मोदी सरकार के रेडार पर फ़ोर्ड फ़ाउंडेशन

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- Author, अंकुर जैन
- पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए, अहमदाबाद से
- प्रकाशित
भारत के गृह मंत्रालय ने ‘देश हित और सुरक्षा’ के मद्देनज़र बड़े अंतरराष्ट्रीय फ़ंडिंग संगठनों में से एक फ़ोर्ड फ़ाउंडेशन पर निगरानी रखने के आदेश दिए हैं.
ऐसा गुजरात सरकार के फ़ोर्ड फ़ाउंडेशन और मानवाधिकार कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ की फ़ंडिंग की जांच के बारे में केंद्र को लिखे पत्र के एक हफ्ते बाद हुआ है.
गृह मंत्रालय के आदेश मे कहा गया है कि फ़ोर्ड फ़ाउंडेशन और अमरीका से देश में किसी भी एजेंसी, ग़ैर सरकारी संगठनों के लिए आ रही फ़ंडिंग को पहले मंत्रालय की मंज़ूरी लेना आवश्यक होगा.
ये कार्रवाई विदेशी चंदा नियमन क़ानून (एफ़सीआरए) की धारा 46 के तहत की गई है.
इस बीच, फ़ोर्ड फ़ाउंडेशन ने कहा है कि भारत के गृह मंत्रालय ने उनसे सीधे संपर्क नहीं किया है, लेकिन वे अपने काम को क़ानून के मुताबिक करने के प्रति आश्वस्त हैं.
आरबीआई को निर्देश

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गृह मंत्रालय ने भारतीय रिज़र्व बैंक से कहा है कि वो सभी बैंकों और उनकी शाखाओं को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दे कि फ़ोर्ड फ़ाउंडेशन से आने वाली कोई भी राशि पहले गृह मंत्रालय से मंज़ूर होगी.
पिछले हफ़्ते गुजरात सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर सीतलवाड़ के एनजीओ ‘सबरंग ट्रस्ट’ की जांच कराने की मांग की थी.
गुजरात पुलिस ने फ़ंड की धोखाधड़ी के आरोपों में पहले ही ट्रस्ट के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कर लिया है.

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गुजरात पुलिस का आरोप है कि 'तीस्ता के एनजीओ को मिले फ़ंड्स का इस्तेमाल सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने और विदेशी ज़मीन पर भारत के ख़िलाफ़ दुष्प्रचार' करने के लिए किया गया.
पत्र में कहा गया है कि फ़ोर्ड फ़ाउंडेशन से सबरंग ट्रस्ट और सबरंग कम्युनिकेशन एंड पब्लिशिंग प्राइवेट लिमिटेड को 5.4 लाख डॉलर मिले हैं.
इस पर तब तीस्ता ने कहा था कि ये मामला फ़र्ज़ी है और ये (2002 के) दंगा पीड़ितों को न्याय दिलाने की लड़ाई को रोकने की एक और कोशिश है.
फ़ोर्ड फ़ाउंडेशन 2011 में भारत में तब चर्चा में आया था, जब ये पता चला था कि एनजीओ कबीर को (जिससे अरविंद केजरीवाल संबंधित थे) फ़ाउंडेशन से लगभग चार लाख डॉलर मिले.
इससे पहले, मोदी सरकार ने ग्रीन पीस इंडिया का एफ़सीआरए लाइसेंस निलंबित कर दिया था, जिसके तहत विदेशों से चंदा लिया जाता है.
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