कैसे चलता है उबर का धंधा?

ऊबर, टैक्सी, कैब, ऐप
    • Author, राजीव मखनी
    • पदनाम, टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ
  • प्रकाशित

दिल्ली में एक महिला से टैक्सी में हुए कथित बलात्कार का मामला सामने आने के बाद ऐसे सफ़र में यात्रियों की सुरक्षा का सवाल उठने लगा है.

पुलिस ने रविवार को टैक्सी ड्राइवर को गिरफ़्तार करने का दावा किया है. पुलिस के अनुसार शुक्रवार को 27 वर्षीय इस महिला ने देर रात वसंत विहार से अपने घर सराय रोहिल्ला जाने के लिए टैक्सी ली थी.

ये टैक्सी अंतरराष्ट्रीय कंपनी उबर टैक्सी सर्विस की थी.

यह कंपनी जिस तकनीकी का प्रयोग करती है उसमें सुरक्षा संबंधी बड़ी खामी है.

ऐसी घटनाओं से बचने के लिए हर टैक्सी में जीपीएस लगाना ज़रूरी कर दिया जाना चाहिए. जिस कंपनी की टैक्सी है यात्रियों की स्थिति ट्रैक करने की पूरी ज़िम्मेदारी उस पर होना चाहिए.

पढ़ें लेख विस्तार से

बलात्कार, भारत, लड़कियाँ

आम टैक्सी कंपनियों के पास अपनी निजी गाड़ियाँ होती हैं जिसमें एक सामान्य स्थायी जीपीएस (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) लगा होता है.

इस जीपीएस को किसी भी हालत में बंद नहीं किया जा सकता है.

कंपनी की अपनी गाड़ी हो और ड्राइवर हो तो सुरक्षा व्यवस्था बेहतर हो जाती है. ऐसी स्थिति में सफ़र जहाँ से शुरू होता है वहाँ से लेकर मंजिल तक पहुँचने तक कंपनी गाड़ी और ड्राइवर पर नज़र रख सकती है.

लेकिन उबर ने बिल्कुल अलग हाई टेक्नोलॉजी सिस्टम निकाला जो एक नया प्रयास था. इसके बावजूद इस कंपनी के साथ दुनिया में सुरक्षा संबंधी कई विवादस्पद घटनाएँ हुई हैं.

सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि उबर के पास अपनी गाड़ी और ड्राइवर नहीं होते. इस मामले में शामिल गाड़ी भी किसी और की आउटसोर्स्ड गाड़ी है.

कंपनी सभी गाड़ी वालों को एक आईफ़ोन देती है जिसमें कंपनी का ऐप होता है. जैसे ही कोई ग्राहक गाड़ी की माँग करता है तो ऐप अपने फ़ोन पर इसकी सूचना देता है.

फिर ड्राइवर के फ़ोन पर संदेश आता है कि यहाँ पर एक उपभोक्ता है क्या आप उसे लेना चाहेंगे. अगर वो हाँ कर देता है, उपभोक्ता के पास गाड़ी पहुँच जाती है.

कंपनी की ज़िम्मेदारी

मोबाइल ऐप

इस स्थिति में केवल ड्राइवर के फ़ोन से पता चलता है कि गाड़ी कहाँ है. इस मामले में ड्राइवर ने फ़ोन को स्विच ऑफ़ कर दिया. लेकिन उबर ने इस बारे में कुछ नहीं किया.

अभी तक यह नहीं पता चला है कि ऐसी आपात स्थिति में कंपनी क्या क़दम उठाती है. अगर उपभोक्ता अपनी मंजिल पर नहीं पहुँचा है तो कंपनी इस बारे में क्या करती है यह भी नहीं पता?

यह आश्चर्यजनक है कि कंपनी को इस बात की ख़बर ही नहीं हुई कि एक गाड़ी जीपीएस से पूरी तरह से गायब है.

उन्होंने अपने ताज़ा बयान में कहा है कि उन्हें पुलिस से इस बारे इत्तला मिली और उसके बाद से वो हर संभव मदद कर रहे हैं.

ये दुखद बात है कि हमारे देश में काम कर रही है एक कंपनी को नहीं पता कि ऐसी आपातकालीन स्थिति में क्या करना है.

टेक्नोलॉजी पर ज़्यादा भरोसा

भारत, बलात्कार

टेक्नोलॉजी एक दोधारी तलवार है. उबर कंपनी तकनीक की बदौलत पूरी दुनिया में बहुत कम समय में लोकप्रिय हो चुकी है.

इस कंपनी के पास न अपनी कार है, न अपने ड्राइवर. बस एक फ़ोन और ऐप देकर ये अपनी गाड़ियों की संख्या बढ़ा सकती है.

कंपनी कहती है कि हम पूरी तरह सुरक्षित यातायात प्रदान करते हैं क्योंकि हमारी हर गाड़ी में प्रमाणित ड्राइवर है और फुल जीपीएस है.

लेकिन हम भूल जाते हैं कि न ड्राइवर उनका है, न गाड़ी और न कोई ज़िम्मेदारी.

पूरा मामला एक फ़ोन पर निर्भर है, जो कभी भी बंद हो सकता है, जिसका सिम निकाल कर फेंका जा सकता है.

तकनीकी ही सहारा

टैक्सी, लंदन

कई गाड़ियों में ऐसी स्थिति के लिए एक पैनिक बटन होता है. अगर ऐसा नहीं है तो हमें इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि गाड़ी का जीपीएस चालू है कि नहीं.

कुछ कंपनियों के ऐप में यह सुविधा होती है कि आप ख़ुद को ट्रैक कर सकते हैं या किसी और ( ख़ासकर रात के समय) को कह सकते हैं कि वो आपको ट्रैक करता रहे. मुझे लगता है कि इस ऐप को हर टैक्सी सेवा के लिए ज़रूरी कर देना चाहिए.

जीपीएस बने ज़रूरी

जीपीएस सिस्टम

हर स्मार्टफ़ोन में जीपीएस ट्रैकिंग की सुविधा होती है. आप चाहे तो तीन-चार लोगों को अपने फ़ोन का एक्सेस दे सकते हैं.

लेकिन यह आपको पहले से ही करके रखना होगा ताकि ज़रूरत पड़ने पर आप इनमें से किसी को कह सकें कि वो आपको ट्रैक करें.

लेकिन इससे हमेशा मदद नहीं मिल सकती है. इसके लिए ज़रूरी है कि हर टैक्सी में जीपीएस होना चाहिए. जो किसी भी हालात में बंद नहीं होना चाहिए, चाहे गाड़ी भले ही बंद हो जाए.

और इसके ट्रैकिंग की ज़िम्मेदारी कंपनी की होनी चाहिए. गाड़ी में एक यूनिवर्सल सिग्नल होना चाहिए जिससे पता चले कि जीपीएस चल रहा है और कंपनी इसपर निगरानी रख रही है.

(बीबीसी संवाददाता स्वाती बक्शी से बातचीत पर आधारित)

<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> करें. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi " platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi " platform="highweb"/></link> पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)</bold>