पाकिस्तानः पेशावर के मृतकों के लिए गीत

    • Author, शाहज़ेब जिलानी
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़
  • प्रकाशित

पाकिस्तानी गायक और अभिनेता अली ज़फ़र एक गाने के ज़रिए पेशावर के एक स्कूल में हुए तालिबानी हमले में मारे गए बच्चों को श्रद्धांजलि देंगे.

इस सप्ताहांत रिलीज़ हो रहे इस गाने में पाकिस्तान के क़रीब 40 नामी-गिरामी सेलेब्रिटीज़ और शख़्सियतें शामिल होंगी.

पेशावर के एक आर्मी स्कूल में 16 दिसंबर को हुए तालिबानी बंदूक़धारियों के हमले में क़रीब 150 लोग मारे गए थे, मरने वालों में अधिकतर बच्चे थे. इस जनसंहार से पूरे पाकिस्तान में शोक की लहर दौड़ गई थी.

अली ज़फ़र कहते हैं, "मुझे इस बात को महसूस करने में थोड़ा वक़्त लगा कि ऐसा कुछ सचमुच हो सकता है."

वो कहते हैं, "एक पिता होने के नाते मुझमें इसे लेकर ग़ुस्सा और खीझ थी. मारे गए बच्चों के परिवार वालों के दुखों और संत्रास की मैं कल्पना भी नहीं कर सकता."

सामान्य होने में लगा वक़्त

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पेशावर हादसे के बाद अली को सामान्य होने के लिए संघर्ष करना पड़ा. वो बताते हैं कि उन्होंने दक्षिण अफ़्रीका में अपना एक कंसर्ट रद्द कर दिया. वो कहते हैं, "मैं अपने आपको इसके लिए तैयार नहीं कर पाया."

फिर उन्होंने तय किया कि वो अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करेंगे और उसेक बाद 'उडेंगे' गीत के बोल लिखे और उसे संगीतबद्ध किया.

गाने की शुरुआत उदासी भरी है लेकिन यह ज्यों-ज्यों आगे बढ़ता है इसमें बेहतर कल का संदेश झलकता है.

अली ज़फ़र पाकिस्तानी के सबसे लोकप्रिय सितारों में एक माने जाते हैं. उन्होंने अभिनय की शुरुआत पाकिस्तानी टीवी सीरियलों से की थी.

साल 2010 में उन्होंने 'तेरे बिन लादेन' फ़िल्म से भारतीय सिनेमा में अपनी पारी शुरू की थी. इस फ़िल्म में अल-क़ायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन और अमरीका के 'चरमपंथ के ख़िलाफ़' युद्ध पर व्यंग्य किया गया था.

एकजुट होने का संदेश

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आज 34 वर्षीय अली के पूरे दक्षिण एशिया में लाखों प्रशंसक हैं. वो कहते हैं, "हमारे पास चरमपंथ के ख़िलाफ़ एकजुट होने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है."

उनका मानना है, "दुनिया को यह पता चलना चाहिए कि पाकिस्तान इससे संघर्ष कर रहा है, इससे लड़ रहा है. और पाकिस्तान इससे उबर कर ऊपर उठेगा."

पेशावर हादसे के बाद पाकिस्तानी सरकार के चरमपंथियों की ख़िलाफ़ कार्रवाई का समर्थन करते हुए अली कहते हैं, "यह बहुत पहले हो जाना चाहिए था लेकिन कभी नहीं से देर भली."

अली मानते हैं कि पाकिस्तान को अपनी भावी पीढ़ियों को बचाने के लिए अपनी कुछ भू-राजनीतिक नीतियों को बदलना होगा.

वो कहते हैं, "हमें अपने घर में व्यवस्था बहाल करनी होगी. अगर हमें इस देश को बचाना है तो हम आँख नहीं मूंद सकते."

सच का सामना

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इमेज कैप्शन, पाकिस्तानी टीवी सीरियल से अभिनय की शुरुआत करने वाले अली ज़फ़र भारतीय फ़िल्मों में काम कर रहे हैं.

अली कहते हैं, "अब समय आ गया है कि हम सच का सामना करें. हमें अपनी ग़लती ज़रूर माननी चाहिए और उसके बाद सबको मिलकर काम करना चाहिए."

अली अपना म्यूज़िक वीडियो लेकर पेशावर के आर्मी स्कूल में भी जाना चाहते हैं. वो वहाँ छात्रों और अभिभावकों से मिलना चाहते हैं.

उन्होंने बताया कि इस वीडियो से होने वाली आय स्कूल निर्माण करने और पाकिस्तान में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए ख़र्च की जाएगी.

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