वो झील, जहां मोदी ने 'पकड़ा था मगरमच्छ'

वडनगर में वो घर जहां मोदी रहा करते थे.
इमेज कैप्शन, वडनगर में वो घर जहां मोदी रहा करते थे.
    • Author, अंकुर जैन
    • पदनाम, वडनगर से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
  • प्रकाशित

महात्मा गांधी और गरबा के बाद क्या दुनिया को गुजरात की सबसे बड़ी देन नरेंद्र मोदी हैं!

एक 'चाय बेचने वाले' से भारत के प्रधानमंत्री तक का सफ़र तय करने वाले मोदी की कहानी ने लाखों भारतीयों की कल्पनाओं को पंख लगाए हैं.

इसी भावना को सवारी बनाकर एक ट्रैवेल कंपनी ने एक दिवसीय टूर की शुरुआत की है - ‘अ राईज़ फ़्राम मोदीज़ विलेज.’

अंकुर जैन ने 42 अन्य पर्यटकों के साथ अहमदाबाद से वडनगर तक के इस टूर में हिस्सा लिया.

भारतीबेन और रमेशभाई ने अपनी शादी की 52वीं सालगिरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गांव जाकर मनाने का निर्णय लिया.

टूर पैकेज

मोदी जहां बेचते थे चाय

भारतीबेन और रमेशभाई अपनी शादी की 52वीं सालगिरह मोदी को जानने समझने के लिए उनके घर में बिताना चाहते थे. सेवानिवृत्त बैंकर बाबूभाई गज्जर और उनकी पत्नी कांताबेन रोज़मर्रा के कोलाहल से थोड़ी शांति चाहते थे.

उन्होंने युवा मोदी के घर और स्कूल को देखने के लिए एक दिन का पैकेज लिया.

इनके जैसे अधिकांश लोगों के लिए उत्तरी गुजरात के वडनगर में स्थित मोदी का पैतृक निवास उस सूची में ख़ास स्थान रखता है जिसके दर्शन वो करना चाहते हैं..

भारतीबेन कहती हैं, “हम अपनी सालगिरह पर कुछ अलग करना चाह रहे थे और उन चीजों को देखने से बेहतर और क्या हो सकता है जहां मोदी रहते थे, जिन गलियों में खेला, काम किया और जहां पढ़ने गए.”

टूर कंपनी का कहना है कि असल में यह टूर पैकेज, जनवरी में होने वाले प्रवासी भारतीय दिवस में आने वाले प्रवासी भारतीयों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था.

भारी मांग पर हुआ शुरू

टूर कंपनी

टूर कंपनी अक्षर ट्रैवल्स के डायरेक्टर मनीष शर्मा कहते हैं, “जनवरी में हम गुजरात आने वाले एनआरआई और दूसरे विदेशी पर्यटकों को वडनगर ले गए थे. इसके बाद हमारे पास टूर के संबंध में पूछताछ होने लगे और लोग चाहते थे कि हम वडनगर के लिए एक दिन का टूर शुरू करें.”

शर्मा कहते हैं कि उनकी कंपनी अब हर रविवार को अहमदाबाद से वडनगर तक पर्यटकों को ले जाती है.

उनके अनुसार, “वैसे परिवार हैं जो अपनी कारों में जाते हैं और वो भी जो ग्रुप की शक्ल में जाना चाहते हैं हमारी बस हर रविवार गांधी आश्रम से चलती है.”

अहमदाबाद में साबरमती आश्रम के ठीक बाहर से, जहां से कभी महात्मा गांधी ने नमक सत्याग्रह की शुरुआत की थी, मोदी के गांव का टूर शुरू होता है.

जैसे ही बस चलती है टूर गाइड यात्रियों को मोदी की ज़िंदगी के बारे में जानकारियां देने लगता है.

झील

झील

गाइड बताता है, “आज, हम उस व्यक्ति का गांव देखने जा रहे हैं जिसने चाय बेचने से लेकर भारत का प्रधानमंत्री बनने तक की यात्रा की. हम वो स्टेशन देखेंगे जहां वो चाय बेचते थे और उसके बाद उनका पुराना घर और स्कूल देखेंगे.”

टूर पैकेज में झील शर्मिष्ठा का भ्रमण भी शामिल है, जहां कथित रूप से मोदी ने मगरमच्छ को पकड़ा था.

अधिकांश बुज़ुर्ग पर्यटक पहले टूरिस्ट स्पॉट - वडनगर रेलवे स्टेशन पर उतरे हैं.

टूर गाइड कहता है, “यह बहुत महत्वपूर्ण स्टेशन है, जहां मोदी चाय बेचते थे.”

वडनगर रेलवे स्टेशन

पर्यटक डीएम दारज़ी के अनुसार, “मैंने इस स्टेशन के बारे में सुन रखा था, लेकिन यहां मौजूद होना अच्छा लग रहा है.”

एक अन्य पर्यटक के अनुसार, “हमने मोदी की ज़िंदगी के बारे में पढ़ रखा है लेकिन उनके गांव को जाकर देखना एक यादगार अनुभव है. भारत में मोदी के बराबार कोई नहीं.”

लेकिन तापमान बढ़ने और झुलसाती गर्मी के कारण बहुत कम लोग एसी बस से नीचे उतरते हैं. अधिकांश अंदर से ही दर्शन करना ठीक समझते हैं.

कुछ मुठ्ठीभर लोग ही वडनगर के मध्य में स्थित मोदी का घर देखने के लिए संकरी गलियों में उतरते हैं.

पर्यटकों की संख्या

मोदी के गांव का टूर

गरम दोपहरी में खुदी और गंदी सड़क पर्यटकों के उत्साह पर ठंडा पानी डाल रही है.

गुजरात में रहने वाले बहुत से लोगों के लिए मोदी अभी भी एक सुपरहीरो से कम नहीं हैं और वडनगर में पर्यटकों की संख्या बढ़ रही है.

हालांकि इस जगह के लोगों का विचार कुछ अलग अलग है.

हर्षद की किराना और सिगरेट की दुकान मोदी के पुराने घर के बिल्कुल सामने है. मोदी का वो घऱ बिक चुका है.

वो बताते हैं, “यह बढ़िया है कि लोग उत्सुक हैं और मोदी का घर देखने वडनगर आ रहे हैं. लेकिन स्थानीय लोगों के लिए ये कोई मायने नहीं रखता है. पर्यटक अक्सर अपनी गाड़ी में आते हैं और जगह देखने के बाद लौट जाते हैं. हमें कुछ भी नहीं मिलता.”

हालत सुधरेगी?

मोदी के घर को जाने वाली गली.
इमेज कैप्शन, मोदी के घर को जाने वाली गली.

स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि मोदी ने गुजरात के टूरिज़्म की हालत दुरुस्त कर दी है और एक दिन वडनगर के लोग भी संपन्नता और धन दौलत हासिल करेंगे.

मोदी के शासनकाल में गुजरात में आक्रामक प्रचार के कारण पर्यटकों की संख्या में पांच गुने की वृद्धि हुई.

साल 2014-15 में गुजरात आने वाले पर्यटकों की संख्या 3.26 करोड़ थी, जबकि 2002-03 में यह संख्या 60 लाख थी.

जानकारों का मानना है कि भारतीय पर्यटन व्यवसाय को मोदी की क़ाबिलियत का लाभ मिलेगा. उद्योग जगत के लोगों का मानना है कि 2015 तक टूरिज़्म की जीडीपी में सात प्रतिशत हिस्सेदारी हो जाएगी.

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