भाजपा की मुश्किलें बढ़ाएगा खड़से का इस्तीफ़ा?

    • Author, अश्विन अघोर
    • पदनाम, मुंबई से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
  • प्रकाशित

महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री और भाजपा नेता एकनाथ खड़से के इस्तीफ़े के विरोध में जलगांव नगर निगम के 14 पार्षदों ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है. इससे खड़से के गढ़ में भाजपा मुश्किलों में घिरती नज़र आ रही है.

कई आरोपों से घिरे एकनाथ खड़से ने काफ़ी दबाव के बाद शनिवार को मंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया था.

राज्य सरकार ने उनपर लगे आरोपों की जाँच हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त जज से कराने का फ़ैसला किया है.

जैसा अंदाज़ा लगाया जा रहा था, खड़से समर्थकों ने इसका कड़ा विरोध किया. उन्होंने पार्टी आलाकमान को गंभीर परिणामों की धमकी तक दे डाली है.

खड़से के समर्थन में जलगांव के कई भाजपा नेता, कार्यकर्ता और पार्षद मुंबई में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मिलना चाहते थे.

लेकिन इसे अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधि बताते हुए, फडणवीस ने उनसे मिलने से इनकार कर दिया. पार्टी ने ऐसे नेताओं को कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी है.

पार्टी की चेतावनी को नज़रअंदाज़ कर जलगांव नगर निगम के 14 पार्षदों ने खड़से के समर्थन में अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया.

खड़से के इस्तीफ़े के बाद उनके गृह ज़िले जलगांव में कई जगह हिंसक प्रदर्शन हुए. खड़से समर्थकों ने मुंबई-आगरा हाईवे को जाम कर दिया. पुलिस ने काफ़ी जद्दोजहद के बाद उन पर क़ाबू पाया.

वरिष्ठ पत्रकार और राजनैतिक विश्लेषक कुमार केतकर मानते हैं कि यह भाजपा की तकलीफ़ों की महज़ शुरुआत है.

वो कहते हैं, ''खड़से के इस्तीफ़े के बाद उत्तर महाराष्ट्र में भाजपा की समस्याएं काफ़ी हद तक बढ़ जाएंगी.''

केतकर कहते हैं, ''राज्य के इस हिस्से में खड़से का काफ़ी दबदबा है. इसे नजरअंदाज़ नहीं किया जा सकता. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में खड़से क्या करते है."

वरिष्ठ पत्रकार अभय देशपांडे खड़से के इस्तीफ़े को कुछ अलग अंदाज़ में ही देखते हैं.

वो कहते हैं, ''अब भाजपा को 'विरोधी पार्टी' और 'पार्टी विरोधी' नेताओं से कड़ा संघर्ष करना पड़ेगा. खड़से के जाने के बाद महाराष्ट्र सरकार को काफ़ी दिक़्क़तों का सामना करना पड़ सकता है.''

देशपांडे कहते हैं, ''राज्य विधानसभा का मानसून सत्र जल्द ही शुरू होने वाला है. तब खड़से की कमी खलेगी, जब विपक्ष सरकार को हर मुद्दे पर घेरने की कोशिश करेगा. उस वक़्त सरकार के बचाव की ज़िम्मेदारी अकेले फडणवीस पर होगी."

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