'आईसीयू में है तमिलनाडु सरकार'

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    • Author, इमरान क़ुरैशी
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
  • प्रकाशित

क्या देश के सबसे प्रगतिशील राज्यों में से एक तमिलनाडु में पिछले आठ महीने से विकास ठप पड़ गया है?

आठ महीने पहले सत्तारूढ़ अन्नाद्रमुक की नेता जयललिता को अदालत के आदेश पर सत्ता छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा था.

अब जयललिता की कट्टर विरोधी डीएमके राज्य के वर्तमान मुख्यमंत्री ओ पनीरसेलवम से पूछ रही हैं कि उनकी प्रतिबद्धता किसके प्रति है, 'तमिलनाडु के लोगों के प्रति या उसकी सजायाफ़्ता नेता के प्रति.'

श्रेय के लिए थमी गति

अम्मा नमक

पिछले सप्ताह डीएमके नेता एमके स्टालिन ने पनीरसेलवम को लिखे एक तीखे पत्र में लिखा है, "तमिलनाडु आईसीयू में है और इसके लक्षण चिंता का विषय हैं. भारत के तीन प्रमुख निवेश ठिकानों में से एक रहा राज्य आज उन तीन राज्यों में से एक है जहां से कंपनियां भाग रही हैं."

हालांकि जिन कंपनियों की वह बात कर रहे हैं हो सकता है कि वे कई अन्य वजहों से जा रही हों.

लेकिन राजनीतिक और व्यापारिक हलकों में इसे लेकर संदेह बहुत कम है कि सितंबर 2014 (जबसे जयललिता को जेल भेजा गया है), उसके बाद से राज्य में जारी राजनीतिक गतिरोध की वजह से राज्य की निवेश ठिकाने के रूप में छवि चटख हरे से बदलकर लाल हो रही है.

उद्योग संघों और व्यापारी नेताओं ने विकास की गति में 'ठहराव' पर टिप्पणी से इनकार कर दिया है. कुछ लोगों ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि स्थिति में 'एक किस्म की मंदी तो आ रही है.'

फ़ैसले का इंतज़ार

जयललिता, मुख्यमंत्री पनीरसेलवम

राजनीतिक विश्लेषक केएन अरुण के अनुसार, "अन्नाद्रमुक पार्टी का गठन कुछ इस तरह हुआ है कि पार्टी जो भी करे उसका सारा श्रेय जयललिता को जाना है. सरकार भी उनके नाम पर ही बनी है. अब क्योंकि वह मुख्यमंत्री नहीं हैं इसलिए नए कार्यक्रम शुरू नहीं किए जा रहे हैं."

चेन्नई मेट्रो रेल सिस्टम को अब तक औपचारिक रेलवे सेफ़्टी मानकों पर नहीं परखा गया है क्योंकि एक बार इसे सुरक्षा प्रमाण पत्र मिल जाए तो सरकार को उसे लोगों के लिए खोलना पड़ेगा.

अरुण कहते हैं, "सरकार इस पर धीरे-धीरे काम कर रही है क्योंकि इसका श्रेय जयललिता को जाना है."

लेकिन वरिष्ठ बिज़नेस पत्रकार सुशीला रवींद्रनाथ कहती हैं, "ऐसा नहीं है कि निवेश के मोर्चे पर कुछ नहीं हो रहा है. यामाहा और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसी कंपनियों ने अपनी परियोजनाओं के विस्तार के लिए निवेश बढ़ाने का ऐलान किया है. लेकिन सड़क, ऊर्जा और आधारभूत ढांचे जैसे क्षेत्रों में ठहराव आ गया है."

जयाललिता समर्थक

रवींद्रनाथ कहती हैं, "तब तक कुछ नहीं होगा जब तक कि लंबित याचिका (निचली अदालत के जयललिता को दोषी ठहराने के फ़ैसले को कर्नाटक हाईकोर्ट में चुनौती देन वाली) पर फ़ैसला नहीं आ जाता."

उच्चतम न्यायालय की तीन जजों की बेंच के निर्देशानुसार उच्च न्यायालय को उनकी याचिका पर 12 मई से पहले फ़ैसला देना है.

'अछूता नहीं तमिलनाडु'

अपने पत्र में स्टालिन ने कहा है, "आपके मंत्री जिन्हें तमिलनाडु पर शासन करना चाहिए था, आपकी नेता को छुड़ाने के लिए रोज़ दूध के पात्र लिए, पूजा करते और आग पर चलते नज़र आते हैं."

चुनावों में पटखनी खाने वाली डीएमके को ऊर्जा मिली जब दूसरी बार ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट को सरकार ने स्थगित कर दिया. इस आयोजन से 73,000 करोड़ रुपए का निवेश आने की उम्मीद की जा रही थी.

अजीब बात यह है कि तमिलनाडु सरकार निवेश की गति धीमी होने के मुख्य बिंदुओं को चिन्हित करने को भी तैयार नहीं है.

चेन्नई शहर

मद्रास विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफ़ेसर आर श्रीनिवासन कहते हैं, "तमिलनाडु की अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित नहीं है. इसकी अर्थव्यवस्था सीधे दुनिया की आर्थिक स्थिति से जुड़ी हुई है इसलिए अगर पूरी दुनिया में निवेश का माहौल अच्छा नहीं है तो तमिलनाडु अछूता कैसे रहेगा."

लेकिन तमिलनाडु सरकार इस बात को भी विपक्ष को जवाब देने के लिए इस्तेमाल नहीं कर रही है. इससे यकीनन विपक्ष को सरकार के ख़िलाफ़ उग्र होने का मौका मिल गया है. क्या पूर्व मुख्यमंत्री के वफ़ादार मुख्यमंत्री, इस इशारे को समझेंगे और प्रतिक्रिया करेंगे, इससे पहले कि देरी हो जाए?

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