इनके लिए चार घंटे की नींद ही काफ़ी?

    • Author, हेलन थॉमसन
    • पदनाम, बीबीसी फ़्यूचर
  • प्रकाशित

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते हैं कि वे हर दिन केवल तीन से चार घंटे ही सोते हैं. ऐसा ही भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के बारे में कहा जाता था.

पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री मार्गेट थैचर भी कहती थीं कि वो रात में केवल चार घंटे ही सोती थीं. उधर मशहूर सिंगर मारिया कैरी को सोने के लिए 15 घंटे चाहिए होते हैं.

कम समय की नींद से और कुछ हो ना हो, एक फ़ायदा तो तय है. आपको अपने काम के लिए साल में औसतन 60 दिन का अतिरिक्त समय मिलता है, यानी पूरे दो महीने का अतिरिक्त समय.

ऐसा कहनी हैं फ्लोरिडा के मायामी की मनोचिकित्सक एबी रॉस, जो ख़ुद भी केवल चार घंटे ही सोती हैं.

रॉस कहती हैं, "मेरे पास दिन में कहीं ज्यादा घंटे होते हैं, मुझे ऐसा लगता है कि मैं दो जीवन जी सकती हूं."

तो आप क्या करेंगे अगर आपको एक साल में 60 दिनों का अतिरिक्त समय मिल जाए? और, ऐसा कर पाने का राज़ क्या है?

क्या हो तरीका?

रॉस जैसे कम सोने वाले लोगों की एक ख़ास बात ये भी होती है कि वो हमेशा जोश और उत्साह से भरे होते हैं, अलसाए से नहीं दिखते और ना ही वो बहुत ज़्यादा सो पाते हैं.

अमूमन ये लोग सुबह चार या पांच बजे तक उठ जाते हैं.

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तो आखिर क्या वजह है कि कुछ लोग कम सोने के बाद भी ताज़गी से भरे होते हैं और कुछ लोग कम नींद की वजह से दिन भर अलसाए से रहते हैं?

क्या हमें अपने सोने के तौर तरीकों को ज्यादा प्रभावी बनाने की ज़रूरत है?

2009 में सैन फ्रांसिस्को की यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफ़ोर्निया के यिंग हुई फ़ू की लैब में एक महिला ये शिकायत लेकर पहुंचीं कि वो सुबह बहुत जल्दी जग जाती हैं.

पहले लगा कि वे जल्दी सोने और जल्दी उठने वाली महिला हैं लेकिन उन्होंने बताया कि रात के 12 बजे सोने के बाद भी उनकी नींद 4 बजे टूट जाती है.

उन्होंने ये भी बताया कि उनके परिवार में कई सदस्यों के साथ भी ऐसा ही होता था. तब यिंग हुई फ़ू और उनके साथियों ने उस महिला के परिवार वालों के जीनोम की जांच की.

इस जांच से पता चला कि इन लोगों के जीनोम में एक छोटा सा म्यूटेशन (जीन में बदलाव) डीईसी 2 मौजूद था. ये कम सोने वाले लोगों में ही पाया जाता है.

लेकिन सामान्य नींद लेने वाले लोगों के जीन में ये बदलाव नहीं पाया गया और जिन 250 लोगों ने इस प्रयोग में हिस्सा लिया, उनमें भी नहीं पाया गया.

जब प्रयोग के दौरान चूहों के जीन में वहीं बदलाव किया गया तो पाया गया कि वो भी कम सोने लगे, लेकिन उनकी दिन भर की गतिविधि में कोई अंतर नहीं पड़ा है.

कम नींद के ख़तरे

वैसे कम नींद का असर स्वास्थ्य पर पड़ता है, जीवन की गुणवत्ता पर भी पड़ता है और उम्र को भी ये प्रभावित करता है. इससे अवसाद उत्पन्न हो सकता है, वजन बढ़ सकता है और हार्ट अटैक का ख़तरा और डायबिटीज़ होने का ख़तरा भी बढ़ जाता है.

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यिंग हुई फ़ू कहती हैं, "नींद लेना काफी ज़रूरी है. अच्छी नींद कई बीमारियों से निजात दिला सकती है. भूलने वाली बीमारी एलज़ाइमर को होने का ख़तरा भी घट सकता है. अगर किसी लगातार ही सोने के लिए महज दो घंटे कम मिलें, तो जल्दी ही उसे कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है."

आखिर नींद की इतनी जरूरत क्यों होती है? आम मान्यता ये है कि दिमाग को नींद की ज़रूरत है ताकि वह इस दौरान अपना रख-रखाव और मरम्मत करके ख़ुद को रीचार्ज कर सके. इसके लिए उसे दिन में वक्त नहीं मिलता.

जब हम सोते हैं तब हमारा दिमाग क्षतिग्रस्त कोशिकाओं की मरम्मत करता है. इससे शरीर में ऊर्जा की आपूर्ति बढ़ती है, नई ताज़गी का संचार होता है.

अनिंद्रा की शिकायत

यिंग हुई फ़ू कहती हैं, "डीईसी 2 म्यूटेशन होने की वजह से यह मरम्मत का काम कम समय में हो जाता है. नींद के दौरान यह ज़्यादा तेज़ी से होता है. लेकिन अहम सवाल ये है कि दिमाग ये सब करता कैसे है?"

हालांकि डीईसी 2 म्यूटेशन की खोज के बाद कई लोग ये दावा कर रहे हैं कि उनका काम कुछ घंटों की नींद से चल जाता है, लेकिन इनमें से ज़्यादातर लोग अनिंद्रा के शिकार होते हैं.

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लेकिन डीईसी 2 म्यूटेशन वाले लोगों में कुछ बातें ख़ास होती हैं. इसके बारे में यिंग हुई फ़ू बताती हैं, "वे काफी ऊर्जा से भरे होते हैं. काफी आशान्वित होते हैं. वे जीवन में काफी कुछ करना चाहते हैं, लेकिन इसका म्यूटेशन से क्या रिश्ता हो सकता है, ये मालूम नहीं है."

रॉस अपने अनुभव के आधार पर बताती हैं, "नींद से जगने के बाद मुझे हमेशा अच्छा लगता है. सुबह पांच बजे के करीब उठ जाती हूं और उस वक्त काफी शांति होती है. आप काफी कुछ कर सकती हैं. काश उस वक्त दुकाने खुलीं होतीं. लेकिन मैं ऑनलाइन शापिंग करती हूं. काफी कुछ पढ़ती हूं. बाहर निकलकर वर्ज़िश या जॉगिंग करती हूं."

इसी की वजह से रॉस ने अपनी यूनिवर्सिटी की पूरी पढ़ाई ढाई साल में पूरी कर ली. बचे हुए समय में उन्होंने काफ़ी दूसरी चीजें सीखीं. इतना ही नहीं, अपने पहले बेटे को जन्म देने के तीन सप्ताह के बाद ही रॉस ने सुबह में दौड़ना शुरू किया. 10 मिनट की दौड़ से ऐसा सिलसिला शुरू हुआ कि अब तक रॉस 37 मराथन पूरी कर चुकी हैं.

ख़ास होते हैं ये लोग

यिंग हुई फ़ू अपनी लैब में जीन की इस ख़ास म्यूटेशन का अध्ययन कर रही हैं. उन्हें यकीन है कि आने वाले दिनों में कम नींद वाले लोगों की प्रवृति की और वजहों को जानना आसान होगा.

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वैसे दूसरे लोग भी असरदार और आरामदायक नींद लेने की आदत बना सकते हैं. कंसलटेंट नील स्टेनली कहते हैं, "नींद को प्रभावी नींद में बदलने का सबसे बेहतर तरीका यही है कि सुबह उठने का समय निश्चित कर लें. शरीर को रूटीन यानी निश्चित समय पर निश्चित काम, सबसे ज़्यादा पसंद आता है."

हालांकि सबसे अहम सवाल यही है कि आपको कितनी नींद की ज़रूरत है?

इसके बारे में स्टेनली कहते हैं, "ये आपके जीन तय करते हैं. कुछ लोग कुछ ही घंटे में जगकर तरो-ताज़ा हो जाते हैं, तो कुछ लोगों को 11 से 12 घंटे नींद की ज़रूरत होती है. इसलिए हमें यदि ये समझ में आ जाए की हमारे अपने शरीर को किस तरह की नींद पसंद है, और हम उसके मुताबिक चलें, तो ये सबसे अच्छा होगा."

<italic><bold>अंग्रेज़ी में <link type="page"><caption> मूल लेख</caption><url href="http://www.bbc.com/future/story/20150706-the-woman-who-barely-sleeps" platform="highweb"/></link> यहां पढ़ें, जो <link type="page"><caption> बीबीसी फ़्यूचर </caption><url href="http://www.bbc.com/future" platform="highweb"/></link>पर उपलब्ध है.</bold></italic>

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