ईरान: बच्चे की देखभाल करती महिला की इस तस्वीर पर क्यों छिड़ा विवाद

ईरान में एक बच्चे की देखभाल करती महिला की फ़ोटो को हटाने का आदेश दिया गया क्योंकि उसने हिजाब नहीं पहना था

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    • Author, बीबीसी मॉनिटरिंग
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ईरान में एक अनाथ बच्चे की देखभाल करने वाली महिला की फ़ोटो को लेकर विवाद पैदा हो गया है. इस फ़ोटो में महिला बिना हिजाब के दिख रही है और ईरान में हिजाब पहनने की सख़्त हिदायत है.

वहां की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के प्रबंध निदेशक को वहां के संस्कृति और मीडिया अभियोजक कार्यालय में तलब किया गया है.

न्यायपालिका की मीज़ान समाचार एजेंसी ने 21 मई को बताया कि आईआरएनए ने एक ऐसी महिला की तस्वीरें प्रकाशित की थीं, जिस पर देश के इस्लामी ड्रेस कोड का पालन न करने का आरोप है.

यह समन आईआरएनए की एक फ़ोटो रिपोर्ट को लेकर पैदा हुए विवाद के बाद जारी किया गया.

इस रिपोर्ट में तेहरान की 37 वर्षीय लेखिका और कलाकार सारा कनानी को दिखाया गया था, जिन्होंने सरकार की फोस्टर योजना के तहत कुछ समय के लिए एक अनाथ बच्चे की देखभाल की थी.

अधिकारियों ने एजेंसी को कथित तौर पर ये तस्वीरें हटाने को कहा जिसके बाद यह फोटो सेट हटा दिया गया.

क्या है विवाद

ईरान में हिजाब पहनने की सख़्त हिदायत है, ये तस्वीर 17 अप्रैल 2026 की है जब तेहरान में अमेरिका-इसराइल विरोधी प्रदर्शन आयोजित किए गए थे

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इमेज कैप्शन, ईरान में हिजाब पहनने की सख़्त हिदायत है, ये तस्वीर 17 अप्रैल 2026 की है जब तेहरान में अमेरिका-इसराइल विरोधी प्रदर्शन आयोजित किए गए थे

"40 दिनों का मातृत्व प्रेम" शीर्षक वाली मूल रिपोर्ट में कनानी उस बच्चे की देखभाल करते दिख रही हैं, जिसे अमेरिका-इसराइल और ईरान के बीच युद्ध के दौरान बेहरोयेश इंस्टीट्यूट के एक कार्यक्रम के तहत उनके पास रखा गया था.

इससे पहले बच्चे को ईरान के वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन की देखरेख में रखा गया था. इस दौरान कनानी बच्चे से गहराई से जुड़ गईं और उसकी कस्टडी चाहती थीं, लेकिन नियमों के अनुसार अविवाहित महिलाओं की तुलना में निःसंतान विवाहित जोड़ों को प्राथमिकता दी जाती है.

बाद में उन्हें बताया गया कि एक दूसरा परिवार बच्चे को गोद लेगा. इसके 40 दिनों के बाद उन्होंने बच्चे को वापस संस्था की देखरेख में सौंप दिया ताकि वह नए परिवार के साथ नई ज़िंदगी शुरू कर सके.

विवाद तब शुरू हुआ जब आईआरएनए ने कनानी के घर के भीतर ली गई तस्वीरें प्रकाशित कीं, जिनमें वह आधिकारिक मीडिया में सामान्यतः अनिवार्य माने जाने वाले पूरे हिजाब में नजर नहीं आ रही थीं.

मध्यमार्गी वेबसाइट अस्र-ए-ईरान ने कहा कि इन तस्वीरों पर ऑनलाइन मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं.

तेहरान में हाल के दिनों में ऐसी कई तस्वीरें नज़र आईं जब महिलाएं सार्वजनिक जगहों पर बिना हिजाब के दिखीं

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इमेज कैप्शन, तेहरान में हाल के दिनों में ऐसी कई तस्वीरें नज़र आईं जब महिलाएं सार्वजनिक जगहों पर बिना हिजाब के दिखीं (तस्वीर: 21 अप्रैल 2026)

कुछ लोगों ने इसे रोज़मर्रा की सामाजिक वास्तविकताओं को दुर्लभ तरीके से दिखाने वाला कदम बताया, जबकि अन्य ने सरकारी मीडिया संस्थान के ऐसी तस्वीरें प्रकाशित किए जाने की आलोचना की.

वेबसाइट के मुताबिक, इस घटना ने सामाजिक जीवन को दिखाने और सरकारी प्रतिबंधों का पालन करने के बीच मौजूद तनाव को सामने ला दिया.

कट्टरपंथी वेबसाइट राजा न्यूज़ ने आईआरएनए पर "कानून और सामाजिक परंपराओं के खिलाफ" काम करने का आरोप लगाया. वेबसाइट ने उन तस्वीरों को "सामाजिक मानदंडों को तोड़ने वाली" तस्वीरें बताया.

वेबसाइट ने यह भी सवाल उठाया कि क्या कनानी बच्चे की देखभाल के लिए उपयुक्त थीं. उसका तर्क था कि एक अविवाहित महिला होने के कारण वह न्यूनतम आवश्यकताओं को पूरा नहीं करती थीं. साथ ही आईआरएनए पर "अनुचित सामाजिक मानदंडों" को बढ़ावा देने का आरोप भी लगाया गया.

रिपोर्ट में आगे दावा किया गया कि कनानी के संबंध "विरोधी-क्रांतिकारी" गतिविधियों से रहे हैं. इसके लिए उनके सोशल मीडिया पोस्ट और "वुमन, लाइफ़, फ़्रीडम" नारे के संदर्भों का हवाला दिया गया.

लोगों की प्रतिक्रिया

कई सोशल मीडिया यूज़र्स का कहना है कि अमेरिका के विरोध में आयोजित सरकारी प्रदर्शनों में बिना हिजाब पहने औरतें दिखीं थीं जो सरकार का दोहरा मानदंड दिखाता है

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इमेज कैप्शन, कई सोशल मीडिया यूज़र्स का कहना है कि अमेरिका के विरोध में आयोजित सरकारी प्रदर्शनों में बिना हिजाब पहने औरतें दिखीं थीं जो सरकार का दोहरा मानदंड दिखाता है
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कनानी ने 19 मई को इंस्टाग्राम पोस्ट में कहा कि वह इस रिपोर्ट का विषय थीं और तस्वीरों के प्रकाशन की ज़िम्मेदारी उनकी नहीं थी. उन्होंने विदेशी मीडिया से बातचीत करने की बात से भी इनकार किया और पुराने सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर लगाए गए दावों को खारिज किया.

फोटोग्राफर मरज़िये मौसवी ने इस प्रोजेक्ट का बचाव करते हुए कहा कि इसका केंद्र "देखभाल और मातृत्व" था, न कि किसी की वेशभूषा या दिखावट. उन्होंने कहा कि विवाद के कारण उस फोस्टर योजना के मूल उद्देश्य पर ध्यान नहीं गया, जिसका मकसद ज़रूरतमंद बच्चों को अस्थायी सहारा देना है.

इस घटना ने ईरान में हिजाब नियमों के लागू किए जाने में कथित दोहरे मानदंडों को लेकर चल रही बड़ी बहस को भी हवा दे दी है. कुछ सोशल मीडिया यूज़र्स ने हाल की उन तस्वीरों की ओर इशारा किया, जो सरकारी और रूढ़िवादी मीडिया संस्थानों में प्रकाशित हुई थीं और जिनमें सरकार समर्थक आयोजनों में कुछ महिलाएं बिना सिर ढके दिखाई दी थीं. वहीं आलोचना के बाद आईआरएनए ने कनानी की तस्वीरें हटा दीं.

कुछ अन्य लोगों का कहना था कि यह मामला दिखाता है कि बीच-बीच में कुछ ढील दिखाई देने के बावजूद, आधिकारिक मीडिया में ड्रेस कोड से जुड़े प्रतिबंध अब भी सख्ती से लागू हैं.

इस बीच, ईरान में ड्रेस कोड नियमों को लेकर छिटपुट कार्रवाई जारी रहने के संकेत भी मिले हैं. आईआरएनए ने 20 मई को खबर दी कि काशान शहर के ऐतिहासिक सराये अमेरिहा होटल परिसर में स्थित कैफ़े-रेस्तरां को कुछ ग्राहकों के कथित हिजाब नियम उल्लंघन के कारण अधिकारियों ने बंद कर दिया.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित