कहीं दवा नहीं तो कहीं जांच नहीं

स्वाइन फ़्लू, जयपुर अस्पताल
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भारत में स्वाइन फ़्लू का क़हर लगातार बढ़ता जा रहा है. अब तक 1,000 से ज़्यादा लोगों की इस बीमारी से मौत हो गई है और 15,000 से ज़्यादा इससे संक्रमित हैं.

बीबीसी हिंदी ने देश के तीन बड़े राज्यों में स्वाइन फ्लू के संक्रमण और इसके इलाज की स्थिति की पड़ताल की.

राजस्थान

जयपुर से आभा शर्मा के अनुसार स्वाइन फ्लू से मरने वालों की संख्या के लिहाज से राजस्थान देश में दूसरे नंबर पर है. स्वाइन फ्लू से संक्रमित लोगों की संख्या भी करीब 5,000 पहुँच गई है.

स्वाइन फ़्लू, जयपुर अस्पताल

यहां दवाइयों की कमी तो नहीं लेकिन मरीज़ों की बढ़ती तादाद बड़ी समस्या बन गई है.

राजस्थान स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ. केसी मीणा का कहना है कि राज्य में 'टेमीफ्लू' की कोई कमी नहीं है.

स्वाइन फ़्लू, जयपुर अस्पताल

राजधानी जयपुर में प्रशासन अब जागा है और स्वाइन फ्लू के बढ़ते प्रकोप के चलते सरकारी अस्पतालों में भीड़ कम करने के लिए 15 निजी अस्पतालों को अलग से आइसोलेशन वार्ड और आईसीयू की व्यवस्था के निर्देश दिए हैं.

जयपुर की घाट गेट निवासी हिना की 11 महीने की बेटी सदा को बच्चों के अस्पताल जेके लोन के आईसीयू में चार दिन रखना पड़ा.

गांव में उसकी तबियत बिगड़ने पर उसे सोमवार रात जयपुर लाकर भर्ती किया गया था. पहले पता नहीं चल पाया कि उसे स्वाइन फ्लू है.

जयपुर के हरमाड़ा इलाके के निजी चिकित्सक डॉक्टर पीएन वर्मा का कहना है कि साधारण इन्फ्लुएंजा जैसे ही लक्षण होने के कारण स्वाइन फ्लू की जल्दी पहचान नहीं हो पाती.

हर व्यक्ति सर्दी-जुकाम, बुखार होने पर स्वाइन फ्लू का टेस्ट नहीं करवाता क्योंकि टेस्ट महंगा है. सरकारी अस्पतालों में पहले ही बहुत लम्बी कतारें हैं.

महाराष्ट्र

स्वाइन फ़्लू

मुंबई से अश्विन अघोर बता रहे हैं कि महाराष्ट्र में कई जगह ख़ून की जांच की सुविधा न होने के कारण यह समस्या गंभीर हो गई है.

राज्य में स्वाइन फ्लू के मरीज़ों की कुल संख्या 1,261 हो गई है और अब तक 113 लोग इस बीमारी के कारण अपनी जान गंवा चुके हैं.

सबसे ज़्यादा असर नागपुर शहर और ज़िले में दिख रहा है. दरअसल नागपुर में स्वाइन फ्लू जांच की सुविधा उपलब्ध नहीं है.

स्वाइन फ़्लू, कश्मीर

नागपुर के सार्वजनिक आरोग्य उप संचालक डॉ संजय जायसवाल के मुताबिक स्वाइन फ्लू के लिए खून की जांच करने की मशीनें नागपुर में पर्याप्त संख्या में उपलब्ध नहीं थी, जिसकी वजह से नमूने पुणे भेजने पड़ते थे.

संजय जायसवाल का कहना है,"परिस्थिती की गंभीरता को देखते हुए, राज्य सरकार ने तुरंत यह मशीनें मुहैया करवाईं, जिसके बाद खून की जांच नागपुर में भी होने लगी है."

केंद्र सरकार की एक टीम ने हाल ही में राज्य का दौरा कर स्वाइन फ्लू की रोकथाम के लिए इस बीमारी की एपिडेमोलॉजिकल मैपिंग करने के आदेश जारी किए हैं.

जम्मू और कश्मीर

स्वाइन फ़्लू, कश्मीर

श्रीनगर से माजिद जहांगीर बताते हैं कि कश्मीर में अभी तक आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक़ छह लोगों की मौत हो चुकी है और 181 लोग स्वाइन फ्लू से प्रभावित पाए गए हैं.

बाज़ार और सरकारी अस्पतालों में लोग दवाइयां न मिलने की शिकायत कर रहे हैं.

अनंतनाग के इरफ़ान खान का कहना है कि वह कई बार अस्पताल और बाज़ार में दवाई ढूंढने गए लेकिन उन्हें मिली नहीं.

उनका कहना है, "मैं पिछले दो साल से खांसी से परेशान हूं. अब स्वाइन फ्लू ने और डरा दिया है. इसके लिए मैंने बाज़ार और अपने ज़िला अस्पताल में दवाई तलाश की थी, लेकिन नहीं मिली.''

स्वाइन फ़्लू, कश्मीर
इमेज कैप्शन, डॉक्टर्स एसोसिएशन ऑफ़ कश्मीर का कहना है कि बाज़ार में कोई दवाई नहीं है.

डॉक्टर्स एसोसिएशन ऑफ़ कश्मीर के अध्यक्ष डॉक्टर निसार उल हसन कहते हैं कि किसी भी अस्पताल या बाज़ार में कोई दवाई मौजूद नहीं है.

वह कहते हैं, "हमने एक हफ्ते पहले एक हेल्पलाइन नंबर शुरू किया था, जिस पर 10,000 लोगों ने हमें फ़ोन किए जिनका कहना था कि उनको कहीं भी दवाई नहीं मिली. प्रशासन के दावे झूठे हैं."

राज्य के कुछ अस्पतालों में कर्मचारियों ने इसलिए प्रदर्शन किया कि उन्हें मास्क और दवा नहीं दी जा रही है.

इस विषय पर कश्मीर के स्वास्थ्य निदेशक डायरेक्टर ने कहा कि उन्होंने ज़रूरत के मुताबिक़ इस सिलसिले में क़दम उठाए हैं.

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