ये हैं शिक्षा के भगवाकरण की मंशा वाले कठेरिया

    • Author, नितिन श्रीवास्तव
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
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अपने बयानों के चलते विवादों में रहे केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री राम शंकर कठेरिया फिर से सुर्खियों में हैं.

लखनऊ विश्विद्यालय के एक समारोह में उन्होंने कहा है कि 'देश को जिस तरह की शिक्षा नीति की ज़रूरत है सरकार उसी पर काम कर रही है और देश के भले की लिए ज़रूरत पड़ी तो शिक्षा का भगवाकरण भी किया जाएगा.'

कुछ दिन पहले कोटा, राजस्थान में कठेरिया के उस बयान की भी निंदा हुई थी जिसमें उन्होंने एक प्रमुख विपक्षी नेता की ओर इशारा करते हुए कहा था, "मोदी सरकार बहुत सारा काम कर रही है लेकिन पप्पू इन्हें समझ नहीं पा रहे".

लेकिन कौन हैं राम शंकर कठेरिया ? आएं उनके अब तक के राजनीतिक सफ़र पर नज़र डालते हैं:

उत्तर प्रदेश के इटावा के रहने वाले कठेरिया 16वीं लोकसभा में आगरा से सांसद हैं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से एक लंबे समय तक जुड़े रहे हैं.

नवंबर 2014 में जब नरेंद्र मोदी ने इन्हें अपनी कैबिनेट में शामिल किया था तब विपक्षी दलों ने मोदी के फ़ैसले की खासी निंदा भी की थी.

वजह थी उस समय राम शंकर कठेरिया के ख़िलाफ़ दर्ज 23 आपराधिक मामले जिनमें से एक मामला हत्या की कोशिश और दूसरा धोखाधड़ी का भी था.

खुद कठेरिया ने चुनाव आयोग में जो हलफ़नामा दिया है उसके अनुसार इनके खिलाफ 23 मामले थे और उन्होंने कहा था कि अदालत में इन सभी मामलों में से किसी एक में भी तब तक आरोप तय नहीं किए गए हैं.

उनके खिलाफ आपराधिक मामलों में ज़्यादातर प्रशासन के काम-काज में रुकावट डालने से लेकर फ़र्ज़ी डिग्री और हत्या की कोशिश तक के मामले हैं.

आरएसएस प्रचारक रहते हुए भी कानपुर विश्वविद्यालय से पीएचडी करने वाले कठेरिया आगरा विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर भी हैं.

हालांकि केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री के ख़िलाफ़ आगरा विश्विद्यालय में नौकरी का आवेदन करते समय कथित तौर पर बीए और एमए की जाली डिग्रियों को देने का भी आरोप लगा था. वो इन सभी आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज करते रहे हैं.

गौरतलब ये भी है कि उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी सरकार ने 2013 में कठेरिया के खिलाफ दर्ज पांच आपराधिक मामलों में उन्हें क्लीन चिट भी दी थी.

अपने राजनीतिक करियर में विवादों से दो-चार होते रहे राम शंकर कठेरिया ने मार्च 2016 में विश्व हिंदू परिषद के एक स्थानीय नेता की हत्या के बाद हुई शोक सभा में भी हिस्सा लिया था जिसमें ख़ासी विवादास्पद बयानबाज़ी भी हुई थी.

इस शोक सभा में मुस्लिम समुदाय के लोगों की तुलना कथित तौर से 'राक्षस' और 'रावण के वंशजों' से की गई थी.