खुले में निबटने वालों से निबटती लट्ठमार महिलाएँ

बिहार, नालंदा
    • Author, आरज़ू आलम
    • पदनाम, फ़ोटो पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
  • प्रकाशित

"तीन बजे भोरवा में चलली सड़किया के सफाई में चला हे सखिये उठा रोड के सफाई में,

हाथ में लेली टरचवा, हाथ में लेली डंडवा, चला हे सखिये उठा रोड के सफाई में...”

बिहार के नालंदा इलाक़े में तड़के सुबह महिलाएं ये गीत गाती सड़कों पर निकलती हैं.

महिलाओं की ये टोली पहरे पर निकली है, जिसका मक़सद है खुले में शौच करने वालों को खदेड़कर आबादी वाले इलाक़ों से दूर करना.

बिहार, नालंदा

नालंदा ज़िले के अरौत गाँव की 16 महिलाओं की ये पहरेदारी इलाक़े के लोगों को सफ़ाई का पाठ पढ़ाने के लिए है.

गाँव में लगभग पौने तीन सौ घर हैं, लेकिन ज़्यादातर घरों में शौचालय नहीं. ऐसे में औरत-मर्द दोनों शौच के लिए रास्तों के किनारे खुले में बैठा करते थे.

बिहार, नालंदा

गाँव में रहने वाले सुदामा प्रसाद कहते हैं, “दस फुट की सड़क पर चलने की ख़ातिर चार फुट भी जगह नहीं बचती थी. रात के अंधेरे में नीचे खेत में उतर कर आते-जाते थे कि मैला ना लगे”.

बिहार, नालंदा

गंदगी और उनसे होने वाली बीमारियों से परेशान गाँव की ही एक महिला गिरजा देवी ने पिछले साल अक्तूबर में पहल करते हुए गाँव की कुछ महिलाओं को इकट्ठा कर सुबह और शाम रास्ते पर पहरेदारी करने का निर्णय लिया.

बिहार, नालंदा

घरों में शौचालय नहीं और अंधेरे में दूर तक जाना सुरक्षित नहीं, ऐसे में पहरा देने वाली टोली की महिलाएं शौच करने वाली औरतों को दूर खेत तक छोड़कर आती हैं.

यही नहीं समूह की महिलाएं हफ्ते में एक बार गाँव की नालियाँ भी साफ करती हैं.

बिहार, नालंदा

गिरजा देवी बताती हैं, "शुरुआत में पहले पहल हम चार लोग थे, लेकिन धीरे-धीरे और महिलाओं नें जुड़ने की इच्छा जताई. इस तरह आज हम कुल 16 औरतें हैं जो चार-चार की टोली में अपने घर के नज़दीक वाले रास्ते पर पहरा देती हैं.”

बिहार, नालंदा

समूह की सभी महिलाएं दलित हैं और पढ़ाई-लिखाई का कभी कोई मौका नहीं मिला, लेकिन स्वच्छता के प्रति इनकी प्रतिबद्धता देखते बनती है.

बिहार, नालंदा

पहरेदारी के लिए निकली राज मुन्नी देवी बातों-बातों में कहती हैं, "काम भले ही नेक हो, लेकिन सफाई के लिए पहरेदारी करना आसान नहीं है."

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उनके मुताबिक़, गाँव के कई लोगों से इन औरतों का बैर हुआ और तो कईयों ने बोल-चाल तक बंद कर दी.

लेकिन काम चलाऊ डंडे और हाथ में टॉर्च लेकर अंधेरे मुंह मुस्तैदी करने वाली इन महिलाओं की पहल रंग ला रही है.

इस मुहिम को लोगों का समर्थन मिल रहा है.

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