क्या डॉक्टरों की लापरवाही के कारण 10 साल के लड़के का लिंग आंशिक रूप से हटाना पड़ा?

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- Author, सिराज
- पदनाम, बीबीसी तमिल संवाददाता
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 7 मिनट
(इस रिपोर्ट में दी गई कुछ जानकारियां कुछ पाठकों के लिए विचलित करने वाली हो सकती है)
तमिलनाडु के शिवगंगा ज़िले के कराईकुडी में 10 साल के एक लड़के के माता-पिता ने पिछले महीने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी. उनका आरोप है कि एक निजी अस्पताल के डॉक्टरों की ग़लत चिकित्सा के कारण उनके बेटे का पेनेक्टॉमी (सर्जरी के ज़रिए लिंग हटाना) करना पड़ा.
हालांकि, उनका कहना है कि एक महीने बीत जाने के बाद भी संबंधित डॉक्टरों के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की गई.
इसको लेकर लड़के के माता-पिता, व्यापारिक संगठनों और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्यों ने 7 जुलाई को कराईकुडी में विरोध प्रदर्शन किया.
पुलिस ने बीबीसी तमिल को बताया कि इस मामले में केस दर्ज कर लिया गया है. कथित "चिकित्सकीय लापरवाही" के आधार पर स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त निदेशक जांच कर रहे हैं. उनकी विस्तृत रिपोर्ट मिलने के बाद डॉक्टरों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी.
सर्जरी की नौबत क्यों आन पड़ी?
शिवगंगा ज़िले के कराईकुडी में रहने वाले एक दंपती का 10 साल का बेटा है. लड़के की मां ने कहा, "डॉक्टरों की ग़लत चिकित्सा के कारण मेरे बेटे के लिंग का बड़ा हिस्सा हटाना पड़ा. इससे उसका भविष्य अनिश्चित हो गया है."
उन्होंने बीबीसी तमिल से कहा, "हमारा सिर्फ़ एक बेटा है. उसके लिंग में लगातार खुजली होती थी. इसलिए मई में हम उसे कराईकुडी के एक निजी अस्पताल लेकर गए. उसी अस्पताल में उसका जन्म हुआ था. जांच के बाद डॉक्टर ने कहा कि सर्जरी करके उसके लिंग के आगे हिस्से की चमड़ी (फ़ोरस्किन) हटानी होगी."
उन्होंने आगे कहा, "डॉक्टर ने हमसे कहा कि डरने की कोई बात नहीं है. यह एक सामान्य सर्जरी है, लेकिन इसे तुरंत करना होगा. हम राज़ी हो गए. 21 मई को सर्जरी की गई. हालांकि बाद में अस्पताल में हमें बताया गया कि ऑपरेशन करने वाले सर्जन दरअसल कराईकुडी के ही एक दूसरे निजी अस्पताल से आए थे."
उन्होंने कहा, "अगले दिन उन्होंने कहा कि हम अपने बेटे को घर ले जा सकते हैं. उन्होंने बताया कि वह एक सप्ताह के भीतर ठीक हो जाएगा."
परिवार की शिकायत

हालांकि, घर लौटने के कुछ दिन बाद उनके बेटे के लिंग में तेज़ दर्द शुरू हो गया और उसे पेशाब करने में बहुत परेशानी होने लगी.
उन्होंने कहा, "उसका लिंग काला पड़ गया. वह पेशाब नहीं कर पा रहा था और बहुत तकलीफ़ में था. जब हम उसे दोबारा उसी निजी अस्पताल ले गए तो उन्होंने कहा कि उसे संक्रमण हो गया है और हमें उस अस्पताल ले जाने को कहा गया, जहां सर्जन काम करते हैं. हमें दोनों अस्पतालों के बीच बार-बार चक्कर लगवाए गए."
उन्होंने कहा, "बाद में दूसरे निजी अस्पताल में 27 मई को मेरे बेटे की फिर से सर्जरी की गई. उन्होंने भरोसा दिलाया कि वह दो दिन में ठीक हो जाएगा और चिंता करने की ज़रूरत नहीं है. लेकिन 28 मई की सुबह अचानक उन्होंने कहा कि संक्रमण बहुत गंभीर हो गया है और उसे तुरंत मदुरै ले जाना होगा."
उन्होंने आगे कहा, "उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि हम उसे मदुरै के एक ख़ास अस्पताल में ही ले जाएं. चूंकि तब तक हमारा उन पर से भरोसा उठ चुका था, इसलिए हम अपने बेटे को एक दूसरे निजी अस्पताल ले गए और उसे आपातकालीन वार्ड में भर्ती कराया."
लड़के की मां के अनुसार, वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उनसे कहा, "लिंग का हिस्सा काला पड़ चुका था और संक्रमण से बुरी तरह प्रभावित हो गया था. लिंग का बड़ा हिस्सा तुरंत सर्जरी करके हटाना ज़रूरी था. ऐसा नहीं किया जाता तो उसकी जान को ख़तरा हो सकता था."
उन्होंने कहा, "हमारे पास कोई दूसरा विकल्प नहीं था. उस समय हमारे लिए सबसे ज़रूरी बात अपने बेटे की जान बचाना थी. इसलिए हमने इसकी अनुमति दे दी."
इसके बाद 6 जून को लड़के के माता-पिता ने कराईकुडी के दो निजी अस्पतालों के दो डॉक्टरों के ख़िलाफ़ पुलिस और शिवगंगा ज़िला कलेक्टर दोनों से शिकायत की.
इस शिकायत पर पिछले महीने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की तमिलनाडु राज्य शाखा के अध्यक्ष डॉ. श्रीधर ने इलाज करने वाले डॉक्टरों के साथ मिलकर सफ़ाई दी थी.
उन्होंने कहा, "बच्चे की जो सर्जरी की गई, वह एक सामान्य और नियमित रूप से की जाने वाली प्रक्रिया है. हालांकि, जो जटिलता सामने आई, वह बहुत दुर्लभ है और संभव है कि 10 लाख में से केवल एक मरीज़ में ऐसा हो. जो हुआ वह एक चिकित्सकीय दुर्घटना थी. संबंधित डॉक्टर प्रभावित बच्चे के इलाज के लिए हर संभव सहायता देने को तैयार हैं."
उन्होंने यह भी कहा, "कुछ दिनों में बच्चे की स्थिति में सुधार होगा. माता-पिता को जो मानसिक पीड़ा हुई है, उसके लिए मेडिकल एसोसिएशन खेद व्यक्त करता है. बच्चे का पूरा लिंग नहीं हटाया गया है. केवल एक छोटा हिस्सा हटाया गया है और प्लास्टिक सर्जरी के ज़रिए पुनर्निर्माण संबंधी माइक्रोसर्जरी की गई है."
जब बीबीसी तमिल ने स्पष्टीकरण के लिए कराईकुडी के संबंधित निजी अस्पताल के प्रबंधन से संपर्क किया तो उन्होंने सिर्फ़ इतना कहा, "इस मामले पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन पहले ही स्पष्टीकरण दे चुका है."
'लिंग का ज़्यादातर हिस्सा हटा दिया गया है'
उधर लड़के की मां ने कहा, "शिकायत दर्ज कराने के बाद भी हमें निजी अस्पतालों से कोई मदद नहीं मिली. मेरे बेटे के लिंग का ज़्यादातर हिस्सा हटा दिया गया है. अब सिर्फ़ अंडकोश बचा है."
उन्होंने कहा, "मेरा बेटा अब तक इस सदमे से उबर नहीं पाया है. वह अब बाहर भी नहीं जाता. जब वह खेलने जाता है तो उसकी उम्र के लड़के उसका मज़ाक उड़ाते हैं, जिससे उसे बहुत दुख होता है. वह किसी से बात नहीं करता और हर समय एक जगह चुपचाप बैठा रहता है."
उन्होंने कहा, "मुझे नहीं पता कि इतनी कम उम्र में हुए इस नुकसान का सामना वह कैसे करेगा."
उन्होंने कहा कि शिकायत दर्ज होने के एक महीने बाद भी डॉक्टरों के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की गई. इसके बाद 7 जुलाई को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और व्यापारिक संगठनों के साथ मिलकर प्रदर्शन भी किया गया.
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के शिवाजी गांधी ने कहा, "इस बच्चे का भविष्य ही अनिश्चित हो गया है. इसके बावजूद डॉक्टरों को गिरफ़्तार नहीं किया गया. इसी वजह से हमने घेराव प्रदर्शन किया. हालांकि, पुलिस ने हमें हिरासत में ले लिया और शाम तक रोके रखा."
उन्होंने आगे कहा, "डॉक्टरों में से एक के ख़िलाफ़ पहले से भी कुछ आरोप हैं. पुलिस को इस मामले में इसी तरह धीमी और सतर्क कार्रवाई जारी नहीं रखनी चाहिए."
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी समेत विभिन्न संगठनों की ओर से किए गए घेराव प्रदर्शन के बाद कराईकुडी के सभी निजी अस्पतालों ने अपने लिए पर्याप्त सुरक्षा की मांग को लेकर 10 जुलाई को सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक चिकित्सा सेवाएं स्थगित रखने की घोषणा की.
दक्षिणी क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक विजयेंद्र बिदारी ने बीबीसी तमिल से कहा, "इस मामले में केस दर्ज किया गया है. साथ ही, चूंकि यह चिकित्सा क्षेत्र से जुड़ा मामला है, इसलिए पहले यह स्थापित होना ज़रूरी है कि क्या चिकित्सकीय लापरवाही हुई थी. केवल पुलिस इसकी जांच करके इस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकती. यही वजह है कि स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त निदेशक इसकी जांच कर रहे हैं."
उन्होंने कहा, "जांच रिपोर्ट मिलने के बाद अगर डॉक्टरों की ओर से किसी तरह की ग़लती पाई जाती है तो निश्चित रूप से कार्रवाई की जाएगी."
पेनेक्टॉमी क्या है?

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पेनेक्टॉमी वह सर्जरी है जिसमें लिंग को हटाया जाता है. सरकारी स्टैनली मेडिकल कॉलेज में जनरल मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. एस. चंद्रशेखर ने बताया कि मरीज़ की चिकित्सकीय स्थिति के आधार पर सर्जन लिंग का कुछ हिस्सा या पूरा लिंग हटा सकते हैं. यह सर्जरी लिंग से संबंधित बीमारियों के इलाज के तौर पर की जाती है.
उन्होंने ख़ासतौर से कहा, "इस सर्जरी का इस्तेमाल आमतौर पर लिंग के कैंसर के मामलों में किया जाता है. कराईकुडी के इस लड़के के मामले में यह संभव है कि लिंग तक रक्त प्रवाह रुक गया हो या गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण के कारण लिंग के ऊतकों की मृत्यु हो गई हो. ऐसी स्थिति में संक्रमण को शरीर के दूसरे हिस्सों में फैलने से रोकने के लिए लिंग का एक निश्चित हिस्सा हटाया गया हो."
हालांकि, डॉ. चंद्रशेखर ने ज़ोर देकर कहा कि इस मामले में कोई भी निष्कर्ष स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट आने के बाद ही निकाला जा सकता है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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