ट्रंप ने बताया हमास डालेगा हथियार, लेकिन इसराइल ने रखी ये शर्त

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इमेज कैप्शन, डोनाल्ड ट्रंप ने बताया है कि बोर्ड ऑफ़ पीस ने हमास के साथ समझौता किया है
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हमास के हथियार छोड़ने की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की घोषणा के बाद इसराइल ने इस पर प्रतिक्रिया दी है.

हमास के निरस्त्रीकरण पर सहमति के बाद पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया में इसराइल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "आज सुबह ग़ज़ा पट्टी में कूटनीतिक प्रगति से जुड़ी विभिन्न ख़बरों के संबंध में इसराइल ने दोहराया है कि जब तक हमास का वास्तविक निरस्त्रीकरण नहीं होता, तब तक इसराइली रक्षा बल (आईडीएफ) मौजूदा येलो लाइन से पीछे नहीं हटेगा."

इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि उनके 'बोर्ड ऑफ़ पीस' ने ग़ज़ा में हमास और दूसरे सशस्त्र समूहों के साथ एक समझौता किया है जिसके तहत वे हथियार डाल देंगे.

हमास के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बीबीसी को बताया है कि संगठन ने ग़ज़ा में पूरी तरह हथियार डालने के 'बोर्ड ऑफ पीस' के प्रस्ताव पर सहमति जताई है.

हमास के साथ समझौते की घोषणा

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, राष्ट्रपति ट्रंप और पीट हेगसेथ
इमेज कैप्शन, कैंप डेविड में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, राष्ट्रपति ट्रंप और पीट हेगसेथ

राष्ट्रपति ट्रंप ने हमास के हथियार छोड़ने को अपनी विदेश नीति की एक बड़ी उपलब्धि बताया है.

ट्रंप ने कहा कि जैसे-जैसे निरस्त्रीकरण का काम पूरा होता जाएगा, इसराइली सेना ग़ज़ा से पीछे हटेगी.

उन्होंने इस समझौते को 'ग़ज़ा में अंततः एक नई फ़लस्तीनी सरकार के शासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम' बताया.

अमेरिका की मध्यस्थता वाले ग़ज़ा सीज़फ़ायर प्लान के दूसरे चरण में हमास को हथियार छोड़ने के लिए मनाना शामिल है.

इस चरण में ग़ज़ा के पुनर्निर्माण की योजना भी शामिल है.

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर हमास के हथियार छोड़ने पर सहमति देने के बाद लिखा, ''यह ट्रंप की 20 सूत्रीय योजना को लागू करने की दिशा में एक अहम उपलब्धि है. इस समझौते को सावधानी के साथ तय चरणों में लागू किया जाएगा.''

उन्होंने लिखा, ''जैसे-जैसे निरस्त्रीकरण पूरा होता जाएगा, इसराइली सेना ग़ज़ा से पीछे हटती जाएगी. इसके बाद इंटरनेशनल स्टेबलाइजेशन फ़ोर्स एक नई फ़लस्तीनी पुलिस के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करेगी कि ग़ज़ा उसके निवासियों और पड़ोसी देशों के लिए सुरक्षित रहे.''

ट्रंप ने मध्यस्थता की भूमिका निभाने के लिए मिस्र, क़तर और तुर्की को भी धन्यवाद दिया.

एएफ़पी की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, मिस्र के सरकारी मीडिया ने बताया है कि सीज़फायर योजना के दूसरे चरण पर चर्चा के लिए ग़ज़ा के मध्यस्थों की एक बैठक काहिरा में होगी.

इसराइल के मंत्री ने क्या कहा

इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेत्याहू और दक्षिणपंथी राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्विर
इमेज कैप्शन, इसराइल के दक्षिणपंथी राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्विर ने कहा है कि 'बोर्ड ऑफ पीस' की ओर से जारी मसौदा समझौता "इसराइल के लिए स्वीकार्य नहीं" है

हालाँकि इसराइल के दक्षिणपंथी राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्विर ने एक्स पर लिखा कि बोर्ड ऑफ पीस की ओर से जारी मसौदा समझौता "इसराइल के लिए स्वीकार्य नहीं" है.

उन्होंने कहा "आतंकी संगठन के हत्यारों को ख़त्म करने की कार्रवाई" रोकने पर सहमत होना, हमास को "अगले जनसंहार की तैयारी के लिए दोबारा संगठित होने" का अवसर देने जैसा होगा.

उन्होंने यह भी कहा कि इसराइल को ग़ज़ा में अपने सैन्य लक्ष्यों पर कार्रवाई जारी रखनी चाहिए. साथ ही उन्होंने क्षेत्र से "लोगों के पलायन को प्रोत्साहित करने" संबंधी अपनी पहले की टिप्पणी भी दोहराई.

इस बीच विशेषज्ञों ने बीबीसी वेरिफाई से कहा है कि हालिया निर्माण गतिविधियां इस बात का संकेत देती हैं कि इसराइल लंबे समय तक वहां मौजूद रहने की तैयारी कर रहा है.

इस बीच बीबीसी संवाददाता एमा पेंगेली के मुताबिक़ इस दिशा में एक प्रमुख घटनाक्रम यह है कि इसराइली सेना पिछले साल अक्तूबर में युद्धविराम समझौते के तुरंत बाद शुरू किए गए विशाल मिट्टी के बैरिकेड्स के नेटवर्क का लगातार विस्तार कर रही है.

यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काया कलास
इमेज कैप्शन, यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काया कलास ने कहा है कि पूरी तरह लागू होने पर यह योजना शांति की दिशा में एक सकारात्मक कदम साबित हो सकती है (फ़ाइल फ़ोटो)

यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काया कलास ने कहा है कि अगर यह समझौता पूरी तरह लागू हो जाता है, तो हमास के निरस्त्रीकरण की योजना "शांति की दिशा में एक सकारात्मक कदम" साबित हो सकती है.

हालांकि उन्होंने कहा, "इस योजना के सफल होने के लिए अभी बहुत कुछ होना बाक़ी है. इसकी सफलता सभी पक्षों की पूरी प्रतिबद्धता पर निर्भर करेगी."

काया कलास ने एक्स पर लिखी एक पोस्ट में कहा कि समझौते की शर्तों के पालन की हमास की पुष्टि करना "एक बड़ी चुनौती" होगी और अंततः इसराइल को ग़ज़ा से अपनी सेना वापस बुलानी होगी.

उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ "अगले चरणों में सहयोग के लिए तैयार है, जिसमें राष्ट्रीय समिति और अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल की तैनाती भी शामिल है."

ट्रंप का बोर्ड ऑफ़ पीस क्या है?

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इमेज कैप्शन, अजय बंगा भारत में पैदा हुए थे और ट्रंप के बोर्ड ऑफ़ पीस के सदस्य हैं
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डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले साल सितंबर में पहली बार बोर्ड ऑफ पीस की घोषणा की थी. उस वक़्त माना गया था कि इसका मक़सद ग़ज़ा में इसराइल और हमास के बीच दो साल से जारी युद्ध को समाप्त करने में मदद करना और पुनर्निर्माण की निगरानी करना है.

हालांकि, बाद में ट्रंप ने कहा कि बोर्ड का कार्यक्षेत्र ग़ज़ा से आगे बढ़कर दुनिया भर के अन्य संघर्षों से निपटने तक होगा.

ट्रंप बोर्ड के पहले चेयरमैन हैं. यह ऐसा पद है, जिसे वह जीवनभर अपने पास रख सकते हैं. बोर्ड ऑफ पीस की वेबसाइट में अमेरिका, इसराइल, सऊदी अरब, क़तर और पाकिस्तान समेत 28 देशों को इस पहल के संस्थापक सदस्य के रूप में सूचीबद्ध किया गया है.

हालांकि अमेरिका के कुछ पारंपरिक सहयोगी इसमें शामिल होने के लिए सहमत नहीं हुए हैं और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अन्य स्थायी सदस्यों में से किसी ने भी इसमें भाग लेने की प्रतिबद्धता नहीं जताई है.

बोर्ड ऑफ़ पीस के एग्ज़ीक्यूटिव बोर्ड में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ट्रंप के दामाद जेरेड कुश्नर, अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, वर्ल्ड बैंक के प्रेसीडेंट अजय बंगा समेत अन्य लोग भी शामिल हैं.

ग़ज़ा के प्रशासन के लिए नेशनल कमेटी क्या है?

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इमेज कैप्शन, ट्रंप ने बोर्ड ऑफ़ पीस का गठना किया था

हमास ने कहा है कि सौंपे गए भारी हथियार, ग़ज़ा के प्रशासन के लिए नेशनल कमेटी (एनसीएजी) की जिम्मेदारी में रखे जाएंगे.

एनसीएजी, ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस की निगरानी में ग़ज़ा के रोज़मर्रा के प्रशासन का संचालन करने के लिए है.

यह खुद को "ट्रांज़ीशनल, तकनीकी और गैर-राजनीतिक" कमेटी बताता है, जिसमें "सिर्फ़ ग़ज़ा पट्टी के योग्य फ़लस्तीनी" शामिल हैं.

इसकी संरचना एक सरकारी कैबिनेट की तरह है, जिसमें 13 प्रशासनिक क्षेत्रों, जैसे वित्त, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा और न्याय के लिए "कमिश्नर" ज़िम्मेदार हैं.

इसके मुख्य कमिश्नर अली शाअत हैं, जो पेशे से सिविल इंजीनियर हैं और पहले फ़लस्तीनी प्राधिकरण में मंत्री पद संभाल चुके हैं.

एनसीएजी का कहना है कि उसका अधिकार क्षेत्र "नागरिक मामलों" तक सीमित है और वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फ़लस्तीनी लोगों का प्रतिनिधित्व नहीं करेगा.

यह भी कहा गया है कि वह केवल अपनी "ट्रांज़ीशनल भूमिका" निभाएगा, जब तक कि "फ़लस्तीनी ख़ुद फ़ैसला लेने की स्थिति में आ जाते और राज्य की स्थापना के लिए विश्वसनीय रास्ता" तैयार नहीं हो जाता.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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