योगेंद्र यादव का इंटरव्यू: 'आंदोलन ने नए नेताओं को जन्म दिया, विपक्ष ने अपनी भूमिका निभाई'

योगेंद्र यादव

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इमेज कैप्शन, योगेंद्र यादव का कहना है कि शनिवार दोपहर तक यह उम्मीद नहीं थी कि धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफ़ा देंगे
    • Author, पंकज प्रियदर्शी
    • पदनाम, असिस्टेंट एडिटर, बीबीसी न्यूज़ हिन्दी
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 8 मिनट

पिछले एक महीने से ज़्यादा चले कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और देशव्यापी आंदोलन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को इस्तीफ़ा सौंप दिया.

इसके बाद प्रल्हाद जोशी को देश का नया शिक्षा मंत्री बनाया गया. धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रदर्शनकारियों में जश्न का माहौल है.

सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने इसे बड़ी जीत बताया है. सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि ये सिर्फ शुरुआत है, वो आगे युवाओं से जुडे़ और भी मुद्दे उठाएंगे.

इस घटनाक्रम ने देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है. क्या यह आंदोलन सिर्फ़ एक मंत्री के इस्तीफे़ तक सीमित था या इसने सरकार और विपक्ष, दोनों की राजनीति को प्रभावित किया? क्या इससे नए युवा नेतृत्व की शुरुआत हुई?

इन सवालों पर बीबीसी न्यूज़ हिंदी ने राजनीतिक विश्लेषक और सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव से विस्तार से बातचीत की.

इस विशेष साक्षात्कार में योगेंद्र यादव ने आंदोलन के राजनीतिक महत्व, सरकार के फैसलों, नए उभरते नेतृत्व, सोनम वांगचुक की भूमिका और भारतीय राजनीति में युवाओं की बदलती भागीदारी पर अपनी राय रखी.

क्या उम्मीद थी कि कोई कैबिनेट मंत्री इस्तीफ़ा दे सकता है?

धर्मेंद्र प्रधान, शिक्षा मंत्री

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इमेज कैप्शन, धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से शनिवार को इस्तीफ़ा दे दिया (फ़ाइल फ़ोटो)

हमने सबसे पहले योगेंद्र यादव से जानना चाहा कि क्या उन्हें उम्मीद थी कि इतनी जल्दी मोदी सरकार का कोई कैबिनेट मंत्री इस्तीफा दे सकता है?

योगेंद्र यादव बताते हैं, "मुझे शनिवार दोपहर तक यह उम्मीद नहीं थी. मेरा अपना अनुमान था कि ये तीन-चार दिन और घसीटेंगे और मेरी अपनी समझ थी कि जितना घसीटेंगे उसकी कॉस्ट बढ़ती चली जाएगी. तो उस लिहाज़ से इस सरकार ने एक राजनैतिक समझ का परिचय दिया कि अगर बात और बढ़ेगी तो अब धर्मेंद्र जी पर नहीं वो नरेंद्र जी तक पहुंच जाएगी. तो नरेंद्र जी को बचाने के लिए धर्मेंद्र को छोड़ देना ही अच्छा है."

योगेंद्र यादव ने बताया कि यह सिर्फ एक मंत्री के इस्तीफे तक सीमित नहीं था, बल्कि सत्ता के अहंकार को चुनौती देने वाला क्षण था.

दरअसल, राजनाथ सिंह ने एक बयान में कहा था, "यह मोदी सरकार है, यह एनडीए की सरकार है, इसमें मंत्री इस्तीफा नहीं देते."

उन्होंने कहा कि जिस युवा पीढ़ी को गैर-राजनीतिक और मोबाइल में व्यस्त बताया जाता था, उसने अपनी ताकत और राजनीतिक समझ साबित की है.

प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्री बनाए जाने पर क्या बोले?

प्रल्हाद जोशी

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इमेज कैप्शन, प्रल्हाद जोशी को देश के शिक्षा मंत्रालय का प्रभार दिया गया है

धर्मेंद्र प्रधान की जगह प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्री बनाए जाने पर योगेंद्र यादव ने कहा, "जिसको ऐसा लगा होगा कि सरकार अपना कोई एजुकेशन का एजेंडा बदलने वाली है, उनको तो समझ आ गया होगा. स्पष्ट सिग्नल है कि उनका कोई वैचारिक एजेंडा नहीं बदलेगा और जो शिक्षा पर, बीजेपी सरकारों ने किया है उसमें कोई नीतिगत बदलाव नहीं आने वाला है."

"अभी की स्थिति में जो किया जाएगा, वो ये है कि एग्जामिनेशन जो कि एडमिशन के लिए होते हैं, मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन और दूसरे जो रिक्रूटमेंट के लिए होते हैं उनमें कुछ चुस्ती लाई जाए और वो चुस्ती लाई जा सकती है. क्योंकि वो लेफ्ट और राइट का मामला नहीं है वो शुद्ध करप्शन का मामला है."

उन्होंने आगे कहा, "मैं समझता हूं कि सरकार को इतना सबक ज़रूर मिल गया है कि भैया इन चीज़ों के अंदर अब चुस्ती बरतनी चाहिए. तो कुछ एफिशिएंसी लाई जाएगी और कुछ प्रचार के लिए बहुत कड़े कानून लाए जाएंगे."

"हालांकि इतिहास गवाह है कि कड़े कानूनों से कभी भी यह समस्या नहीं सुलझी."

संयुक्त प्रेस कॉन्फ़्रेंस पर योगेंद्र यादव ने क्या कहा?

सीजेपी

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इमेज कैप्शन, कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रवक्ता सौरव दास (बीच में) और आशुतोष रांका (दाएं), भारत के स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के साथ 25 जुलाई को नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल हुए

योगेंद्र यादव से ये जानने की कोशिश की कि वो सरकार और सीजेपी के बीच हुए समझौते और संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को किस तरह देखते हैं, क्या वो इससे संतुष्ट हैं?

योगेंद्र यादव ने बताया, "कोई भी आंदोलन में अंत में जो समझौता होता है, उसमें कुछ चीज़ें रह जाती हैं. जब किसान आंदोलन जब कॉल ऑफ किया गया मैं व्यक्तिगत रूप से उसके पक्ष में नहीं था. मैंने उस वक्त किसान आंदोलन के नेतृत्व में अपनी असहमति जताई थी और मैंने कहा था कि नहीं चार-पांच दिन एक हफ्ता और हमें खींचना चाहिए."

"इसी तरह कल जो समझौता हुआ है एक आधी कसक रह गई. अगर मुझसे पूछते तो मैं कहता भैया यह जो एफ़आईआर विड्रॉ करने वाली चीज़ है. अभी से लिखवा लो."

"यह मंगलवार तक जो आपने इनको समय दिया है यह ख़तरनाक है. मंगलवार को जो लिख के लाएंगे वो नहीं होगा जो आप प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोल रहे हो. मैं आज भी आपको बोल रहा हूं कि सरकार मंगलवार को जो लिखित गारंटी देगी वो नहीं होगा जो कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोला गया था.

आंदोलन के नेताओं पर क्या बोले योगेंद्र यादव?

अभिजीत दीपके

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इमेज कैप्शन, योगेंद्र यादव मानते हैं कि सीजेपी किसी ना किसी किस्म का युवा संगठन बनेगा

योगेंद्र यादव से हमने पूछा कि वो आने वाले दिनों में इस आंदोलन के नेताओं को कहां देखते हैं,क्या वो राजनीतिक दल बनाएंगे या किसी इतिहास में दर्ज हो जाएंगे?

इस पर योगेंद्र यादव कहते हैं, "आज बैठ के इस आंदोलन के भविष्य में भविष्यवाणी करना बहुत हल्की चीज़ होगी. असंभव भी है. कुछ चीजों के बारे में हम निश्चित कह सकते हैं. जो सीजेपी है, वो एक पार्टी नहीं है, मैं उसे पार्टी मानता भी नहीं हूं. ये किसी ना किसी किस्म का युवा संगठन बनेगा. बनना चाहिए भी. और उसका एक राजनैतिक तेवर रहेगा."

"दूसरी बात ये कि इस आंदोलन से नए नेता पैदा हुए हैं. और ये मैं केवल अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका के लिए नहीं कह रहा हूं. नेहा क्या शानदार बोलती है, वो लड़की. मतलब देश को ऐसे नेताओं की ज़रूरत है."

"दिन रात लोग कहते हैं कि ये लोग तो पॉलिटिक्स कर लेंगे. मैं कहता हूं भाई इससे सुंदर चीज़ क्या हो सकती है? तो मेरी तो उम्मीद है कि इस आंदोलन से कुछ दर्जन नेता आएंगे जो हमारी देश की राजनीति पर असर डालेंगे."

'सोनम वांगचुक के साथ उतना न्याय नहीं हुआ'

सोनम वांगचुक

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सोनम वांगचुक पर योगेंद्र यादव ने कहा कि उनकी जितनी बड़ी भूमिका थी उनके साथ उतना न्याय नहीं हुआ.

उन्होंने कहा, "राजनीति में हमेशा जो बहुत अहम फिगर होते हैं वो थोड़ा एम्बीगुअस (अस्पष्ट) होते हैं और उनकी अस्पष्टता जो है वही उनको वहां पहुंचाती है जहां वो है. अगर वो बिल्कुल स्पष्ट हो तो वो वहां होंगे नहीं, जहां अभी हैं. तो सोनम वांगचुक उन एम्बीगुअस कैरेक्टर्स में से एक हैं."

"सोनम वांगचुक की अगर वो कॉन्सपिरेसी थ्योरी सही होती तो सोनम वांगचुक के पास चार या पांच अवसर थे जो आसानी से समझौता कर सकते. समझौता करके चुपचाप से चले जाते."

"धर्मेंद्र प्रधान की कुर्सी बच जाती. सरकार की फजीहत नहीं होती. मगर ऐसा उन्होंने नहीं किया. सोनम वांगचुक चाहते तो जब उनको सरकार अस्पताल लेके गई, उसके बाद फीड ले लेते. सरकार तो फोर्स फीड कर ही रही थी. अनशन करने की उन्हें कोई ज़रूरत नहीं थी. लेकिन उन्होंने अनशन को कंटिन्यू किया. इन सब बातों को दर्ज किया जाना चाहिए."

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आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस को टारगेट किया, इस पूरे आंदोलन के बीचों-बीच में जब आंदोलन एकदम शिखर पर था, आंदोलन तेज था, देश भर में प्रदर्शन हो रहे थे, उस बीच में केजरीवाल की पार्टी का कांग्रेस को टारगेट करने और विपक्ष की भूमिका को आप कैसे देखते हैं?

योगेंद्र यादव ने कहा, "आंदोलन और विपक्ष की लोकतंत्र में अलग-अलग भूमिका होती है. आंदोलन जनता के मुद्दों को उठाकर संस्थानों तक पहुंचाता है, जबकि विपक्ष उन्हें राजनीतिक स्तर पर आगे बढ़ाता है."

उन्होंने विपक्षी नेताओं की भागीदारी को ज़रूरी बताया, लेकिन आंदोलन के बीच आप और कांग्रेस की आपसी बयानबाज़ी की आलोचना की.

उन्होंने कहा, "चुनावी प्रतिस्पर्धा को इस आंदोलन में लाना उचित नहीं था. विपक्ष को आपसी आरोपों के बजाय आंदोलन के मूल मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि इससे नेताओं की छवि और आंदोलन का उद्देश्य प्रभावित होता है."

हमने योगेंद्र यादव से जानना चाहा कि कौन से एक चीज़ है जो उन्होंने इस आंदोलन से सीखी, जिसे वो हमेशा याद रखेंगे और अगले कभी आंदोलन की ज़रूरत पड़ी तो उसका इस्तेमाल भी करेंगे.

योगेंद्र यादव ने कहा, "एक नहीं मैंने तो बहुत चीजें सीखी हैं. इस बार तो नए-नए नारे सीखे हैं. जैसे मेरे ज़माने का नारा होता था 'जब जब सत्ता डरती है, पुलिस को आगे करती है.' हर नारे का एक नया स्वरूप इन्होंने दिया है, नए नारे सीखे हैं."

"दूसरा यह कि प्रोटेस्ट में हंसी, खेल, डांस ये सब उसका हिस्सा है. प्रोटेस्ट को इतना गंभीर मुंह लटका के नहीं करना चाहिए और जो मुंह ना लटकाए उसको अगंभीर नहीं समझना चाहिए."

"और ये सीखा कि भारत सिर्फ वो नहीं है जो दिल्ली के ड्राइंग रूम या टीवी स्टूडियो में बैठ के गंभीर चर्चाओं में दिखाई देता है. जितना निराशा नैराश्य बोध होता है 'हाय हाय देश तो डूब गया, लुट गए, मर गए, कब्जा हो गया हर चीज पे कुछ नहीं बचा', यह नहीं है."

उन्होंने कहा, "यह देश में बहुत कुछ है. तो मैं तो उसको सलाम करता हूं."

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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