राष्ट्रीय कर्ज करीब 40.05 ट्रिलियन डॉलर था. यानी पिछले करीब एक दशक में अमेरिकी कर्ज दोगुने से भी ज्यादा हो गया है.
यूएनएससी में भारत बोला, 'सदस्यता का इस्तेमाल आतंकियों को ‘वैध’ ठहराने के लिए नहीं होना चाहिए'
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इमेज कैप्शन, भारत ने यूएनएससी में कहा कि सिर्फ राजनीतिक वजहों से किसी संगठन को आतंकी घोषित करना या किसी आतंकवादी का नाम प्रतिबंधों की सूची से हटाने की कोशिश करना सही नहीं है (फ़ाइल फ़ोटो)
भारत ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की सदस्यता का इस्तेमाल आतंकवादियों को वैध ठहराने के लिए नहीं किया जाना चाहिए.
भारत ने यह भी कहा कि सिर्फ राजनीतिक वजहों से किसी संगठन को आतंकी घोषित करना या किसी आतंकवादी का नाम प्रतिबंधों की सूची से हटाने की कोशिश करना सही नहीं है.
बुधवार को सुरक्षा परिषद में कामकाज के तरीकों पर हुई खुली बहस के दौरान संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि की प्रभारी चार्ज डी’अफेयर्स और राजदूत योजना पटेल ने आतंकियों और आतंकी संगठनों को प्रतिबंध सूची में शामिल करने या उससे हटाने की प्रक्रिया में ज़्यादा पारदर्शिता और निष्पक्षता की ज़रूरत बताई.
योजना पटेल ने कहा कि सुरक्षा परिषद की सदस्यता अपने साथ बड़ी ज़िम्मेदारियां लेकर आती है और इसका इस्तेमाल सीमित राजनीतिक हितों को आगे बढ़ाने के मंच के तौर पर नहीं किया जाना चाहिए.
उन्होंने कहा, "आतंकियों और आतंकी संगठनों को सूची में शामिल करने या हटाने के मामले में प्रक्रिया ज़्यादा पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए. सुरक्षा परिषद में किसी देश की मौजूदगी का इस्तेमाल आतंकवादियों को प्रतिबंध सूची से हटाकर उन्हें वैध ठहराने या बिना किसी ठोस मानदंड और दस्तावेजी सबूत के राजनीतिक आधार पर किसी दूसरे संगठन को आतंकी घोषित करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए."
भारत लंबे समय से यूएनएससी की प्रतिबंध समितियों में आतंकवादियों और आतंकी संगठनों को सूचीबद्ध करने से जुड़े फैसलों में अपनाई जाने वाली कथित अपारदर्शी प्रक्रिया पर सवाल उठाता रहा है.
दिल्ली में पाकिस्तान हाई कमीशन के बाहर बने ढांचे पर चला बुलडोजर, ये है वजह
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इमेज कैप्शन, नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान हाई कमीशन के बाहर का नज़ारा
नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान हाई कमीशन के बाहर बने कुछ ढांचों को गुरुवार को अधिकारियों ने ध्वस्त कर दिया.
न्यूज़ एजेंसी पीटीआई ने आधिकारिक सूत्रों के हवाले से बताया कि, जांच में पाया गया कि ये ढांचे हाई कमीशन की मंज़ूर सीमा से बाहर बनाए गए थे.
संबंधित एजेंसियों ने जेसीबी मशीन की मदद से यह कार्रवाई की. हाई कमीशन के बाहर वाली लेन में बनाए गए ढांचों और बैरिकेड्स को हटाया गया.
इनमें वीजा सेक्शन के पास लोगों की कतार संभालने के लिए लगाए गए इंतज़ाम भी शामिल थे.
कार्रवाई के बाद हाई कमीशन के बाहर मलबा बिखरा नज़र आया. मौके पर टूटी हुई लोहे की रेलिंग और गेट, मुड़े हुए धातु के फ्रेम, छत की चादरें, ईंटें, कंक्रीट और प्लास्टर के टुकड़े पड़े दिखाई दिए.
राहुल गांधी को 30 शर्तों के साथ मिली पुणे में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम की मंजूरी
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इमेज कैप्शन, बुधवार को जारी पुलिस के अनुमति आदेश के मुताबिक, कार्यक्रम में आठ हज़ार से दल हज़ार लोगों के शामिल होने की संभावना है.
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के 22 अगस्त को पुणे में होने वाले ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को पुलिस ने मंजूरी दे दी है. हालांकि, पुलिस ने कार्यक्रम के लिए 30 शर्तें तय की हैं.
न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, पुलिस ने आयोजकों को ऐसे बैनर, पोस्टर या तस्वीरें लगाने से मना किया है, जिन्हें आपत्तिजनक माना जा सकता है. साथ ही, आयोजकों को धार्मिक भावनाओं को ठेस न पहुंचाने का निर्देश दिया गया है.
‘छात्रों की गूंज’ खास तौर पर महिला छात्रों के लिए आयोजित किया जा रहा है. कार्यक्रम में शिक्षा, सुरक्षा, समानता, प्रतियोगी परीक्षाओं और करियर के अवसरों जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी.
यह कार्यक्रम 22 अगस्त को शाम 4:30 बजे से रात 9:30 बजे तक शहर के आरटीओ चौक के पास स्थित एसएसपीएमएस कॉलेज ग्राउंड में आयोजित किया जाएगा.
बुधवार को जारी पुलिस के अनुमति आदेश के मुताबिक, कार्यक्रम में 8,000 से 10,000 लोगों के शामिल होने की संभावना है.
इस देश में सोने की खदान धंसी, 100 से ज़्यादा लोगों की मौत, पॉल न्जी, बीबीसी अफ़्रीका
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इमेज कैप्शन, माइनिंग साइट पर लैंडस्लाइड के बाद बचाव और राहत कार्य जारी है
सेंट्रल अफ़्रीकन रिपब्लिक (सीएआर) के पश्चिमी हिस्से में, कैमरून की सीमा के पास एक सोने की खदान में भूस्खलन होने से 100 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई है. एक स्थानीय अधिकारी ने बीबीसी को यह जानकारी दी.
सामने आए वीडियो में खदान का एक हिस्सा लोगों के ऊपर गिरता दिखाई दे रहा है. इस दौरान कुछ लोग अपनी जान बचाने के लिए भागते नज़र आए.
कैमरून की सीमा से लगे शहर गरुआ-बुलाई के मेयर अदमो अब्दोन ने बीबीसी को बताया कि यह हादसा मंगलवार दोपहर हुआ.
घटना के बाद राहत और बचाव अभियान जारी है और अधिकारियों को आशंका है कि मरने वालों की संख्या और बढ़ सकती है.
अभी यह साफ नहीं है कि खदान में भूस्खलन किस वजह से हुआ. अब्दोन ने बताया कि अब तक 107 शव मलबे से निकाले जा चुके हैं.
हादसे में बचे एक खनिक सेड्रिक मबांगो ने एएफ़पी को बताया, "ज़मीन पूरी तरह धंस गई और लोग मलबे में दब गए. मेरे आपसे बात करने के वक्त भी कुछ लोग अभी मलबे में फंसे हुए हैं."
कैमरून के ईस्ट रीजन के गवर्नर के मुताबिक, मारे जाने वालों में कम से कम तीन लोग कैमरून के नागरिक थे. उनके शव अंतिम संस्कार के लिए वापस कैमरून भेजे जा रहे हैं. वहीं, घायलों के इलाज के लिए भी इंतज़ाम किए जा रहे हैं.
एएफ़पी के मुताबिक, घायलों और हादसे में बचे लोगों को खदान से करीब 50 किलोमीटर दूर सीएआर के बाबुआ शहर के अस्पताल ले जाया जा रहा है.
स्थानीय मीडिया के अनुसार, अधिकारियों ने हादसे की वजह पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है. बाबुआ के सरकारी अभियोजक के हवाले से बताया गया है कि शुरुआती तौर पर माना जा रहा है कि खदान के अंदर कई सुरंगें धंसने की वजह से यह हादसा हुआ.
इस इलाक़े में छोटे स्तर पर पारंपरिक तरीके से खनन बड़ी संख्या में परिवारों की कमाई का मुख्य जरिया है. लेकिन यहां काम करने की परिस्थितियां खराब हैं और खनिकों को स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़े कई खतरों का सामना करना पड़ता है.
खदानों का धंसना और भूस्खलन इस इलाक़े में असामान्य नहीं है. अक्सर खदानों के गड्ढों को ठीक से बंद नहीं किया जाता और तेज बारिश के कारण मिट्टी कमज़ोर पड़ जाती है, जिससे ऐसे हादसों का खतरा बढ़ जाता है.
रूस के मिसाइल हमले में कीएव और आसपास के इलाक़ों में कम से कम 5 लोगों की मौत
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इमेज कैप्शन, गुरुवार को कीएव में हुए हमलों में से एक हमले वाली जगह से उठता धुआं
रूस की ओर से रातभर किए गए मिसाइल हमलों में यूक्रेन की राजधानी कीएव और आसपास के इलाक़ों में कम से कम 5 लोगों की मौत हो गई है. हमलों में कम से कम 23 लोग घायल हुए हैं.
यूक्रेन की स्टेट इमरजेंसी सर्विस (डीएसएनएस) ने बताया कि गुरुवार को बड़े पैमाने पर किए गए हमले में इमारतों और गोदामों को निशाना बनाया गया.
हमलों के बाद राहत और बचाव दल मलबे में फंसे लोगों को निकालने में जुटे हैं. बचावकर्मी अब तक एक व्यक्ति को मलबे से ज़िंदा निकाल चुके हैं.
इस बीच, रूस के यूक्रेन पर हमलों के बीच पोलैंड की सेना ने “एहतियाती सैन्य विमान अभियान” शुरू करने का ऐलान किया है.
कीएव के मेयर विताली क्लिट्स्को ने बताया कि रात के हमलों में एक बच्चों का अस्पताल भी क्षतिग्रस्त हुआ है. अस्पताल की खिड़कियां टूट गईं और आसपास कई कारों में आग लग गई.
मेयर के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिमी कीव के सोलोमियांस्की ज़िले में स्थित एक औद्योगिक इलाक़े को भी मिसाइलों से निशाना बनाया गया.
वहीं, कीएव क्षेत्र के ब्रोवरी ज़ेले में हुए एक हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई और एक अन्य घायल हो गया. क्षेत्रीय गवर्नर तिमुर तकाचेंको ने इसकी जानकारी दी.
क्षेत्रीय प्रशासन ने रात में ही लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाने की चेतावनी जारी कर दी थी. प्रशासन ने कहा था कि इलाक़े में हवाई सुरक्षा अभियान चलाए जा सकते हैं.
रातभर क्षेत्रीय अधिकारियों की ओर से मिसाइल हमलों को लेकर लगातार नए अलर्ट जारी किए जाते रहे.
कीनिया में हेलीकॉप्टर क्रैश: इक्वाडोर के इंटेलिजेंस चीफ, उनकी पत्नी समेत सात लोगों की मौत
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इमेज कैप्शन, अमेरिकी विदेश विभाग के एक प्रवक्ता ने बताया कि हादसे में पांच अमेरिकी नागरिक भी मारे गए हैं
कीनिया में बुधवार को हुए एक हेलीकॉप्टर क्रैश में इक्वाडोर के इंटेलिजेंस चीफ़ और उनकी पत्नी की मौत हो गई. हादसे में पांच अमेरिकी नागरिकों समेत कुल सात लोगों की जान गई है.
अमेरिकी विदेश विभाग के एक प्रवक्ता ने बताया कि हादसे में पांच अमेरिकी नागरिक भी मारे गए हैं.
इक्वाडोर के इंटेलिजेंस चीफ़ मिशेल सेंसी कॉन्टोगी और उनकी पत्नी स्टेफनी होलिहान उन सात लोगों में शामिल थे, जिनकी मौत सांबुरु काउंटी में हुई.
कीनिया सिविल एविएशन अथॉरिटी के मुताबिक, हेलीकॉप्टर लुईसाबा के एक संरक्षित वाइल्डलाइफ़ इलाक़े से इवासो न्यीरो नदी की तरफ एक हवाई यात्रा पर निकला था. इवासो न्यीरो कीनिया के कई इलाक़ों से होकर बहने वाली एक प्रमुख नदी है.
अथॉरिटी ने बताया कि कीनिया के परिवहन मंत्रालय और एयर एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन विभाग हादसे की जांच करेंगे. जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि हेलीकॉप्टर किस वजह से हादसे का शिकार हुआ और इसके पीछे की पूरी परिस्थितियां क्या थीं.
प्रिंस हैरी और मेगन मर्केल ब्रिटेन वापस लौटने की तैयारी में, सितंबर से ब्रिटिश स्कूल में पढ़ेंगे बच्चे
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इमेज कैप्शन, रिपोर्ट के मुताबिक, हैरी और मेगन इसी महीने के आखिर में अमेरिका छोड़कर लंदन के बाहर एक प्राइवेट, गैर-शाही घर में शिफ्ट होने वाले हैं (फ़ाइल फ़ोटो)
बीबीसी न्यूज़ को मिली जानकारी के मुताबिक, ड्यूक और डचेस ऑफ़ ससेक्स प्रिंस हैरी और मेगन मर्केल अमेरिका से ब्रिटेन वापस लौटने की तैयारी कर रहे हैं.
डेली टेलीग्राफ और द सन की रिपोर्ट के बाद सामने आई जानकारी के मुताबिक, हैरी और मेगन इसी महीने के आखिर में लंदन के बाहर एक प्राइवेट, गैर-शाही घर में शिफ्ट होने वाले हैं.
उनके दोनों बच्चे, 7 साल के प्रिंस आर्ची और 5 साल की प्रिंसेस लिलिबेट का सितंबर से ब्रिटेन के एक स्कूल में दाखिला कराया गया है.
बताया जा रहा है कि किंग चार्ल्स को रविवार को इस फैसले की जानकारी दी गई. हालांकि, फिलहाल प्रिंस हैरी या मेगन के दोबारा शाही परिवार के कामकाजी सदस्य यानी वर्किंग रॉयल्स के तौर पर अपनी भूमिका शुरू करने की कोई योजना नहीं है.
इस साल जुलाई में हैरी, मेगन और उनके बच्चे किंग चार्ल्स से उनके हाईग्रोव स्थित घर पर मिले थे. हालांकि, समझा जाता है कि उस मुलाक़ात के दौरान ब्रिटेन वापस लौटने की योजना पर कोई चर्चा नहीं हुई थी.
बीबीसी के मुताबिक, किंग चार्ल्स को पिछले हफ़्ते के आखिर तक इस फैसले की जानकारी नहीं थी. हालांकि, वो निजी और पारिवारिक तौर पर ससेक्स परिवार के साथ ज्यादा समय बिताने का मौका मिलने का स्वागत कर रहे हैं.
लेकिन हैरी और मेगन की आधिकारिक स्थिति में कोई बदलाव नहीं होगा. दोनों आगे भी शाही परिवार के कामकाजी सदस्यों के बजाय निजी नागरिकों के तौर पर ही रहेंगे.
प्रिंस विलियम और प्रिंसेस कैथरीन को भी हैरी और मेगन के ब्रिटेन लौटने की योजना के बारे में जानकारी दे दी गई है.
ट्रंप ने ईरान के ख़िलाफ़ ‘आर्थिक जंग’ शुरू की, क्या एलान किया?
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इमेज कैप्शन, ट्रंप ने पहले के अपने बयानों को दोहराते हुए कहा कि ईरान की सैन्य और आर्थिक ताकत को कमज़ोर किया जाएगा (फ़ाइल फ़ोटो)
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के ख़िलाफ़ एक “अभूतपूर्व और बेहद कड़ा आर्थिक अभियान” शुरू करने का एलान किया है.
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि उन्होंने ईरान को समझौते के लिए सबसे ज़्यादा मौका दिया, लेकिन ईरान इसका फ़ायदा उठाने में नाकाम रहा.
उन्होंने कहा, “आज मैं किसी भी देश के ख़िलाफ़ अब तक की सबसे कड़ी आर्थिक कार्रवाई का एलान कर रहा हूं. यह बड़े स्तर पर आर्थिक युद्ध और ईरान को अलग-थलग करने की मुहिम होगी.”
ट्रंप ने पहले के अपने बयानों को दोहराते हुए कहा कि ईरान की सैन्य और आर्थिक ताकत को कमज़ोर किया जाएगा. उन्होंने चेतावनी दी कि जो भी देश अपने वित्तीय संस्थानों, कारोबार, एयरपोर्ट या सरकारी एजेंसियों के जरिए ईरान को किसी भी तरह की आर्थिक मदद देगा, उसे भी भारी आर्थिक नुक़सान उठाना पड़ेगा.
ट्रंप ने खास तौर पर तेल की तस्करी, तेल टैंकरों की अदला-बदली, नकदी के जरिए पैसे भेजने, मनी एक्सचेंज कंपनियों के इस्तेमाल और जहाजों को फ़र्जी कंपनियों के नाम पर रजिस्टर करने जैसी गतिविधियों का ज़िक्र किया.
अपने बयान के आखिर में ट्रंप ने इस अभियान की तुलना द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नॉर्मंडी में अमेरिकी सैनिकों की लैंडिंग से की. उन्होंने अमेरिका के सहयोगी देशों से अपील की कि वे ईरान से पैदा होने वाले ख़तरे को खत्म करने के लिए अमेरिका का साथ दें.
ट्रंप ने इस पूरी कार्रवाई को “ऐतिहासिक कदम” बताया है.
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