केंद्रीय मंत्री के अपने ही मंत्रालय की स्कीम से 99 लाख की सब्सिडी लेने पर क्यों मचा हंगामा

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खीरे, टमाटर, शिमला मिर्च की खेती के लिए अपने ही कृषि मंत्रालय की स्कीम से क़रीब 99 लाख रुपये की सब्सिडी लेने को लेकर हो रही आलोचनाओं पर केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने सफ़ाई दी है.
भागीरथ चौधरी ने कहा कि उन्होंने एक पॉलीहाउस लगाया था और इसके लिए 'आठ साल पहले उन्होंने सब्सिडी के लिए अप्लाई किया' था, "मैंने कुछ छिपाकर काम नहीं किया."
चौधरी राजस्थान की अजमेर लोकसभा सीट से बीजेपी के सांसद हैं. उनकी सफ़ाई के बाद भी यह विवाद थमता नहीं दिख रहा.
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने इसे भ्रष्टाचार का नया मॉडल करार देते हुए सरकार पर निशाना साधा है.
सोशल मीडिया पर भी लोग प्रतिक्रिया दे रहे हैं. लेखिका सबा नक़वी ने एक्स पर लिखा, "खीरा, ककड़ी, जल, जंगल, ज़मीन का भ्रष्टाचार. इसके ऊपर घी, गोल्ड, जवाहरात, मंदिर में चढ़ावा. शर्म से सिर झुक जाने चाहिए."
दरअसल, यह विवाद तब खड़ा हुआ जब इंडियन एक्सप्रेस ने 27 जून को फ़्रंट पेज पर एक इनवेस्टिगेटिव रिपोर्ट छापी.
इस रिपोर्ट में दावा किया गया कि "केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी को तीन महीने पहले अपने ही मंत्रालय की एक योजना के तहत 99 लाख 60 हज़ार रुपये की सब्सिडी मिली, जिसे उस बोर्ड ने मंज़ूरी दी जिसमें वह पदेन उपाध्यक्ष हैं."
हालांकि केंद्रीय मंत्री के बचाव में आए राजस्थान के बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौर ने कहा, "विपक्ष का आरोप पूरी तरह ग़लत है. राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड ने यह सब्सिडी दी है, जिसके सदस्य भागीरथ चौधरी नहीं हैं. विपक्ष में जिस किसी ने भी यह आरोप लगाया है, उसने अज्ञानता के कारण ऐसा किया है."
क्या है पूरा मामला?

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इंडियन एक्सप्रेस ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की जिसमें कहा गया है, "चुनिंदा सब्ज़ियों और फूलों की 'व्यावसायिक खेती' को बढ़ावा देने की एक योजना 2014-15 में शुरू की गई थी, जो एकीकृत बागवानी विकास मिशन (एमआईडीएच) के तहत आती है. इसका संचालन राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (एनएचबी) करता है जो कि चौधरी के मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संगठन है."
रिपोर्ट के अनुसार, "इस योजना के तहत शिमला मिर्च, खीरा और टमाटर की खेती और गुलाब, एंथूरियम और ऑर्किड समेत फूलों की आठ किस्मों के लिए परियोजना लागत का अधिकतम 50 फ़ीसदी, यानी प्रति परिवार अधिकतम 1 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी दी जाती है."
रिपोर्ट में दावा किया गया है, "16,592 वर्ग मीटर क्षेत्र में खीरे की खेती के लिए भागीरथ चौधरी की परियोजना उन 467 परियोजनाओं में शामिल है, जिन्हें एनएचबी ने 2025 में 'बागवानी फ़सलों के उत्पादन और कटाई के बाद प्रबंधन के ज़रिए व्यावसायिक बागवानी का विकास' योजना के तहत मंज़ूरी दी."
"एनएचबी की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक़, इसकी गतिविधियों का संचालन निदेशक मंडल करता है, जिसके पदेन अध्यक्ष केंद्रीय कृषि मंत्री होते हैं, जबकि केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री पदेन उपाध्यक्ष होते हैं. बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर पदेन उपाध्यक्ष के तौर पर कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री का उल्लेख है."
हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है, "काग़ज़ों पर देखें तो योजना के तहत सब्सिडी वाली परियोजनाओं को मंज़ूरी देने में राज्य मंत्री की कोई सीधी भूमिका नहीं है. अंतिम मंज़ूरी एनएचबी की परियोजना अनुमोदन समिति देती है, जिसमें बोर्ड के अध्यक्ष या उपाध्यक्ष शामिल नहीं होते."
रिपोर्ट के अनुसार, "आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि वित्त वर्ष 2025-26 में इस योजना के तहत 144 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली और 677 एकड़ क्षेत्र में फैली 467 परियोजनाओं को मंज़ूरी दी गई. इनमें 60 परियोजनाओं को 50 लाख रुपये से ज़्यादा की सब्सिडी मिली."
"साइट पर लगे अनिवार्य साइनबोर्ड पर सब्सिडी की राशि के अलावा परियोजना की कुल लागत 1.99 करोड़ रुपये दर्ज है."
रिपोर्ट में रिकॉर्ड के हवाले से कहा गया, "अजमेर से बीजेपी सांसद और 2024 से कृषि मंत्रालय में राज्य मंत्री रहे चौधरी ने 15 अप्रैल 2025 को इस योजना के तहत परियोजना शुरू करने के लिए आवेदन किया था. 14 दिन बाद, 29 अप्रैल 2025 को, परियोजना को सैद्धांतिक मंज़ूरी मिल गई."
जबकि भागीरथ चौधरी का दावा है कि उन्होंने साल 2018 से ही परियोजना के लिए आवेदन किया हुआ था. भागीरथ चौधरी साल 2019 में पहली बार लोकसभा के लिए अजमेर सीट से सांसद चुने गए थे.
विपक्ष ने बताया भ्रष्टाचार

इस रिपोर्ट को लेकर विपक्षी नेताओं ने सरकार पर निशाना साधा है.
राजस्थान के पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने एक्स पर लिखा, "जब देश के कृषि राज्य मंत्री ही अपने मंत्रालय की योजना से अपने खेत के लिए करीब एक करोड़ रुपये की सब्सिडी मंजूर करवा ले, तो इसे आप क्या कहेंगे?"
"एक तरफ़ आम किसान सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटकर थक जाता है, और दूसरी तरफ बीजेपी के मंत्रियों और चहेते अफसरों के परिवारों पर करोड़ों की सरकारी मेहरबानी हो रही है."
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने एक्स पर इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट साझा करते हुए एक लंबी पोस्ट लिखी. इसमें उन्होंने लिखा, "जब बाड़ ही खेत को खाने लगे, तो फ़सल बचेगी कैसे?"
पवन खेड़ा ने लिखा, "यह चिंताजनक है, क्योंकि ग़रीबों से उम्मीद की जाती है कि वे 5 किलो मुफ़्त राशन और अपने बच्चों के लिए मिलने वाले मामूली मिड डे मील के लिए आभारी रहें, मानो ये सरकार की मेहरबानियां हों, न कि नागरिकों के अधिकार. वहीं, मंत्री और उनके क़रीबी लोग सरकारी ख़ज़ाने को अपनी पहुंच में समझते हैं. वे सब्सिडी हासिल करते हैं, सरकारी लाभ उठाते हैं और सार्वजनिक धन को मानो अपने बाप की जागीर की तरह इस्तेमाल करते हैं."
मंत्री की सफ़ाई

केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने इन आरोपों पर सफ़ाई देते हुए कहा, "मैं एक किसान हूँ और बचपन से ही खेती-बाड़ी से जुड़ा रहा हूँ. मैं उन्नत किस्म की खेती करता हूं, जैसा कि प्रधानमंत्री जी ने भी अपील की है. मैंने पॉलीहाउस लगाया था, इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि वहाँ (गांव में) ज़मीन के नीचे पानी बिल्कुल नहीं है."
उन्होंने कहा, "पॉलीहाउस की छत पर बारिश का पानी इकट्ठा हो जाता है, इसी से मैं पूरे साल पेड़-पौधों और खेती के लिए पानी का इस्तेमाल करता हूं. मैं पॉलीहाउस में खीरे, टमाटर, धनिया, शिमला मिर्च उपजाता हूं."
भागीरथ चौधरी ने आगे कहा, "मैंने कुछ भी नहीं छिपाया है. हज़ारों किसान पॉलीहाउस लगा रहे हैं और सब्सिडी ले रहे हैं, उसी के तहत मैंने भी ली थी. मैंने 2018 से ही आवदेन किया हुआ था. मैंने वहाँ एक बोर्ड लगाया है और उन सभी लोन और सब्सिडी का ज़िक्र किया है जो मैंने लिए हैं."
"मैं वहाँ किसानों को नई तकनीकों और प्राकृतिक खेती की ट्रेनिंग भी देता हूँ. मैंने कुछ छिपा कर काम नहीं किया है?..."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
























