छत्तीसगढ़: निकाय चुनाव में भाजपा को झटका

    • Author, आलोक प्रकाश पुतुल
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
  • प्रकाशित

एक दिन पहले विधानसभा उपचुनाव के टेप में कथित लेनदेन को लेकर आलोचना झेल रही छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार को स्थानीय निकाय के चुनाव में तगड़ा झटका लगा है.

11 नगर निगम और नगर पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में 8 सीटों पर भाजपा को पराजय का सामना करना पड़ा है.

राजधानी रायपुर से लगे हुए भिलाई नगर निगम के चुनाव परिणाम भी भाजपा के खिलाफ गए हैं. भिलाई नगर निगम के महापौर पद पर कांग्रेस के देवेंद्र यादव ने 45 हज़ार से भी अधिक वोटों से कब्जा किया है.

यह तब है, जब भाजपा सरकार के तीन वरिष्ठ मंत्री पूरे चुनाव के दौरान लगातार सक्रिय थे.

प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि रमन सिंह की सरकार जिस तरह साजिश करके पैसे बांट कर चुनाव जीतती रही है, जनता ने इस चुनाव में उस साजिश का जवाब दिया है.

बघेल ने कहा- “यह रमन सिंह और भारतीय जनता पार्टी की नीतियों की हार है. जनता राज्य और देश में भाजपा की सरकार से परेशान हो चुकी है.”

वहीं भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता संजय श्रीवास्तव ने पूरे मामले की पार्टी फ़ोरम पर समीक्षा की बात कही है.

लेकिन एक बड़ा वर्ग मानता है कि छत्तीसगढ़ में असली समीक्षा की घड़ी कांग्रेस के लिए है.

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पार्टी के दो धड़े रहे हैं. पहला धड़ा कांग्रेस पार्टी के नाम से जाना जाता है और बरसों से दूसरे गुट को जोगी कांग्रेस कहा जाता है.

राजनीतिक गलियारे में इस बार यह बात बहुत स्पष्ट थी कि नगरीय निकाय के चुनाव में कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने अपनी पसंद के उम्मीदवार मैदान में उतारे.

इस चुनाव में अजीत जोगी के अधिकांश उम्मीदवारों को किनारे कर दिया गया था.

ज़ाहिर है, भारतीय जनता पार्टी के लिये ये परिणाम एक सबक की तरह हो सकते हैं लेकिन विधानसभा के उपचुनाव के लेनदेन का कथित टेप पहले ही अजीत जोगी गुट के लिये मुश्किल का कारण बना हुआ था, अब नगरीय निकाय चुनाव के परिणाम के बाद जोगी छत्तीसगढ़ की राजनीति में और कमज़ोर होंगे, यह बात तय मानी जा रही है.

राज्य के वरिष्ठ पत्रकार और दैनिक छत्तीसगढ़ के संपादक सुनील कुमार कहते हैं, “टेप कांड और नगरीय निकाय के परिणाम को देखें तो इन दो दिनों में भाजपा एक बड़े नुकसान में दिखती है. लेकिन कांग्रेस पार्टी के लिये भी यह एक ख़तरनाक नौबत है, जिससे वो एक अधिक मज़बूत पार्टी के रुप में भी उभर सकती है और टूट भी सकती है.”

सुनील कुमार का मानना है कि यह समय कांग्रेस के लिये चुनौती और संभावना का समय है.

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