बिहारः 'मैं अपने विधायक का नाम तक नहीं जानती'

बिहार, पटना
    • Author, सीटू तिवारी
    • पदनाम, बीबीसी हिन्दी डॉटकॉम के लिए
  • प्रकाशित

बिहार के आगामी विधानसभा चुनाव में युवा वोटरों पर बहुत कुछ दारोमदार रहने वाला है.

यहां कुल वोटरों में युवाओं की संख्या 56 फ़ीसदी है और इसीलिए सभी राजनीतिक पार्टियां उन्हें अपनी ओर खींचने की कोशिशें कर रही हैं.

पटना के दिल डाकबंगला चौराहे से सटे जेपी भवन के पास खोमचा लगाने वाले 25 साल के गुलाम नबी विकलांग हैं.

बिहार, युवा मतदाता, गुलाम नबी

उनका दाहिना हाथ और पैर आंशिक रूप से ख़राब हैं. तीन बच्चों के पिता ग़ुलाम चुनाव के बारे में पूछने पर कहते हैं, “हम विकलांग हैं लेकिन किसी सरकार ने सर्टिफिकेट नहीं बनाया. हमें नहीं दिया कोई बात नहीं, लेकिन कम से कम मेरे बच्चों की शिक्षा सरकार देखे."

वोट किसको देंगे, इस पर वो कहते हैं, "जो काम करेगा, उसे ही वोट देगें चाहे वह किसी जाति, धर्म का हो.”

विधायक की ग़लती?

बिहार, युवा मतदाता, मगध महिला कॉलेज

पटना के मगध महिला कॉलेज की बीकॉम तीसरे साल की छात्रा स्वाति कहती हैं, “मुझे नहीं मालूम मेरा विधायक कौन है और अगर मैं अपने विधायक का नाम नहीं जानती तो सवाल मुझ पर नहीं बल्कि विधायक उस पर है. जिसके पास वह नेतृत्व क्षमता भी नहीं कि हम उनका नाम जान सकें.”

बिहार, पटना, आरजेडी पोस्टर

दिलचस्प है कि इस समूह में कोई भी छात्रा अपने विधायक का नाम नहीं जानती.

अंकिता कहती हैं, “हम यहां उच्च शिक्षा के बारे में सोच भी नहीं सकते. और यह हालात बनाए हैं नेताओं ने. हमारे कॉलेज को बिहार में सब जानते हैं लेकिन ज़रा आप वॉशरूम जाकर देख आइए, आपको हक़ीक़त मालूम चल जाएगी. फिर हम कैसे मान लें कि बिहार में कोई ढंग का लीडर है.”

बिहार, युवा मतदाता, फ़ातिमा

लेकिन इस बेफ़िक्री के बीच भी मुद्दे हैं, जैसा कि फातिमा कहती है, “दूसरे मुद्दों के अलावा मेरे समुदाय की सुरक्षा मेरे लिए बड़ा सवाल है.”

जाति टूटेगी?

बिहार इंटरप्रेनर एसोसिएशन से जुड़े 31 साल के अभिषेक कहते हैं, “युवा, ख़ासकर शहरी युवा से अपनी जाति, धर्म के हिसाब से वोट करने की उम्मीद ग़लत है. अगर मुझे वोट डालना हो तो मैं करियर ऑप्शन, करियर सेलेक्शन और बिहारी प्राइड के आधार पर वोट डालूंगा.”

अभिषेक

अभिषेक से उलट 25 वर्षीय सृष्टि शरण जाति को महत्वपूर्ण मानती हैं.

ग्रामीण बैंक में काम करने वाली सृष्टि कहती हैं, “खुद मेरे लिए सरकार की नीतियां, महिलाओं की सुरक्षा बड़ा सवाल है. लेकिन सभी के लिए ऐसा नहीं है."

"हम जब बैंक में काम करते हैं तो कस्टमर भी अपनी जाति, अपने इलाके का आदमी ढूंढता है कि उसके पास जाने से काम जल्दी हो जाएगा. ऐसे में आप जाति की सच्चाई को कैसे खारिज करेंगे.”

सृष्टि

हालांकि बिहार चुनावों में अप्रवासी युवा महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.

त्यौहार के मौके पर बिहार लौटने वाले ये युवा किन मुद्दों के आधार पर वोट डालते हैं ये भी राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण होगा.

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