पिछले बजट सत्र ने कई रिकॉर्ड बनाए थे

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मंगलवार से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में ख़ासा हंगामा होने के आसार हैं.

पिछले बजट सत्र में भी दोनों पक्षों की रस्साकशी के कारण कई अहम विधेयक पारित नहीं हो सके थे.

लेकिन संसद के कामकाज पर नज़र रखने वाली सस्था पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के अनुसार पिछले 15 साल के संसद के कामकाज के घंटों के मुताबिक पिछले बजट सत्र में सबसे ज़्यादा काम हुआ.

इस बार कम से कम आठ ऐसे विधेयक हैं जो दोनों में से एक सदन या तो लोकसभा या राज्यसभा में पास हो गए हैं और संभव है कि इस सत्र में ये लाए जाएँ.

भूमि अधिग्रहण विधेयक लोकसभा में पारित हो चुका है और जूविनाइल जस्टिस एक्ट राज्य सभा में विचाराधीन है.

बजट सत्र के आकड़े

पिछले सत्र का लेखा-जोखा

पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के अनुसार वक़्त के इस्तेमाल और उस दौरान हुए कामकाज के हिसाब से 15 साल में पिछले बजट के दौरान सबसे ज़्यादा काम हुआ.

बजट सत्र में लोकसभा में जहां 122 फ़ीसदी काम हुआ वहीं राज्यसभा ये आंकड़ा 102 फ़ीसदी था.

जब काम के निर्धारित समय के मुकाबले में असल में काम ज़्यादा समय होता है तो 100 फ़ीसदी का आंकड़ा पार हो जाता है.

बजट सत्र के आकड़े

सत्र के समाप्त होने तक लोकसभा में प्रश्नकाल के लिए निर्धारित समय का 84 फ़ीसदी इस्तेमाल हुआ और राज्यसभा में 80 फ़ीसदी.

सत्र के दौरान 20 बिल लाए गए जिनमें से पांच बिल स्टैंडिंग कमिटी को भेज दिए गए.

उस सत्र में 16 बिल पारित हुए. इनमें से पांच को अध्यादेश की जगह पारित करवाया गया.

संविधान संशोधन विधेयक को वापस ले लिया गया, जीएसटी बिल को राज्य सभा की सेलेक्ट कमिटी को भेज दिया गया जबकि भूमि अधिग्रहण बिल को संयुक्त संसदीय समिति को भेजा गया.

पिछले 15 सालों में उस सत्र में बिल पास कराने के लिए सबसे ज़्यादा 17 फ़ीसदी बिल रिकॉर्डेड वोट से पास हुए. पहले औसतन पांच फ़ीसदी बिल हर लोकसभा में रिकॉर्डेड वोट से पास होते थे.

प्राइवेट मेंबर बिल पारित

बजट सत्र के आकड़े

अध्यादेश की जगह कुल 39 फ़ीसदी बिल पास हुए जबकि 14वीं और 15वीं लोकसभा में अध्यादेश की जगह कुल बिल का 11 फ़ीसदी और आठ फ़ीसदी पास हुए.

लोकसभा में छह मंत्रालयों के अनुदान पर चर्चा हुई. पिछले 47 साल में संसद के किसी भी सदन में कोई भी प्राईवेट मेंबर बिल पास नहीं कराया गया था.

इस सत्र में तीरुची सीवा की ओर से लाए गए प्राइवेट मेंबर बिल राइट्स ऑफ़ ट्रांसजेंडर पर्सन बिल, 2014 को राज्यसभा में मंजूरी मिली थी.

(सभी आकड़ें पीआरएस के हवाले से)

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