बस पांच मिनट की कसरत से लंबा जीना संभव, जानिए क्या है एक्सरसाइज़ स्नैकिंग

    • Author, मेलिसा होगेनबूम
    • पदनाम, वरिष्ठ स्वास्थ्य संवाददाता, बीबीसी
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 7 मिनट
एक्सरसाइज़ करती महिला

हम रोजमर्रा के जीवन में शारीरिक गतिविधियों को थोड़ा-थोड़ा बढ़ाकर भी लंबे समय तक तंदुस्त बने रह सकते हैं. शरीर के साथ दिमाग भी सेहतमंद रहेगा और इससे असमय मृत्यु का खतरा भी घटता है.

लांसेंट में प्रकाशित एक मेटा अध्ययन के मुताबिक, हर दिन अगर पांच मिनट के लिए ही किसी तरह की कसरत की जाए तो करीब दस में से एक मृत्यु को रोका जा सकता है.

जैसे- अगर कोई पांच मिनट के लिए तेज़ गति से टहले, साइकिल चलाए या सीढ़ियाँ चढ़े तो लाखों लोगों को इससे लाभ मिल सकता है.

कई विशेषज्ञों का मानना है कि सेहतमंद शरीर बनाने के लिए बहुत इंटेंस वर्कआउट ज़रूरी नहीं है. बल्कि जरूरत है धीमे-धीमे अपने रूटीन मूमेंट को बढ़ाने की.

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घर में योगा मैट पर व्यायाम करती महिला
इमेज कैप्शन, हर दिन कुछ मिनट का व्यायाम असमय मौत का ज़ोखिम घटाता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि सिर्फ पाँच मिनट की कसरत से आप सेहतमंद बने रहेंगे. लेकिन यह दिखाता है कि कुछ न करने की तुलना में खुद को इन छोटी-छोटी एक्टिविटी से जोड़ना सेहत के लिए फायदेमंद हो सकता है.

अध्ययन से यह भी पता लगता है कि ऐसी पांच मिनट की कसरत का असर पहले से एक्टिव रहने वाले व फिट लोगों पर कम दिखेगा.

एक्सरसाइज़ से तय होगा बुढ़ापे का जीवन

व्यायाम करतीं दो महिलाएं.
इमेज कैप्शन, कसरत हमारे तनाव व थकान को कम करने में मददगार है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ रोड आइलैंड में पेशीय गति विज्ञान (काइनेज़ियोलॉजी) की असिस्टेंट प्रोफेसर निकोल लोगन इसे बुढ़ापे से जोड़ती हैं. उनका कहना, "बेसिक एक्सरसाइज़ के ज़रिए शरीर में बहुत अधिक तनाव व थकान (बर्नआउट) को घटाने में मदद मिलती है. ये शारीरिक गतिविधियां यहां तक तय करती हैं कि जीवन के बचे हिस्से में कौन कितना सेहतमंद रह सकेगा या कब मृत्यु हो सकती है."

वह कहती हैं, "शारीरिक कार्यक्षमता, मांसपेशियों की ताकत व गुणवत्ता और हड्डियों की मजबूती ऐसे संकेतक हैं जो बता सकते हैं कि बुढ़ापा कैसा होगा और यह मृत्यु तक को प्रभावित कर सकते हैं."

थोड़ी सी कसरत से मौत का जोखिम घटेगा

व्यायाम करता एक जोड़ा.
इमेज कैप्शन, कसरत करने से बुढ़ापे में गुणवत्तापूर्ण जीवन जीने की संभावना बढ़ जाती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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इस शोध में ब्रिटेन, अमेरिका और स्कैंडिनेविया के 1,50,000 वयस्कों के डेटा का बड़े पैमाने पर विश्लेषण किया गया. शोध के मुख्य लेखक और नॉर्वेजियन स्कूल ऑफ स्पोर्ट्स में शारीरिक गतिविधि एवं स्वास्थ्य के प्रोफेसर उल्फ एकेलुंड एक्सरसाइज़ के असर पर बात करते हैं.

उन्होंने स्टडी के निष्कर्ष को लेकर कहा, "यह जानना हमारे लिए आश्चर्यजनक था कि रूटीन में बदलाव करते हुए सिर्फ पांच मिनट की एक्सरसाइज़ करने से असमय मौत का जोख़िम घटता है."

साथ ही उन्होंने बताया कि स्टडी के ये निष्कर्ष बड़ी तादाद में लोगों को हुए लाभ को दर्शाते हैं.

हालांकि शोधकर्ता एकेलुंड की सलाह है कि युवाओं को डब्लूएचओ की उस सिफारिश का पालन करना चाहिए, जिसमें हर सप्ताह 150 मिनट मध्यम-तीव्रता वाले व्यायाम का लक्ष्य दिया गया है.

लेकिन जो लोग किसी भी कारण के चलते जिम नहीं जा सकते या किसी स्पोटर्स क्लब से नहीं जुड़ पाते, वे अपने रूटीन जीवन में थोड़ा ज्यादा चल-फिरकर इसका लाभ उठा सकते हैं.

लेकिन इस अध्ययन से यह पता चलता है कि जो लोग जिम जाने या खेल क्लब से जुड़ने में कठिनाई महसूस करते हैं, वे भी अपनी जिंदगी में थोड़ा ज्यादा चल-फिरकर सेहतमंद रह सकते हैं.

ज्यादा बैठने से बचेंगे तो लंबा जियेंगे

एक्सरसाइज़ के लिए तैयार होता एक युवक
इमेज कैप्शन, बैठने के समय को घटाकर कुछ देर तेज़ गति से टहलना लाभकारी है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

मेटा स्टडी से यह भी पता लगा है कि शरीर की निष्क्रियता घटाने से मौत का खतरा घटना है. रोज़ाना बैठने के समय को 30 मिनट कम करने से असमय मृत्यु में 7 फीसदी की कमी देखी गई है.

यह खास तौर पर अहम है क्योंकि शारीरिक निष्क्रियता से लंबे समय तक रहने वाली बीमारियां हो जाती हैं. साथ ही यह जल्दी मौत का भी कारण है.

व्यवहारिक चिकित्सा की प्रोफेसर अमांडा डेली सुझाव देती हैं कि बैठने की आदत को कम करने का एक आसान तरीका यह है कि अपनी गाड़ी को अपने गंतव्य से कम से कम पाँच मिनट की दूरी पर पार्क करें. वह कहती हैं कि यह भी एक तरह की "स्नैक्टिविटी" है. शोधकर्ता ने अपने सहयोगियों के साथ किए एक छोटे अध्ययन में पाया कि लोग इस विचार को आसानी से अपनाते हैं.

मसल पावर बढ़ाने वाले काम करें

जिम में व्यायाम करतीं युवतियां
इमेज कैप्शन, एरोबिक एक्सरसाइज़ से मांसपेशियां मजबूती देती हैं जो बुढ़ापे के लिए जरूरी है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

मेटा स्टडी की शोधकर्ता एकेलुंड कहते हैं, "व्यायाम में निरंतरता बहुत जरूरी है. धीमे शुरू करें और धीरे-धीरे एक्सरसाइज़ की तीव्रता बढ़ाएं. लेकिन यह हर व्यक्ति की क्षमता व पसंद के हिसाब से होनी चाहिए."

एक अमेरिकी शोध से पता लगता है कि मांसपेशियों को मजबूत बनाने वाली एक्टिविटी भी फायदेमंद साबित होती हैं. इस स्टडी में पाया गया, "60 और 70 साल के ऐसे लोग जो एरोबिक एक्सरसाइज़ के साथ ही ऐसे काम करते थे जिनसे मांसपेशियां मजबूत होती हैं, वे बुजुर्ग लंबा जिये. साथ ही उनमें मौत का जोखिम उन लोगों की तुलना में कम पाया गया जो बिल्कुल कसरत नहीं करते."

'एक्सरसाइज़ स्नैकिंग' से फायदा होगा

काम के दौरान समय निकालकर व्यायाम करता युव
इमेज कैप्शन, काम के बीच से उठकर कुछ मिनट के लिए कसरत करना एक्सरसाइज़ स्नैकिंग है. (प्रतीकात्मक)

हाल के अन्य शोधों में "एक्सरसाइज़ स्नैकिंग" के लाभ बताए गए हैं. एक्सरसाइज़ स्नैकिंग का मतलब दिनभर में की जाने वाली छोटी-छोटी गतिविधियों से है. इससे दिल की सेहत दुरुस्त होती है.

एक बड़े विश्लेषण से यह भी पता लगा कि पूरे दिन में छोटी-छोटी एक्सरसाइज़ करने से बुजुर्गों में मांसपेशीय सहनशक्ति भी बेहतर हुई है.

शोधकर्ता ने पाया कि एक्सरसाइज़ स्नैकिंग को 80 फीसदी से ज्यादा बुजुर्ग ज़ारी रख पाए क्योंकि इसे रूटीन में शामिल करना आसान है.

यूके की अल्स्टर यूनिवर्सिटी की मनोवैज्ञानिक प्रोफेसर मैरी मर्फी ने बीबीसी के "जस्ट वन थिंग" पॉडकास्ट में कहा, "छोटे-छोटे हिस्सों में व्यायाम करने से हमारा मेटाबॉलिज्म कई बार एक्टिव होता है. और जब हम व्यायाम करना बंद करते हैं, तब भी हमारा मेटाबॉलिज्म कुछ समय तक तेज़ रहता है."

इस तरह वह कहते हैं कि " एक्सरसाइज़ स्नैकिंग से मेटाबॉलिक सिस्टम चलता रहता है."

शोध से पता लगा कि जब लोगों को एक्सरसाइज़ स्नैकिंग के फायदों के बारे में जागरुक किया जाता है तो इस पर उनका रुख सकारात्मक होता है. ये तरीका एक्सरसाइज़ की रुकावटों को घटा सकता है.

सेहतमंद बदलावों को आदत में ढाले

घर से सामान के साथ निकलता युवक व बच्चा
इमेज कैप्शन, सामान लेकर चलने से भी शरीर को लंबे समय तक लाभ मिल सकता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

रिसर्चर यह भी कहते हैं कि खुद को एक्टिव रखने के सरल तरीकों से जुड़े संकेत भी लोगों पर असर डालते हैं. उदाहरण के लिए, लोगों को लिफ्ट या एस्केलेटर की जगह सीढ़ियों के इस्तेमाल के लिए प्रेरित करने वाले संकेत बड़ी संख्या में लोगों को ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं.

यूके की लफबरो यूनिवर्सिटी की व्यवहारिक चिकित्सा की प्रोफेसर अमांडा डेली कहती हैं कि छोटे-छोटे बदलाव हमारे अंदर समय के साथ बड़ा असर पैदा करते हैं. वे समझाती हैं, "धीरे-धीरे ये बदलाव हमारी आदत बन जाती हैं जिसे करने के लिए हमें अलग से सोचना नहीं पड़ता. जैसे अगर कोई सीढ़ियां चढ़ने की आदत डाल लें तो लिफ्ट लेने का विचार नहीं आएगा, वह व्यक्ति खुद ही सीढ़ियों की ओर बढ़ जाएगा. "

काम के दौरान हल्की स्ट्रेचिंग करें

काम के दौरान स्ट्रेटिंग करती महिला
इमेज कैप्शन, काम के दौरान एक्सरसाइज़ स्नैकिंग से स्वास्थ्य को लाभ होगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, "हमें रोज़ उतने ज्यादा कदम चलने की जरूरत नहीं है, जितना आमतौर पर माना जाता है. एक अध्ययन में पाया गया कि रोज़ 2,517 से 2,735 कदम चलने से हृदय रोग का जोखिम 2,000 कदम चलने की तुलना में 11% कम हो जाता है."

प्रोफेसर डेली कहती हैं कि बाजार से घर सामान लाने में भले दर्द का अहसास होने लगे लेकिन असुविधाजनक काम भी सेहत के लिए फायदेमंद हो सकता है. वह सुझाव देती हैं कि किचन में काम करते हुए या टीवी देखते हुए लोग अगर थोड़ी सी स्ट्रेचिंग भी कर लेंगे तो यह उन्हें फायदा पहुंचाएगी. वे कहती हैं कि ये ऐसी "स्नैक्स" हैं, जिनके लिए आपको कभी अपराधबोध महसूस करने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

(मेलिसा होगेनबूम, बीबीसी की एक वरिष्ठ स्वास्थ्य संवाददाता हैं. वे ब्रेडविनर्स (2025) और द मदरहुड कॉम्पैक्स की लेखिका हैं। इंस्टाग्राम पर उनका अकाउंट melissa_hogenboom है।)

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