उत्तर कोरिया का सबसे बड़ा रहस्यः किम जोंग उन कभी अपनी मां के बारे में बात क्यों नहीं करते

बीच में युवा को योंग हुई, बाईं ओर किम जोंग उन और दाईं ओर किम जोंग इल। इन तीनों के पीछे एक जापानी झंडा (बाईं ओर) और एक उत्तर कोरियाई झंडा है
इमेज कैप्शन, बीच में युवा को योंग हुई (किम जोंग उन की मां), बाईं ओर किम जोंग उन और दाईं ओर किम जोंग इल (किम जोंग उन के पिता)
    • Author, सांगमी हान
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़ कोरियन
    • ........से, सियोल
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 10 मिनट

उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन से जुड़ी तमाम रहस्यमयी बातों में उनकी माँ को लेकर बरती गई गोपनीयता सबसे अलग है. सत्ता में 15 साल पूरे होने के बाद भी किम ने कभी सार्वजनिक रूप से अपनी माँ का नाम नहीं लिया.

उत्तर कोरिया की वंशानुगत तानाशाही की वैधता 'माउंट पैकतु' वंश पर टिकी है - यह कोरियाई प्रायद्वीप का सबसे ऊँचा पर्वत है, जिसे कोरियाई लोगों का पौराणिक जन्मस्थान माना जाता है. यही वह जगह भी है जहां देश के संस्थापक किम इल सुंग ने जापानी उपनिवेशवादियों के ख़िलाफ़ गुरिल्ला गतिविधियां चलाई थीं.

देश के संस्थापक किम इल सुंग की माँ कांग पान सोक और किम जोंग इल की माँ किम जोंग सुक - को 'कोरिया की माँएं' कहकर सम्मानित किया गया.

लेकिन किम जोंग उन की मां को योंग हुई एक अनजानी शख़्सियत हैं, जिनके नाम पर कुछ भी नहीं रखा गया है.

को योंग हुई को लेकर यह चुप्पी शायद उनके सामाजिक वर्ग को 'दाग़दार' मानने और उन्हें उपपत्नी समझे जाने से जुड़ी है. विश्लेषकों का कहना है कि यह तथ्य शासन के लिए ख़तरा बन सकते हैं.

सोंगबुनः जाति व्यवस्था जैसी प्रणाली

को योंग हुई का नाम उत्तरी कोरिया के सरकारी मीडिया ने कभी नहीं लिया

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जीवनीकारों के मुताबिक़, को का जन्म 1952 में जापान के ओसाका में हुआ था. उनके माता-पिता मूल रूप से आधुनिक दक्षिण कोरिया के जेजू द्वीप से थे- यानी दुश्मन इलाक़े से.

जापान में रहने वाले को का परिवार 'ज़ाइनिची कोरियाई' कहलाता था - वे लोग जो 1910 से 1945 तक जापान के औपनिवेशिक शासन के दौरान वहां आकर बसे थे.

उत्तर कोरिया लौटने वाले इन परिवारों को शुरू में ईर्ष्या की नज़र से देखा गया क्योंकि वे पूँजीवादी पड़ोसी देश से नक़द, कपड़े और घरेलू सामान लेकर आते थे. लेकिन उन्हें 'ज्जैपो' कहकर भी पुकारा गया. यह उन लोगों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक अपमानजनक शब्द था, जिन्हें विदेशी और ख़तरनाक विचारधाराओं से दूषित माना जाता था.

उत्तर कोरिया में एक सख़्त सामाजिक वर्गीकरण प्रणाली है, जिसे 'सोंगबुन' कहा जाता है.

इसमें ज़ाइनिची कोरियाई 'अस्थिर वर्ग' में आते हैं, जो मुख्य वर्ग और शत्रु वर्ग के बीच होता है. इन पर राज्य की कड़ी निगरानी रहती है और अक्सर इन्हें अच्छे विश्वविद्यालयों या बेहतर नौकरियों में प्रवेश नहीं मिलता.

उत्तर कोरिया एक बहुत गहरे तक वर्गीकृत समाज है, जिसे कुछ विश्लेषक जाति व्यवस्था जैसी प्रणाली बताते हैं.

डोंगयांग विश्वविद्यालय के डॉक्टर जियोंग यंग-ताए कहते हैं कि यह 'संबंध से दोषारोपण की व्यवस्था' भी है, जहाँ नागरिकों को उनके परिवार के सदस्यों के कामों की सज़ा भुगतनी पड़ती है.

'सिंड्रेला जैसी ज़िंदगी'

को योंग हुई (आगे बाईं ओर) प्रतिष्ठित मानसुदे कला मंडली की सदस्य थीं

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जब को करीब 10 साल की थीं तब उनका परिवार उत्तर कोरिया चला गया था. उनका परिवार उन अनुमानित 93,000 कोरियाई लोगों में शामिल था जो 1959 से 1984 के बीच जापान से कम्युनिस्ट देश उत्तर कोरिया पहुंचे थे.

वे लोग 'पृथ्वी पर स्वर्ग' अभियान के तहत उत्तर कोरिया पहुंचे थे. यह एक ऐसी योजना थी जिसमें लौटने वालों के लिए मुफ़्त स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और नौकरियों के साथ आदर्श जीवन का वादा किया गया था.

लेकिन को ने अपने साथी ज़ाइनिची कोरियाई लोगों की तरह कठिनाई और ग़रीबी का जीवन नहीं जिया क्योंकि वह तत्कालीन नेता किम जोंग इल का ध्यान अपनी ओर खींचने में कामयाब रही थीं.

हालाँकि किम ने कभी सार्वजनिक रूप से अपनी पत्नी या साथी को पेश नहीं किया, लेकिन खुफ़िया जानकारी बताती है कि उस समय वे पहले से ही किम योंग सुक से शादी कर चुके थे. किम योंग सुक एक उच्च सैन्य अधिकारी की बेटी थीं और यह विवाह उनके पिता ने तय किया था.

जापानी पत्रकार योजी गोमी की 2025 में को पर एक किताब प्रकाशित हुई है.

वह कहते हैं कि को अभिजात्य मंसुदे आर्ट ट्रूप की सदस्य थीं, अपनी 'स्वाभाविक सुंदरता और नृत्य कौशल' के कारण वह किम की नज़र में आईं. और भले ही उन्होंने सर्वोच्च नेता से कभी शादी नहीं की और न ही उनके संबंध को कभी शासन ने मान्यता दी... गोमी के अनुसार को ने 'सिंड्रेला जैसी ज़िंदगी' जी.

रिपोर्टों के मुताबिक़, किम बहुत शिद्दत से को से प्यार करने लगे थे, जो आगे चलकर देश की राजनीति में दिलचस्पी लेने लगीं.

उनकी आधिकारिक पत्नी राजधानी प्योंगयांग में रहती थीं, जबकि को और उनके तीन बच्चे 210 किलोमीटर दूर तटीय शहर वोनसान में रहते थे.

कहा जाता है कि को, किम जोंग इल की पसंदीदा उपपत्नी थी

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उत्तरी रिसर्च एसोसिएशन के किम ह्यंग-सु कहते हैं, "किम जोंग उन आधिकारिक पत्नी के बेटे नहीं है. वह मूलतः को योंग हुई के 'नाजायज़ बेटे' हैं,"

"(शासन का) पैकतु वंश पवित्र माना जाता है, इसलिए यह कल्पना करना भी असंभव है कि नेता एक 'ज्जैपो' का बेटा हो."

उत्तर कोरिया में विवाहेतर जन्मे बच्चों को भारी कलंक झेलना पड़ता है.

कम्युनिस्ट दिखावे के बावजूद देश गहराई से कन्फ़्यूशियस मान्यताओं में डूबा हुआ है. विश्लेषकों का कहना है कि पुत्र धर्म और निष्ठा जैसी अवधारणाओं का इस्तेमाल जनता को वैचारिक रूप से बाँधने के लिए किया गया है.

गोमी एक और कारण बताते हैं कि किम जोंग उन राजधानी से दूर बड़े हुए. उस समय वोनसान और जापान के बीच फ़ेरी चलती थी, जिससे को के लिए वहाँ आने वाले लोगों से मिलना और जापानी सामान हासिल करना आसान हो जाता था.

वह कहते हैं. "को जापान के अपने घर को बहुत याद करती थीं और उन्होंने अपने बच्चों को जापानी सिखाई."

केंजी फुजिमोटो, एक सुशी शेफ़ थे जिन्होंने 1988 से 2001 तक किम जोंग इल के लिए काम किया था. वह अपनी किताब में लिखते हैं कि किम जोंग उन 'जापानी गाने अच्छे गाते थे' और 'जापान की उन्नत अर्थव्यवस्था से ईर्ष्या करते थे'.

जापानी मीडिया के मुताबिक़, किम जोंग उन अपने बड़े भाई के साथ जापान के टोक्यो डिज़्नीलैंड भी गए थे. गोमी कहते हैं कि को भी अपने सचिव के साथ अलग से जापान गई थीं.

उत्तराधिकार

कई विशेषज्ञों का मानना ​​है कि को योंग हुई ने अपने बेटे को उत्तराधिकारी बनने में मदद की

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उत्तर कोरिया के निर्वासित राजनयिक र्यु ह्युन-वू ने अपनी किताब 'किम जोंग उन्स सीक्रेट वॉल्ट' में लिखा, "को योंग हुई को कभी किम इल सुंग ने बहू के रूप में मान्यता नहीं दी."

सेजोंग इंस्टीट्यूट के डॉक्टर चियोंग सियोंग-चांग कहते हैं कि अगर को को बुज़ुर्ग किम की स्वीकृति मिल जाती, तो किम इल सुंग और उनके पोते जोंग उन की तस्वीरें दूर-दूर तक फैलाई जातीं.

हालांकि ऐसा नहीं हुआ, लेकिन को ने किम जोंग इल का भरोसा जीत लिया. वे देश की वास्तविक प्रथम महिला की तरह काम करती थीं. वह अपने पति के साथ सैन्य निरीक्षणों में जातीं और उनके सहयोगियों से दोस्ताना संबंध बनातीं.

शेफ़ फुजिमोटो ने लिखा कि किम तो नीतिगत फ़ैसले लेने से पहले भी उनकी राय लेते थे.

2011 में किम जोंग इल की मृत्यु के बाद बनी एक आधिकारिक डॉक्यूमेंट्री में को को सर्वोच्च नेता के साथ स्थानीय दौरों पर दिखाया गया- हालांकि उसमें उनका नाम या उनका सोंगबुन कभी उजागर नहीं किया गया.

डॉक्टर चियोंग बताते हैं कि यह डॉक्यूमेंट्री कभी सार्वजनिक नहीं हुई, बल्कि जून 2012 में केवल वरिष्ठ पार्टी अधिकारियों को दिखाई गई. हालांकि बाद में यह लीक होकर आम नागरिकों तक तस्करी किए गए यूएसबी ड्राइव्स के ज़रिए पहुंची.

वह कहते हैं, "जैसे-जैसे यह फैली… लोगों की को योंग हुई के प्रति जिज्ञासा तेज़ी से बढ़ी. इस पर शासन ने तुरंत (डॉक्यूमेंट्री) वापस ले ली."

उनका मानना है कि को की पृष्ठभूमि शासन की वैधता पर सवाल खड़े कर सकती थी.

तो फिर उपपत्नी का दूसरा बेटा - किम जोंग इल का सबसे छोटा बेटा - सत्ता का वारिस कैसे बना?

कई जीवनीकारों का मानना है कि को ने सक्रिय रूप से किम जोंग उन को उत्तराधिकार के लिए तैयार किया.

वरिष्ठ पत्रकार अन्ना फ़िफ़ील्ड ने अपनी किताब 'द ग्रेट सक्सेसर: द सीक्रेट राइज़ एंड रूल ऑफ़ किम जोंग उन' में लिखा कि को की छोटी बहन ने उन्हें कहा था कि जोंग उन को अगला नेता बनना ही होगा, वरना उनका परिवार ख़तरे में पड़ जाएगा.

माना जा रहा है कि नेता किम जोंग उन अपनी बेटी जू ए को नेतृत्व के लिए तैयार कर रहे हैं

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गोजी कहते हैं कि किम जोंग इल के बड़े बेटे, किम जोंग नाम, शुरुआत में ही सर्वोच्च नेता बनने की दौड़ से बाहर हो गए थे क्योंकि उन्होंने उत्तर कोरिया की वंशानुगत उत्तराधिकार प्रणाली पर सवाल उठाए और सुधार की वकालत की.

गोजी ने वर्षों तक नाम से ईमेल पर बातचीत की थी. जोंग नाम के राजनीतिक विचार शायद विदेश में एक दशक तक पढ़ाई करने का नतीजा थे. वह फ़्रेंच और अंग्रेज़ी धाराप्रवाह बोलते थे. साथ ही वह अक्सर कैसीनो जाने और आलीशान जीवनशैली के कारण 'पार्टी करने वाला' कहलाने लगे थे.

जोंग नाम के उत्तर कोरिया लौटने के बाद भी को योंग हुई द्वारा अपने बच्चों को उत्तराधिकार के लिए तैयार करने की अफ़वाहें जारी रहीं. पूर्व राजनयिक र्यु की किताब के अनुसार उनका बड़ा बेटा, जोंग चुल अफ़ीम की गंभीर लत के कारण उत्तराधिकारी नहीं बन सका. उनके अनुसार एक बार जोंग चुल ने सुबह-सुबह उनके दरवाज़ा खटखटाया और अफ़ीम माँगी.

विश्लेषकों का कहना है कि किम जोंग उन अपने नेतृत्व क्षमता और प्रतिस्पर्धी स्वभाव के कारण पिता का पसंदीदा बन गया. को की बहन और उनके पति को किम और उनके बड़े भाई की देखभाल का काम सौंपा गया था, जब वे स्विट्ज़रलैंड में पढ़ाई कर रहे थे. लेकिन 1998 में, जब को को स्तन कैंसर का पता चला, यह दंपति अमेरिका भाग गया.

वॉशिंगटन पोस्ट के एक 2016 के लेख के लिए उनका इंटरव्यू लिया गया था. इसके अनुसार उन्हें डर था कि "अब शासन को ज़्यादा देर तक उनकी ज़रूरत नहीं रहेगी."

हालाँकि किम जोंग उन अंततः उत्तराधिकारी बन गए, लेकिन उनकी आशंकाएँ सही साबित हुईं. सत्ता में आने के बाद उनके एक चाचा को फाँसी दे दी गई, जबकि जोंग नाम की मलेशिया में हत्या कर दी गई.

'आग की तरह फैल सकता है संदेह'

2004 में को योंग हुई की मृत्यु स्तन कैंसर से फ्रांस में हुई थी

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को की मृत्यु किम जोंग इल से पहले हो गई थी, लेकिन पेरिस के एक अस्पताल में हुई उनकी मौत उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया में कहीं दर्ज नहीं हुई.

विश्लेषकों का कहना है कि किम जोंग उन की गुप्त वंशावली ही शायद वजह है कि उनका जन्मदिन राष्ट्रीय अवकाश घोषित नहीं किया गया, जबकि उनके दादा और पिता के जन्मदिन पर छुट्टी होती है. उनके जन्म पर ध्यान दिलाना उनकी माँ और इस बात पर असहज सवाल खड़े कर सकता है कि उन्हें प्योंगयांग से बाहर क्यों पाला गया.

शोधकर्ता किम कहते हैं, "सच सामने आ जाए तो संदेह आग की तरह फैल सकता है."

पूर्व राजनयिक र्यु ने लिखा कि हालाँकि किम जोंग उन उत्तर कोरिया की पदानुक्रम व्यवस्था के शीर्ष पर हैं, लेकिन उनके सोंगबुन के हिसाब से वे सामाजिक क्रम में अपेक्षाकृत नीचे आते हैं, क्योंकि उनका रिश्ता ज़ाइनिची कोरियाई और भगोड़ों से जुड़ा है.

डॉक्टर चियोंग का कहना है कि किम जोंग उन की वंशावली को लेकर बरती गई गोपनीयता की शायद यही वजह है कि उन्होंने सत्ता संभालते ही अपनी पत्नी री सोल जू को सार्वजनिक रूप से पेश किया. ऐसा लगता है कि वे अपनी किशोर बेटी जू ए को भविष्य की उत्तराधिकारी के रूप में तैयार कर रहे हैं.

दक्षिण कोरिया की खुफ़िया सेवा के अनुसार एक प्रतिष्ठित प्रदर्शन समूह की पूर्व गायिका रही री, प्योंगयांग के उच्च-मध्यवर्गीय परिवार से हैं. कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि उनके पिता विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर थे. उन्हें सरकार ने शास्त्रीय गायन की पढ़ाई के लिए चीन भेजा था, यह अच्छे सोंगबुन का संकेत है.

क्या किम जोंग उन कभी अपनी माँ की उत्पत्ति का खुलासा करेंगे?

उत्तर कोरिया की प्रचार मशीन के लिए भी इसे संभालना बेहद चुनौतीपूर्ण होगा.

सबसे ऊपर की तस्वीर और पारिवारिक ग्राफ़िक: एंड्रो सैनी, ईस्ट एशिया विज़ुअल जर्नलिज़्म

अतिरिक्त रिपोर्टिंग: ग्रेस त्सोई और लेनी बैरन

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